पड़ोस की दीवार के पार जब हमने सारी सीमाएँ पार कर लीं
रात के लगभग बारह बज रहे थे। सोसाइटी में सन्नाटा पसरा हुआ था।
अवनी बालकनी में खड़ी थी। हल्की नाइटी पहने, बाल खुले। ठीक सामने वाली बालकनी में रेयान सिगरेट पी रहा था। दोनों की नजरें मिलीं। अवनी ने नजरें नहीं हटाईं। रेयान ने सिगरेट बुझाई और सिर हिलाया।
अवनी का दिल जोर से धड़का। पति सो चुका था। वह अंदर आई, बेडरूम का दरवाजा हल्के से बंद किया और अपने फ्लैट का मेन डोर खोला। रेयान पहले से गलियारे में खड़ा था। दोनों बिना एक शब्द कहे अंदर आ गए। अवनी ने ताला लगा दिया।
रेयान ने तुरंत अवनी को दीवार से सटा दिया। चुंबन गहरा और भूखा था। अवनी की नाइटी ऊपर हो गई। रेयान ने उसकी ब्रा खोली और दोनों स्तनों को जोर से मसलने लगा। निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा। अवनी की सिसकी निकल गई।
“आवाज धीमी…” अवनी ने फुसफुसाया।
रेयान ने जवाब में और जोर से चूसा। फिर उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। अवनी पहले से गीली थी। रेयान की उंगलियाँ तेजी से उसके बीच में घूमने लगीं। अवनी की कमर अपने आप आगे बढ़ गई।
रेयान ने उसे सोफे पर लिटा दिया। पैंटी को एक झटके में नीचे खींच लिया। फिर अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। अवनी की टाँगें काँपने लगीं। रेयान की जीभ क्लिट पर जोर-जोर से घूम रही थी। अवनी ने अपना मुँह हाथ से बंद कर लिया।
कुछ ही देर में अवनी का शरीर अकड़ गया। पहला चरम आ गया। उसकी दबी हुई आवाज सोफे में गूँज गई।
रेयान ऊपर आया। उसने अपनी पैंट खोली। अवनी की आँखें उसके कड़े अंग पर टिक गईं। रेयान ने उसकी दोनों टाँगें फैलाईं और एक ही धक्के में अंदर तक घुस गया।
अवनी की आँखें फट गईं। “आह्ह… रेयान…”
रेयान रुका नहीं। उसने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने लगे। सोफा चरमरा रहा था। हर धक्का इतना गहरा था कि अवनी की छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। रेयान ने उसके स्तनों को मुँह में ले लिया और दाँतों से काटने लगा।
अवनी की आवाजें अब दबाना मुश्किल हो रहा था। रेयान ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और और तेज हो गया।
थोड़ी देर बाद रेयान ने उसे पलटा। अवनी अब घुटनों के बल थी। रेयान ने पीछे से फिर से अंदर घुस गया। उसने अवनी के बाल पकड़ लिए और जोर से खींचे। हर धक्के के साथ अवनी की गर्दन पीछे की ओर झुक रही थी।
रेयान ने उसके नितंबों पर थप्पड़ मारे। आवाज दबाने के बावजूद घर में गूँज रही थी। अवनी और जोर से पीछे की ओर धकेलने लगी।
“और… पूरा ले लो…” अवनी की आवाज टूटी हुई थी।
रेयान ने उसकी कमर और नीचे झुका दी और पूरी ताकत लगा दी। अवनी का दूसरा चरम इतना तेज था कि उसके पैर लड़खड़ा गए। रेयान ने भी उसी समय उसके अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया।
दोनों सोफे पर गिरे पड़े थे। पसीने से लथपथ। अवनी की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं।
रेयान ने उसके कान में कहा, “कल रात फिर से।”
अवनी ने आँखें बंद किए हुए सिर हिलाया। “आ जाना… पति सो जाएगा तो।”
रेयान मुस्कुराया। उसने अवनी के स्तन को अंतिम बार सहलाया और कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले दरवाजे पर खड़े होकर बोला, “दीवार के पार भी तेरी साँसें सुनाई देती हैं।”
अवनी ने कुछ नहीं कहा। बस दरवाजा बंद किया और दीवार के सहारे खड़ी रही। जाँघों के अंदर रेयान का अंश अभी भी बह रहा था। शरीर पर उसके नाखूनों और दाँतों के निशान थे।
उसने मुस्कुरा दिया।
पड़ोस की दीवार अब सिर्फ दीवार नहीं रह गई थी। वह एक दरवाजा बन चुकी थी—जिसके पार हर रात सीमाएँ टूटती थीं।
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