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Published: 18 Sept 2026, 02:21 PM
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराने हिंदी भवन के संगीत कक्ष में बारिश वाली मंगलवार की शाम साहित्य की छात्रा अनन्या ने इतिहास के छात्र कबीर के साथ वह छंद लिखा जो किसी रीतिकाल की कॉपी या शोध के गजट पर कभी दर्ज नहीं होता
इलाहाबाद का पुराना संगीत कक्ष। बारिश वाली मंगलवार। अनन्या और कबीर। वह छंद जो रीतिकाल की कॉपी पर कभी नहीं चढ़ता।