बच्चे के सोने के बाद जब पड़ोसी ने मेरे घर की चुप्पी तोड़ दी और पति के शहर में होने का फायदा उठाया
रात के लगभग साढ़े ग्यारह बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। तीन साल का बच्चा अपने कमरे में सो चुका था। पति दो दिन के दौरे पर था।
अवनी हल्की नाइटी में सोफे पर बैठी थी। तभी हल्की दस्तक हुई। दिल बैठ गया। उसने दरवाजे का पाइप होल देखा। रेयान खड़ा था—बिल्कुल सामने वाले फ्लैट का।
अवनी ने दरवाजा खोला। रेयान अंदर आया। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। अवनी ने उँगली से होंठों पर इशारा किया—“बच्चा सो रहा है।”
रेयान ने सिर हिलाया। अवनी ने दरवाजा बंद किया और ताला लगाया। दोनों गलियारे में खड़े थे। रेयान ने अवनी का हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी ओर खींचा। चुंबन बहुत धीमा था—आवाज न निकले इसलिए। लेकिन भूख साफ थी।
अवनी की नाइटी ऊपर हो गई। रेयान ने उसकी ब्रा के ऊपर से स्तनों को मसलना शुरू किया। फिर ब्रा को ऊपर उठाया और निप्पल को मुँह में ले लिया। अवनी ने अपना मुँह उसके कंधे पर दबा लिया। सिसकी दब गई।
रेयान ने उसे बेडरूम में ले जाया—बच्चे के कमरे से दूर वाला। दरवाजा बंद किया। अवनी को बिस्तर पर लिटाया। उसकी पैंटी धीरे से उतारी। अवनी की जाँघें काँप रही थीं। रेयान ने अपनी जीभ उसके बीच में रख दी।
अवनी ने तकिया मुँह में दबा लिया। रेयान की जीभ धीमी लेकिन गहरी थी। वह क्लिट को धीरे-धीरे चूस रहा था, कभी उंगलियाँ अंदर डाल रहा था। अवनी का शरीर तन गया। पहला चरम तकिए में दब गया। आँसू निकल आए।
रेयान ऊपर आया। उसने अपनी पैंट खोली। अवनी ने खुद उसका अंग पकड़कर अपने अंदर की ओर गाइड किया। रेयान बहुत धीरे-धीरे अंदर घुसा। अवनी की आँखें बंद हो गईं। जब पूरा अंदर गया तो दोनों की साँसें एक हो गईं।
रेयान ने हिलना शुरू किया। धीरे, लेकिन गहरा। बिस्तर न चरमराए इसलिए उसने गति कंट्रोल में रखी। अवनी की टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। रेयान ने झुककर उसके कान में कहा, “आवाज मत निकालना।”
अवनी ने सिर हिलाया। लेकिन जब रेयान की गति थोड़ी तेज हुई तो उसकी सिसकियाँ तकिए में भी दबने लगीं। रेयान ने उसका मुँह अपने हाथ से हल्का सा दबाया और और गहराई तक जाने लगा।
अवनी का दूसरा चरम और भी तेज था। उसने रेयान को जोर से जकड़ लिया। शरीर काँप रहा था लेकिन आवाज नहीं निकली। रेयान ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर लेटे रहे।
कुछ देर बाद अवनी ने बहुत धीमे स्वर में कहा, “एक बार और… लेकिन और चुपचाप।”
रेयान मुस्कुराया। उसने अवनी को साइड में कर लिया। पीछे से अंदर आया। एक हाथ उसके मुँह पर था, दूसरा उसके स्तन पर। धक्के धीमे लेकिन बहुत गहरे थे। अवनी की आँखें बंद थीं। हर धक्के के साथ उसका शरीर थोड़ा सा हिल रहा था।
रेयान ने उसके कान में कहा, “तेरा शरीर कितना गरम है आज।”
अवनी ने जवाब में और पीछे की ओर धकेल दिया। तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। अवनी की आँखों से आँसू निकल आए—मजे के और इस बात के कि आवाज नहीं निकाल सकते थे।
रात के एक बज गए थे। रेयान ने कपड़े पहने। अवनी नाइटी ठीक कर रही थी। दोनों गलियारे तक आए। रेयान ने अवनी के गाल पर हल्का सा चुंबन लिया।
“कल रात?” उसने फुसफुसाया।
अवनी ने सिर हिलाया। “बच्चा सो जाए… तब।”
रेयान निकल गया। अवनी ने दरवाजा बंद किया और बच्चे के कमरे में झाँका। बच्चा अभी भी गहरी नींद में था। अवनी ने राहत की साँस ली।
शरीर में अभी भी रेयान की गर्मी थी। जाँघों के अंदर उसका अंश था। लेकिन घर की चुप्पी फिर से बहाल हो गई थी।
अवनी मुस्कुराई। बच्चे के सोने के बाद जो चुप्पी टूटी थी, वह अब हर रात टूटने वाली थी।
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