पहाड़ों की उस बर्फीली रात में जब दो अजनबी एक-दूसरे के शरीर में खो गए
बाहर बर्फ बहुत तेज पड़ रही थी। पहाड़ी सड़कें बंद हो चुकी थीं। छोटी सी कॉटेज में बिजली गई हुई थी। सिर्फ फायरप्लेस की लाल रोशनी कमरे में फैल रही थी।
इशिता कंबल ओढ़े सोफे पर बैठी थी। सामने आर्यन आग के पास खड़ा था। दोनों एक-दूसरे के पूरी तरह अजनबी थे। सुबह की कैब में संयोग से साथ हो गए थे। मंजिल एक ही थी—यह कॉटेज। अब बर्फबारी ने उन्हें यहाँ कैद कर दिया था।
“कम से कम दो दिन सड़क नहीं खुलेगी,” आर्यन ने कहा।
इशिता ने सिर हिलाया। खामोशी लंबी होती जा रही थी। फायरप्लेस की आँच दोनों के चेहरों पर नाच रही थी। इशिता ने अचानक कंबल हटाया और खड़ी हो गई। उसके गाल लाल थे—सर्दी से या कुछ और से।
“ठंड बहुत लग रही है,” उसने धीमे स्वर में कहा।
आर्यन उसकी ओर मुड़ा। दोनों की निगाहें मिलीं। कोई मुस्कान नहीं थी। सिर्फ एक भारी सा सवाल। आर्यन ने एक कदम बढ़ाया। इशिता पीछे नहीं हटी। अगले ही पल आर्यन ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया और चूमा।
चुंबन में जल्दबाजी नहीं थी। इसमें ठंड थी, तन्हाई थी और एकदम कच्ची भूख। इशिता की उंगलियाँ आर्यन के स्वेटर में घुस गईं। आर्यन ने उसका स्वेटर ऊपर से खींचकर उतार दिया। फिर अपना भी। दोनों के शरीर फायरप्लेस की रोशनी में चमक रहे थे।
आर्यन ने इशिता को सोफे पर धकेला। ब्रा खोली। उसके स्तनों को दोनों हाथों से पकड़कर जोर से मसला। निप्पल को मुँह में ले लिया और दाँतों से हल्का काटा। इशिता की कमर तन गई। उसकी साँसें तेज हो गईं।
“और जोर से,” इशिता ने फुसफुसाया।
आर्यन ने उसकी जींस का बटन खोला और नीचे खींच दिया। पैंटी को एक तरफ सरकाया। इशिता पहले से गीली थी। आर्यन ने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं और तेजी से हिलाने लगा। साथ में निप्पल चूसता रहा। इशिता के नाखून सोफे को जकड़ गए।
थोड़ी देर में इशिता का शरीर अकड़ गया। पहला चरम फायरप्लेस की आँच के सामने आया। उसने आर्यन के बाल जोर से पकड़ रखे थे।
आर्यन ऊपर आया। उसने अपनी पैंट उतारी। इशिता की आँखें उसके कड़े अंग पर टिक गईं। आर्यन ने उसकी टाँगें फैलाईं और धीरे-धीरे अंदर घुसना शुरू किया। इशिता की भौंहें सिकुड़ गईं लेकिन उसने रोका नहीं। जब पूरा अंदर गया तो दोनों की साँसें एक हो गईं।
आर्यन कुछ पल रुका, फिर हिलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। इशिता की टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। आर्यन ने झुककर उसके स्तनों को फिर मुँह में लिया। इशिता की आवाजें अब कॉटेज में गूँज रही थीं। बाहर बर्फ की आवाज भी दब गई थी।
“और गहरा… आर्यन…” इशिता ने कहा।
आर्यन ने उसकी कमर पकड़ ली और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगे। सोफा चरमरा रहा था। इशिता की नाखून उसकी पीठ पर लकीरें बना रहे थे। दूसरा चरम इशिता का और भी लंबा था। उसने आर्यन को जोर से जकड़ लिया। आर्यन ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया।
दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। फायरप्लेस की आँच उनके पसीने से भीगे शरीर पर पड़ रही थी।
कुछ देर बाद इशिता ने धीरे से कहा, “ठंड अभी भी लग रही है।”
आर्यन मुस्कुराया। उसने इशिता को उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर पटकते ही उसने उसे घुटनों के बल कर दिया। पीछे से फिर से अंदर आया। इस बार शुरू से ही तेज। इशिता ने तकिया दबा लिया। आर्यन एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए था, दूसरे से उसके नितंबों पर थप्पड़ मार रहा था।
इशिता पीछे की ओर जोर से धकेल रही थी। “और… और जोर से…”
आर्यन ने उसकी कमर और नीचे झुका दी। धक्के इतने गहरे थे कि इशिता की आवाज तकिए में भी दब नहीं पा रही थी। तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। आर्यन ने फिर से उसके अंदर ही छोड़ दिया।
रात अभी बाकी थी।
दो घंटे बाद दोनों फिर से जाग गए। इस बार इशिता ने आर्यन को अपने ऊपर खींच लिया। उसने खुद उसका अंग अपने अंदर लिया और जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। आर्यन के हाथ उसके स्तनों पर थे। इशिता की आँखें बंद थीं, मुँह खुला। वह खुद अपनी गति बढ़ा रही थी।
आर्यन ने उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के लगाने लगा। इशिता की सिसकियाँ तेज हो गईं। चौथा चरम और भी भारी था। इशिता आर्यन की छाती पर गिर गई। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं।
सुबह जब हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आई, दोनों अभी भी नंगे एक-दूसरे से सटे हुए थे। बाहर बर्फ रुक चुकी थी लेकिन सड़क अभी बंद थी।
इशिता ने आँखें खोलीं। आर्यन जाग रहा था। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। कोई शर्म नहीं थी। सिर्फ एक अजीब सी शांति थी।
“आज रात फिर?” आर्यन ने पूछा।
इशिता ने धीरे से सिर हिलाया। “जब तक सड़क न खुले… हर रात।”
आर्यन ने उसके माथे पर चुंबन रखा। पहाड़ों की उस बर्फीली तन्हाई ने दो अजनबियों को एक-दूसरे के शरीर में इस कदर मिला दिया था कि अब बाहर की दुनिया मायने नहीं रखती थी।
दोनों जानते थे—सड़क जब खुलेगी, वे अलग हो जाएँगे। लेकिन जो कुछ इन रातों में हुआ था, वह दोनों की त्वचा पर हमेशा के लिए बर्फ की तरह जम चुका था।
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