लेट नाइट ओवरटाइम: मैनेजर के केबिन में
रात के दस बज चुके थे। ऑफिस में सिर्फ कुछ लाइटें जल रही थीं। मैं रिपोर्ट फिनिश करके मैनेजर के केबिन में गया। विक्रम सर कुर्सी पर बैठे थे। उन्होंने मुझे अंदर देखते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और पर्दा गिरा दिया।
“आज बहुत अच्छा काम किया है तुमने… इनाम मिलना चाहिए।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने कुछ समझने से पहले ही वे पास आ गए। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी कुर्सी की तरफ खींच लिया। फिर बिना कुछ कहे मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। पहले मैं हैरान रहा, फिर जवाब देने लगा।
विक्रम सर ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। शर्ट उतरते ही उन्होंने मेरे स्तनों को पकड़ लिया। ब्रा के ऊपर से मसलने लगे, फिर ब्रा खोल दी। निप्पल पहले से सख्त थे। उन्होंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगे।
“आह… सर… कोई आ सकता है…”
“कोई नहीं आएगा। गार्ड को बोल दिया है देर तक मत घूमना।” उन्होंने कहा और दूसरे निप्पल को भी चूसने लगे।
मैंने उनकी कुर्सी पर धकेल दिया। खुद घुटनों के बल बैठकर उनका पेंट खोला। मोटा लंड बाहर निकला। मैंने उसे हाथ में लिया और मुँह में ले लिया। विक्रम सर ने मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए। ग्लक-ग्लक की आवाज़ कैबिन में गूँजने लगी।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे उठाया और टेबल पर लिटा दिया। मेरी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी नीचे खींच दी। मेरी चूत पहले से गीली थी। उन्होंने जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिट को चूसा, उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिलाईं। मेरी कमर टेबल पर उठने लगी।
फिर उन्होंने मेरे पैर फैलाए और एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरी चीख दब गई।
“उफ़्फ़… बहुत मोटा… धीरे…”
उन्होंने धीरे नहीं किया। दोनों पैर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगे। टेबल हिल रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे। विक्रम सर ने दोनों स्तन पकड़कर निप्पल मरोड़ने शुरू कर दिए।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे टेबल से उतारा और खिड़की के पास खड़ा कर दिया। हाथ काँच पर रखे और पीछे से पेलने लगे। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए थे।
“आज पूरी रात ओवरटाइम है… समझी?”
मैं सिर्फ कराह रही थी। उन्होंने और रफ्तार बढ़ा दी। फिर मुझे कुर्सी पर बिठाया और खुद सामने खड़े होकर पेलने लगे। मेरी टांगें उनके कंधों पर थीं।
आखिर में जब वे करीब पहुँचे तो पूछा —
“कहाँ छोड़ूं?”
मैंने हांफते हुए कहा —
“अंदर… आज अंदर छोड़ दो…”
उन्होंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और पूरा गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मेरा शरीर कांपने लगा।
दोनों पसीने से भीगे हुए थे। विक्रम सर ने शर्ट ठीक करते हुए कहा —
“कल फिर लेट बैठना। इस बार और लंबा ओवरटाइम होगा।”