जबलपुर कला महाविद्यालय की इशिता ने मिट्टी स्टूडियो में आगरा वाले ब्रॉन्ज़ कास्टर की मोटी लंड से अपनी गीली चूत फड़वा दी
जबलपुर कला महाविद्यालय के पुराने मिट्टी स्टूडियो में आज का प्रदर्शन रद्द हो चुका था। बारिश के कारण बिजली गुल थी, लाईट्स नहीं जल रही थीं, और सभी छात्र छात्राएँ निकल चुके थे। सिर्फ अंतिम वर्ष की छात्रा इशिता अभी भी वहीं बैठी हुई थी। उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरक चुका था, और मिट्टी के छोटे छोटे ढेरों के बीच वह अकेली बैठी अपने स्केचबुक में कुछ बना रही थी।
दरवाज़े पर खटखटाहट हुई। आगरा से आया कांसे यानी ब्रॉन्ज़ का ढलाई करने वाला कास्टर जिसका नाम रुद्र था। मोटा, काला, हाथों पर मिट्टी और धातु की गंदगी चिपकी हुई, उम्र करीब पैंतीस चालीस। उसने इशिता को देखा और मुस्कुराया।
मैडम, प्रोग्राम कैंसिल हो गया ना? मैं तो काम लेकर आया था।
इशिता ने सिर उठाया। उसकी नज़र सीधे रुद्र के पैंट के उभार पर जा टिकी। पैंट के अंदर मोटी लंड साफ दिख रही थी। इशिता की चूत में हल्की सी खुजली हुई। वह उठकर दरवाज़ा बंद करने चली गई और पीछे से कुंडी लगा दी।
काम तो अब नहीं होगा लेकिन कुछ और हो सकता है, इशिता ने धीरे से कहा और साड़ी का पल्लू एकदम गिरा दिया। उसके बड़े बड़े स्तन बाहर निकल आए। ब्लाउज़ के बटन खोलते हुए उसने कहा, तुम्हारी लंड देख के मेरी चूत गीली हो गई है।
रुद्र की आँखें फटी रह गईं। उसने अपनी पैंट का ज़िप खोला। अंदर से मोटी, काली, नसों वाली लंड बाहर निकली। इशिता ने झुककर उसे हाथ में लिया और मुँह में डाल लिया। वह लंड इतनी मोटी थी कि इशिता के गले तक पहुँचते पहुँचते उसकी आँखों से पानी आने लगा। वह चूसती रही थूक टपकाती हुई, गले की गहराई तक लंड को धकेलती हुई।
रुद्र ने इशिता के बाल पकड़कर अपनी लंड और अंदर धकेल दी। चूस रंडी और गहरा। इशिता की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह रुक नहीं रही थी। लंड पर थूक चमक रहा था। वह लंड को चाट चाट कर गीला कर रही थी, अंडकोष भी मुँह में ले रही थी।
इशिता ने एक हाथ से रुद्र की कमर पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से उसकी जांघों को सहला रही थी। रुद्र के हाथ उसके बालों में उलझे थे और वह हल्के हल्के उसके मुँह को अपनी लंड पर धकेल रहा था। हर धक्के पर इशिता की साँस थम सी जाती। उसके गले से हल्की खराश की आवाज़ निकल रही थी और रुद्र उस आवाज़ पर और मचल उठा।
बस बहुत हो गया, रुद्र ने उसे ऊपर खींचा और उसके होठों पर अपने थूक भरे हाथ से निशान छोड़ दिया। अब बारी मेरी। इशिता के स्तन अब भी बाहर थे और निप्पल सख्त होकर तने हुए थे। रुद्र ने एक निप्पल मुँह में लिया और दूसरे को उँगलियों से मसलने लगा।
इशिता की कमर अकड़ गई। आह्ह और चूसो। उसके हाथ रुद्र के सिर को दबा रहे थे। रुद्र ने दोनों निप्पलों को बारी बारी चूसा, काटा, जीभ घुमाई। इशिता की साड़ी का बचा हुआ हिस्सा फर्श पर लुढ़क चुका था। अब वह सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी।
रुद्र ने उसे घुमाया और पीछे से चिपक गया। उसकी मोटी लंड इशिता की गांड की दरार में दब रही थी और वह हिल रहा था। उसके हाथ सामने से उसके स्तन दबा रहे थे। इशिता ने सिर पीछे करके उसकी गर्दन पर मुँह लगाया और कान कुतरने लगी।
मेरी चूत गीली हो गई है, इशिता फुसफुसाई। देखो कितना पानी निकल रहा है। रुद्र ने अपना हाथ नीचे ले जाकर पेटीकोट के अंदर डाला। पैंटी पहले से ही भीगी हुई थी। उसने पैंटी खींची और एक झटके में फाड़ दी। फटा हुआ कपड़ा मिट्टी के ढेर पर जा गिरा।
इशिता की चूत अब सामने थी। गुलाबी, फूली हुई, पानी टपका रही थी। रुद्र ने अपनी मोटी उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। दो उँगलियाँ, फिर तीन। इशिता कराह उठी।
आह्ह चूत फाड़ दोगे क्या।
रुद्र मुस्कुराया और उँगलियों को अंदर बाहर करने लगा। उसके अंगूठे ने इशिता के दाने को पकड़ लिया और गोल गोल घुमाने लगा। इशिता की टाँगें काँपने लगीं। वह मिट्टी के ढेर को पकड़े हुए थी और उसकी पीठ धनुष की तरह मुड़ गई थी।
और तेज़ और तेज़, वह चीख रही थी। रुद्र ने उँगलियाँ और गहरा धकेला और अचानक इशिता का पूरा शरीर झटका खा गया। उसकी चूत से पानी की धार छूटी और रुद्र के हाथ पर बह गया। पहला झटका मिट्टी के ढेर पर ही लग गया था।
रुद्र ने अपना गीला हाथ इशिता के होठों पर फेर दिया। चाट इसे। इशिता ने उसकी उँगलियाँ मुँह में लीं और चाटने लगी। उसका अपना पानी उसके मुँह में नमकीन लग रहा था। रुद्र ने अपनी लंड को इशिता की चूत के मुँह पर लगाया और एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसेड़ दिया।
इशिता की चीख निकल गई। चूत पूरी तरह फैल गई थी। रुद्र जोर जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर इशिता की स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे, चूत से पानी की आवाज़ छप छप आ रही थी।
तेरी चूत कितनी टाइट है रंडी कला कॉलेज की लड़कियाँ इतनी हरामी होती हैं क्या?
इशिता सिर्फ कराह रही थी। और जोर से मेरी चूत फाड़ दो लंड पूरी अंदर डालो गर्भ तक पहुँचा दो।
रुद्र ने इशिता की टाँगें कंधों पर चढ़ा दीं और और गहरे धक्के मारने लगा। लंड हर बार गर्भाशय तक जा रही थी। इशिता की चूत से झाग बनने लगा था। मिट्टी के फर्श पर पानी और थूक की मिलावट फैल रही थी। इशिता के नाखून मिट्टी में धंस गए थे।
रुद्र का पसीना इशिता के सीने पर टपक रहा था। उसकी साँस इशिता के कान में गर्म लग रही थी। उसने एक हाथ से इशिता की ठुड्डी पकड़ी और आँखों में देखा। देख मुझे देख। इशिता ने आँखें खोलीं और रुद्र की लाल आँखों में देखते देखते एक और झटका खा गई।
दूसरी बार झड़ने के बाद इशिता की टाँगें ढीली पड़ गईं लेकिन रुद्र रुका नहीं। उसने लंड बाहर निकाली, इशिता को पलटा और घुटनों के बल कर दिया। पीछे से लंड घुसाई और कमर पकड़कर जोर जोर से कुटाई करने लगा।
हर धक्के पर इशिता की गांड हिल रही थी। रुद्र ने थूक लगाकर एक उँगली इशिता की गांड में भी घुसा दी। फिर दो उँगलियाँ।
आह्हह्ह गांड भी फाड़ रहे हो चुदवा रही हूँ दोनों छेद और जोर से चोदो।
रुद्र ने आगे से हाथ बढ़ाकर इशिता के दाने को मसलना शुरू कर दिया। पीछे से लंड के धक्के और आगे से उँगलियों का दबाव। इशिता पागल हो रही थी। उसकी चीखें स्टूडियो की दीवारों से टकरा रही थीं।
बाहर बारिश और तेज़ हो गई थी। बिजली की कड़कड़ाहट के बीच इशिता की कराहें दब सी गईं। रुद्र ने इशिता के बाल पकड़े और उसका सिर ऊपर खींचा। उसकी पीठ अब धनुष जैसी मुड़ी थी और लंड हर धक्के पर और गहरा जा रहा था।
चोदो मुझे चोदो रंडी बना दो, इशिता बड़बड़ा रही थी। रुद्र ने थप्पड़ मारा उसकी गांड पर। चट की आवाज़ आई और निशान पड़ गया। इशिता ने और जोर से चिल्लाया।
रुद्र ने उसे फिर पलटाया और इस बार खुद नीचे लेट गया। आ मेरे ऊपर बैठ। इशिता उसकी कमर पर बैठी और लंड को अपनी चूत में धंसा लिया। उसने कूदना शुरू कर दिया। उसके स्तन उछल रहे थे और रुद्र उन्हें नीचे से पकड़कर दबा रहा था।
इशिता की रफ्तार बढ़ती गई। वह खुद अपनी चूत को लंड पर पटक रही थी। हर बार नीचे बैठने पर लंड उसके अंदर की दीवारों को रगड़ती। रुद्र ने उसकी कमर पकड़कर उसे और तेज़ उछालने में मदद की।
अब इशिता झड़ने के बिल्कुल किनारे थी। रुद्र ने यह महसूस किया और अपनी उँगली उसके दाने पर रख दी। बस एक हल्का सा दबाव और इशिता की चीख फट पड़ी। तीसरी बार का झटका सबसे तेज़ था। उसकी चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया।
रुद्र ने इशिता को नीचे गिराया और खुद उसके ऊपर आ गया। अब उसका चेहरा लाल था और साँस फूल रही थी। उसने आखिरी धक्के तेज़ तेज़ मारे और फिर जोर की आवाज़ के साथ अपनी मोटी लंड इशिता की चूत के अंदर ही छोड़ दी।
गर्म गर्म गाढ़ा वीर्य की धार चूत के अंदर भर गई। इशिता की टाँगें काँप रही थीं। चूत से सफेद वीर्य बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था और मिट्टी में मिल रहा था।
रुद्र ने लंड निकाली तो चूत से प्लॉप की आवाज़ आई। इशिता मिट्टी पर लेटी हुई, साँस फूलती हुई बोली, अगली बार जब आना तो और जोर से चोदना। मेरी चूत अब तुम्हारी लंड की आदी हो गई है। आज तो पूरा वीर्य अंदर ले लिया।
रुद्र मुस्कुराया और उसके माथे पर पसीना पोंछा। तू तो बड़ी रंडी निकली मैडम। कला कॉलेज की लड़कियों में इतना गर्म कहाँ से आता है। इशिता ने उसकी लंड की ओर देखा जो अब भी आधी खड़ी थी और थूक से चमक रही थी।
एक बार और, इशिता ने कहा और रुद्र को नीचे खींच लिया। उसने लंड को फिर मुँह में लिया। इस बार वह धीरे धीरे चूस रही थी, हर नस को जीभ से महसूस करते हुए। रुद्र की आँखें बंद हो गईं।
इशिता ने उसे बिठाया और खुद उसकी गोद में बैठ गई। आमने सामने। उसने लंड को फिर अपनी चूत में लिया और धीरे धीरे हिलने लगी। दोनों के पसीने आपस में मिल रहे थे। रुद्र ने उसकी पीठ सहलाई और गर्दन पर चूमा।
इस बार की चुदाई धीमी थी लेकिन गहरी। हर धक्का नपा तुला। इशिता रुद्र के कंधों पर सिर रखे कराह रही थी। रुद्र के हाथ उसकी गांड को पकड़े हुए थे और हर नीचे बैठने पर दबा रहे थे।
लंबी धीमी चुदाई के बाद रुद्र ने फिर झड़ने का संकेत दिया। उसने इशिता को उठाया और मिट्टी के ढेर पर लिटाया। इस बार उसने वीर्य इशिता के पेट और स्तनों पर छोड़ा। सफेद धारें उसके गीले शरीर पर बह गईं।
इशिता ने अपनी उँगली से वीर्य उठाया और चाट लिया। नमकीन और गाढ़ा। रुद्र ने यह देखकर उसके होठों पर एक गहरा चुंबन दिया। दोनों मिट्टी में लिपटे हुए पड़े थे।
रुद्र ने पैंट ऊपर की और जाने लगा। दरवाज़े पर रुककर बोला, अगली बार प्रदर्शनी के समय आऊँगा। इशिता ने मिट्टी से उठकर अपनी साड़ी लपेटी। जाना मत भूलना। मेरी चूत तुम्हारा इंतज़ार करेगी।
रुद्र मुस्कुराया, पैंट ऊपर की, और निकल गया। इशिता अभी भी वहीं लेटी रही चूत खुली, वीर्य टपकता हुआ, स्टूडियो की मिट्टी पर अपना पानी और उसका वीर्य मिलाए हुए। उसकी साड़ी पूरी गंदी हो चुकी थी, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।
उस रात के बाद इशिता जब भी स्टूडियो में आती तो उसी जगह की मिट्टी सूंघती जहाँ रुद्र ने उसे चोदा था। उसकी चूत में अभी भी उस मोटी लंड का अहसास रहता। कभी कभी वह खुद अपनी उँगलियाँ अंदर डालकर उसी रात को याद करती और कराह उठती।
प्रदर्शन बाद में हुआ लेकिन उस रात का गर्म किसी चिट्ठी या हॉस्टल की हाजिरी में कभी नहीं चढ़ा। ब्रॉन्ज़ कास्टर रुद्र आगरा लौट गया पर इशिता की चूत में उसकी लंड की याद हमेशा के लिए बस गई।
Readers who enjoyed “जबलपुर कला महाविद्यालय की इशिता ने मिट्टी स्टूडियो में आगरा वाले ब्रॉन्ज़ कास्टर की मोटी लंड से अपनी गीली चूत फड़वा दी” also read
8 curated storiesहॉस्टल की रात रूमरेट की बहन के साथ जब उसने दरवाज़ा बंद करते ही कहा आज रात यहीं रुकोंगी फिर दीवारें भी नहीं सुन सकीं
रूममेट घर गया था। उसकी बहन मेरे कमरे में आई और दरवाज़ा बंद करते ही बोली – आज रात यहीं रुकोंगी। फिर जो हुआ वो हॉस्टल की दीवारें भी सुन नहीं सकतीं।
हिंदी टीचर सेक्स कहानी: स्टाफ रूम वाली दोपहर
हिंदी टीचर सेक्स कहानी: जयपुर के कॉलेज में नमन ने अपनी प्रोफेसर को फोन पर कुछ ऐसा कहते सुन लिया, जिसने उस दोपहर को हमेशा के लिए बदल दिया।
जब सीनियर लड़की ने खुद जूनियर को अपने कमरे में बुलाकर सब कुछ छीन लिया
हॉस्टल की खामोश रात में एक सीनियर लड़की ने जूनियर लड़के को बुलाया… और फिर जो हुआ वह किसी ने सोचा नहीं था। नियंत्रण इस बार लड़की के हाथ में था।
Hindi College Girl Sex Kahani: Library Mein Fest Wali Raat
फेस्ट की रात बंद कॉलेज लाइब्रेरी में पूजा और अर्जुन की हिम्मत भरी मुलाकात, एक दिलचस्प हिंदी कॉलेज गर्ल सेक्स कहानी।
कानपुर कृषि महाविद्यालय की पुरानी बीज परीक्षण प्रयोगशाला में अंतिम जर्मिनेशन ट्रे के बाद तीसरे वर्ष की छात्रा ईशा ने उन्नाव के लैब अटेंडेंट को वह प्रतिशत दिया जो किसी रजिस्टर या हॉस्टल हाजिरी में कभी नहीं चढ़ता
कानपुर कृषि महाविद्यालय की पुरानी बीज लैब। अंतिम ट्रे। तीसरे वर्ष की ईशा और उन्नाव का राजू। वह प्रतिशत जो रजिस्टर या हाजिरी में कभी नहीं चढ़ता।
वाराणसी की पुरानी वेधशाला के गुंबद में ग्रहण की रात तीसरे वर्ष की छात्रा ने नैनीताल से आए खगोल सहायक को वह छाया दी जो किसी लॉगबुक या हॉस्टल की हाजिरी में कभी नहीं चढ़ती
वाराणसी की पुरानी वेधशाला। ग्रहण की रात। कव्या और नैनीताल से आए आर्यन। वह छाया जो लॉगबुक या हॉस्टल की हाजिरी में कभी नहीं चढ़ती।
ज़बरदस्त रात जब उसने बाल खींचकर चोदा और साफ कहा कि आज नर्मियत नहीं चलेगी सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स
उसने मेरा बाल पकड़कर खींचा और बोली – आज नर्मियत नहीं चलेगी। फिर जो हुआ वो सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स था।
पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात की घंटी
पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात को बाथरूम की टंकी फटने पर सुनीता भाभी ने पड़ोसी दीपक को मदद के लिए बुलाया, लेकिन पानी रुकने के बाद जो शुरू हुआ, वो दोनों की जिंदगी की सबसे लंबी रात बन गया।