जब सीनियर लड़की ने खुद जूनियर को अपने कमरे में बुलाकर सब कुछ छीन लिया
रात के लगभग बारह बज रहे थे। गर्ल्स हॉस्टल के अंतिम कोने वाले कमरे में हल्की रोशनी जल रही थी।
आराध्या दरवाजे के पास खड़ी थी। फाइनल ईयर, लंबी, और कॉलेज में नामी। उसने फोन पर सिर्फ इतना टाइप किया था—“आ जा। अकेली हूँ।”
दस मिनट बाद दस्तक हुई। रेयान खड़ा था—दूसरे साल का, थोड़ा घबराया हुआ, लेकिन आँखों में उत्सुकता साफ थी। आराध्या ने उसे अंदर खींचा और दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
रेयान कुछ कहने वाला था कि आराध्या ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया। “आज तू बात नहीं करेगा। सिर्फ करेगा जो मैं कहूँगी।”
रेयान की आँखें चौड़ी हो गईं। आराध्या ने उसकी टी-शर्ट ऊपर से खींचकर उतार दी। फिर उसके बेल्ट के साथ खिलवाड़ करने लगी। रेयान की साँसें तेज हो गईं। आराध्या ने उसे बिस्तर पर धकेला और खुद उसके ऊपर बैठ गई।
उसने अपनी नाइटी ऊपर की और रेयान के हाथ उसके स्तनों पर रख दिए। “मसल। जोर से।”
रेयान ने आज्ञा का पालन किया। आराध्या ने सिर पीछे किया और सिसकी निकाली। फिर वह नीचे झुकी और रेयान के होंठों को चूसने लगी। चुंबन में वह主导 थी। जीभ, दाँत, सब कुछ उसके नियंत्रण में।
आराध्या ने रेयान की जींस और अंडरवियर एक साथ नीचे खींच दिए। उसका अंग पूरी तरह कड़ा हो चुका था। आराध्या ने उसे अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। रेयान की साँस अटक गई।
“आज तू अंदर तक जाएगा,” आराध्या ने धीमे स्वर में कहा। “लेकिन मेरी गति से।”
उसने अपनी पैंटी साइड में खिसकाई और धीरे-धीरे रेयान के अंग को अपने अंदर लेना शुरू किया। रेयान की उंगलियाँ चादर को जकड़ गईं। आराध्या ने पूरा अंदर ले लिया और कुछ पल रुकी। फिर वह खुद ऊपर-नीचे होने लगी।
रेयान की आँखें बंद हो गईं। आराध्या की गति पहले धीमी थी, फिर तेज होती गई। उसके स्तन रेयान के चेहरे के ठीक ऊपर थे। आराध्या ने उसका सिर उठाया और निप्पल उसके मुँह में ठूंस दिया। “चूस।”
रेयान ने आज्ञा मानी। आराध्या की सिसकियाँ बढ़ने लगीं। वह और तेज होने लगी। बिस्तर चरमरा रहा था। आराध्या ने रेयान के दोनों हाथ पकड़कर उसके सिर के ऊपर दबा दिए। नियंत्रण पूरी तरह उसके हाथ में था।
“आह्ह… और गहरा…” आराध्या खुद बड़बड़ा रही थी।
थोड़ी देर बाद आराध्या ने गति और तेज कर दी। रेयान की साँसें उखड़ने लगीं। आराध्या ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। पहला चरम आराध्या का आया। उसका शरीर काँप उठा। उसने रेयान को जोर से जकड़ लिया।
रेयान अभी भी अंदर था। आराध्या ने कुछ पल आराम किया, फिर फिर से हिलना शुरू कर दिया। “तू अभी नहीं निकलेगा। समझा?”
रेयान ने सिर हिलाया। आराध्या ने इस बार अपना रुख बदला। वह रेयान के ऊपर से उठी और घुटनों के बल हो गई। “आजा पीछे से।”
रेयान उठकर उसके पीछे आया। आराध्या ने खुद उसका अंग पकड़कर अपने अंदर डाल लिया। “अब जोर से। लेकिन रुकना मत जब तक मैं न कहूँ।”
रेयान ने कमर पकड़ी और धक्के लगाने शुरू कर दिए। आराध्या पीछे की ओर धकेल रही थी। उसकी आवाजें अब दब नहीं पा रही थीं। रेयान की गति तेज होती गई। आराध्या ने तकिया मुँह में दबा लिया।
“और… और जोर से रेयान…”
रेयान ने उसकी बात मान ली। धक्के और गहरे हो गए। आराध्या का दूसरा चरम और भी तेज था। उसके पैर काँपने लगे। रेयान ने भी उसी समय बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन आराध्या ने उसकी जाँघ पकड़ ली। “अंदर। आज अंदर।”
रेयान ने उसके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिरे रहे।
कुछ देर बाद आराध्या ने रेयान को अपनी ओर खींचा। “थका?”
रेयान ने सिर हिलाया। आराध्या मुस्कुराई। उसने रेयान का हाथ अपने स्तन पर रखा। “रात अभी बाकी है। और आज तू मेरे कहे अनुसार ही चलेगा।”
अगले एक घंटे में आराध्या ने रेयान को और दो बार लिया। एक बार अपने मुँह में, एक बार फिर से ऊपर बैठकर। हर बार नियंत्रण उसके हाथ में था। रेयान बस पालन कर रहा था।
रात के तीन बज गए थे जब आराध्या ने आखिरी बार रेयान को अपने अंदर लिया। इस बार वह बहुत धीरे हिल रही थी। आँखें बंद, होंठ खुले। रेयान के हाथ उसके कमर पर थे लेकिन वह कुछ कर नहीं रहा था—बस महसूस कर रहा था।
जब दोनों का अंतिम चरम आया, आराध्या रेयान की छाती पर गिर गई। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं।
आराध्या ने धीरे से कहा, “कल रात फिर आजा। और अगली बार… थोड़ा और हिम्मत दिखाना।”
रेयान मुस्कुराया। “जैसी आज्ञा सीनियर।”
आराध्या ने उसकी छाती पर हल्का थप्पड़ मारा। “अब निकल। सुबह हो जाएगी।”
रेयान कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले दरवाजे पर खड़े होकर बोला, “आज तूने सब कुछ छीन लिया… लेकिन अगली बार मैं भी कुछ छीनूँगा।”
आराध्या ने तकिया फेंककर जवाब दिया। “कोशिश तो करके देखना।”
दरवाजा बंद होते ही आराध्या मुस्कुराई। हॉस्टल की उस रात नियंत्रण उसके हाथ में था। और दोनों जानते थे—ये खेल अब और गहरा होने वाला है।
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