hindi boss sex kahani: देर रात केबिन में हारी हुई शर्त

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"दरवाज़ा अंदर से बंद कर दो, रिया," अर्जुन खन्ना ने अपनी रिवॉल्विंग चेयर से उठते हुए कहा, और उसी पल मुझे एहसास हुआ कि आज की रात ठीक वैसी ही hindi boss sex kahani बनने जा रही है जिसके बारे में ऑफिस की कैंटीन में सिर्फ फुसफुसाकर बातें होती हैं।

बाहर अंधेरी की सड़क पर ट्रैफिक की आवाज़ें धीमी पड़ चुकी थीं। ऑफिस की लाइटें आधी बुझ चुकी थीं और सिर्फ उसके केबिन की ट्यूबलाइट जल रही थी, जिसमें उसकी शर्ट के ऊपर के दो खुले बटन साफ दिख रहे थे।

मैंने दरवाज़े का लैच धीरे से दबाया। क्लिक की आवाज़ केबिन में गूंजी और अर्जुन के चेहरे पर वह मुस्कान आ गई जो मैंने आज तक सिर्फ क्लाइंट मीटिंग्स में देखी थी, जीतने वाली मुस्कान।

"शर्त याद है ना, सर?" मैंने कहा और अपनी फाइल टेबल पर रख दी। "मैंने कहा था, एक विश। कोई सवाल नहीं।"

"याद है," उसने कहा, "लेकिन मुझे नहीं लगा था कि तुम्हारी विश इतनी... केबिन वाली होगी।" वह मेरे करीब आया, इतना करीब कि उसके परफ्यूम की खुशबू मेरी सांसों में उतर गई।

तीन हफ्ते पहले की बात है। मेहता ज्वेल्स का आठ करोड़ का अकाउंट हमारे हाथ से फिसलता दिख रहा था। पूरी टीम ने हार मान ली थी, लेकिन मैंने अर्जुन से कहा था, "एक हफ्ता दीजिए, यह पिच मैं क्लोज करूंगी।"

उसने हंसकर कहा था, "और अगर नहीं हुआ तो?" मैंने जवाब दिया था, "तो Q3 की पूरी रिपोर्ट मैं अकेले बनाऊंगी, एक महीने तक।" और फिर मैंने वह लाइन बोली थी जिसने सब कुछ बदल दिया था, "और अगर हुआ, तो आप मेरी एक विश पूरी करेंगे। बिना सवाल किए।"

आज शाम छह बजकर चालीस मिनट पर मेहता ज्वेल्स ने हां कह दी थी। पूरी टीम ने तालियां बजाईं, किसी ने केक मंगवाया, और रात नौ बजते बजते ऑफिस खाली हो गया। सिर्फ हम दो बचे थे।

मैंने उसे मैसेज किया था, "रात 9:45, आपका केबिन, सिर्फ हम दो। विश नंबर वन।" उसने सिर्फ एक स्माइली भेजी थी। अब वह मेरे सामने खड़ा था, टाई ढीली, आस्तीनें चढ़ी हुईं।

"तो बताओ, रिया मल्होत्रा," उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा, "तुम्हारी विश क्या है? डिनर? बोनस? प्रमोशन?" उसकी आवाज़ में वह खनक थी जो बॉस वाली अथॉरिटी और कुछ और के बीच झूल रही थी।

"डिनर तो सब करते हैं, सर," मैंने कहा और उसकी टाई का नॉट पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा। "मैंने कहा था, कोई सवाल नहीं।" हमारी सांसें टकराईं और केबिन का एसी अचानक बहुत ठंडा लगने लगा।

उसने मेरी कमर पर हाथ रखा, पहले हल्के से, जैसे इजाज़त मांग रहा हो, और फिर मज़बूती से। "तुम्हें पता है ना, यह गलत है?" उसने फुसफुसाकर कहा। "ऑफिस पॉलिसी, HR, सब कुछ।"

"तो HR को बुला लीजिए," मैंने उसकी शर्ट का कॉलर पकड़ते हुए कहा, "या फिर शर्त चुका दीजिए।" और फिर मैंने वह किया जो मैं तीन हफ्तों से सोच रही थी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

पहला किस धीमा था, टेस्ट करने वाला। उसके होंठ गर्म थे, कॉफी की हल्की खुशबू के साथ। फिर उसने मेरी गर्दन के पीछे हाथ रखा और किस गहरा हो गया, भूखा, बेसब्र। मेरी साड़ी का पल्लू कंधे से फिसलकर फर्श को छूने लगा।

"रिया..." उसने मेरे होंठों के बीच ही कहा, लेकिन मैंने उसे बोलने नहीं दिया। मैंने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए, एक एक करके, और उसकी छाती पर अपनी उंगलियां फेरीं। उसकी सांसें तेज हो गईं।

उसका हाथ मेरी पीठ पर फिसला और मेरे ब्लाउज़ के हुक तक पहुंचा। "इतनी जल्दी?" उसने हंसते हुए कहा। "शर्त में टाइम लिमिट नहीं थी, सर," मैंने जवाब दिया और खुद ही अपने ब्लाउज़ का पहला हुक खोल दिया।

ब्लाउज़ फर्श पर गिरा और उसके सामने मेरी काली लेस वाली ब्रा थी। उसकी नज़रें मेरे बूब्स पर टिक गईं और उसने धीरे से कहा, "तुम ऑफिस में यह पहनकर आती हो?" "सिर्फ खास दिनों में," मैंने कहा, "जैसे आज।"

उसने मेरी ब्रा का स्ट्रैप कंधे से सरकाया और मेरे दाहिने बूब को अपने हाथ में भर लिया। उसकी हथेली गर्म थी और जब उसने मेरे निप्पल को उंगलियों से मसलना शुरू किया, तो मेरे मुंह से एक सिसकारी निकल गई जो मैंने रोकने की कोशिश भी नहीं की।

"आवाज़ मत रोको," उसने कहा और मेरी ब्रा को ऊपर सरकाकर मेरे निप्पल को अपने मुंह में ले लिया। उसकी जीभ का गर्म स्पर्श और हल्के दांतों का दबाव मुझे पागल कर रहा था। मैंने उसके बालों में उंगलियां धंसाईं और उसे और करीब खींचा।

मैंने उसकी बेल्ट का बकल खोला। चटक की आवाज़ केबिन में गूंजी। उसकी पैंट नीचे सरकी और उसके बॉक्सर में उसका लंड साफ तना हुआ दिख रहा था, बड़ा और बेसब्र। मैंने उसे बॉक्सर के ऊपर से ही पकड़ लिया।

"इतना बड़ा?" मैंने शरारत से कहा। "शर्त लगाने से पहले सोचना चाहिए था," उसने जवाब दिया और मेरा हाथ अपने लंड पर दबा दिया। मैंने उसे बॉक्सर से बाहर निकाला और अपनी मुट्ठी में भरकर धीरे धीरे हिलाने लगी।

वह कराह उठा। "रिया, प्लीज़..." "प्लीज़ क्या, सर?" मैंने कहा और उसके सामने घुटनों पर बैठ गई। केबिन की ठंडी टाइल्स मेरे घुटनों को छू रही थीं, लेकिन मेरे अंदर सब कुछ जल रहा था।

मैंने उसके लंड के टिप को अपनी जीभ से छुआ। नमकीन स्वाद मेरी जीभ पर फैला और उसने मेरे बाल पकड़ लिए। फिर मैंने उसे धीरे धीरे अपने मुंह में लेना शुरू किया, पहले टिप, फिर आधा, फिर जितना अंदर जा सका।

मैं उसे चूस रही थी, मेरी जीभ उसके लंड के नीचे वाली नस पर फिसल रही थी, और वह मेरे मुंह में और अंदर धकेल रहा था। "बहुत बढ़िया," वह बड़बड़ा रहा था, "तुम तो पिच से भी बेहतर निकलीं।"

मैंने उसे अपने मुंह से बाहर निकाला, एक धागे सी लार हमारे बीच खिंची, और खड़ी हो गई। "अब मेरी बारी, सर," मैंने कहा और अपनी साड़ी की प्लेटें खोल दीं। साड़ी फर्श पर ढेर हो गई।

अब मैं सिर्फ पेटीकोट और पैंटी में उसके सामने खड़ी थी। उसने मुझे उठाकर अपनी बड़ी टेबल पर बिठा दिया। लैपटॉप एक तरफ खिसक गया, कुछ फाइलें फर्श पर गिरीं, लेकिन किसी को परवाह नहीं थी।

उसने मेरी टांगें फैलाईं और मेरी पैंटी को एक तरफ सरकाया। मेरी चूत उसके सामने थी, गीली और फूली हुई। "इतनी गीली?" उसने कहा। "तीन हफ्ते से इस पल का इंतज़ार कर रही हूं," मैंने जवाब दिया।

उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डालीं और मैं चीख पड़ी। उसकी उंगलियां अंदर बाहर हो रही थीं, मेरे जी स्पॉट को छू रही थीं, और मेरे जिस्म में करंट दौड़ रहा था। "अर्जुन..." मैं पहली बार उसका नाम लेकर बोली।

"सर नहीं?" उसने हंसते हुए कहा और अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी। उसकी जीभ मेरे दाने पर घूम रही थी, चाट रही थी, चूस रही थी। मैंने टेबल का किनारा पकड़ लिया और मेरी टांगें उसके कंधों पर चढ़ गईं।

"मैं झड़ने वाली हूं," मैं हांफते हुए बोली। "अभी नहीं," उसने कहा और रुक गया। मेरी चूत तड़प रही थी, खालीपन काट रहा था। "शर्त अभी बाकी है," उसने शरारत से कहा।

उसने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाव डाला। टिप अंदर गया और मैं सिसक उठी। "पूरा डालो," मैंने कहा। "ऑर्डर दे रही हो?" उसने कहा, "बॉस मैं हूं।" और फिर एक झटके में पूरा अंदर।

मैं चिल्ला उठी। उसका लंड मेरी चूत में पूरा समाया हुआ था, गर्म और सख्त। उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, हर धक्के के साथ मेरी टेबल हिल रही थी। "कैसा लग रहा है?" उसने पूछा।

"बहुत... बहुत अच्छा," मैं हांफ रही थी। उसने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और धक्के तेज कर दिए। हर धक्का मेरे अंदर गहराई तक जा रहा था। केबिन में सिर्फ हमारी सांसों और जिस्मों के टकराने की आवाज़ें थीं।

"बोलो, किसने शर्त जीती?" उसने मेरे बूब्स को मसलते हुए पूछा। "मैंने," मैं चीखी, "मैंने जीती, अर्जुन!" उसने मुझे पलट दिया। अब मैं टेबल पर घुटनों के बल थी, वह मेरे पीछे था।

उसने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाला और मेरे बाल पकड़ लिए। कांच की दीवार के पार मुंबई की रात जगमगा रही थी और यहां अंदर हम दोनों पसीने में भीगे हुए थे। उसके धक्के अब जानवरों जैसे हो गए थे।

"तुम्हारी चूत बहुत टाइट है," वह बड़बड़ाया, "इतनी टाइट कि मैं पागल हो जाऊंगा।" मैंने अपनी गांड पीछे धकेली, उसे और अंदर लेने के लिए। "और तेज," मैं बोली, "और तेज चोदो मुझे।"

तभी मेरा जिस्म कांपने लगा। मेरे अंदर जैसे कोई बांध टूटा। मैं झड़ रही थी, चीख रही थी, मेरी चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। "मैं भी..." उसने कहा और कुछ ही धक्कों में वह भी झड़ गया, गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया।

हम दोनों हांफ रहे थे। वह मेरे ऊपर झुका रहा, उसका लंड अभी भी मेरे अंदर था, धीरे धीरे नरम पड़ रहा था। केबिन में सन्नाटा था, सिर्फ एसी की घरघराहट और हमारी धड़कनें।

उसने मेरे ब्लाउज़ का गिरा हुआ बटन उठाया और शरारत से कहा, "कल सुबह की मीटिंग में सबको लगेगा कि यह सिर्फ एक पिच थी।" मैंने अपनी साड़ी लपेटते हुए कहा, "पिच थी भी, सर। बस क्लोजिंग थोड़ी लंबी हो गई।"

तभी मेरा फोन बजा। मेहता ज्वेल्स के MD का मैसेज था, "रिया जी, शानदार प्रेजेंटेशन। अकाउंट आपका।" अर्जुन ने स्क्रीन देखी और मेरे कान में फुसफुसाया, "अकाउंट तुम्हारा, और अब मैं भी। कल सुबह नौ बजे, मीटिंग रूम नंबर दो। शर्त का दूसरा हिस्सा बाकी है।"

मैं हंसी और दरवाज़ा खोलने से पहले मुड़कर बोली, "सर, कल मैं साड़ी नहीं पहनूंगी।" वह अपनी कुर्सी पर बैठा, टाई ठीक करते हुए बोला, "तो मैं मीटिंग कैंसिल कर दूंगा। सिर्फ हम दो।"

🔒 Bonus Scene locked

शर्त तो चुक गई, लेकिन केबिन का दरवाज़ा बंद होने से पहले अर्जुन ने रिया के कान में जो कहा, उसने उसकी धड़कनें रोक दीं।

WhatsApp par share karo, turant unlock1 dost ko bhejo, bonus scene yahin khul jayega
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