पति ने फोन पर निर्देश दिए और मैंने पड़ोसी को अंदर बुला लिया
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। पति रोहन शहर से बाहर था। फोन पर उसकी आवाज आ रही थी।
“अब दरवाजा खोल,” रोहन ने कहा।
आरोही ने गहरी साँस ली और दरवाजा खोला। सामने कर्ण खड़ा था—बिल्कुल अगले फ्लैट का। रोहन ने पहले ही मैसेज कर रखा था। कर्ण अंदर आया। आरोही ने ताला लगाया।
फोन स्पीकर पर था। रोहन की आवाज साफ आ रही थी। “उसे दीवार से सटा। और चूम।”
कर्ण ने आरोही को दीवार से सटाया और जोर से चूमा। आरोही की साँसें तेज हो गईं। रोहन ने फिर निर्देश दिया, “ब्लाउज खोल। स्तनों को मसल।”
कर्ण ने आरोही का ब्लाउज खोला। ब्रा नीचे की। दोनों स्तनों को जोर से मसलने लगा। निप्पल को मुँह में ले लिया। आरोही की सिसकी निकल गई। रोहन फोन पर सुन रहा था।
“अब बिस्तर पर ले जा। और उसकी पैंटी उतार,” रोहन ने कहा।
कर्ण ने आरोही को बिस्तर पर लिटाया। पैंटी उतार दी। आरोही की जाँघें फैल गईं। रोहन ने निर्देश दिया, “जीभ से शुरू कर।”
कर्ण ने अपनी जीभ आरोही के बीच में रख दी। आरोही ने तकिया दबा लिया। कर्ण की जीभ तेज थी। रोहन फोन पर साँसें ले रहा था। “दो उंगलियाँ डाल… और जोर से।”
कर्ण ने आज्ञा का पालन किया। आरोही का पहला चरम जल्दी आ गया। उसकी दबी आवाज फोन तक पहुँच गई। रोहन ने कहा, “अब अंदर जा। पूरी तरह।”
कर्ण ने अपनी पैंट खोली। आरोही की आँखें उसके अंग पर टिक गईं। कर्ण ने एक ही धक्के में अंदर तक घुस गया। आरोही चीख पड़ी। रोहन फोन पर बोला, “जोर से ले उसे। मैं सुन रहा हूँ।”
कर्ण ने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर चरमरा रहा था। आरोही की आवाजें अब साफ फोन पर जा रही थीं। रोहन निर्देश देता रहा, “और तेज… उसके बाल पकड़… थप्पड़ मार।”
कर्ण ने आरोही के बाल पकड़ लिए और नितंबों पर थप्पड़ मारे। आरोही पीछे की ओर धकेलने लगी। दूसरा चरम इतना तेज था कि आरोही की आवाज घर में गूँज गई। कर्ण ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया।
फोन पर रोहन की आवाज आई, “अभी खत्म नहीं। एक बार और। पीछे से।”
कर्ण ने आरोही को घुटनों के बल किया। पीछे से फिर से अंदर आया। रोहन निर्देश देता रहा। आरोही की सिसकियाँ फोन पर जा रही थीं। तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। कर्ण ने फिर से उसके अंदर ही छोड़ दिया।
रात के एक बज गए थे। रोहन ने कहा, “अब उसे चूम के विदा कर। और कल फिर से बुलाना।”
कर्ण ने आरोही को चूमा और कपड़े पहनने लगा। आरोही अभी भी बिस्तर पर लेटी थी। शरीर पर कर्ण के निशान थे। जाँघों के अंदर उसका अंश था।
दरवाजा बंद होते ही रोहन ने फोन पर पूछा, “कैसा लगा?”
आरोही ने हांफते हुए जवाब दिया, “बहुत… तुम्हारे निर्देशों के साथ और भी ज्यादा।”
रोहन मुस्कुराया। “ये तो शुरुआत है। अगली बार और हिदायतें दूँगा।”
आरोही ने आँखें बंद कर लीं। पति के फोन से आते निर्देशों ने उस रात उसके शरीर को किसी और के हवाले कर दिया था। और दोनों जानते थे—ये खेल अब और गहरा होने वाला है।
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