पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात की घंटी
अगर कोई मुझसे कहता कि मेरी अपनी जिंदगी एक दिन सचमुच की पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी बन जाएगी, तो मैं जोर से हंसता और कहता कि भाई, ये सब सिर्फ इंटरनेट की कहानियों में होता है। लेकिन उस रात ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर जब दरवाजे की घंटी इतनी जोर से बजी कि मेरा हेडफोन तक हिल गया, तब मुझे समझ आया कि कहानियां कहीं आसमान से नहीं टपकतीं, वो बिल्कुल बगल वाले फ्लैट से आती हैं।
मैं उस वक्त अपने कमरे में बीजीएमआई के फाइनल जोन में था। वॉइस चैट पर मेरे तीन दोस्त चिल्ला रहे थे। सनी बोला, भाई, लेफ्ट से कवर दे, जोन आ रहा है। मैंने माउस कसकर पकड़ा ही था कि डोरबेल फिर बजी, इस बार लगातार तीन बार। मैंने चिढ़कर माइक म्यूट किया और चिल्लाया, एक मिनट रुक, कोई दरवाजे पर है।
दरवाजा खोला तो सामने सुनीता भाभी खड़ी थीं। सामने वाले फ्लैट वाली सुनीता भाभी, तैंतीस साल की, जिनके पति रमेश फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट करते हैं। वो पूरी तरह भीगी हुई थीं। उनकी हल्की गुलाबी नाइटी पानी में भीगकर जिस्म से चिपक गई थी और उनके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी।
दीपक, प्लीज जल्दी चलो, मेरे बाथरूम की फ्लश टंकी फट गई है। पानी पूरे घर में फैल रहा है। रमेश ड्यूटी पर हैं और प्लंबर सुबह से पहले नहीं आएगा। उनकी आवाज कांप रही थी और वो बार बार पीछे अपने फ्लैट की तरफ देख रही थीं जहां से पानी की आवाज आ रही थी।
मैंने एक सेकंड भी नहीं सोचा। किचन से टूलबॉक्स उठाया, दोस्तों को चैट में टाइप किया कि भाई इमरजेंसी है, बाद में आता हूं, और भाभी के पीछे उनके फ्लैट में घुस गया। बाथरूम का नजारा देखकर मेरे होश उड़ गए। टंकी के नीचे से पानी की तेज धार निकल रही थी और फर्श पर टखनों तक पानी भर चुका था।
वाल्व कहां है, भाभी। मैंने पूछते हुए टूलबॉक्स खोला। सुनीता भाभी ने कांपती उंगली से टंकी के पीछे की तरफ इशारा किया और टॉर्च पकड़कर मेरे साथ फर्श पर बैठ गईं। मैं टंकी के नीचे घुसा और पानी की धार सीधे मेरे चेहरे और टीशर्ट पर पड़ी। ठंडे पानी से मेरी पूरी शर्ट भीग गई।
टॉर्च की रोशनी में मैंने वाल्व ढूंढा और रिंच से उसे कसना शुरू किया। सुनीता भाभी बिल्कुल मेरे बगल में बैठी टॉर्च पकड़े थीं। उनकी भीगी नाइटी उनके सीने से चिपकी हुई थी और मैं चाहकर भी अपनी नजरें हटा नहीं पा रहा था। उनकी सांसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं और हर सांस के साथ उनका सीना ऊपर नीचे हो रहा था।
बस, हो गया। मैंने आखिरी बार रिंच घुमाया और पानी की धार रुक गई। बाथरूम में अचानक सन्नाटा छा गया। सिर्फ हमारी तेज सांसों की आवाज आ रही थी। मैंने टंकी के नीचे से निकलकर उनकी तरफ देखा। वो मुझे देख रही थीं और उनके होठों पर एक अजीब सी मुस्कान थी।
तुम तो पूरे भीग गए, दीपक। उन्होंने धीरे से कहा और उनकी नजर मेरी भीगी टीशर्ट पर टिक गई जो मेरे सीने से चिपक गई थी। मेरी नजरें भी उनकी नाइटी से हट नहीं रही थीं। उस पल बाथरूम की टाइलों पर बैठे बैठे हम दोनों के बीच कुछ ऐसा हुआ जो शब्दों में कहना मुश्किल है।
रुको, मैं तुम्हारे लिए अदरक वाली चाय बनाती हूं। इतनी रात को भीगे कपड़ों में जाओगे तो सर्दी लग जाएगी। वो उठीं और किचन की तरफ बढ़ीं। मैं भी उनके पीछे पीछे ड्राइंग रूम में आया। उन्होंने अलमारी से रमेश की एक पुरानी टीशर्ट और शॉर्ट्स निकाले और मेरी तरफ बढ़ा दिए। ये पहन लो, तुम्हारे कपड़े मैं सुखा दूंगी।
मैं बाथरूम में जाकर कपड़े बदला। रमेश की टीशर्ट मेरे कंधों पर थोड़ी ढीली थी। जब मैं बाहर आया तो सुनीता भाभी भी सूखी नाइटी बदल चुकी थीं, हल्के नीले रंग की, पतली स्ट्रैप वाली। किचन से अदरक और इलायची की खुशबू आ रही थी। वो दो कप चाय लेकर सोफे पर बैठीं और मुझे अपने बगल में बैठने का इशारा किया।
रमेश की नाइट शिफ्ट कब से चल रही है, भाभी। मैंने चाय का कप उठाते हुए पूछा। तीन साल से। पहले तो आदत नहीं थी, अब तो नींद भी अकेले ही आती है। उन्होंने हल्की हंसी के साथ कहा, लेकिन उनकी आंखों में वो हंसी नहीं थी। रात भर घर में अकेली रहती हूं, कभी कभी तो डर भी लगता है।
बात करते करते उनका हाथ कप से फिसला और मेरी उंगलियों से टकरा गया। उन्होंने हाथ हटाया नहीं। मैंने देखा कि उनकी नजरें मेरे होठों पर टिकी थीं। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज हो गई कि मुझे लगा वो सुन लेंगी। चाय का एक कतरा उनके निचले होंठ पर लगा रह गया था।
ये लो, लग गया। मैंने धीरे से कहा और अपने अंगूठे से उनके होंठ का वो कतरा पोंछ दिया। मेरा अंगूठा उनके नरम होठों पर एक पल ज्यादा रुक गया। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी सांस ली। जब उन्होंने आंखें खोलीं तो उनमें कुछ ऐसा था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था।
दीपक। बस इतना कहा उन्होंने और अगले ही पल मेरे होंठ उनके होठों पर थे। पहले तो धीरे, जैसे कोई डर हो, फिर इतनी जोर से कि चाय के कप टेबल पर छूट गए। उनके हाथ मेरे बालों में थे और मेरे हाथ उनकी कमर पर। उनकी नाइटी का कपड़ा इतना पतला था कि मुझे उनकी गर्म त्वचा साफ महसूस हो रही थी।
मैंने उन्हें अपनी गोद में खींच लिया। वो मेरे ऊपर बैठीं और उनकी जांघें मेरी जांघों के दोनों तरफ थीं। मैंने उनकी नाइटी की स्ट्रैप कंधों से नीचे सरकाई। उनके गोरे कंधे और फिर उनके भारी बूब्स मेरी आंखों के सामने थे। मैंने उन्हें अपने हाथों में भरा और धीरे धीरे दबाया। उनके मुंह से एक सिसकारी निकली।
आह, दीपक, धीरे। उन्होंने कहा, लेकिन उनके हाथ मेरे शॉर्ट्स के अंदर जा चुके थे। उनकी नरम उंगलियों ने मेरे खड़े लंड को पकड़ा और मैं कांप गया। उन्होंने उसे धीरे धीरे हिलाना शुरू किया और मैं उनके बूब्स को चूसने लगा। उनका निप्पल मेरे मुंह में सख्त हो गया और वो मेरे बाल खींचने लगीं।
बेडरूम में चलो। उन्होंने मेरी आंखों में देखकर कहा और मेरा हाथ पकड़कर उठ खड़ी हुईं। हम दोनों बेडरूम में पहुंचे। उन्होंने लाइट धीमी कर दी और पलंग पर बैठकर अपनी नाइटी एक झटके में उतार दी। उनका नंगा जिस्म लैंप की पीली रोशनी में चमक रहा था। भारी बूब्स, पतली कमर और चिकनी जांघें।
मैंने अपने कपड़े उतारे और उनके सामने खड़ा हो गया। वो पलंग से उतरीं, मेरे सामने घुटनों पर बैठीं और मेरे लंड को अपने हाथ में लिया। फिर उन्होंने उसे अपने मुंह में ले लिया। उनकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी और मैं पागल हो रहा था। मैंने उनके बाल पकड़े और वो और अंदर तक लेने लगीं।
बस, अब बर्दाश्त नहीं होता। मैंने उन्हें उठाया और पलंग पर लिटा दिया। मैंने उनकी टांगें फैलाईं और उनकी चूत को देखा, गीली और फूली हुई। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत पर रखी और वो चीख पड़ीं। मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया, अंदर तक जीभ डाली और उनकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगीं।
दीपक, प्लीज, अब डाल दो ना। वो तड़पते हुए बोलीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में अंदर डाल दिया। उनकी चूत इतनी गीली और गर्म थी कि मेरा लंड फिसलता हुआ जड़ तक अंदर चला गया। हम दोनों के मुंह से एक साथ आवाज निकली।
मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ उनके बूब्स हिल रहे थे और वो मेरी पीठ नोंच रही थीं। फिर मैंने रफ्तार बढ़ा दी। पलंग चरमराने लगा। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थी और हर बार अंदर बाहर होते वक्त गीली आवाज आ रही थी।
पलटो। मैंने कहा और उन्हें घोड़ी बनाया। उनके कूल्हे मेरी तरफ थे और वो तकिए में मुंह दिए सिसक रही थीं। मैंने पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाला और उनके कूल्हे पकड़कर जोर जोर से धक्के लगाए। मेरे हर धक्के पर वो आगे को धकेली जा रही थीं और चिल्ला रही थीं, हां, और जोर से, दीपक।
अब मेरी बारी। वो अचानक पलटीं और मुझे पलंग पर गिराकर मेरे ऊपर बैठ गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत में डाला और उछलना शुरू किया। उनके बूब्स मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे और मैं उन्हें पकड़कर दबा रहा था। उनकी रफ्तार इतनी तेज थी कि मैं झड़ने के कगार पर पहुंच गया।
मैं झड़ने वाला हूं, भाभी। मैंने हांफते हुए कहा। मेरे साथ, साथ में। उन्होंने कहा और अपनी उंगली अपनी चूत के दाने पर रगड़नी शुरू कर दी। अगले ही पल हम दोनों एक साथ झड़े। मेरा वीर्य उनकी चूत में भर गया और उनकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। वो मेरे सीने पर गिर पड़ीं और हम दोनों हांफने लगे।
कुछ देर हम ऐसे ही लिपटे रहे। फिर उन्होंने मेरे सीने पर उंगली से गोल गोल घुमाते हुए कहा, रमेश सुबह छह बजे आएंगे। अभी तीन बजे हैं। तुम्हारे पास तीन घंटे हैं, दीपक। उनकी आंखों में शरारत थी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भींच लिया और वो हंसते हुए मेरे लंड को फिर से सहलाने लगीं।
दूसरी बार हमने कोई जल्दी नहीं की। इस बार वो पूरी तरह खुल चुकी थीं। उन्होंने मुझे हर पोज में साथ दिया और हर बार उनकी सिसकारियां और तेज होती गईं। जब हम दूसरी बार एक साथ झड़े तो बाहर हल्की हल्की सुबह होने लगी थी। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोलीं, आज की रात मैं कभी नहीं भूलूंगी।
सुबह पौने छह बजे मैं अपने फ्लैट में वापस आया। मेरे भीगे कपड़े उनकी बालकनी में सूख रहे थे। जाते जाते वो दरवाजे पर रुकीं, मेरे गाल पर हल्की सी चपत लगाई और धीरे से बोलीं, कल फिर टंकी खराब हो जाएगी, टूलबॉक्स तैयार रखना। फिर वो मुस्कुराते हुए अपने फ्लैट में चली गईं और दरवाजा बंद हो गया।
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