पहली रात: दर्द और मज़े का मिश्रण
रात के लगभग दो बज रहे थे। कमरे में हल्की रोशनी थी। नायरा मेरे सामने बिस्तर पर बैठी थी। उसके हाथ काँप रहे थे। आज पहली बार होने वाला था।
मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से चूम लिया। वह घबराई हुई थी लेकिन उसके होंठों ने जवाब दिया। मैंने धीरे-धीरे उसकी टॉप ऊपर की। अंदर हल्का गुलाबी ब्रा था। ब्रा खोलते ही उसके छोटे-छोटे सख्त स्तन बाहर आ गए। निप्पल हल्के गुलाबी और खड़े हुए थे।
मैंने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और बहुत धीरे से चूसने लगा। नायरा की साँस तेज़ हो गई। उसने मेरे बाल पकड़ लिए।
“हल्के से… बहुत सेंसेटिव है…”
मैंने दोनों निप्पल धीरे-धीरे चूसे, फिर जीभ से चाटा। उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई। फिर मैंने उसका लोअर धीरे से नीचे उतारा। पैंटी पहले से थोड़ी गीली थी। मैंने पैंटी सरकाई और अपनी उंगली से हल्के से छुआ। नायरा सिकुड़ गई।
मैंने उसे लिटाया और धीरे-धीरे जीभ से उसकी चूत चाटनी शुरू की। पहले बहुत हल्के से, फिर क्लिट पर फोकस किया। नायरा की कमर अपने आप उठने लगी। मैंने एक उंगली धीरे से अंदर डाली। बहुत टाइट थी।
“आह… दर्द हो रहा है थोड़ा…”
मैंने रुककर और धीरे किया। उंगली को अंदर-बाहर करते हुए क्लिट चूसता रहा। थोड़ी देर में नायरा की आवाज़ें बदलने लगीं। दर्द कम और मज़ा बढ़ने लगा।
जब वह काफी गीली हो गई तो मैंने अपना लंड निकाला। नायरा की आँखें थोड़ी फटी रह गईं।
“इतना… बड़ा लगेगा क्या?”
मैंने उसके माथे पर चुंबन लिया और बोला — “धीरे से करूँगा।”
मैंने उसके पैर फैलाए और लंड का सिर उसकी चूत पर रखा। धीरे-धीरे दबाव दिया। नायरा ने तकिया पकड़ लिया। जब थोड़ा अंदर गया तो उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“उफ़्फ़… रुक… थोड़ा रुक…”
मैंने रोक लिया। उसे चूमते हुए और शांत किया। जब उसकी साँस स्थिर हुई तो फिर से धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। बहुत टाइट और गर्म थी। आखिरकार जब पूरा अंदर चला गया तो दोनों की साँसें फूल गईं।
मैंने कुछ पल बिना हिले सिर्फ अंदर रखा। फिर बहुत धीमे-धीमे धक्के शुरू किए। नायरा की भौंहें चढ़ी हुई थीं लेकिन अब वह मुझे रोक नहीं रही थी।
धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। नायरा के मुँह से अब हल्की कराहें निकलने लगीं। मैंने उसके स्तनों को सहलाया और निप्पल मरोड़े।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे साइड में मोड़ा और पीछे से धीरे-धीरे पेलने लगा। एक हाथ से उसकी क्लिट सहला रहा था। नायरा अब खुद पीछे को धक्का देने लगी थी।
“अब थोड़ा जोर से कर सकते हो…” उसने हांफते हुए कहा।
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। दर्द अब मज़े में बदल चुका था। नायरा की आवाज़ें तेज़ होने लगीं। मैंने उसके बाल सहलाते हुए और गहराई तक जाना शुरू किया।
आखिर में जब मैं करीब पहुँचा तो पूछा —
“कहाँ छोड़ूं?”
नायरा ने शर्म से आँखें बंद करते हुए कहा —
“बाहर… अभी अंदर मत…”
मैंने लंड निकाला और उसके पेट पर पूरा गरम वीर्य छोड़ दिया। नायरा की साँसें तेज़ चल रही थीं। उसके शरीर पर हल्की कंपन थी।
मैंने उसे गले लगाया। नायरा ने मेरे सीने से चिपटते हुए धीरे से कहा —
“दर्द भी हुआ… लेकिन मज़ा भी बहुत आया। अगली बार… थोड़ा और जोर से करना।”