पड़ोस की खिड़की से शुरू हुआ वो राज़ जब बालकनी की मुस्कान ने दोनों की जिंदगी बदल दी और दीवारों के पार साँसें थम गईं

R
26 min read1 readers
Font:
0:000:00
Share Story:

रियान की नई फ्लैट में आने के सिर्फ तीन दिन हुए थे। तीसरी मंजिल का वो कोना वाला घर, जहाँ से ठीक सामने की बालकनी दिखती थी, अब उसकी जिंदगी का सबसे खतरनाक कोना बनने वाला था।

सुबह की चाय का कप हाथ में लिए वह बालकनी में खड़ा था जब पहली बार उसने उसे देखा। साड़ी का पल्लू कंधे से थोड़ा सा खिसका हुआ, बाल खुले, और आँखों में वो थकान जो शादीशुदा औरतों की आँखों में अक्सर रहती है। नाम था अंजलि। उम्र मुश्किल से अट्ठाईस-उनतीस। पति आईटी कंपनी में काम करता था और अक्सर देर रात लौटता था।

रियान ने मुस्कुरा दिया। अंजलि ने भी एक हल्की सी मुस्कान लौटाई और नज़रें चुरा लीं। बस इतना सा। लेकिन वो मुस्कान दोनों के दिमाग में तीन दिन तक घूमती रही।

चौथे दिन शाम को जब बिजली गई, तो दोनों फिर बालकनी में आ गए। मोमबत्ती की रोशनी में अंजलि का चेहरा और भी नरम लग रहा था। रियान ने पूछा, “आपके यहाँ भी बिजली नहीं है?”

अंजलि हँसी, “पूरे सोसाइटी में नहीं है। आप नए हैं ना… नाम?”

“रियान।” उसने अपना नाम बताया और फिर धीरे से जोड़ा, “आपकी मुस्कान बहुत अच्छी है।”

अंजलि की साँस थोड़ी तेज हो गई। उसने जवाब नहीं दिया, बस सिर झुका लिया। लेकिन उस रात सोते समय उसके मन में रियान का चेहरा बार-बार आ रहा था। पति के बगल में लेटी हुई भी वह सोच रही थी कि वो आदमी कितना अलग लगता है—आसान, सीधा और खतरनाक।

अगले हफ्ते रियान ने जानबूझकर देर शाम को बालकनी में खड़े रहना शुरू कर दिया। अंजलि भी अब पहले से ज्यादा समय बालकनी में बिताने लगी थी। कभी कपड़े सुखाने के बहाने, कभी पौधों को पानी देने के बहाने। दोनों की नजरें मिलतीं, फिर टूट जातीं, फिर मिलतीं।

एक दिन अंजलि की साड़ी का पल्लू हवा में उड़ गया। रियान ने हँसते हुए कहा, “संभालिए… नहीं तो पड़ोसी देख लेगा।”

अंजलि ने शरमाते हुए पल्लू ठीक किया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी। उसने धीरे से जवाब दिया, “पड़ोसी तो देख ही रहा है।”

उस रात रियान ने पहली बार सोचा कि ये खेल अब खतरनाक हो रहा है। लेकिन वह रुकने वाला नहीं था।

दो हफ्ते बाद अंजलि के पति तीन दिन के दौरे पर गए। रियान को पता चल गया। उसने जानबूझकर उस शाम बालकनी में सिगरेट जलाई। अंजलि आई। दोनों कुछ देर चुप रहे। फिर रियान ने धीरे से कहा, “अंदर आ जाऊँ?”

अंजलि की साँस अटक गई। उसने सिर्फ सिर हिलाया।

रियान का दरवाजा खुलते ही अंजलि के घर की हल्की सी खुशबू उसके नाक में समा गई—इत्र और कुछ और। वह अंदर घुसा। अंजलि ने दरवाजा बंद किया और पीठ के बल खड़ी हो गई। दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। कोई शब्द नहीं।

रियान ने एक कदम बढ़ाया। अंजलि पीछे नहीं हटी। उसने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से अपने गाल पर रख दिया। रियान की उंगलियाँ उसके गाल पर फिसलीं, फिर होंठों तक पहुँचीं। अंजलि की आँखें बंद हो गईं।

पहला चुंबन बहुत धीमा था। जैसे दोनों डर रहे हों कि कहीं सपना टूट न जाए। फिर रियान ने उसके कमर को अपनी ओर खींचा। अंजलि की साड़ी का पल्लू फर्श पर गिर गया। रियान के हाथ उसकी कमर पर थे, फिर उसकी पीठ पर, फिर और नीचे।

अंजलि ने उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी। रियान के सीने पर उसके होंठ लगते ही दोनों की साँसें एक हो गईं। वह उसे बेडरूम तक ले गया। बिस्तर पर लेटते ही अंजलि की साड़ी पूरी तरह खुल गई। रियान ने उसकी ब्रा खोली और उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया। अंजलि की कमर अपने आप उठ गई।

रियान ने धीरे-धीरे उसके शरीर पर होंठ फेरना शुरू किया। गर्दन, कॉलरबोन, फिर स्तनों के निप्पल तक। अंजलि की उंगलियाँ उसके बालों में खो गईं। जब रियान ने उसके पैंटी के अंदर हाथ डाला, तो अंजलि की जाँघें थरथरा उठीं। वह पहले से गीली थी।

रियान ने उसके पैंटी को नीचे खींचा और अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। अंजलि ने तकिए को मुँह में दबा लिया ताकि आवाज बाहर न जाए। रियान की जीभ उसके क्लिट पर घूम रही थी, कभी धीरे, कभी तेज। अंजलि की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। कुछ ही मिनटों में वह काँपते हुए चरम पर पहुँच गई।

रियान ऊपर आया। अंजलि ने खुद उसके पैंट के बटन खोले और उसे अपने अंदर लेने के लिए जाँघें फैला दीं। जब रियान अंदर घुसा, तो दोनों एक साथ साँस छोड़ी। अंजलि की आँखें बंद थीं, होंठ खुले। रियान ने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। अंजलि की टाँगें उसकी कमर के चारों ओर लिपट गईं।

बिस्तर चरमरा रहा था। अंजलि अब आवाजें रोक नहीं पा रही थी। रियान ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद किया और और तेज हो गया। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। रियान उसके अंदर ही रुक गया। अंजलि की साँसें तेज चल रही थीं। उसने रियान के कंधे को कसकर पकड़ रखा था।

उस रात वे दो बार और मिले। सुबह होने से पहले रियान चला गया। अंजलि बिस्तर पर लेटी रही और छत को देखती रही। उसके शरीर पर रियान की खुशबू थी। उसने मुस्कुरा दिया।

पति लौट आया। जिंदगी सामान्य हो गई। लेकिन अब दोनों की नजरें मिलते ही कुछ और कहने लगती थीं। कभी-कभी अंजलि जानबूझकर बालकनी में देर तक खड़ी रहती। कभी रियान रात को देर से सिगरेट जलाता।

एक महीने बाद फिर मौका मिला। पति दो दिन के लिए बाहर था। इस बार अंजलि खुद रियान के घर आई। दरवाजा खुलते ही उसने रियान को दीवार से लगा दिया और उसके होंठों को चूसने लगी। इस बार कोई हिचक नहीं थी।

रियान ने उसे सोफे पर लिटा दिया। अंजलि की सलवार जल्दी से उतर गई। रियान ने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और गहराई तक घुस गया। अंजलि चीखने वाली थी, लेकिन रियान ने फिर से उसका मुँह बंद कर दिया। इस बार गति बहुत तेज थी। अंजलि की छाती बार-बार ऊपर-नीचे हो रही थी। रियान ने उसके निप्पल को दाँतों से हल्का सा काटा। अंजलि की उंगलियाँ सोफे के किनारे को जकड़ गईं।

वे रात भर मिले। कभी सोफे पर, कभी फर्श पर, कभी बालकनी के पास खड़े-खड़े। सुबह चार बजे अंजलि अपने घर लौटी। उसके शरीर पर निशान थे, लेकिन वह खुश थी।

अगले कुछ महीनों में ये मुलाकातें नियमित हो गईं। कभी दोपहर में जब पति ऑफिस में होता, कभी रात को जब वह सो जाता। अंजलि अब रियान के बिना अधूरी महसूस करने लगी थी। रियान भी।

एक दिन अंजलि ने कहा, “ये कब तक चलेगा?”

रियान ने उसके बालों को सहलाते हुए जवाब दिया, “जब तक दोनों चाहें।”

अंजलि चुप रही। उसने रियान के सीने पर सिर रखा और आँखें बंद कर लीं। दीवार के उस पार उसका अपना घर था, उसका पति था, उसकी जिम्मेदारियाँ थीं। लेकिन इस तरफ रियान था—और वो हर रात उसे अपने पास खींच लेता था।

कुछ हफ्ते बाद पति को शक हुआ। उसने अंजलि से पूछा, “तुम इन दिनों बहुत बदल गई हो।”

अंजलि ने बस मुस्कुरा दिया और बात टाल दी। लेकिन दिल में डर बैठ गया।

अगली मुलाकात में उसने रियान से कहा, “हमें कुछ दिन रुकना चाहिए।”

रियान ने सिर हिलाया, लेकिन दोनों जानते थे कि रुकना मुश्किल है। तीन दिन बाद ही अंजलि फिर उसके दरवाजे पर खड़ी थी। बारिश हो रही थी। उसके बाल भीग चुके थे। रियान ने उसे अंदर खींचा और कपड़े उतरवा दिए। गीले शरीर पर उसके हाथ फिसल रहे थे। अंजलि दीवार से लगी हुई थी और रियान उसके पीछे से अंदर तक घुस रहा था। बारिश की आवाज में अंजलि की सिसकियाँ दब गईं।

उस रात उन्होंने फैसला किया कि ये रिश्ता अब सिर्फ शरीर का नहीं रह गया है। कुछ और भी है। लेकिन दोनों जानते थे कि ये आगे नहीं बढ़ सकता। अंजलि शादीशुदा थी। रियान अकेला।

फिर भी वे रुक नहीं पाए।

एक साल बाद भी जब कभी अंजलि बालकनी में खड़ी होती, रियान की नजरें उसे ढूँढ लेतीं। कभी-कभी वे सिर्फ देख लेते। कभी-कभी रात के अंधेरे में दरवाजा खुल जाता।

और हर बार जब रियान उसके शरीर में समाता, अंजलि की आँखें बंद हो जातीं। वह सोचती—ये गलत है। बहुत गलत है। लेकिन इस गलत में ही उसकी सबसे सच्ची साँसें छिपी थीं।

पड़ोस की वो खिड़की आज भी खुली रहती है। और दोनों जानते हैं कि जब भी मौका मिलेगा, वे फिर से एक-दूसरे के पास पहुँच जाएँगे। क्योंकि कुछ रिश्ते दीवारों के पार भी साँस लेते हैं।

Rate this story

🔥 NEXT CHAPTER IN LINE

Neighbour Affair

पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात की घंटी

पड़ोसी भाभी सेक्स स्टोरी: आधी रात को बाथरूम की टंकी फटने पर सुनीता भाभी ने पड़ोसी दीपक को मदद के लिए बुलाया, लेकिन पानी रुकने के बाद जो शुरू हुआ, वो दोनों की जिंदगी की सबसे लंबी रात बन गया।

Read Next Story

Readers who enjoyed “पड़ोस की खिड़की से शुरू हुआ वो राज़ जब बालकनी की मुस्कान ने दोनों की जिंदगी बदल दी और दीवारों के पार साँसें थम गईं” also read

8 curated stories
Neighbour Affairहिंदी (Hindi)

बच्चे के सोने के बाद जब पड़ोसी ने मेरे घर की चुप्पी तोड़ दी और पति के शहर में होने का फायदा उठाया

घर में बच्चा सो रहा था। पति शहर में था। और पड़ोसी दरवाजे पर खड़ा था। उस रात हर सिसकी को दबाना पड़ा, लेकिन शरीर ने कोई सीमा नहीं मानी।

⏱️ 31 min read•👁️ 1 views
Neighbour Affairहिंदी (Hindi)

पड़ोस की दीवार के पार जब हमने सारी सीमाएँ पार कर लीं

बालकनी की मुस्कान से शुरू हुई वो चाहत आखिरकार दीवार के पार जा पहुँची। एक शादीशुदा औरत और उसके पड़ोसी के बीच पनपी सबसे गुपचुप और तीव्र कहानी।

⏱️ 28 min read•👁️ 0 views
Neighbour Affairहिंदी (Hindi)

ऊपर वाले फ्लैट की औरत रात की मुलाकात जब लिफ्ट में नज़रें मिलीं और उसने मुस्कुराते हुए फ्लैट नंबर बताया फिर दरवाज़ा खोला तो सिर्फ हवस बाकी थी

लिफ्ट में नज़रें मिलीं। उसने मुस्कुराते हुए अपना फ्लैट नंबर बताया। रात को जब दरवाज़ा खोला तो अंदर सिर्फ हवस बाकी थी।

⏱️ 12 min read•👁️ 0 views
Rough & Dirtyहिंदी (Hindi)

ज़बरदस्त रात जब उसने बाल खींचकर चोदा और साफ कहा कि आज नर्मियत नहीं चलेगी सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स

उसने मेरा बाल पकड़कर खींचा और बोली – आज नर्मियत नहीं चलेगी। फिर जो हुआ वो सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स था।

⏱️ 9 min read•👁️ 36 views
Hardcore Desiहिंदी (Hindi)

नौकरानी की चुदाई: दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर

राहुल और उसकी कामवाली गौरी की ये कहानी दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर में दीवान हिलाने की मदद मांगने से शुरू हुई, और बेकाबू होती चली गई।

⏱️ 11 min read•👁️ 22 views
Hotwife / Cuckoldहिंदी (Hindi)

जब पति ने खुद मुझे किसी और के हवाले कर दिया और दोनों की सीमाएँ मिटा दीं हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात

एक पति की इच्छा, एक पत्नी का समर्पण और एक तीसरा व्यक्ति जिसने दोनों की सीमाएँ मिटा दीं। हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात।

⏱️ 29 min read•👁️ 21 views
Hotwife / Cuckoldहिंदी (Hindi)

पत्नी को दूसरे के साथ देखना मेरी छुपी हुई हवस जब मैंने खुद कहा और दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था

मैंने खुद अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के साथ सोने के लिए कहा। दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा। जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था।

⏱️ 5 min read•👁️ 17 views
Office Romanceहिंदी (Hindi)

लेट नाइट ओवरटाइम जब मैनेजर ने केबिन में बुलाया दरवाज़ा बंद किया और जो ओवरटाइम हुआ वो काम से जुड़ा नहीं था

सभी कर्मचारी जा चुके थे। मैनेजर ने कैबिन में बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर जो ओवरटाइम हुआ वो काम से जुड़ा नहीं था।

⏱️ 10 min read•👁️ 14 views