गुलाम बनाकर चोदा हुक्म की रात जब उसने आँखों पर पट्टी बाँधी हाथ बाँधे और बोली आज तुम मेरे गुलाम हो
रात के एक बज रहे थे। कमरे में सिर्फ एक कोने में हल्की लाल बत्ती जल रही थी। आरव मेरे सामने खड़ी थी। काले चमड़े की छोटी स्कर्ट और टाइट टॉप में। उसके हाथ में एक पतली सी रस्सी और काली पट्टी थी।
उसने मेरे पास आकर धीरे से कहा —
“आज से तुम मेरे गुलाम हो। कोई सवाल नहीं, सिर्फ हुक्म। समझे?”
मैंने सिर हिलाया। आरव ने मेरी आँखों पर काली पट्टी बाँध दी। दुनिया अंधेरी हो गई। फिर उसने मेरे दोनों हाथ पीछे करके रस्सी से कसकर बाँध दिए। थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था।
उसने मुझे घुटनों के बल बैठा दिया। मैंने उसकी आवाज़ सुनी — ज़िप खुलने की। फिर कुछ गर्म और सख्त मेरे होंठों से छूआ।
“मुँह खोलो।”
मैंने मुँह खोला। आरव ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। पहले सिर्फ थोड़ा, फिर गहराई तक। उसने मेरे बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरी आँखों में पानी आ गया लेकिन वह नहीं रुकी। ग्लक-ग्लक की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाला और मुझे खड़ा किया। मेरे कपड़े एक-एक करके उतारे। ठंडी हवा मेरे शरीर से टकराई। आरव ने मेरे निप्पल को दो उंगलियों से पकड़कर मरोड़ा। दर्द के साथ मज़ा भी आया।
“आवाज़ मत निकालना जब तक मैं इजाजत न दूँ।”
उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। पेट के बल लिटाया। फिर मेरे कूल्हों को ऊपर उठाया। अचानक एक जोरदार थप्पड़ मेरी गांड पर पड़ा। फिर दूसरा, तीसरा। मेरी त्वचा जलने लगी।
आरव ने मेरे कान में कहा —
“आज बहुत देर तक चोदूँगी। और तुम सिर्फ सहोगे।”
उसने मेरे पैर और चौड़े किए। मैंने महसूस किया कि उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ खा रहा है। फिर एक झटके में पूरा अंदर घुस गया। मेरी चीख निकल गई।
“आह्ह…”
आरव ने मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जोर से बोली —
“चुप रहो। आवाज़ निकाली तो और ज़ोर से पेलूँगी।”
फिर उसने बेतहाशा धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर मेरा शरीर आगे को धकेल रहा था। रस्सी हाथों में धंस रही थी। आरव एक हाथ से मेरे बाल खींच रही थी और दूसरे हाथ से मेरे निप्पल मरोड़ रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने पोज़िशन बदली। मुझे शर्मसार करके लिटाया, पैर कंधों पर रखे और और भी गहराई तक पेलने लगी। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
“तुम सिर्फ मेरी चीज हो आज। समझे?”
मैंने सिर्फ सिर हिलाया। आँखों पर पट्टी की वजह से कुछ नहीं दिख रहा था, सिर्फ अहसास हो रहा था।
आरव ने मुझे फिर से पलटकर डॉगी बना दिया। इस बार उसने और तेज़ी से पेलना शुरू किया। बीच-बीच में थप्पड़ भी मार रही थी। मेरी गांड जल रही थी और चूत पूरी तरह भीग चुकी थी।
अचानक उसने लंड निकाल लिया। मैंने महसूस किया कि वह मेरे मुँह के पास आई।
“चूसो। साफ करो।”
मैंने उसका लंड मुँह में लिया और चाटने लगा। आरव ने फिर से मेरे बाल पकड़कर मुँह में धक्के मारने शुरू कर दिए।
कुछ देर बाद वह फिर से मुझे चोदने लगी। इस बार और भी रफ। बिस्तर जोर-जोर से खटखटा रहा था। मेरी रस्सी से बंधी कलाईयाँ जल रही थीं।
आखिर में आरव ने मेरे कान में कहा —
“अंदर छोड़ने वाली हूँ… और तुम कुछ नहीं बोलोगे।”
उसने आखिरी बहुत जोरदार धक्के मारे और पूरा गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मेरा शरीर कांपने लगा। वह कुछ देर अंदर ही रही, फिर धीरे से लंड निकाला।
आरव ने मेरी आँखों की पट्टी खोली और हाथ की रस्सी खोली। मेरी कलाईयों पर लाल निशान पड़ गए थे। वह मेरे ऊपर लेट गई और मेरे कान में बोली —
“अगली बार और सख्त हुक्म होंगे। आज तो मैंने हल्के से खेला है।”
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