जिम बंद होने के बाद जब ट्रेनर ने मुझे मैट पर लिटा दिया और पसीने भरी वर्कआउट को कुछ और बना दिया
रात के लगभग दस बज रहे थे। जिम का शटर नीचे हो चुका था। अंदर सिर्फ इमरजेंसी लाइट जल रही थी।
मेहर योगा मैट पर बैठी अपनी बोतल से पानी पी रही थी। पसीने से टी-शर्ट शरीर से चिपक गई थी। तभी कर्ण उसके पास आया। जिम का ट्रेनर। लंबा, मजबूत शरीर, और पिछले कुछ हफ्तों से मेहर पर खास ध्यान देने वाला।
“आज का सेशन खत्म?” कर्ण ने पूछा।
मेहर ने सिर हिलाया। “हाँ… घर भी देर हो गई।”
कर्ण बैठ गया। दोनों की निगाहें मिलीं। जिम की खामोशी भारी लग रही थी। कर्ण ने धीरे से मेहर का हाथ पकड़ा। “एक और सेट कर लेते हैं।”
मेहर कुछ कह पाती इससे पहले कर्ण ने उसे मैट पर लिटा दिया। उसके हाथ उसके घुटनों पर थे। “पैर फैला।”
मेहर ने फैला दिए। कर्ण उसके बीच में बैठ गया। उसने मेहर की टाइट लेगिंग के ऊपर से ही हाथ फेरना शुरू किया। मेहर की साँस तेज हो गई। कर्ण ने लेगिंग को नीचे खींच दिया। पैंटी के साथ। मेहर अब नीचे से नंगी थी।
कर्ण ने उसकी जाँघें और फैलाईं और अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। मेहर ने मुँह में हाथ दबा लिया। कर्ण की जीभ तेज और अनुभवी थी। वह क्लिट को जोर-जोर से चूस रहा था। मेहर की कमर मैट से ऊपर उठने लगी।
“कर्ण… यहाँ… जिम में…” मेहर की आवाज काँप रही थी।
“शटर बंद है,” कर्ण ने कहा और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। मेहर का शरीर तन गया। थोड़ी देर में पहला चरम आ गया। मेहर ने कर्ण के बाल जोर से पकड़ रखे थे।
कर्ण ऊपर आया। उसने अपनी ट्रैक पैंट नीचे की। मेहर की आँखें उसके कड़े अंग पर टिक गईं। कर्ण ने मेहर की टाँगें अपने कंधों पर रखीं और एक ही धक्के में अंदर तक घुस गया।
मेहर की आँखें फट गईं। “आह्ह…”
कर्ण ने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। मैट फिसलने लगी। मेहर की टी-शर्ट ऊपर हो गई। कर्ण ने ब्रा को ऊपर उठाया और स्तनों को जोर से मसलने लगा। निप्पल को मुँह में ले लिया।
मेहर की आवाजें अब दबाना मुश्किल हो रहा था। कर्ण ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और और तेज हो गया। जिम की खामोशी में सिर्फ शरीर की आवाजें गूँज रही थीं।
थोड़ी देर बाद कर्ण ने मेहर को पलटा। मेहर अब घुटनों के बल थी। कर्ण ने पीछे से फिर से अंदर घुस गया। उसने मेहर के बाल पकड़ लिए और जोर से खींचे। हर धक्के के साथ मेहर की गर्दन पीछे की ओर झुक रही थी।
“और जोर से… कर्ण…” मेहर ने दबी आवाज में कहा।
कर्ण ने उसके नितंबों पर थप्पड़ मारे। मेहर और जोर से पीछे की ओर धकेलने लगी। दूसरा चरम इतना तेज था कि मेहर के पैर काँपने लगे। कर्ण ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया।
दोनों मैट पर गिरे पड़े थे। पसीने से लथपथ। जिम की इमरजेंसी लाइट उनके शरीर पर पड़ रही थी।
कुछ देर बाद मेहर ने हांफते हुए कहा, “एक बार और… फिर घर चलूँगी।”
कर्ण मुस्कुराया। उसने मेहर को दीवार से सटाया। एक टाँग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े अंदर घुस गया। मेहर की पीठ शीशे से लग रही थी। कर्ण के धक्के तेज और गहरे थे। मेहर की आवाजें अब हाथ से भी नहीं दब पा रही थीं।
तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। कर्ण ने फिर से उसके अंदर ही छोड़ दिया। मेहर की टाँगें काँप रही थीं।
रात के ग्यारह बज गए थे। दोनों ने कपड़े सही किए। मेहर की लेगिंग अभी भी घुटनों तक थी। कर्ण ने उसका बैग उठाया।
“कल लास्ट स्लॉट फिर?” कर्ण ने पूछा।
मेहर ने सिर हिलाया। “कल… और उसके बाद भी। लेकिन शटर बंद होने के बाद ही।”
कर्ण ने दरवाजा खोला। बाहर की ठंडी हवा अंदर आई। मेहर मुस्कुराई। जिम बंद होने के बाद जो सेशन शुरू हुआ था, वह अब रोज का रूटीन बनने वाला था।
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