ससुराल में अकेली: देवर के साथ रात
रात के करीब बारह बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। पति सुबह ही गाँव चला गया था और सास-ससुर भी रिश्तेदारों के यहाँ रुके हुए थे। घर में सिर्फ मैं और मेरा देवर रोहित बचे थे।
मैं अपने कमरे में लेटी थी तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। रोहित खड़ा था। हल्की सी मुस्कान के साथ बोला —
“भाभी, पानी का गिलास मिल सकता है?”
मैंने उसे अंदर बुलाया। गिलास देते समय मेरी उंगलियाँ उसकी उंगलियों से छू गईं। उसने गिलास लिया लेकिन मेरी आँखों में देखने लगा। कुछ पल की खामोशी के बाद उसने गिलास साइड टेबल पर रखा और मेरे करीब आ गया।
“भाभी… आज घर में कोई नहीं है।”
मैंने कुछ नहीं कहा। रोहित ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसकी हथेली गर्म थी। फिर उसने धीरे से मेरा चेहरा अपने पास खींचा और होंठों पर होंठ रख दिए। पहले मैंने हल्का सा विरोध किया, फिर खुद उसकी तरफ झुक गई।
रोहित ने मेरी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज़ के हुक खोलने लगा। ब्लाउज़ खुलते ही मेरे स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। मेरे मुँह से हल्की कराह निकल गई।
“आह… धीरे… किसी को पता नहीं चलना चाहिए…”
रोहित ने दोनों स्तनों को मसलना और चूसना शुरू कर दिया। फिर उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट नीचे कर दिए। पैंटी पहले से गीली हो चुकी थी। उसने पैंटी सरकाई और अपनी उंगलियाँ अंदर डाल दीं। मैंने उसके कंधे दबा लिए।
थोड़ी देर बाद रोहित ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और जीभ से मेरी चूत चाटने लगा। क्लिट को चूसते हुए उंगलियाँ तेजी से हिला रहा था। मेरी कमर बार-बार उठ रही थी। मैंने उसका सिर और अंदर दबा दिया।
फिर उसने अपना पजाम़ा नीचे किया। उसका लंड मोटा और सख्त था। मैंने उसे हाथ में लिया और मुँह में ले लिया। रोहित ने मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए। मैंने जितना हो सका गहराई तक लिया।
कुछ देर बाद रोहित ने मुझे लिटाया, पैर फैलाए और धीरे-धीरे लंड अंदर डालना शुरू किया। जब पूरा अंदर गया तो दोनों की साँसें फूल गईं।
“उफ़्फ़… बहुत गहरा जा रहा है…”
रोहित ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, फिर रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्के पर मेरे स्तन उछल रहे थे। उसने दोनों स्तन पकड़कर निप्पल मरोड़ने शुरू कर दिए। मैं तकिया दबाकर अपनी आवाज़ रोकने की कोशिश कर रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे डॉगी पोज़िशन में कर दिया। पीछे से दोनों कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से मेरी क्लिट भी रगड़ रहा था। मेरी आँखें बंद थीं और मुँह से दबी हुई आवाज़ें निकल रही थीं।
“भाभी… आज पूरी रात चोदूँगा…”
रोहित ने मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज़ी से धक्के मारने लगा। बिस्तर हल्के-हल्के खटखटा रहा था। मैं पूरी तरह भीग चुकी थी।
फिर उसने मुझे ऊपर बिठा लिया। मैं उसके लंड पर बैठकर खुद उछलने लगी। मेरे स्तन उसके चेहरे के सामने थे। रोहित ने उन्हें मुँह में ले लेकर चूसा और काटा।
आखिर में जब वह करीब पहुँचा तो पूछा —
“कहाँ छोड़ूं भाभी?”
मैंने हांफते हुए कहा —
“अंदर… आज अंदर छोड़ दो…”
रोहित ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और पूरा गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मेरा शरीर कांपने लगा। उसकी जाँघों पर मेरी जाँघें काँप रही थीं।
दोनों पसीने से भीगे हुए लेटे थे। रोहित ने मेरे बाल सहलाते हुए धीरे से कहा —
“पति जब तक नहीं आते… हर रात आ जाया करो मेरे कमरे में।”