दोस्त ने खुद अपनी बीवी मुझसे चुदवाई, उसकी चूत में लंड डालते हुए वो देखता रहा
गेस्ट रूम की दराज खींचते ही मेरी उंगलियां किसी नरम सी चीज से टकराईं। अंदर एक काली रेशमी पट्टी और उसके नीचे एक छोटी सी चाबी पड़ी थी। मैं समझ नहीं पाया कि करन के घर के मेहमान वाले कमरे में ये सब क्या कर रहा है, और उस वक्त मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि यही छोटी सी दराज एक दिन उस रात की वजह बनेगी जब मेरे दोस्त ने खुद अपनी बीवी मुझसे चुदवाई। तभी दरवाजे पर करन की आवाज आई, और उसने दराज बंद करते हुए कहा कि ये चीजें उसी की हैं।
करन मेरा बचपन का दोस्त है। हम दोनों दिल्ली के एक ही मोहल्ले में बड़े हुए थे। उसकी शादी को दो साल हुए थे और उसकी बीवी निशा से मैं कई बार मिल चुका था। निशा हंसमुख थी, खूबसूरत थी और हमेशा सबकी खातिरदारी में लगी रहती थी। उस शाम मैं उनके घर डिनर पर रुका था।
डिनर के बाद करन ने मुझे रुकने को कहा। उसने कहा कि रात हो गई है, सुबह चले जाना। मैंने हां कर दी। गेस्ट रूम में सामान रखते हुए ही वो दराज खुल गई थी। करन ने पट्टी उठाई और मुस्कुराते हुए बोला कि ये उसकी एक फैंटेसी का हिस्सा है। मैं हंस दिया, मुझे लगा वो मजाक कर रहा है।
लेकिन करन की आंखों में मजाक नहीं था। उसने धीरे से कहा कि वो हमेशा से चाहता था कि कोई मर्द उसकी बीवी को उसके सामने प्यार करे। वो देखना चाहता था कि निशा किसी और के साथ कैसे खुलती है। मेरी सांस अटक गई। मैंने कहा कि ये पागलपन है, वो अपनी बीवी को किसी और को कैसे दे सकता है।
करन ने कहा कि ये उसकी सबसे गहरी ख्वाहिश है और वो सिर्फ मुझ पर भरोसा करता है। उसने कहा कि निशा भी इस बारे में जानती है। वो भी इस ख्याल से बेचैन हो जाती है। मैंने कहा कि मैं इस खेल में नहीं पड़ना चाहता। लेकिन सच ये था कि निशा का चेहरा मेरे दिमाग में घूमने लगा था।
रात को ग्यारह बजे करन मेरे कमरे में आया। उसने कहा कि निशा तैयार है, अगर मैं चाहूं तो। मेरे हाथ कांप रहे थे। मैं उठा और उसके पीछे चल दिया। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था। अंदर हल्की पीली रोशनी जल रही थी। निशा बिस्तर पर बैठी थी। उसने गुलाबी रंग की पतली सी नाइटी पहनी थी।
निशा ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी। उसकी आंखों में शर्म भी थी और एक अजीब सी बेचैनी भी। करन ने दरवाजा बंद किया और एक कुर्सी खींचकर कोने में बैठ गया। उसने कहा कि वो सिर्फ देखेगा, बीच में नहीं आएगा। मैंने निशा के पास जाकर बैठते हुए उसका हाथ पकड़ा। उसका हाथ गर्म था और कांप रहा था।
मैंने निशा से पूछा कि क्या वो सच में ये चाहती है। उसने धीरे से हां कहा। उसने कहा कि करन ने उसे महीनों से इस बारे में बताया था और अब वो खुद भी जानना चाहती थी कि किसी और मर्द के साथ कैसा लगता है। मैंने उसके गाल को छुआ और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
निशा का मुंह नरम था। उसने मेरे होंठों को चूमा और उसकी सांस तेज हो गई। मैंने उसकी नाइटी के स्ट्रैप नीचे खिसकाए। उसके गोरे कंधे सामने आ गए। मैंने उसके कंधे पर चूमा और धीरे धीरे उसकी गर्दन तक पहुंच गया। निशा ने मेरी कमीज पकड़ ली और मुझे अपने करीब खींच लिया।
करन कोने से देख रहा था। उसकी सांसें भी तेज हो रही थीं। मैंने निशा की नाइटी ऊपर उठाई। उसकी टांगें गोरी और चिकनी थीं। मैंने उसकी जांघों पर हाथ फेरा और वो सिहर उठी। उसने मेरे कान में कहा कि धीरे करो, वो पहली बार किसी और के साथ है।
मैंने उसकी पैंटी को धीरे से नीचे खिसकाया। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली से उसे छुआ तो वो कांप उठी। मैंने उसकी चूत को सहलाया और उसकी गीलीपन महसूस की। निशा ने आंखें बंद कर लीं और मेरे कंधे पर सिर रख दिया। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।
निशा की आवाज निकलने लगी। वो हल्के से कराह रही थी। करन ने अपनी कुर्सी थोड़ी आगे खिसकाई। उसकी आंखें हम दोनों पर जमी थीं। मैंने निशा की चूत को चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उसकी गीली चूत पर घूम रही थी। निशा ने मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी टांगें फैला दीं।
मैंने उसकी चूत को चूसा और उसकी भगनासा को जीभ से छेड़ा। निशा का बदन ऐंठने लगा। वो बोली कि बस अब और नहीं, उसे मेरा लंड चाहिए। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। निशा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी।
उसके हाथ की नरमी ने मुझे पागल कर दिया। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगों के बीच आ गया। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। निशा ने आंखें खोलीं और मेरी तरफ देखा। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।
निशा की चूत टाइट थी और गीली थी। मेरा लंड अंदर जाते ही वो चिल्ला उठी। मैंने रुककर उसे संभलने दिया। फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ निशा की आवाज तेज होती गई। करन अब खड़ा हो गया था। वो बिस्तर के पास आ गया था और देख रहा था कि मेरा लंड उसकी बीवी की चूत में अंदर बाहर हो रहा है।
मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। निशा ने मेरी पीठ पकड़ ली और अपने नाखून गड़ा दिए। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने उसकी छातियों को दबाया और उसके निप्पल्स को मुंह में लिया। निशा पागलों की तरह कराह रही थी।
करन ने कहा कि और तेज करो। उसकी आवाज कांप रही थी। मैंने निशा को पलटकर घोड़ी बनाया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी चूत में पीछे से लंड डाला और तेज धक्के मारने लगा। निशा के मुंह से लगातार आवाजें निकल रही थीं।
बिस्तर हिलने लगा। निशा की चूत से गीलापन बह रहा था। मैंने उसके बाल पकड़े और और तेज चोदा। तभी निशा का बदन कांपने लगा। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया और वो झड़ गई। उसका पानी मेरे लंड पर बह गया। वो चिल्लाई कि वो झड़ गई है।
निशा के झड़ने के बाद करन बिस्तर पर आ गया। उसने निशा के होंठों पर चूमा और उसके बाल सहलाए। निशा ने करन का हाथ पकड़ लिया और बोली कि उसे बुरा नहीं लग रहा है, उसे अच्छा लग रहा है। करन ने मेरी तरफ देखा और कहा कि रुकना मत, उसे अभी और चाहिए। उसकी आवाज में एक अजीब सी खुशी थी।
मैंने निशा को सीधा लिटाया और उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं। इस पोज में मेरा लंड उसकी चूत में और गहरा जा रहा था। निशा ने अपनी आंखें बंद कर लीं और हर धक्के पर उसका मुंह खुल जाता था। मैंने उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी।
निशा बोली कि उसे मेरा लंड बहुत पसंद आ रहा है। उसने कहा कि करन उसे इतना गहरा कभी नहीं चोद पाया। करन ने ये सुनकर मुस्कुरा दिया। उसने कहा कि इसीलिए तो वो मुझे लाया है। मैंने निशा की चूत में और तेज धक्के मारे। उसकी चूत की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
मैंने निशा को उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया। वो मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी। उसकी छातियां मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उसके निप्पल्स को चूसा और उसकी कमर पकड़कर उसे ऊपर नीचे कराया। निशा की सांसें फूल गई थीं और वो मेरे कानों में कराह रही थी।
करन ने निशा की पीठ सहलाई और कहा कि वो कितनी खूबसूरत लग रही है। निशा ने करन की तरफ देखा और मुस्कुरा दी। फिर उसने मेरी तरफ देखकर कहा कि अब वो फिर झड़ने वाली है। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया और वो दूसरी बार झड़ गई। उसका पानी मेरी जांघों पर बह गया।
मैंने धक्के जारी रखे। मेरा भी निकलने वाला था। मैंने निशा की चूत में आखिरी तेज धक्के मारे और अपना सारा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। मेरा लंड झटके खाता रहा। निशा हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़ी। करन ने आकर निशा के माथे पर चूमा।
उस रात के बाद सब कुछ बदल गया। करन ने कहा कि उसने जो देखा वो उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी ख्वाहिश पूरी होना था। निशा ने कहा कि वो शर्मिंदा नहीं है। और मैं समझ गया कि उस रात सच में मेरे दोस्त ने खुद अपनी बीवी मुझसे चुदवाई थी, और हम तीनों ने मिलकर एक ऐसी हद पार की थी जिसके बाद लौटना मुमकिन नहीं था।
रात को सोने से पहले निशा ने मेरे कमरे में आकर मेरे माथे पर चूमा था। उसने धीरे से कहा था कि आज की रात उसने अपने आप को पहली बार पूरी तरह आजाद महसूस किया है। उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया था, क्योंकि मुझे पता था कि हम तीनों ने मिलकर एक ऐसा राज बना लिया है जो सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगा।
अगली सुबह नाश्ते की मेज पर तीनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी। लेकिन उस खामोशी में एक समझ भी थी। करन ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया। निशा ने चाय का कप मेरी तरफ बढ़ाया और उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों से छू गईं। मुझे पता था कि ये कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है।
उस रात के बाद मैं करन के घर से सुबह निकला तो मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। मैंने सोचा था कि सब कुछ वहीं खत्म हो जाएगा। लेकिन दो दिन बाद करन का मैसेज आया। उसने लिखा कि निशा मुझे याद कर रही है।
मैंने पहले मना करने की सोची। लेकिन सच ये था कि निशा की आवाजें मेरे कानों में अब भी गूंज रही थीं। उसी शाम मैं फिर उनके घर पहुंचा। इस बार करन ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए मुझे अंदर ले गया। निशा रसोई में थी। उसने मुझे देखते ही चाय के लिए पूछा, लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं।
करन ने कहा कि आज वो कुछ नया करना चाहता है। उसने निशा की आंखों पर वही काली रेशमी पट्टी बांध दी जो मैंने दराज में देखी थी। निशा की सांसें तेज हो गईं। उसने मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे बेडरूम तक ले गई।
पट्टी बंधी होने से निशा की बाकी इंद्रियां और तेज हो गई थीं। मैंने उसके कान में धीरे से कहा कि मैं ही हूं। उसने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ अपनी कमर पर रख दिया। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसके पेट पर चूमा। निशा कांप उठी।
करन पास में बैठकर देख रहा था। मैंने निशा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी चूत पहले से गीली थी। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाल दिया। निशा ने पट्टी के नीचे से मेरी तरफ चेहरा घुमाया और कराह उठी।
इस बार धक्के धीमे थे, लेकिन हर धक्का गहरा था। निशा की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। करन ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था। थोड़ी देर में निशा झड़ गई और उसके बाद मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया। पट्टी खोलते ही निशा ने मेरी तरफ देखा और बोली कि ये वाली रात उसे सबसे ज्यादा याद रहेगी।
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