जब पड़ोस की भाभी ने खुद दरवाजा खोला और साफ कहा कि आज रात तू मेरा है फिर किसी को कुछ पता नहीं चला
रात के लगभग साढ़े ग्यारह बज रहे थे। सोसाइटी में सन्नाटा था।
आरव अपने फ्लैट के बाहर खड़ा था। तभी सामने वाले फ्लैट का दरवाजा खुला। शालिनी भाभी दरवाजे पर खड़ी थीं। उम्र लगभग बत्तीस-तैंतीस, साड़ी पहने, बाल खुले। पति ऑफिस ट्रिप पर थे।
शालिनी ने आरव की ओर देखा और धीरे से बोलीं, “अंदर आ जा।”
आरव की साँस रुक गई। वह अंदर गया। शालिनी ने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। दोनों गलियारे में खड़े थे। शालिनी ने एक कदम आगे बढ़ाया और आरव की टी-शर्ट पकड़कर अपनी ओर खींच लिया।
“आज रात तू मेरा है,” उन्होंने साफ कहा। “कोई हिचक नहीं, कोई सवाल नहीं।”
आरव कुछ कह पाता इससे पहले शालिनी ने उसके होंठों पर मुँह रख दिया। चुंबन में वह पूरी तरह주도 थीं। जीभ अंदर तक चली गई। आरव की पीठ दीवार से सट गई। शालिनी ने उसकी टी-शर्ट ऊपर की और सीने पर हाथ फेरने लगीं।
फिर उन्होंने आरव का हाथ पकड़कर अपने ब्लाउज पर रखा। “खोल।”
आरव के हाथ काँप रहे थे लेकिन उसने हुक खोले। शालिनी की ब्रा भी खुल गई। उन्होंने खुद आरव का सिर अपने स्तनों की ओर दबाया। “मुँह में ले। जोर से चूस।”
आरव ने आज्ञा का पालन किया। शालिनी की सिसकी निकल गई। उन्होंने आरव के बाल पकड़ रखे थे और उसे और जोर से अपने स्तनों पर दबा रही थीं। थोड़ी देर बाद शालिनी ने आरव को बेडरूम की ओर धकेला।
बिस्तर पर लेटते ही शालिनी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट खुद उतार दिए। पैंटी भी। वे पूरी तरह नंगी हो गईं। आरव अभी भी जींस में था। शालिनी ने उसकी जींस के बटन खोले और नीचे सरका दिया। फिर वे खुद आरव के ऊपर बैठ गईं।
“आज मैं ले रही हूँ,” शालिनी ने कहा और धीरे-धीरे आरव के अंग को अपने अंदर लेने लगीं। आरव की साँस अटक गई। शालिनी ने पूरा अंदर ले लिया और कुछ पल रुकीं। फिर वे जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगीं।
आरव के हाथ उनके स्तनों पर चले गए। शालिनी ने सिर पीछे किया। “हाँ… ऐसे ही मसल।”
गति तेज होती गई। बिस्तर चरमरा रहा था। शालिनी की आवाजें अब साफ निकल रही थीं। वे खुद अपनी गति बढ़ा रही थीं। आरव बस उनके नीचे था—उनके नियंत्रण में।
शालिनी का पहला चरम जल्दी आ गया। उनका शरीर काँप उठा। उन्होंने आरव को जोर से जकड़ लिया। लेकिन रुकीं नहीं। कुछ पल बाद फिर से हिलना शुरू कर दिया।
“तू अभी नहीं निकलेगा,” उन्होंने हांफते हुए कहा। “मैं कहूँगी तब।”
आरव ने सिर हिलाया। शालिनी ने इस बार अपना रुख बदला। वे आरव के ऊपर से उठीं और घुटनों के बल हो गईं। “आजा। पीछे से। और जोर से।”
आरव उठकर उनके पीछे आया। शालिनी ने खुद उसका अंग पकड़कर अपने अंदर डाल लिया। “अब मत रुकना।”
आरव ने कमर पकड़ी और धक्के लगाने शुरू कर दिए। शालिनी पीछे की ओर जोर से धकेल रही थीं। उनकी आवाजें अब दब नहीं पा रही थीं। आरव की गति तेज होती गई। शालिनी ने तकिया मुँह में दबा लिया।
“और… और गहरा आरव…”
आरव ने उनकी बात मान ली। धक्के और गहरे हो गए। शालिनी का दूसरा चरम और भी तेज था। उनके पैर काँपने लगे। आरव ने भी उसी समय बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन शालिनी ने उनकी जाँघ पकड़ ली। “अंदर छोड़। आज अंदर।”
आरव ने उनके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिरे रहे।
कुछ देर बाद शालिनी ने आरव को अपनी ओर खींचा। “थका?”
आरव ने सिर हिलाया। शालिनी मुस्कुराईं। उन्होंने आरव का हाथ अपने स्तन पर रखा। “रात अभी बाकी है। और आज तू मेरे कहे अनुसार ही चलेगा।”
अगले एक घंटे में शालिनी ने आरव को और दो बार लिया। एक बार अपने मुँह में, एक बार फिर से ऊपर बैठकर। हर बार नियंत्रण उनके हाथ में था। आरव बस पालन कर रहा था।
रात के दो बज गए थे जब शालिनी ने आखिरी बार आरव को अपने अंदर लिया। इस बार वे बहुत धीरे हिल रही थीं। आँखें बंद, होंठ खुले। आरव के हाथ उनकी कमर पर थे लेकिन वह कुछ कर नहीं रहा था—बस महसूस कर रहा था।
जब दोनों का अंतिम चरम आया, शालिनी आरव की छाती पर गिर गईं। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं।
शालिनी ने धीरे से कहा, “कल रात फिर आजा। पति तीन दिन बाद आएगा। तब तक हर रात तू आएगा।”
आरव मुस्कुराया। “जैसी आज्ञा भाभी।”
शालिनी ने उसकी छाती पर हल्का थप्पड़ मारा। “अब निकल। सुबह हो जाएगी।”
आरव कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले दरवाजे पर खड़े होकर बोला, “आज आपने सब कुछ छीन लिया… लेकिन अगली बार मैं भी कुछ छीनूँगा।”
शालिनी ने तकिया फेंककर जवाब दिया। “कोशिश तो करके देखना।”
दरवाजा बंद होते ही शालिनी मुस्कुराईं। पड़ोस की उस रात नियंत्रण उनके हाथ में था। और दोनों जानते थे—ये खेल अब और गहरा होने वाला है।
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