खाली बुकशॉप में इशिता ने अजनबी लड़के को घुटनों पर बिठाकर घंटों तक अपनी गीली चूत उसके मुंह पर दबाए रखी फिर पेट पर वीर्य निकलवाकर बाहर भेज दिया
इशिता ने बुकशॉप का मुख्य दरवाज़ा अंदर से बंद करके ताला लगा दिया। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। सड़क पर पानी जमा हो चुका था। दुकान के अंदर सिर्फ एक पीली ट्यूबलाइट जल रही थी। किताबों की महक और पुरानी लकड़ी की गंध पूरे कमरे में फैली हुई थी। दीवारों पर ऊँची-ऊँची अलमारियाँ थीं, जिनमें सैकड़ों किताबें सजी हुई थीं। काउंटर के पीछे एक छोटी सी कुर्सी और एक पुरानी घड़ी टंगी थी जो धीरे-धीरे टिक-टिक कर रही थी।
लड़का काउंटर के पास खड़ा था। नाम पता नहीं। उम्र शायद तेईस-चौबीस। उसने कहा था कि उसे एक पुरानी किताब चाहिए। इशिता ने कहा था कि स्टॉक में है, लेकिन ऊपर की अलमारी में रखी है। जब वह ऊपर गई थी, तभी बिजली चली गई थी। फिर बैकअप लाइट जल गई। और अब दोनों अकेले थे। बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ हो रही थी। अंदर सिर्फ किताबों की खामोशी थी।
इशिता ने लड़के को देखा। साफ-सुथरा चेहरा, थोड़ी घबराहट, गीले बाल। उसकी शर्ट कंधों से भीग चुकी थी। उसने अपनी फ्रॉक का हेम ठीक किया। आज साड़ी नहीं, काला फ्रॉक पहना था। घुटनों तक। अंदर सिर्फ एक पतली ब्रा और पैंटी। फ्रॉक के नीचे उसकी जांघें चिकनी और गर्म थीं।
“दरवाज़ा बंद है,” उसने शांत आवाज़ में कहा। “बारिश कम होने तक रुको। बैठ जाओ।”
लड़का एक कुर्सी पर बैठ गया। इशिता उसके पास आई। कुछ पल चुप रही। उसकी नज़र लड़के के चेहरे पर टिकी थी। फिर बोली, “तुमने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे मैं कोई किताब हूँ। जो तुम पढ़ना चाहते हो।”
लड़का घबरा गया। “नहीं… मैंने...”
“चुप।” इशिता ने एक शब्द में रोक दिया। “आज तुम कुछ नहीं बोलोगे। जो मैं कहूँगी, वही करोगे। समझे?”
लड़के ने सिर हिलाया। आँखें नीचे थीं। उसका गला सूख गया था।
इशिता ने फ्रॉक के नीचे हाथ डाला और अपनी पैंटी खींचकर एक तरफ रख दी। फिर काउंटर के किनारे बैठ गई। दोनों पैर फैलाए। फ्रॉक ऊपर उठ गया। उसकी चूत पहले से गीली थी। बारिश की ठंडक और अंदर की गर्मी ने उसे बेचैन कर रखा था। उसने लड़के की तरफ देखा और धीरे से बोला, “आओ। घुटनों पर बैठो।”
लड़का काँपते हुए आगे आया। इशिता ने उसके बाल पकड़कर अपने दोनों जांघों के बीच खींच लिया। उसकी चूत लड़के के चेहरे से सिर्फ कुछ इंच दूर थी। गर्मी और गंध दोनों महसूस हो रहे थे।
“चाटो,” उसने कहा। “धीरे। और रुको मत। जब तक मैं न कहूँ, सर मत हिलाना। साँस लेने के लिए मैं खुद उठूँगी।”
लड़के की जीभ निकली। इशिता ने कमर थोड़ी आगे की। उसकी गीली चूत सीधे लड़के के मुंह पर बैठ गई। उसने दोनों हाथ काउंटर पर रखे और आँखें बंद कर लीं। पहली छुअन में ही उसके शरीर में एक लहर दौड़ गई।
शुरुआत में सिर्फ हल्की हरकत। फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। कभी पूरी तरह बैठ जाती तो लड़के की साँस रुक जाती। कभी थोड़ी उठती तो उसे हवा मिलती। लेकिन कंट्रोल हमेशा उसके हाथ में था। वह जानती थी कब दबाना है और कब छोड़ना है। लड़के की जीभ उसकी चूत के अंदर तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी। इशिता को महसूस हुआ कि वह और गीली हो रही है।
बीस मिनट बीत गए। लड़के का चेहरा पूरा गीला हो चुका था। इशिता का पानी उसकी ठुड्डी से गले तक बह रहा था। इशिता के साँस अब थोड़े तेज़ थे, लेकिन आवाज़ में वही ठंडक थी। उसने लड़के के बालों में उंगलियाँ डालीं और थोड़ा और ज़ोर से दबाया।
“और ज़ोर से,” उसने कहा। “पूरा मुंह लगाओ। जीभ अंदर तक। मेरा स्वाद याद रखना।”
लड़के ने वैसा ही किया। उसकी जीभ इशिता की चूत में गहराई तक जा रही थी। इशिता ने आँखें और ज़ोर से बंद कर लीं। शरीर में एक गहरी गर्मी फैल रही थी। वह और नीचे बैठ गई। लड़के की नाक उसकी चूत में दब गई। वह हाँफ रहा था, लेकिन इशिता नहीं हिली। वह जानबूझकर उसे और कुछ देर वैसे ही रखे हुए थी।
लगभग पैंतालीस मिनट बाद इशिता के पैर काँपने लगे। उसने लड़के के बाल मज़बूती से पकड़े और अपनी चूत उसके मुंह पर और ज़ोर से दबा दी। पानी की एक तेज़ धार निकल आई। लड़के की आँखें बंद थीं। वह सब निगल रहा था। इशिता कुछ पल वैसे ही बैठी रही। शरीर में लहरें दौड़ रही थीं। उसकी जांघें काँप रही थीं। फिर धीरे-धीरे उठी।
लड़का हाँफ रहा था। उसका चेहरा चमक रहा था। पैंट में उसकी लंड पूरी सख्त हो चुकी थी, लेकिन इशिता ने अभी तक उसे एक बार भी नहीं छुआ था। इशिता काउंटर के किनारे बैठी रही। साँस संभालते हुए। फिर लड़के की तरफ देखा।
इशिता काउंटर पर खड़ी हो गई। फ्रॉक ऊपर उठाया। फिर लड़के को इशारा किया। “काउंटर पर लेट जाओ। चित।”
लड़का लेट गया। इशिता उसके बगल में खड़ी रही। फिर धीरे से उसका ज़िपर खोला। लंड बाहर निकाली। गरम और सख्त। उसने उसे अपने हाथ में लिया। पहली बार। लंड का वजन और गर्मी उसके हाथ में महसूस हुई।
“हिलो मत,” उसने कहा। “सिर्फ लेटे रहो। आँखें बंद मत करना। मुझे देखो।”
लड़के ने हाथ काउंटर पर दबा दिए। इशिता ने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। कभी तेज़, कभी धीरे। कभी सिर्फ सिर, कभी पूरा हाथ। कभी अंडकोष हल्के दबाती। लड़के के साँस तेज़ हो गए। माथे पर पसीना था। वह बोलना चाहता था, लेकिन इशिता की नज़र से डर कर चुप रह जाता था। इशिता की उंगलियाँ उसकी लंड पर फिसल रही थीं। वह जानती थी वह कब आखिरी हद के करीब है।
जब वह करीब आया तो इशिता ने लंड अपने पेट पर रख दी। नाभि के ठीक ऊपर।
“यहीं निकालो,” उसने साफ़ कहा। “मेरे पेट पर। एक बूँद भी इधर-उधर नहीं। पूरा।”
लड़के की कमर अकड़ गई। उसने ज़ोर से साँस छोड़ते हुए सब इशिता के पेट पर निकाल दिया। गाढ़ा सफ़ेद वीर्य नाभि के आसपास फैल गया। कुछ बूँदें नीचे बहने लगीं। इशिता ने देखा। फिर उंगली से उसे फैला दिया। थोड़ा अपनी चूत पर भी लगा लिया। लड़के की आँखें अभी भी खुली थीं। वह हाँफ रहा था।
उसने लड़के की तरफ देखा। “साफ़ करो।”
लड़के की आँखें बड़ी हो गईं। उसने हिचकिचाते हुए शरीर उठाया और जीभ निकाली। इशिता के पेट पर झुककर अपना ही वीर्य चाटने लगा। इशिता देखती रही। कोई मुस्कान नहीं। कोई प्यार नहीं। सिर्फ नज़र। जब पेट साफ़ हो गया तो उसने लड़के के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “अच्छा किया। अब उठो।”
फिर वह शांत भाव से फ्रॉक ठीक करने लगी। लड़का अभी भी काउंटर पर बैठा था। लंड अब नरम पड़ गई थी। उसने कुछ पूछने की कोशिश की, “फिर मिलेंगे?”
इशिता ने दरवाज़े की तरफ जाते हुए सिर्फ इतना कहा, “अगर ज़रूरत पड़ी तो बुलाऊँगी। आज सिर्फ इतना ही। कोई सवाल मत पूछना।”
उसने दरवाज़े का ताला खोला। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी। लड़का बाहर निकला। पानी में उसके जूते भीग गए। इशिता ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
दुकान में फिर से सिर्फ किताबों की महक रह गई। इशिता ने बाथरूम में जाकर ठंडे पानी से पेट धोया। आईने में अपना चेहरा देखा। कोई भाव नहीं। सिर्फ शरीर हल्का लग रहा था। बहुत दिनों बाद पहली बार वह सच में संतुष्ट थी। उसने किसी को अंदर नहीं लिया था। किसी को अपना नहीं बनाया था। सिर्फ लिया था। जितना चाहिए था। और भेज दिया।
रात भर दुकान में अकेली रही। बारिश थम गई। सुबह जब उसने दुकान खोली तो बाहर धूप थी। लेकिन उसके शरीर पर अभी भी उस रात की हल्की याद बाकी थी। नाभि के आसपास की सनसनाहट। और लड़के के मुंह का स्वाद जो उसने अपनी चूत पर छोड़ा था।
उसने उस लड़के का नंबर कभी नहीं माँगा। और लड़के ने भी कभी वापस नहीं आकर कुछ पूछा। दोनों के बीच सिर्फ एक रात थी। एक कंट्रोल। एक खामोशी। और एक अधूरी सी तसल्ली जो सिर्फ इशिता के पास पूरी थी।
अगले कुछ दिनों में इशिता ने अपनी सामान्य ज़िंदगी जारी रखी। किताबें बेचना, ग्राहकों से बात करना, शाम को अकेली दुकान बंद करना। लेकिन कभी-कभी जब दुकान खाली होती और बारिश होती, तो उस रात की याद वापस आ जाती। लड़के का वजन उसके जांघों के बीच। उसकी ठंडी आवाज़। और पेट साफ़ करने का हुक्म।
लड़के ने बाद में कई बार उस रात के बारे में सोचा। इशिता का वजन उसके चेहरे पर, उसकी ठंडी आवाज़, और पेट साफ़ करने का आदेश। उसे कभी उसका नंबर नहीं मिला। इशिता ने कभी उसकी तलाश नहीं की। उसने जो चाहिए था लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया। दोनों के लिए यही कहानी का अंत था।
इशिता ने अपनी डायरी में उस रात के बारे में कुछ नहीं लिखा। कोई शब्द नहीं। सिर्फ शरीर की याद बाकी थी। और वह काफी थी। उसने फिर कभी उस लड़के को नहीं बुलाया। और लड़के ने भी कभी उसका नाम नहीं पूछा। दोनों के बीच सिर्फ एक रात थी। एक कंट्रोल। एक खामोशी। और एक अधूरी सी तसल्ली जो सिर्फ इशिता के पास पूरी थी।
वह रात दोनों के जीवन में आई और चली गई। एक ने लिया, दूसरे ने दिया। एक भूल गई, दूसरा याद रखता रहा। और यही उनकी कहानी का असली अंत था। इशिता आगे बढ़ गई। लड़का पीछे रह गया। यही सच था।
Readers who enjoyed “खाली बुकशॉप में इशिता ने अजनबी लड़के को घुटनों पर बिठाकर घंटों तक अपनी गीली चूत उसके मुंह पर दबाए रखी फिर पेट पर वीर्य निकलवाकर बाहर भेज दिया” also read
8 curated storiesज़बरदस्त रात जब उसने बाल खींचकर चोदा और साफ कहा कि आज नर्मियत नहीं चलेगी सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स
उसने मेरा बाल पकड़कर खींचा और बोली – आज नर्मियत नहीं चलेगी। फिर जो हुआ वो सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स था।
पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात की घंटी
पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात को बाथरूम की टंकी फटने पर सुनीता भाभी ने पड़ोसी दीपक को मदद के लिए बुलाया, लेकिन पानी रुकने के बाद जो शुरू हुआ, वो दोनों की जिंदगी की सबसे लंबी रात बन गया।
नौकरानी की चुदाई: दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर
राहुल और उसकी कामवाली गौरी की ये कहानी दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर में दीवान हिलाने की मदद मांगने से शुरू हुई, और बेकाबू होती चली गई।
जब पति ने खुद मुझे किसी और के हवाले कर दिया और दोनों की सीमाएँ मिटा दीं हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात
एक पति की इच्छा, एक पत्नी का समर्पण और एक तीसरा व्यक्ति जिसने दोनों की सीमाएँ मिटा दीं। हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात।
पत्नी को दूसरे के साथ देखना मेरी छुपी हुई हवस जब मैंने खुद कहा और दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था
मैंने खुद अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के साथ सोने के लिए कहा। दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा। जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था।
लेट नाइट ओवरटाइम जब मैनेजर ने केबिन में बुलाया दरवाज़ा बंद किया और जो ओवरटाइम हुआ वो काम से जुड़ा नहीं था
सभी कर्मचारी जा चुके थे। मैनेजर ने कैबिन में बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर जो ओवरटाइम हुआ वो काम से जुड़ा नहीं था।
हॉस्टल की रात रूमरेट की बहन के साथ जब उसने दरवाज़ा बंद करते ही कहा आज रात यहीं रुकोंगी फिर दीवारें भी नहीं सुन सकीं
रूममेट घर गया था। उसकी बहन मेरे कमरे में आई और दरवाज़ा बंद करते ही बोली – आज रात यहीं रुकोंगी। फिर जो हुआ वो हॉस्टल की दीवारें भी सुन नहीं सकतीं।
कानपुर के पुराने टेक्सटाइल गोदाम में रात की शिफ्ट खत्म होने के बाद शादीशुदा क्लर्क मीना ने अपने पति के सामने गोदाम के युवा लोडर की मोटी काली लंड से अपनी गीली चूत फड़वा दी और पूरा गाढ़ा वीर्य अंदर ले लिया
कानपुर के पुराने टेक्सटाइल गोदाम में रात की शिफ्ट खत्म होने के बाद शादीशुदा क्लर्क मीना ने अपने पति के सामने युवा लोडर की मोटी काली लंड से अपनी गीली चूत फड़वा दी और पूरा गाढ़ा वीर्य अंदर ले लिया।