हॉस्टल की उस खाली रात में जब सीनियर ने मेरी सारी हिचक तोड़ दी बंद कमरे में जूनियर लड़की की सारी सीमाएँ पार कर दीं
रात के लगभग एक बज रहे थे। गर्ल्स हॉस्टल के तीसरे फ्लोर पर सन्नाटा पसरा हुआ था। ज्यादातर लड़कियाँ सो चुकी थीं।
रिया अपने कमरे में अकेली लेटी थी। रुममेट घर गई हुई थी। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रिया ने आँखें खोलीं। दरवाजा धीरे से खुला और आदित्य अंदर आ गया। फाइनल ईयर का, लंबा, और हॉस्टल में नामी सीनियर।
“इतनी रात को?” रिया की आवाज में घबराहट थी।
आदित्य ने दरवाजा बंद किया और अंदर से कुंडी लगा दी। “तभी तो आया हूँ। तूने खुद कहा था ना… जब हॉस्टल खाली हो।”
रिया की साँस तेज हो गई। पिछले कुछ हफ्तों से जो नजरें और बातें चल रही थीं, वह अब असल होने वाली थीं। आदित्य उसके बिस्तर के पास आया और बैठ गया। उसने रिया का चेहरा अपने हाथ में लिया और होंठों पर मुँह रख दिया। चुंबन पहले धीमा था, फिर गहरा होता गया।
रिया की उंगलियाँ आदित्य की टी-शर्ट पर जाकर रुक गईं। आदित्य ने उसकी नाइटी के बटन खोले। एक-एक करके। ब्रा के ऊपर से ही स्तनों को सहलाने लगा। फिर ब्रा को ऊपर उठाया और निप्पल को मुँह में ले लिया। रिया की कमर तन गई।
“आदित्य… आवाज… कोई सुन लेगा…”
“कोई नहीं सुनेगा,” आदित्य ने कहा और दूसरा निप्पल भी मुँह में ले लिया। दाँतों से हल्का काटा। रिया की सिसकी निकल गई।
आदित्य ने उसकी नाइटी पूरी तरह ऊपर कर दी। पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा। रिया पहले से गीली थी। आदित्य ने पैंटी को साइड में खिसकाया और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। रिया की कमर उछल गई।
आदित्य की उंगलियाँ तेजी से आगे-पीछे हो रही थीं। रिया के नाखून चादर को जकड़ गए। “आह्ह… आदित्य…”
आदित्य झुका और उसकी पैंटी को पूरी तरह नीचे खींच लिया। फिर अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। रिया की टाँगें काँपने लगीं। आदित्य की जीभ क्लिट पर घूम रही थी, कभी अंदर तक जा रही थी। रिया का पहला चरम जल्दी आ गया। उसने अपना मुँह तकिए में दबा लिया।
आदित्य ऊपर आया। उसने अपनी टी-शर्ट और पैंट उतारी। रिया की आँखें उसके कड़े अंग पर टिक गईं। घबराहट साफ थी। आदित्य ने उसकी टाँगें फैलाईं और धीरे-धीरे अंदर घुसने लगा। रिया की भौंहें सिकुड़ गईं।
“दर्द हो रहा है?” आदित्य ने रुककर पूछा।
रिया ने सिर हिलाया। “थोड़ा… लेकिन मत रुको।”
आदित्य ने और अंदर धकेला। पूरा अंदर जाते ही दोनों की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। आदित्य कुछ देर बिना हिले रहा। फिर बहुत धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। रिया की आँखों से आँसू निकल आए। दर्द धीरे-धीरे मजे में बदल रहा था।
आदित्य की गति तेज होती गई। बिस्तर हल्के-हल्के चरमरा रहा था। रिया की टाँगें आदित्य की कमर के चारों ओर लिपट गईं। आदित्य ने उसका एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
“थोड़ा और जोर से…” रिया ने फुसफुसाया।
आदित्य ने उसकी बात मानी। धक्के तेज हो गए। रिया की आवाजें अब तकिए में भी पूरी तरह दब नहीं पा रही थीं। आदित्य ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और और तेज हो गया।
रिया का दूसरा चरम पहले से कहीं तेज था। उसका शरीर अकड़ गया। आदित्य ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हांफ रहे थे।
कुछ देर बाद आदित्य बाहर निकला। रिया की जाँघों के अंदर हल्का खून और उसका अंश मिला हुआ था। आदित्य ने नरम कपड़े से उसे साफ किया। रिया अभी भी आँखें बंद किए लेटी थी।
“कैसा लग रहा है?” आदित्य ने पूछा।
रिया मुस्कुराई। “दर्द हो रहा है… लेकिन… फिर से करना है।”
आदित्य हैरान होकर उसकी ओर देखा। रिया ने खुद उसका हाथ पकड़कर अपने स्तन पर रख दिया। “आज रात… और।”
एक घंटे बाद जब दोनों ने फिर से एक-दूसरे को छुआ, तो रिया की हिचक काफी कम हो चुकी थी। आदित्य ने उसे इस बार ऊपर बैठाया। रिया ने खुद उसका अंग अपने अंदर लिया। दर्द अभी भी था, लेकिन अब वह खुद ऊपर-नीचे होने लगी थी। आदित्य के हाथ उसके स्तनों पर थे।
दूसरी बार का चरम पहले से ज्यादा लंबा और गहरा था। रिया ने आदित्य के कंधों को जोर से पकड़ रखा था। आदित्य ने भी उसके अंदर ही छोड़ दिया।
रात के तीन बज गए थे जब आदित्य ने तीसरी बार रिया को लिया—इस बार पीछे से। रिया घुटनों के बल थी। आदित्य ने उसके बाल पकड़कर जोर से खींचे और गहरे धक्के लगाने लगा। रिया की आवाजें अब तकिए में दबाने के बावजूद निकल रही थीं।
जब आदित्य ने आखिरी बार उसके अंदर छोड़ा, रिया का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था। जाँघों के अंदर उसका अंश बह रहा था। गर्दन और स्तनों पर दाँतों के हल्के निशान थे।
आदित्य ने उसके बालों में उँगली फेरते हुए कहा, “कल रात फिर आऊँ?”
रिया ने आँखें बंद किए हुए जवाब दिया, “आ जाना… कुंडी खुली रहेगी।”
आदित्य मुस्कुराया। हॉस्टल की उस खाली रात में जो हिचक टूटी थी, वह अब वापस आने वाली नहीं थी। दोनों जानते थे—ये सिर्फ शुरुआत है।
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