पड़ोसी की बीवी दीवार के पार की हवस जब रात के अंधेरे में उसने दरवाज़ा खोला और साड़ी में भीगे शरीर ने सब बता दिया
रात के करीब दो बज रहे थे। मैं छत पर खड़ा सिगरेट पी रहा था तभी बगल वाले घर की बालकनी में रोशनी जल उठी।
पड़ोसी की बीवी नेहा बाहर आई। हल्की सी साड़ी पहनी थी, बाल खुले हुए। उसने मुझे देखा और मुस्कुरा दी। कुछ पल बाद उसके घर का दरवाज़ा धीरे से खुला।
मैं अंदर गया। उसने दरवाज़ा बंद करते ही मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने बड़े स्तनों से सटा दिया। ब्लाउज़ के अंदर निप्पल सख्त हो चुके थे।
“आज पति नहीं है… पूरी रात तुम्हारी हूँ,” उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने उसकी साड़ी खींचकर नीचे गिरा दी। सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में खड़ी थी। ब्रा खोलते ही उसके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने मेरा पजामा नीचे किया और मोटा लंड निकालकर मुँह में ले लिया। गीली जीभ से चाटते हुए गले तक उतारने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह में धक्के मारने शुरू कर दिए।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे सोफे पर लिटाया, पैर फैलाए और एक झटके में पूरा लंड उसकी गीली चूत में धँस गया। नेहा की चीख दब गई।
“आह… इतना मोटा… धीरे…”
मैंने धीरे नहीं किया। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसके स्तन उछल रहे थे। फिर उसे डॉगी बनाकर और गहराई तक पेलने लगा। एक हाथ से उसकी क्लिट रगड़ रहा था।
आखिर में उसने खुद कहा —
“अंदर छोड़ दो… आज पूरा अंदर चाहिए।”
मैंने आखिरी तेज़ धक्के मारे और पूरा गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। नेहा का शरीर कांप उठा।
दोनों पसीने से भीगे हुए सोफे पर लेटे थे। नेहा ने धीरे से कहा —
“कल फिर आ जाना… पति देर से आएगा।”
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