होटल रूम में अनजान लड़के को बिस्तर पर लिटाकर रिया ने सिर्फ अपनी चूत उसके मुँह पर दबाई घंटों चूसवाया फिर लंड हाथ में लेकर पेट पर वीर्य निकलवाया और चली गई
रिया ने होटल रूम का दरवाज़ा बंद किया और पीछे से लॉक कर दिया। कमरा छोटा था। एक डबल बेड, भारी पर्दे वाली खिड़की और एक बेडसाइड लैंप जो पीली रोशनी फैला रहा था। बाहर शहर की हल्की आवाज़ें आ रही थीं, अंदर सब कुछ शांत था। दीवारों पर कोई तस्वीर नहीं थी। सिर्फ साफ सफेद चादर और एक छोटी सी टेबल।
लड़का उसके पीछे खड़ा था। नाम उसने बताया था आकाश। उम्र पच्चीस के करीब। ऑनलाइन मिले थे। चैट में रिया ने साफ लिख दिया था, तुम कुछ नहीं बोलोगे। सिर्फ वही करोगे जो मैं कहूँगी। कोई सवाल नहीं। कोई छूना नहीं जब तक मैं न कहूँ। आकाश ने सिर्फ ठीक है लिखा था। रिया ने उससे होटल का नाम और रूम नंबर भेजा था। कोई और बात नहीं की थी।
अब वह उसके सामने था। थोड़ा घबराया हुआ। आँखें नीचे। रिया ने उसे देखा। साधारण चेहरा, साफ शरीर, थोड़ी बेचैनी। उसने अपना बैग एक तरफ रखा और धीरे से बोली, कपड़े उतारो। सब।
आकाश ने हिचकिचाते हुए टी-शर्ट उतारी, फिर जींस। आखिर में अंडरवियर। उसकी लंड पहले से तनी हुई थी। रिया ने उसे देखा, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह खुद अपने कपड़े उतारने लगी। जींस, टॉप, फिर ब्रा। आखिर में पैंटी। जब वह नंगी हुई तो कमरे की रोशनी में उसकी चूत हल्की चमक रही थी। वह पहले से गीली थी। उसके स्तन छोटे लेकिन गोल थे। निप्पल सख्त हो चुके थे।
उसने आकाश को बिस्तर की तरफ इशारा किया। लेट जाओ। चित्त। हाथ बगल में रखो।
आकाश लेट गया। रिया उसके पास आई। कुछ पल खड़ी रही। उसकी नज़र आकाश के शरीर पर घूम रही थी। फिर धीरे से उसके ऊपर चढ़ गई। घुटनों के बल। और अपनी चूत सीधे उसके मुँह पर दबा दी।
चूसो, उसने शांत आवाज़ में कहा। धीरे। और मत रोको। जब तक मैं न कहूँ, सर मत हटाओ। साँस लेने के लिए मैं खुद उठाऊँगी।
आकाश की जीभ निकली। रिया ने कमर थोड़ी आगे की। उसकी चूत आकाश के मुँह और नाक दोनों को ढक रही थी। वह साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन रिया ने दबाव कम नहीं किया। उसने दोनों हाथ बिस्तर पर टिकाए और धीरे-धीरे कमर घुमानी शुरू की।
पहले सिर्फ हल्की हरकत। फिर थोड़ी तेज़। उसकी गीली चूत आकाश के होंठों और जीभ पर रगड़ खा रही थी। कभी वह पूरी तरह बैठ जाती, तो आकाश की साँस रुक जाती। कभी थोड़ा ऊपर उठती, तो उसे हवा मिलती। लेकिन रिया नियंत्रित थी। वह जानती थी कब दबाना है और कब छोड़ना है। आकाश की जीभ अंदर तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी चूत और गीली हो रही है।
बीस मिनट बीत गए। आकाश की गर्दन और छाती पूरी तरह गीली हो चुकी थी। रिया का पानी उसकी ठुड्डी से होता हुआ गले तक बह रहा था। रिया की साँसें अब थोड़ी तेज़ हो गई थीं, लेकिन आवाज़ में अभी भी वही ठंडक थी। उसने आकाश के बालों में उँगलियाँ डाल दीं और थोड़ा और जोर से दबाया।
और जोर से, उसने कहा। पूरा मुँह लगाओ। जीभ अंदर तक। मेरे स्वाद को याद रखो।
आकाश ने वैसा ही किया। उसकी जीभ रिया की चूत के अंदर तक जा रही थी। रिया ने आँखें बंद कर लीं। शरीर में एक गहरी गर्मी फैल रही थी। वह और नीचे बैठ गई। आकाश की नाक उसकी चूत में दब गई। वह हाँफ रहा था, लेकिन रिया नहीं हटी। वह जानबूझकर उसे थोड़ा और देर तक वैसे ही रखे रही।
लगभग पैंतालीस मिनट बाद रिया की टाँगें काँपने लगीं। उसने आकाश के बाल कसकर पकड़ लिए और अपनी चूत उसके मुँह पर और जोर से दबा दी। पानी की एक तेज़ धारा निकली। आकाश की आँखें बंद थीं। वह सब कुछ निगल रहा था। रिया कुछ पल वैसी ही बैठी रही। शरीर में लहरें दौड़ रही थीं। उसकी जाँघें काँप रही थीं। फिर धीरे से उठी।
आकाश हाँफ रहा था। उसका चेहरा चमक रहा था। लंड अभी भी पूरी तरह तनी हुई थी, लेकिन रिया ने अभी तक उसे एक बार भी नहीं छुआ था। रिया ने बिस्तर के किनारे बैठकर अपनी साँसें संभालीं। फिर आकाश की तरफ देखा।
रिया उसके बगल में बैठ गई। उसने आकाश की लंड को देखा। फिर धीरे से हाथ बढ़ाया और उसे पकड़ लिया। पहली बार। लंड गरम और सख्त थी। रिया ने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। आकाश की कमर तुरंत उठ गई।
हिलो मत, रिया ने कहा। बस लेटे रहो। हाथ नीचे रखो। आँखें बंद मत करना। मुझे देखो।
आकाश ने हाथ बिस्तर पर दबा लिए। रिया ने रफ्तार बढ़ाई। कभी तेज़, कभी धीमी। कभी सिर्फ टॉप को सहलाती, कभी पूरा हाथ घुमाती। कभी अंडकोष को हल्के से दबाती। आकाश की साँसें तेज़ हो गईं। माथा पसीने से गीला था। वह बोलने की कोशिश करता, लेकिन रिया की नज़र से डरकर चुप हो जाता। रिया की उँगलियाँ उसकी लंड पर फिसल रही थीं। वह जानती थी कि वह कब चरम के करीब है।
जब वह करीब आया तो रिया ने लंड को अपने पेट पर रख लिया। नाभि के ठीक ऊपर।
यहीं निकालो, उसने साफ कहा। मेरे पेट पर। एक बूँद भी इधर-उधर नहीं। पूरा।
आकाश की कमर अकड़ गई। उसने जोर की साँस के साथ सब कुछ रिया के पेट पर छोड़ दिया। गाढ़ा सफेद वीर्य नाभि के आसपास फैल गया। कुछ बूँदें नीचे की तरफ बहने लगीं। रिया ने देखा। फिर अपनी उँगली से उसे फैलाया। थोड़ा सा अपनी चूत पर भी लगा लिया। आकाश की आँखें अभी भी खुली थीं। वह हाँफ रहा था।
उसने आकाश की तरफ देखा। साफ करो।
आकाश की आँखें चौड़ी हो गईं। उसने हिचकिचाते हुए शरीर उठाया और जीभ निकाली। रिया के पेट पर झुका और अपने ही वीर्य को चाटने लगा। रिया देखती रही। कोई मुस्कान नहीं। कोई प्यार नहीं। सिर्फ नज़र। जब पेट साफ हो गया तो उसने आकाश के बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा, अच्छा किया। अब लेटे रहो।
फिर वह उठ खड़ी हुई। शांति से कपड़े पहनने लगी। ब्रा, पैंटी, जींस, टॉप। आकाश अभी भी बिस्तर पर लेटा था। लंड अब ढीली पड़ चुकी थी। उसने कुछ पूछने की कोशिश की, क्या फिर मिलेंगे?
रिया ने दरवाज़े की तरफ जाते हुए सिर्फ इतना कहा, अगर मुझे जरूरत हुई तो बुलाऊँगी। आज बस इतना ही। कोई सवाल मत पूछो।
दरवाज़ा बंद हो गया।
कमरे में सिर्फ आकाश बचा था। उसके मुँह में अभी भी रिया की चूत का स्वाद था। पेट पर उसके अपने वीर्य की हल्की चमक बाकी थी। कमरा शांत था। सिर्फ उसकी अपनी साँसें गूँज रही थीं। वह बिस्तर पर लेटा रहा। मन में कई सवाल घूम रहे थे। लेकिन कोई जवाब नहीं था।
रिया लिफ्ट में खड़ी थी। आईने में अपना चेहरा देखा। कोई भाव नहीं। बस शरीर हल्का लग रहा था। पहली बार बहुत दिनों बाद वह सही मायने में संतुष्ट थी। उसने किसी को अंदर नहीं लिया। किसी को अपना नहीं बनाया। सिर्फ लिया। जितना चाहिए था। और चली गई।
बाहर रात थी। शहर रोशन था। रिया ने कैब बुक की और घर की तरफ चल दी। रास्ते में उसने फोन निकाला और आकाश का नंबर डिलीट कर दिया। कोई निशान नहीं छोड़ा। उसने खिड़की से बाहर देखा। शहर की लाइट्स चमक रही थीं। मन में कोई पछतावा नहीं था।
उस रात उसने अच्छी नींद ली। बिना किसी खालीपन के। अगली सुबह जब वह उठी तो शरीर में एक अजीब सी हल्की सी थकान थी, लेकिन मन बिल्कुल साफ था। उसने कोई वादा नहीं किया था। कोई रिश्ता नहीं बनाया था। सिर्फ एक रात का कंट्रोल लिया था। और वह काफी था।
आकाश उस कमरे में और देर तक लेटा रहा। उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं था। रिया ने कोई निशान नहीं छोड़ा था। न नाम, न नंबर, न वादा। सिर्फ एक अनुभव। और वह अनुभव उसके मुँह और शरीर पर अभी भी चिपका हुआ था।
रिया घर पहुँची। नहाया। गरम पानी के नीचे खड़ी होकर उसने महसूस किया कि उसकी चूत अभी भी थोड़ी संवेदनशील है। लेकिन अंदर कोई खालीपन नहीं था। उसने खुद को आईने में देखा और मुस्कुराई। आज उसने जो चाहा वही लिया। बिना दिए। बिना बाँधे।
यही उसकी जीत थी। उसने फोन साइड में रखा और बिस्तर पर लेट गई। आँखें बंद कीं। कोई सपना नहीं। सिर्फ शांति।
अगले कुछ दिनों तक आकाश ने रिया का इंतज़ार किया। लेकिन कोई मैसेज नहीं आया। कोई कॉल नहीं आई। रिया ने सच में कोई निशान नहीं छोड़ा था। वह सिर्फ एक रात के लिए आई थी। जितना चाहिए था लिया। और चली गई। आकाश के लिए वह रात एक याद बनकर रह गई। रिया के लिए वह सिर्फ एक पूरा हुआ फैसला था।
रिया ने अपनी डायरी में उस रात के बारे में कुछ नहीं लिखा। कोई शब्द नहीं। सिर्फ शरीर की याद बाकी थी। और वह काफी थी। उसने फिर कभी आकाश को नहीं बुलाया। और आकाश ने भी कभी उसका नाम नहीं पूछा। दोनों के बीच सिर्फ एक रात थी। एक कंट्रोल। एक चुप्पी। और एक अधूरी सी संतुष्टि जो सिर्फ रिया के पास पूरी थी। रिया ने कभी उस रात को दोहराने की कोशिश नहीं की। वह बस एक याद बनकर रह गई।
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