नौकरानी की चुदाई: दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर

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दोपहर के ठीक तीन बज रहे थे और राहुल लैपटॉप पर क्लाइंट की प्रेजेंटेशन में उलझा हुआ था, तभी उसके दिमाग में वो पुराना शरारती ख्याल फिर से कौंध गया कि नौकरानी की चुदाई असल जिंदगी में कैसी लगती होगी। उसी पल स्पेयर रूम से गौरी की तेज आवाज़ आई, "साहब, थोड़ा इधर आ जाइए न, ये दीवान अकेले नहीं हिलेगा।"

राहुल ने लैपटॉप एक तरफ सरकाया और स्पेयर रूम की ओर बढ़ा, जहां दिवाली की सफाई के चक्कर में गौरी दोपहर से ही जुटी हुई थी। गौरी घुटनों के बल बैठी दीवान के नीचे झाड़ू लगा रही थी। उसने पुरानी सूती साड़ी पहनी थी जिसका पल्लू कमर में खोंसा हुआ था और माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

"ये दीवान यहां से हटाकर उस दीवार से लगाना है, नीचे बहुत धूल जमी है," गौरी उठते हुए बोली और पल्लू को कंधे पर ठीक किया। राहुल ने दीवान का एक सिरा पकड़ा और गौरी दूसरे सिरे पर लग गई। "एक, दो, तीन, जोर लगाइए साहब," उसने कहा और दोनों ने एक साथ धक्का दिया।

भारी दीवान टस से मस नहीं हुआ, बल्कि दोनों की पकड़ फिसल गई और गौरी का कूल्हा सीधा राहुल की जांघ से जा टकराया। वो टक्कर इतनी अचानक थी कि दोनों एक पल को ठिठक गए, लेकिन गौरी ने हटने की कोई जल्दी नहीं दिखाई। राहुल की सांसें अपने आप तेज हो गईं।

"अरे सॉरी साहब," गौरी हंसते हुए बोली, लेकिन उसकी आंखों में साफ शरारत थी और वो एक इंच भी नहीं हटी। पसीने से उसकी ब्लाउज का गला गीला हो गया था और पल्लू कंधे से सरककर नीचे लटक रहा था। राहुल की नजरें बार बार वहीं अटक रही थीं।

दूसरी कोशिश में दोनों ने पूरी ताकत लगाई और दीवान आखिरकार दीवार से हटकर कमरे के बीचों बीच आ गया। "हो गया साहब, बस थोड़ा और," गौरी हांफते हुए बोली और उसने राहुल की बांह पर हाथ रख दिया। उसकी उंगलियां उसकी बांह पर एक पल ज्यादा टिकी रहीं।

दीवान अपनी नई जगह लग जाने के बाद दोनों एक दूसरे के बिल्कुल पास खड़े हांफ रहे थे। गौरी ने पल्लू से अपना चेहरा पोंछा और इस हरकत में उसकी साड़ी कमर से थोड़ी नीचे सरक गई, जिससे उसकी गोरी कमर झलक उठी। राहुल की नजरें वहीं जम गईं और गौरी उसे देखकर मुस्कुरा दी, जैसे सब समझ गई हो।

राहुल जल्दी से अपने कमरे में लौट आया और लैपटॉप के सामने बैठ गया, लेकिन स्क्रीन के अक्षर उसे धुंधले नजर आ रहे थे। उसके दिमाग में बार बार गौरी के कूल्हे का वो दबाव और उसकी गीली कमर की झलक घूम रही थी। लेकिन उसका लंड जींस के अंदर तनकर खड़ा हो चुका था और दर्द करने लगा था।

तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई और गौरी चाय का कप लेकर अंदर आई। "साहब, इतनी मेहनत की है, चाय पी लीजिए," उसने कप टेबल पर रखने के बजाय सीधा उसके हाथ में थमाया और उसकी उंगलियां जानबूझकर उसकी उंगलियों से रगड़ खा गईं। राहुल ने जल्दी से हाथ पीछे खींचा, लेकिन गौरी मुस्कुराते हुए उसके बिल्कुल पास बैठ गई।

"साहब अकेले बैठकर क्या सोच रहे थे, चेहरा तो लाल हो रहा है," गौरी ने शरारती लहजे में कहा और अपनी जांघ उसकी जांघ से सटा दी। "साहब के हाथ कांप रहे हैं, ज्यादा थक गए क्या," वो बोली और टेबल के नीचे से उसका हाथ उसकी जांघ पर आ टिका।

गौरी ने उसकी आंखों में सीधा देखा और धीरे से बोली, "साहब, सफाई तो हो जाएगी, लेकिन आपकी ये बेचैनी कौन साफ करेगा।" उसके हाथ ने उसकी जांघ पर हल्का दबाव डाला और वो और करीब सरक आई। "गौरी, ये ठीक नहीं है," राहुल ने धीमी आवाज़ में कहा, हालांकि उसकी आवाज़ में दम नहीं था। गौरी उसके चेहरे के बिल्कुल करीब आकर फुसफुसाई, "साहब, ठीक गलत का हिसाब बाद में कर लीजिएगा।"

इससे पहले कि राहुल कुछ और कह पाता, गौरी ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और एक गहरा भीगा हुआ चुंबन जड़ दिया। राहुल के हाथ अपने आप उसकी कमर पर चले गए और उसने उसे अपनी ओर खींच लिया। उस पल राहुल का सारा विरोध पिघलकर बह गया।

चुंबन के बीच में ही राहुल के हाथ उसकी ब्लाउज के अंदर सरक गए और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगे। गौरी के मुंह से चुंबन के बीच ही एक सिसकारी निकली और उसने उसे और जोर से भींच लिया।

गौरी ने चुंबन तोड़ा और उसके गालों से होती हुई उसकी गर्दन पर उतर आई। उसने उसकी गर्दन पर हल्के से दांत गड़ा दिए और राहुल के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई। "साहब की गर्दन तो बहुत सेंसिटिव है," वो हंसते हुए बोली और फिर से वहीं चूमने लगी।

तभी गौरी का हाथ नीचे सरका और जींस के ऊपर से ही उसके तने हुए लंड को मुट्ठी में भर लिया। "अरे बाप रे, साहब तो पहले से ही तैयार बैठे हैं," उसने शरारत से कहा और ऊपर नीचे हल्के से दबाव डालने लगी। राहुल ने आंखें बंद कर लीं और कुर्सी पर सिर टिका दिया।

गौरी कुर्सी से उतरकर उसके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गई और बड़ी फुर्ती से उसकी जींस का बटन खोल दिया। उसने जिपर नीचे खींचा और उसका मोटा तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया। "इतना बड़ा," वो हैरानी और खुशी मिले लहजे में बोली।

राहुल ने अपनी टीशर्ट खुद ही उतारकर एक तरफ फेंक दी और गौरी की आंखें उसके सीने पर टिक गईं। गौरी ने लंड के सुपारे पर अपनी जीभ फेरी और राहुल के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। उसने धीरे धीरे पूरे लंड को अपने मुंह में लेना शुरू किया और ऊपर नीचे करने लगी, उसकी गर्म थूक लंड को चिकना कर रही थी।

गौरी ने रफ्तार बढ़ा दी और लंड को गले तक लेने की कोशिश करने लगी, उसके गले से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं। उसकी आंखों में पानी आ गया था, लेकिन वो रुकी नहीं। "बस गौरी, अभी नहीं," राहुल ने हांफते हुए कहा और उसके कंधे पकड़कर उसे ऊपर उठाया। उसने उसके कान में फुसफुसाया, "स्पेयर रूम में चलो, वहां कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा," और गौरी की आंखों में शरारत चमक उठी, "साहब, दीवान हमने ही हिलाया है, उसी पर ट्रायल हो जाए।"

दोनों दबे पांव स्पेयर रूम पहुंचे और गौरी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। राहुल ने उसे दीवान के पास खड़ा किया और उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोलने शुरू किए। ब्लाउज खुलते ही उसके गोरे बड़े बूब्स सामने आ गए, जिनके निप्पल पसीने से चमक रहे थे।

राहुल ने दोनों हाथों से उसके बूब्स को भर लिया और हल्के से दबाने लगा। "आह साहब," गौरी के मुंह से सिसकारी निकली और उसने अपनी छाती और आगे कर दी। राहुल ने एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरे को उंगलियों से मसलने लगा। गौरी की उंगलियां उसके बालों में उलझ गईं और वो हंसते हुए बोली, "साहब, काटिए मत, चूसिए," हालांकि उसकी आवाज़ में वासना साफ झलक रही थी।

इसके बाद राहुल ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया और साड़ी की तहें एक एक करके खोलने लगा। राहुल ने पेटीकोट का नाड़ा खींचा और वो भी जमीन पर सरक गया, अब गौरी पूरी नंगी उसके सामने खड़ी थी।

राहुल ने उसे दीवान पर लिटा दिया और खुद उसके पैरों के बीच बैठ गया। उसने उसकी जांघों को चूमते हुए ऊपर बढ़ना शुरू किया और फिर उसकी गीली चूत पर अपनी जीभ रख दी। "आआह साहब," गौरी चीख पड़ी और उसकी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी। राहुल ने उसकी चूत के दाने को जीभ से रगड़ा और दो उंगलियां अंदर धंसा दीं।

गौरी का शरीर कांपने लगा और उसकी उंगलियां राहुल के बालों को खींचने लगीं। "साहब, बस, अब डाल दीजिए न, और बर्दाश्त नहीं होता," वो बेसब्री से बोली और उसकी चूत से पानी की धार बह निकली। राहुल ने अपने तने हुए लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा।

राहुल ने एक जोर का धक्का मारा और उसका मोटा लंड उसकी टाइट चूत में आधा धंस गया। "आआह, धीरे साहब, बहुत मोटा है," गौरी की चीख निकल गई और उसने उसकी बांहें कसकर पकड़ लीं। राहुल ने रुककर उसे संभलने का मौका दिया, उसकी चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

कुछ पलों बाद गौरी ने अपनी कमर हिलाकर इशारा किया और राहुल ने दूसरा धक्का मारकर पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। राहुल ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किए और गौरी की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं।

"हां साहब, ऐसे ही, और जोर से," गौरी बड़बड़ा रही थी और उसके नाखून राहुल की पीठ में धंस रहे थे। राहुल ने उसकी टांगें अपने कंधों पर उठा लीं और गहरे धक्के मारने लगा।

तभी गौरी ने उसे धक्का देकर नीचे लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ बैठी। उसने लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और अपनी कमर गोल गोल घुमाते हुए ऊपर नीचे होने लगी। "अब मेरी बारी साहब," वो बोली और राहुल के हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिए।

गौरी की रफ्तार बढ़ती जा रही थी और उसके बूब्स हर उछाल पर हिल रहे थे। "साहब, मैं आने वाली हूं," वो चीखते हुए बोली और उसकी चूत ने लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि राहुल की आंखें फैल गईं। तभी उसका शरीर अकड़ गया और वो जोर से झड़ गई।

गौरी के झड़ने के बाद भी राहुल का लंड तना हुआ था और वो अभी शांत नहीं हुआ था। उसने लंड बाहर निकाला और गौरी को पलटकर घुटनों के बल कर दिया। "साहब, पीछे से," गौरी ने समझते हुए कहा और अपनी कमर नीचे झुकाकर कूल्हे ऊपर उठा दिए। राहुल ने उसके कूल्हों को पकड़ा और एक ही धक्के में लंड फिर से उसकी गीली चूत में पेल दिया।

पीछे से धक्के मारते हुए राहुल ने उसके लटकते बूब्स को पकड़ लिया और उन्हें मसलते हुए चोदने लगा। "आह साहब, बहुत अच्छा लग रहा है, और जोर से," गौरी चिल्ला रही थी। राहुल के धक्के अब बेकाबू हो रहे थे और दीवान दीवार से टकराकर आवाज़ कर रहा था।

"गौरी, मैं भी आने वाला हूं," राहुल ने हांफते हुए कहा और आखिरी कुछ गहरे धक्के मारे। गौरी ने अपनी चूत को और कस लिया और बोली, "अंदर ही छोड़ दीजिए साहब, आज तो पूरा लीजिए।" राहुल ने एक जोर का धक्का मारा और उसका लंड फड़कता हुआ उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया।

दोनों हांफते हुए दीवान पर लुढ़क गए और कुछ देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे। गौरी ने उसके सीने पर सिर रखा और उसके पसीने से भीगे बालों को सहलाने लगी। "साहब, दिवाली की सफाई तो आज सच में पूरी हो गई," वो हंसते हुए बोली।

तभी गौरी उठी और जल्दी जल्दी अपनी साड़ी लपेटने लगी। "साहब, शाम को फिर आना है बर्तन धोने, तब तक ये दीवान भी अपनी जगह लग जाएगा," उसने पल्लू ठीक करते हुए कहा और दरवाजे की कुंडी खोल दी। जाते जाते वो रुकी, पलटी और आंख मारते हुए बोली, "और हां साहब, कल दोपहर को फिर कोई भारी सामान हिलाना हो तो बताइएगा, मैं हाजिर रहूंगी।"

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