ऑफिस की केबिन में वो रात जब देर रात की मीटिंग ने दो सहकर्मियों की सारी सीमाएँ तोड़ दीं

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रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। ऑफिस की पूरी बिल्डिंग सुनसान हो चुकी थी। सिर्फ तीसरी मंजिल की एक केबिन में अभी भी लाइट जल रही थी।

आरव ने अपनी लैपटॉप बंद की और कुर्सी पर पीछे की ओर झुक गया। थकान साफ नजर आ रही थी। ठीक उसी समय दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई।

“अंदर आ सकते हैं?”

आवाज सुनते ही आरव की आँखें चमक उठीं। रिया थी। मार्केटिंग टीम की सबसे होशियार और सबसे खूबसूरत लड़की। काली फॉर्मल शर्ट, स्कर्ट और ऊँची एड़ी। बाल आज खुले थे।

“आ जाओ,” आरव ने कहा।

रिया अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया। ताला भी लगा दिया। आरव ने एक भौं उठाई।

“ताला?”

रिया मुस्कुराई। “रात के बारह बजने वाले हैं। कोई आने वाला नहीं। और…” उसने धीरे से आगे बढ़ते हुए कहा, “आज मैं बात नहीं करने आई हूँ।”

आरव की साँस थोड़ी तेज हो गई। पिछले तीन महीनों से दोनों के बीच जो तनाव चल रहा था, वह अब फूटने वाला था। मीटिंग रूम में मिलती नजरें, कॉफी मशीन के पास छूते हाथ, और वो एक बार का अधूरा चुंबन जो लिफ्ट में हुआ था।

रिया उसके टेबल के पास आई और उसके सामने खड़ी हो गई। आरव की कुर्सी घूम गई। रिया ने धीरे से उसकी टाँगों के बीच जगह बनाई और उसके कंधों पर हाथ रख दिए।

“तुम जानते हो ना कि मैं क्या चाहती हूँ?”

आरव ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी कमर पकड़ ली और अपनी ओर खींच लिया। रिया की स्कर्ट ऊपर उठ गई। आरव के हाथ उसकी जाँघों पर फिसल गए।

रिया झुकी और उसके होंठों को चूसने लगी। चुंबन धीमा नहीं था। भूखा था। आरव ने उसकी जीभ को अपने मुँह में लिया और जोर से चूसा। रिया की सिसकी निकल गई।

आरव ने उसकी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले। काली लेस वाली ब्रा नजर आई। उसने ब्रा को नीचे खींचा और उसके बाएँ स्तन को मुँह में ले लिया। रिया की कमर अपने आप आगे बढ़ गई। आरव ने निप्पल को दाँतों से हल्का काटा तो रिया की उंगलियाँ उसके बालों में खो गईं।

“आरव… यहाँ… केबिन में…” रिया की आवाज काँप रही थी।

“ताला लगा है,” आरव ने जवाब दिया और दूसरी ब्रा को भी नीचे खींच दिया। दोनों स्तन अब उसके सामने थे। उसने उन्हें दोनों हाथों से दबाया और मुँह में लेते हुए जोर-जोर से चूसने लगा। रिया की साँसें तेज हो चुकी थीं।

आरव ने उसे उठाया और अपनी टेबल पर बैठा दिया। रिया की स्कर्ट पूरी तरह कमर तक चढ़ गई। आरव ने उसकी पैंटी को एक झटके में नीचे खींच लिया और फर्श पर फेंक दिया। रिया की जाँघें खुली हुई थीं। बीच का हिस्सा चमक रहा था।

आरव कुर्सी पर बैठ गया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया। पहली बार जब उसकी जीभ रिया के बीच में लगी, तो रिया ने टेबल के किनारे को जोर से पकड़ लिया।

“आह्ह… आरव…”

आरव की जीभ तेज गति से उसके क्लिट पर घूम रही थी। कभी वह अंदर तक जीभ डालता, कभी सिर्फ ऊपर के हिस्से को चूसता। रिया की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उसके नाखून टेबल पर रगड़ रहे थे।

कुछ ही मिनटों में रिया का शरीर काँपने लगा। उसने आरव के बाल पकड़ लिए और जोर से दबाया। चरम इतना तेज था कि उसकी आवाज दबाने के बावजूद केबिन में गूँज गई।

आरव उठा। उसने अपना बेल्ट खोला और पैंट नीचे की। रिया की आँखें उसके कड़े अंग पर टिक गईं। उसने खुद आगे बढ़कर उसे अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर झुकी और मुँह में ले लिया।

आरव की साँस अटक गई। रिया की जीभ उसके सिरे पर घूम रही थी, फिर पूरा अंदर ले रही थी। गला तक। आरव ने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। रिया की आँखों में आँसू आ गए लेकिन उसने रोका नहीं।

थोड़ी देर बाद आरव ने उसे खींचा और टेबल पर लिटा दिया। उसने रिया की दोनों टाँगें फैलाईं और एक झटके में अंदर तक घुस गया।

रिया चीख निकली। “आरव… धीरे…”

लेकिन आरव के मूड में धीरे करने का नामो-निशान नहीं था। उसने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। टेबल चरमरा रही थी। रिया की छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन हर धक्के के साथ काँप रहे थे।

आरव ने झुककर उसके निप्पल को फिर मुँह में ले लिया और दाँतों से काटने लगा। रिया की आवाजें अब नहीं रुक रही थीं।

“और जोर से… आरव… तोड़ दो मुझे…”

आरव ने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर चढ़ा लीं और पूरी ताकत से अंदर तक मारने लगा। हर धक्का इतना गहरा था कि रिया की साँसें अटक जा रही थीं। पसीने से दोनों के शरीर चमक रहे थे।

रिया का दूसरा चरम और भी तेज था। उसके शरीर में ऐंठन सी दौड़ गई। आरव ने भी उसी समय अपने आप को उसके अंदर छोड़ दिया। गर्म तरल उसके अंदर भर गया। दोनों कुछ पल के लिए अचल हो गए।

साँसें धीरे-धीरे सामान्य हुईं। आरव अभी भी उसके अंदर था। रिया ने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा, “ये सिर्फ एक बार का नहीं होना चाहिए था…”

आरव ने उसके माथे को चूमा। “ये सिर्फ एक बार नहीं होगा।”

अगले दिन ऑफिस में दोनों सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन जब लिफ्ट में अकेले हुए तो आरव ने रिया की कमर पकड़ ली और उसके कान में कहा, “आज शाम को फिर केबिन में मिलना।”

रिया की आँखों में वही भूख थी। उसने सिर्फ सिर हिलाया।

उस शाम फिर ताला लगा। इस बार आरव ने रिया को केबिन की कुर्सी पर बैठाया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसने उसकी स्कर्ट ऊपर की और बिना पैंटी उतारे ही बीच में मुँह लगा दिया। रिया की उंगलियाँ कुर्सी के हैंडरेस्ट को जकड़ गईं।

आरव ने उसकी पैंटी को साइड में खिसकाया और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। साथ में जीभ भी चल रही थी। रिया की आवाज दबाने के लिए उसने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया।

रिया चरम पर पहुँची तो आरव उठा और उसे कुर्सी पर ही घुमा दिया। रिया अब घुटनों के बल थी। आरव ने पीछे से उसकी स्कर्ट ऊपर की और एक झटके में अंदर घुस गया।

इस बार गति और भी तेज थी। आरव एक हाथ से उसके बाल पकड़ रहा था और दूसरे से उसकी कमर। हर धक्का इतना जोरदार था कि कुर्सी आगे-पीछे हो रही थी। रिया की आवाजें दबी-दबी निकल रही थीं।

“आरव… और अंदर… पूरा ले लो…”

आरव ने उसकी कमर और नीचे झुका दी और पूरी गहराई तक मारने लगा। रिया का शरीर काँप रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। आरव ने उसके अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया।

रात के दो बज गए थे जब दोनों ने कपड़े पहने। रिया दरवाजे की ओर बढ़ी तो आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“कल भी यहीं।”

रिया मुस्कुराई। “कल भी… और उसके बाद भी।”

केबिन की वो लाइट अब हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार देर रात तक जलती रहती। और हर बार जब ताला लगता, तो दोनों जानते थे कि आज फिर सीमाएँ टूटने वाली हैं।

ऑफिस की दीवारें चुप थीं। लेकिन केबिन के अंदर जो कुछ हो रहा था, वह दोनों की साँसों में हमेशा के लिए बस गया था।

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