शादीशुदा औरत की रात: पति के दोस्त के साथ
रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे जब मैंने उनके घर का दरवाज़ा खटखटाया। मेरा दोस्त राहुल ऑफिस ट्रिप पर गया हुआ था और उसने मुझसे कहा था कि उसकी बीवी को कुछ सामान पहुँचा देना।
दरवाज़ा खोला तो सोनिया खड़ी थी। हल्की सी पीली साड़ी पहनी हुई, बाल खुले, गले में सिर्फ एक पतली चैन। उसने मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया।
“राहुल ने बताया था तुम आओगे… अंदर आओ, ठंड लग रही है बाहर।” उसने दरवाज़ा बंद किया और पीछे से कुंडी लगा दी।
मैंने सोफे पर बैठते हुए सामान रखा। सोनिया रसोई से पानी लेकर आई। झुकते समय उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया और उसके गहरे क्लीवेज ने मेरी निगाहें बाँध लीं। उसने ध्यान दिया और मुस्कुरा दी।
“इतनी देर से अकेले हूँ… बात भी करने को कोई नहीं।” उसने मेरे बगल में बैठते हुए कहा। उसकी जाँघ मेरी जाँघ से छू गई।
थोड़ी देर बातचीत के बाद सोनिया ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने सीने पर रख दिया। ब्लाउज़ के अंदर उसके स्तन नरम और भारी थे। निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे।
“आज पति नहीं है… और मुझे बहुत ज़रूरत है,” उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने उसका चेहरा अपने पास खींचा और उसके होंठों को चूम लिया। सोनिया ने जोर से जवाब दिया। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। मैंने उसका ब्लाउज़ खोला और भारी स्तन बाहर निकाल लिए। दोनों निप्पल गहरे भूरे रंग के थे। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। सोनिया की गर्दन पीछे की ओर झुक गई।
“आह… और जोर से चूसो… राहुल कभी ऐसा नहीं करता…”
मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया। साड़ी और पेटीकोट दोनों खींचकर नीचे गिरा दिए। उसके अंदर सिर्फ काली पैंटी थी जो बीच से पहले से गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी साइड में सरकाई और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी। सोनिया की कमर उठ गई।
मैंने क्लिट को चूसना शुरू किया और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। सोनिया की साँसें तेज़ हो गईं। वह मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को और अंदर दबाने लगी।
थोड़ी देर बाद उसने खुद मेरा पेंट खोला और मोटा लंड निकाल लिया। उसकी आँखें फटी रह गईं।
“इतना… मोटा…”
उसने लंड को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सिर चूसा, फिर धीरे-धीरे पूरा गले तक उतारने की कोशिश करने लगी। ग्लक-ग्लक की आवाज़ आने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए। सोनिया की आँखों से पानी निकल आया लेकिन उसने लंड नहीं छोड़ा।
फिर मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाकर उसके पैर फैला दिए और एक झटके में पूरा लंड उसकी गीली चूत में धँस गया। सोनिया की लंबी चीख निकली।
“उफ़्फ़… धीरे… बहुत गहरा जा रहा है…”
मैंने थोड़ी देर धीरे धक्के मारे, फिर रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्के पर उसके भारी स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तन पकड़कर निप्पल मरोड़ने शुरू कर दिए। सोनिया पागल होने लगी।
मैंने पोज़िशन बदलकर उसे डॉगी बना दिया। पीछे से दोनों कूल्हे कसकर पकड़े और जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से उसकी क्लिट रगड़ रहा था। सोनिया के मुँह से सिर्फ गंदी आवाज़ें निकल रही थीं।
“और जोर से… तोड़ डाल… आज पूरी रात चोद मुझे…”
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज़ी से धक्के मारने लगा। बिस्तर जोर-जोर से खटखटा रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे ऊपर बिठा लिया। सोनिया ने खुद मेरे लंड पर बैठकर उछलना शुरू कर दिया। उसके स्तन मेरे चेहरे पर बार-बार लग रहे थे। मैंने दोनों को मुँह में ले लेकर काटा और चूसा।
आखिर में सोनिया ने खुद कहा —
“अंदर छोड़ दो… आज कंडोम नहीं लगाना… पूरा अंदर डालना…”
मैंने उसे फिर से लिटाया, पैर कंधों पर रखे और फुल पावर से पेलते हुए आखिरी धक्के मारे। फिर पूरा गरम और गाढ़ा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। सोनिया का शरीर जोरों से कांपने लगा। उसकी जाँघें काँप रही थीं और चूत से वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
दोनों पसीने से लथपथ बिस्तर पर लेटे थे। सोनिया ने मेरे सीने पर सिर रखकर धीरे से कहा —
“राहुल तीन दिन बाद आएगा… तब तक हर रात आना। मुझे और चाहिए।”