कोटा के पुराने चंबल कैनाल लॉक गेट कंट्रोल रूम में बाढ़ की रात विवाहित गेट ऑपरेटर की पत्नी ने पति की शांत सहमति से भरतपुर से आए सिंचाई इंजीनियर को वह पानी दिया जो किसी गेज रजिस्टर या घर की डायरी में कभी नहीं चढ़ता
कोटा की उस रात चंबल का पानी काले रंग से नहीं बह रहा था। बाढ़ की चेतावनी में पुराना लॉक गेट नंबर आठ की तरह बह चुकी थी। मजबूत से मजबूत तक चढ़ती जा रही थी। कंट्रोल रूम की पुरानी खिडकी खिडकी बज रही थी। दीवार की बत्ती गेज की सुईं सुईं चढ़ रही थी और बाहर से पानी की गड़गड़ आवाज आ रही थी। पूरे कंट्रोल रूम में तेल की गन्ध बी बाकी हुई थी, मान जैसा लगता था जैसे कोई अंदर से बोल रहा हो।
गोविंद उस रात ड्यूटी पर बैठा था। वो रात का गेट ऑपरेटर था। बाढ़ के मौसम में उसे पानी का स्तर देखना था, लोहे का बैलैंस बदलना था, सुपरिंटेंडेंट को रास्ता देना था। उसकी आँखें में थकावट था और कुछ और कुछ उस बात की इच्छा जो वह कह नहीं सकता जिसे उसकी बीवी के सामने के बाद के बाद बनी रही थी। उसकी पत्नी मीरा थर्मस में बैठी थी, चाय के बेसिन में, भीगे में गीली तिरछी साड़ी, गले के बटन के नीचे काले दाग और कमर में उस पानी की गंध जो अभी तक किसी रजिस्टर में नहीं लिखी जाती।
अभय भरतपुर से आया था। सिंचाई विभाग का इंजीनियर, उम्र बांधने का आदमी, कन्धे की उम्र पर अभी बाढ़ का कीचड़ चिपका हुआ था। उसने कहा था कि रात भर के गेज रीडिंग चैक करनी है और सुबह सुबह से लॉक के स्पिल पेज करने हैं। गोविंद ने उसे अंदर बुलाया। मीरा ने चाय बनाई थी। अभय की उम्र काली थी, कंधे मोटे थे, कमर में भीगी थी। मीरा के मुँह से चाय बिना चढ़ा। उसकी चूड़ियों की नम साड़ी के नीचे भीगी हुई थी। गोविंद ने देखा। उसकी आँखें में कुछ नहीं था। वो उस मर्द को अपनी पत्नी के साथ चोदना चाहता था, किसी और की रात नहीं, सिर्फ आंखों से नहीं। आज वो चाहता था कि कोई उसे चोदे, अपनी पत्नी की चूत को किसी और की लुंड में भरे, अपनी पत्नी की गली को किसी और की जीभ से भरे।
मीरा को पता था कि गोविंद की नजर उस बात पर आ गई है। वो रात को चाय बनाने में महिन होता था, चाय बनाने में पानी और बिजली लाता था। पर आज उसके पति की आँखों में वो भूख थी जो पहले कब्जी चुप नहीं रही थी, उसकी साँस टूट गई। उसने सोचा कि आज उस मर्द को अंदर ले आउं, तो मैं भी अंदर ले आउंगी। यह बात उसके मुँह में कई दिन से पड़ी थी। आज वो बोल नहीं सकी।
रात दो बजे गइ थी। बाहर और पानी की आवाज इतनी बढ़ गई कि खिडकी की कांच काँप रही थी। अभय ने जैकेट उतार दी, खिडकी की सीडी पर रख दी और कहा, गेज अभी पानी के उपर है भैया। कल को करोड़ करना पड़ेगा। गोविंद ने मीरा की ओर देखा। मीरा की साँस तेज हो गई थी। उसके नीचे में पानी की ठंड जैसी बैठी थी। गोविंद ने धीरे से कहा, तु उसको अंदर ले जा। जो चाहे वो करे, मैं देख रहूँगा। आज रात मेरी बीवी को किसी और के हाथ में देखना है।
मीरा का मुँह सुजग गया। वो गोविंद की बात समझने लगी थी, पर आज उसके मुँह से निकली बात निकल रही थी। उसकी चूत गीली हो गई थी, जैसे कोई उसे छू रहा हो। उसकी चूचियाँ भारी हो गई थीं। अभय ने उसकी ओर देखी, फिर गोविंद की ओर देखी, फिर दरवाजा बंद कर दिया। गोविंद ने सिर्फ हिलाया। उसकी सहमति उस रात की सबसे बड़ी चीज थी।
अभय ने मीरा को दीवार के पीछे दबाया। खिडकी की ठंडी रौशनी में उसकी चूचियाँ साफ दिखने लगीं। उसने उसका कुर्ता फाड़ दिया। मीरा की साँस टूट गई। गोविंद कुर्सी पर बैठा रहा, हाथ में हाथ रखे हुए थे, अपना लुंड अपनी पैंट में टट रहा था। उसने अपनी पैंट का ज़िप खोला और अपना लुंड बाहर निकाल दिया। मीरा ने देखा कि उसका पति अभी उसी हालत में खड़ा हुआ है। यह बात उसे और गर्म कर रही थी।
अभय ने मीरा के मुँह में अपनी जीभ ठोक दी। मीरा का मुँह खुल गया। उसकी जीभ गीली हो गई थी, जैसे उसकी चूत को खोल रही हो। अभय ने कहा, अपनी चूत आज मेरे मुँह में है, पति देख रहा है। मैं इसे चुसूंगा, तु इसे चूस। मीरा की आँखें बंद हो गईं। उसने उसकी जीभ को और जोर से दबाया। गोविंद की साँस टूट गई पर वो रुका नहीं। उसका लुंड और झुक रहा था और उसकी पैंट की ज़िप में गीला दाग पड़ गया था।
अभय ने मीरा की साड़ी उतार दाली। उसकी चूचियाँ बहर आ गईं। उसने उन्हें मुँह में दबाया, चूसा, दाँत से दाँत। मीरा की कमर काँपने लगी। उसकी चूत गीली हो गई थी, गीला रस बह रहा था। उसके मुँह से थूक गिरता था। गोविंद के लुंड की आवाज आ रही थी। उसने देखा कि उसकी बीवी का मुँह किसी और के मुँह में है, किसी और की जीभ उसकी गली में है, किसी और का लुंड उसकी चूत में है। यह देखना उसे और झुका दे रहा था।
अभय ने मीरा को दीवार के पीछे घुमा कर दिया। उसका मुँह खुला हुआ। उसने उसकी चूत को खोला, दबाया, चूसा। मीरा की आँखें बंद हो गईं। उसकी गली में पानी जैसा भर आ रहा था। अभय ने कहा, तेरी चूत आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस। मीरा की चीख निकल गई। उसकी चूत खुल गई थी। अभय ने उसकी चूत को दोबारा चूसा। गोविंद ने हर शब्द में कहा, और जोर से, और जोर से। उसकी आवाज मीरा की चीख में मिल गई।
अभय ने मीरा को खिडकी के पीछे मोड़ दिया। उसकी चूत गीली हो गई थी, गीला रस बह रहा था। उसने उसकी गली में अपनी उंगली डाली। मीरा की चीख निकल गई। उसकी चूत खुल गई थी। अभय ने कहा, तेरी गली आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस। मीरा ने हाथ रख दिये। उसकी उंगली में पानी जैसा भर आ रहा था जैसे कैनाल का पानी भरता है। गोविंद ने देखा कि उसकी बीवी की गली किसी और की उंगली से भर रही है। यह देखना उसे और झुका दे रहा था।
मीरा की आँखें बंद हो गईं। उसकी चूत गीली हो गई थी, गीला रस बह रहा था। अभय ने उसकी गली में अपनी उंगली डाली, चोदी, दबाई। मीरा की चीख निकल गई। उसकी चूत खुल गई थी। अभय ने कहा, तेरी गली आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस। गोविंद ने अपनी कुर्सी को कस के बल पर आगे बढ़ाया ताकि कि वो अछी तरह से देख सके कि उसकी बीवी की गली किसी और की उंगली से कितनी खुल रही है। उसका लुंड दुबारा झुक गया।
अभय ने मीरा को पीछे से चोदा। उसकी चूत गीली हो गई थी, गीला रस बह रहा था। उसने उसकी गली में अपनी उंगली डाली, चोदी, दबाई। मीरा की चीख निकल गई। उसकी चूत खुल गई थी। अभय ने कहा, तेरी गली आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस। मीरा की चीख इतनी निकल गई कि उसकी आवाज बाहर में खो गई। गोविंद ने देखा कि उसकी बीवी की चूत किसी और की चूत से भर गई है। यह देखना उसे और झुका दे रहा था।
अभय ने मीरा की चूत में अपना लुंड छोड़ दिया। मीरा की चीख निकल गई। उसकी चूत खुल गई थी। अभय ने कहा, तेरी चूत आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस। मीरा ने चीख दबाई। उसकी चूत के अंदर अभय का गर्म गर्म गर्म गर्म गर्म करता रहा। गोविंद ने देखा कि उसकी बीवी की चूत में किसी और का लुंड जा रहा है। यह देखना उसे और झुका दे रहा था।
अभय ने मीरा को पीछे से दुबारा चोदा। उसकी चूत गीली हो गई थी, गीला रस बह रहा था। उसने उसकी गली में अपना गर्म छोड़ दिया। मीरा की चीख तूट गई। उसकी चूत के अंदर अभय का गर्म गर्म गर्म गर्म गर्म करता रहा। गोविंद ने अपनी पैंट को बाहर निकाली। उसका लुंड टट रहा था। वो देख रहा था कि उसकी पत्नी किसी और के मुँह में है, किसी और की जीभ उसकी गली में है, किसी और का लुंड उसकी चूत में है। उसकी साँस टूट रही थी, पर वो रुका नहीं।
अभय ने मीरा की कमर में अपना गर्म छोड़ दिया। मीरा की चीख तूट गई। उसकी चूत के अंदर अभय का गर्म गर्म गर्म गर्म गर्म करता रहा। गोविंद ने देखा कि उसकी बीवी की कमर में किसी और का गर्म जा रहा है। यह देखना उसे और झुका दे रहा था। अभय ने कहा, तेरी कमर आज मेरी है, पति देख रहा है। मैं इसे चोदूंगा, तु इसे चूस।
बाहर में पानी की आवाज बढ़ गई थी। खिडकी की कांच काँप रही थी। गेज की सुईं बढ़ गई थी, पर उस रात का कोई अंक कहीं नहीं चढ़ा। न गोविंद की लॉगबुक में, न मीरा की डायरी में, न अभय की रिपोर्ट में। वो पानी सिर्फ उन तीन चीजों के बीच रह गया जो उस कंट्रोल रूम में उतरा था।
सुबह सुबह से आकाश की रौशनी आई। अभय ने जैकेट पहन पहनाया। गोविंद ने गेज पढ़ा दिया। मीरा ने अपनी साड़ी उतार ली। तीन की चाय बनी रही जैसी पहले बैठी थी। कोई बोल नहीं चुका। सिर्फ आंखे नहीं खुले। अगली सुबह में गोविंद ने मीरा की कमर में चाय बनाई थी। मीरा ने उसकी ओर देखी। दोनों के बीच वो बात थी जो कही नहीं जा सकती। अभय चला गया था, पर उस रात का नक्शा उसके साथ रह गया।
लॉक गेट नंबर आठ की तरह बह चुकी था। पानी नीचे से बह रहा था। कंट्रोल रूम की खिडकी बुझ गई थी। गोविंद ने लॉगबुक में सिर्फ पानी का स्तर लिखा। मीरा ने घर आकर चाय बनाई। अभय की जीप कोटा स्टेशन की ओर मुड़ गई। और तीन लोग जानते रहे जो उस रात उन तीन चीजों के बीच हुआ था, जो किसी गेज रजिस्टर में कभी नहीं चढ़ता। न किसी हाजिरी में, न किसी डायरी में, न किसी पत्नी के प्रश्न में।
उस रात के बाद जब गोविंद मीरा को छूता तो उसकी आँखों में वह भूख थी जो पहले नहीं दिखाई थी। मीरा की चाल में भी वह बात थी जो उसने कभी अपने पति से नहीं कही थी। दोनों ने उस रात को अपने बीच रख लिया था। और अभय ने भी उस रात को अपनी रिपोर्ट में नहीं लिखा। वो पानी सिर्फ उन तीन के बीच रह गया जो किसी कागज पर नहीं चढ़ता।
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