हॉस्टल की रात: रूमरेट की बहन के साथ
रात के बारह बज रहे थे। मेरा रूममेट घर चला गया था और हॉस्टल का कमरा बिल्कुल शांत था। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
खोला तो सामने उसकी छोटी बहन ईशा खड़ी थी। हल्की सी टॉप और शॉर्ट्स में। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की मुस्कान।
“भैया का सामान भूल गई थी… और अब ऑटो भी नहीं मिल रहा। क्या मैं यहीं रुक्सकती हूँ?”
मैंने उसे अंदर बुला लिया। कमरे में सिर्फ एक ही बेड था। ईशा ने टॉप का स्ट्रैप ठीक करते हुए कहा —
“तुम बेड पर सो जाओ, मैं कुर्सी पर बैठ जाती हूँ।”
मैंने मना कर दिया। दोनों बेड पर लेट गए। थोड़ी देर चुप्पी रही। फिर ईशा ने अचानक मेरी तरफ रुख किया। उसकी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी।
“तुम मेरे भैया के दोस्त हो… गलत तो नहीं होगा ना?” उसने धीरे से पूछा।
मैंने जवाब देने की बजाय उसका चेहरा अपने पास खींच लिया और होंठों पर होंठ रख दिए। ईशा ने पहले हल्के से विरोध किया, फिर जोर से जवाब देने लगी। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई।
मैंने उसका टॉप ऊपर खींच दिया। अंदर ब्रा नहीं थी। छोटे लेकिन सख्त स्तन बाहर आ गए। निप्पल गुलाबी और खड़े हुए थे। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। ईशा की कमर उठ गई।
“आह… हल्के से… नहीं… और जोर से चूसो…”
मैंने दोनों निप्पल चूसे, काटे और मरोड़े। फिर उसका शॉर्ट्स नीचे खींच दिया। पैंटी पहले से गीली थी। मैंने पैंटी सरकाई और अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। ईशा की साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसे लिटाया और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। क्लिट को चूसा, उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। ईशा मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को और दबा रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने खुद मेरा लोअर उतारा और मोटा लंड निकाल लिया। उसकी आँखें बड़ी हो गईं।
“इतना बड़ा… धीरे से करना…”
उसने लंड को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सिर चूसा, फिर धीरे-धीरे और अंदर लेने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए। ग्लक-ग्लक की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, पैर फैलाए और धीरे-धीरे लंड अंदर डालना शुरू किया। ईशा की भौंहें चढ़ गईं। दर्द और मज़े का मिश्रण उसके चेहरे पर था। जब पूरा लंड अंदर चला गया तो उसने जोर से साँस छोड़ी।
“उफ़्फ़… पूरा अंदर है… अब हिलाना शुरू करो…”
मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, फिर रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्के पर ईशा की हल्की चीखें निकल रही थीं। मैंने उसके दोनों स्तन पकड़कर निप्पल मरोड़ने शुरू कर दिए।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे डॉगी पोज़िशन में कर दिया। पीछे से दोनों कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से पेलने लगा। ईशा ने तकिया दबा लिया ताकि आवाज़ कम निकले।
“और जोर से… आज पूरी रात करो…”
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज़ी से धक्के मारने लगा। एक हाथ से उसकी क्लिट भी रगड़ रहा था। ईशा का शरीर कांपने लगा।
फिर मैंने उसे ऊपर बिठा लिया। ईशा ने खुद मेरे लंड पर बैठकर उछलना शुरू कर दिया। उसके छोटे स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे। मैंने उन्हें मुँह में ले लेकर चूसा और काटा।
आखिर में ईशा ने हांफते हुए कहा —
“अंदर मत छोड़ना… बाहर निकालना…”
मैंने लंड निकाला और उसके पेट और स्तनों पर पूरा गरम वीर्य छोड़ दिया। ईशा की साँसें फूल रही थीं। सफेद वीर्य उसके शरीर पर फैला हुआ था।
दोनों पसीने से भीगे हुए लेटे थे। ईशा ने मेरे सीने पर हाथ रखते हुए धीरे से कहा —
“भैया को मत बताना… और हाँ, कल रात फिर से बुला लेना।”