ज़बरदस्त रात जब उसने बाल खींचकर चोदा और साफ कहा कि आज नर्मियत नहीं चलेगी सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स

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रात के एक बज रहे थे। कमरे में सिर्फ डिम लाइट जल रही थी। अनन्या मेरे सामने खड़ी थी, सिर्फ काले लेस के अंदरवियर में। उसने अपना बाल खोला और धीरे से बोली —

“आज नर्मियत मत करना। मुझे ज़ोर से चाहिए… जितना जोर से हो सके।”

मैंने उसे दीवार से सटा दिया और उसके होंठों को जोर से चूम लिया। उसने मेरे बाल पकड़कर खींच लिए। दर्द हुआ लेकिन मज़ा भी आया। मैंने उसका ब्रा खोलकर फेंक दिया। उसके बड़े स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और दांतों से हल्का काट लिया। अनन्या की चीख निकली।

“और जोर से काटो…”

मैंने दूसरे निप्पल को भी काटा और दोनों स्तनों को जोर-जोर से मरोड़ने लगा। अनन्या की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे खींच दी और दो उंगलियाँ उसकी पहले से गीली चूत में डाल दीं। तेजी से हिलाने लगा। अनन्या की टांगें कांपने लगीं।

मैंने उसे बालों से पकड़कर नीचे घुटनों के बल बैठा दिया। मेरा मोटा लंड उसके मुँह के सामने था। उसने खुद लंड को मुँह में ले लिया। मैंने उसके बाल कसकर पकड़े और मुँह में जोर-जोर से धक्के मारने लगा। ग्लक-ग्लक की तेज़ आवाज़ आने लगी। अनन्या की आँखों से पानी निकल रहा था, लेकिन वह रुक नहीं रही थी। थूक उसके मुँह से बहकर स्तनों तक पहुँच रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। उसके पैर फैलाए और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। अनन्या की जोरदार चीख निकली।

“आह्ह… बहुत गहरा… और जोर से…”

मैंने दोनों पैर पकड़कर उसके सिर के पास मोड़ दिए और बेतहाशा धक्के मारने लगा। हर धक्के पर बिस्तर जोर से खटखटा रहा था। मैंने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा। अनन्या की आँखों में और हवस आ गई।

“फिर से मार… और जोर से मार…”

मैंने दूसरा थप्पड़ मारा और धक्कों की रफ्तार और बढ़ा दी। फिर मैंने उसे पलटकर डॉगी पोज़िशन में कर दिया। उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पीछे से जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से उसकी कमर दबाई हुई थी और दूसरे से क्लिट रगड़ रहा था।

अनन्या के मुँह से सिर्फ गंदी आवाज़ें और गालियाँ निकल रही थीं।

“तोड़ डाल मुझे… आज पूरी तरह चोद डाल…”

मैंने उसके बाल और कसकर खींचे और एक थप्पड़ उसकी चूत पर मारा। फिर और तेज़ी से धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे ऊपर बिठा लिया। अनन्या ने खुद मेरे लंड पर बैठकर पागलों की तरह उछलना शुरू कर दिया। उसके स्तन मेरे चेहरे पर जोर-जोर से लग रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को पकड़कर जोर से मरोड़ा और निप्पल काटे।

आखिर में मैंने उसे फिर से लिटाया। पैर कंधों पर रखे और फुल पावर से पेलते हुए पूछा —

“कहाँ छोड़ूं?”

अनन्या ने हांफते हुए जवाब दिया —

“अंदर… पूरा अंदर छोड़… एक बूँद भी बाहर मत निकालना।”

मैंने आखिरी दस-बारह बहुत जोरदार धक्के मारे और फिर पूरा गरम और गाढ़ा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। अनन्या का शरीर जोरों से कांपने लगा। उसकी जाँघें काँप रही थीं और चूत से वीर्य निकलकर बिस्तर पर फैल रहा था।

दोनों पसीने से लथपथ, साँसें फूलती हुई लेटे थे। अनन्या ने मेरे बाल फिर से खींचते हुए कहा —

“आधा घंटा आराम… फिर से शुरू करना है। इस बार और ज़्यादा रफ।”

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