Hindi Office Sex Kahani: Suni Hui Baat
रितु ने वह बात नहीं सुननी चाहिए थी, और शायद इसीलिए हर hindi office sex kahani की तरह यह कहानी भी एक सुनी हुई बात से शुरू होती है। वह शुक्रवार की शाम थी, ऑफिस खाली हो चुका था, और वह अपना लैपटॉप बंद करके निकलने ही वाली थी जब कॉन्फ्रेंस रूम से वरुण की आवाज़ आई। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। "यार, तू रितु को नहीं जानता," वरुण फोन पर कह रहा था, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी। "वह जिस तरह साड़ी में चलती है, कसम से, मैं तो बस..."
रितु के पैर वहीं जम गए। उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे लगा वरुण सुन लेगा। वरुण, इकतीस साल का, मार्केटिंग टीम का स्टार, जिसके बारे में ऑफिस की हर लड़की बात करती थी। लंबा, चौड़े कंधे, और एक मुस्कान जो किसी को भी पिघला दे। रितु अट्ठाईस साल की थी, कंटेंट टीम में सीनियर एग्ज़ीक्यूटिव, नोएडा के इस टेक पार्क में पिछले तीन साल से काम कर रही थी।
"नहीं यार, वह सिर्फ खूबसूरत नहीं है," वरुण कह रहा था। "उसमें कुछ है। आज मीटिंग में जब वह प्रेजेंटेशन दे रही थी, मैं तो बस उसे देखता रह गया। मैंने सोचा, काश एक बार..." उसकी आवाज़ धीमी हो गई, और रितु ने आगे सुनने की हिम्मत नहीं की। वह दबे पांव वहां से निकली, लेकिन उसके गाल जल रहे थे और उसकी सांसें तेज़ थीं।
पूरे वीकेंड रितु के दिमाग में वही आवाज़ गूंजती रही। वरुण उसके बारे में ऐसा सोचता था। उसने कभी खुद को इस नज़र से नहीं देखा था। रविवार की रात उसने आईने में खुद को देखा, अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए, और पहली बार अपने शरीर को वरुण की आंखों से देखा।
सोमवार को ऑफिस में रितु ने फैसला किया। वह वरुण से नज़रें नहीं चुराएगी। लंच ब्रेक में जब वह pantry में कॉफी बना रही थी, वरुण आया। "हाय," उसने कहा, अपनी वही मुस्कान लिए।
"हाय," रितु ने जवाब दिया, और सीधे उसकी आंखों में देखा। "शुक्रवार को कॉन्फ्रेंस रूम में तुम फोन पर किसी से मेरी बात कर रहे थे, है ना?"
वरुण का चेहरा एक पल में लाल हो गया। कॉफी का कप उसके हाथ में कांप गया। "रितु, मैं... वह... तुमने सुना?"
"हर शब्द," रितु ने कहा। उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी। "तुमने कहा था कि मैं जिस तरह साड़ी में चलती हूं... आगे क्या था? तुम रुक क्यों गए?"
वरुण ने इधर उधर देखा। Pantry खाली थी। "रितु, मुझे माफ कर दो। वह बस... मैं बकवास कर रहा था।"
"बकवास?" रितु ने एक कदम आगे बढ़ाया। अब वह वरुण के बहुत करीब थी। "तुम्हारी आवाज़ में बकवास नहीं, कुछ और था। सच बताओ, वरुण। तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो?"
वरुण की सांसें तेज़ हो गईं। "मैं सोचता हूं कि तुम इस ऑफिस की सबसे खूबसूरत औरत हो। मैं सोचता हूं कि तुम्हारी साड़ी का पल्लू जब तुम्हारे कंधे से सरकता है, तो मेरा ध्यान कहीं और नहीं जाता। मैं सोचता हूं..." वह रुका।
"आगे बोलो," रितु ने फुसफुसाकर कहा।
"मैं सोचता हूं कि तुम्हें अपनी बाहों में भर लूं और तुम्हें चूमता रहूं जब तक तुम कांपने न लगो," वरुण ने कहा, उसकी आवाज़ भारी हो गई थी।
रितु ने उसका कॉलर पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। उनके होंठ मिले, और तीन साल की अनकही खिंचाव एक पल में फट पड़ी। वरुण ने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया, उसका शरीर उसके शरीर से दबा दिया। रितु ने उसके मुंह में अपनी जीभ घुसा दी, उसके होंठ को काटा।
वरुण के हाथ रितु के ब्लाउज़ के ऊपर उसके स्तनों पर आए, साड़ी के ऊपर से ही उन्हें मसलते हुए। रितु ने एक गहरी सांस ली, अपनी छाती उसके हाथों में धकेलते हुए। "हां," वह हांफते हुए बोली। "ऐसे ही।"
तभी pantry के बाहर किसी के कदमों की आवाज़ आई। वे झटके से अलग हुए, सांसें तेज़, होंठ सूजे हुए। एक जूनियर लड़की पानी लेने आई और चली गई, कुछ समझे बिना। रितु और वरुण एक दूसरे को देखने लगे और हंस पड़े, घबराहट और उत्तेजना का मिला जुला हंसी।
"आज शाम," वरुण ने कहा। "ऑफिस पार्टी है। सब लोग होंगे। लेकिन..."
"लेकिन क्या?" रितु ने पूछा।
"लेकिन पार्टी के बाद, मेरी गाड़ी पार्किंग में होगी। आखिरी वाली। तुम आओगी?" उसकी आंखों में सवाल था।
रितु ने उसकी टाई ठीक की, उसके बहुत करीब आकर। "मैं आऊंगी," उसने कहा। "और वरुण, आज रात साड़ी नहीं पहनूंगी। कुछ ऐसा पहनूंगी जिसमें तुम्हें ज़्यादा मेहनत न करनी पड़े।"
वरुण की आंखें फैल गईं। "रितु, तुम..."
"शाम को मिलते हैं," रितु ने कहा, और अपनी कॉफी लेकर चली गई, अपनी कमर को जानबूझकर ज़्यादा लचकाते हुए। उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा, लेकिन वह जानती थी कि वरुण उसे देख रहा था।
दोपहर में रितु सीढ़ियों से उतर रही थी जब वरुण ऊपर से आ रहा था। सीढ़ियां खाली थीं। वरुण ने उसे दीवार से लगा दिया और एक तेज़, भूखा चुम्बन दिया। उसका हाथ उसकी कमर पर था, उसकी उंगलियां उसकी साड़ी के पल्लू के नीचे उसकी नंगी कमर को छू रही थीं। "शाम तक इंतज़ार नहीं हो रहा," उसने कहा। रितु ने उसके कान में फुसफुसाया, "अच्छी चीज़ों के लिए इंतज़ार करना पड़ता है।" वह उसे तड़पता छोड़कर नीचे उतर गई, अपनी साड़ी का पल्लू जानबूझकर कंधे से थोड़ा सरकाते हुए।
पार्टी से पहले रितु वॉशरूम में तैयार हुई। उसने आईने में खुद को देखा और मुस्कुराई। आज वह सिर्फ एक सीनियर एग्ज़ीक्यूटिव नहीं थी। आज वह वह औरत थी जिसके बारे में वरुण फोन पर बात करता था। उसने अपने होंठों पर गहरा लाल शेड लगाया, अपने बाल खोले, और ड्रेस की ज़िप को जानबूझकर थोड़ा नीचे रखा।
शाम की पार्टी में रितु ने गहरे नीले रंग की छोटी ड्रेस पहनी थी। वरुण ने जब उसे देखा, तो उसका वाइन का गिलास हाथ में रुक गया। पूरी पार्टी में उनकी नज़रें मिलती रहीं, एक खेल चलता रहा। रितु जानबूझकर उससे दूर रही, उसे तड़पाती रही।
रात के दस बजे पार्टी खत्म हुई। रितु ने अपना बैग उठाया और लिफ्ट की तरफ बढ़ी। वरुण पहले से ही पार्किंग में था। उसने रितु को मैसेज किया था: "P2, आखिरी पंक्ति, काली गाड़ी।"
पार्किंग आधी खाली थी, ट्यूबलाइट की पीली रोशनी। रितु ने काली गाड़ी देखी। वरुण ड्राइविंग सीट पर बैठा था। वह पिछली सीट का दरवाज़ा खोलकर अंदर बैठ गई।
"तुम आईं," वरुण ने कहा, उसकी आवाज़ में राहत और उत्तेजना थी।
"मैंने कहा था न," रितु ने जवाब दिया, और उसके ऊपर झुककर उसे चूम लिया।
गाड़ी की पिछली सीट पर वे एक दूसरे पर टूट पड़े। वरुण ने रितु की ड्रेस की ज़िप खोली, और ड्रेस उसके कंधों से सरक गई। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसके भरे हुए स्तन आज़ाद हो गए, निप्पल तने हुए। वरुण ने एक को मुंह में ले लिया, जीभ से निप्पल चाटते हुए, दूसरे को हाथ से मसलते हुए।
रितु ने उसके बाल पकड़ लिए, उसका सिर अपनी छाती में दबा दिया। "चूसो, वरुण, अच्छी तरह चूसो," वह बोली।
रितु के हाथ नीचे सरके। उसने वरुण की पैंट की ज़िप खोली, और उसका हाथ अंदर गया। वरुण का लंड पहले से ही पूरा तना हुआ था, गर्म और सख्त। रितु ने उसे मुट्ठी में पकड़ा और धीरे धीरे हिलाने लगी। वरुण ने एक गहरी गर्जना निकाली।
"तुम्हारे बारे में सोचकर मैंने कितनी रातें गुज़ारी हैं," वरुण ने हांफते हुए कहा।
"अब सोचना बंद करो," रितु ने कहा, और उसकी गोद में बैठ गई। उसने अपनी पैंटी एक तरफ सरकाई और धीरे धीरे उसके लंड पर बैठ गई। दोनों ने एक साथ सांस ली जब वह पूरा अंदर गया।
रितु ऊपर नीचे होने लगी, पहले धीरे, फिर तेज़। गाड़ी हिलने लगी। वरुण ने उसके स्तन पकड़ लिए, निप्पलों को उंगलियों में मरोड़ते हुए। रितु का सिर पीछे ढल गया, उसके मुंह से आनंद की चीखें निकल रही थीं, गाड़ी के बंद शीशों में गूंजती हुईं।
"वरुण, मैं तुम्हारी हूं," वह बोली। "आज रात मैं सिर्फ तुम्हारी हूं।"
"और तुम मेरी," उसने जवाब दिया, उसके कूल्हे पकड़कर उसे और तेज़ उछालते हुए।
वरुण ने उसे पलटा। अब रितु सीट पर घुटनों के बल थी, और वरुण पीछे से उसमें धंस रहा था। उसका एक हाथ उसके बाल पकड़े था, दूसरा उसके स्तन को मसल रहा था। रितु के कूल्हे हर धक्के के साथ हिल रहे थे, और वह खुशी से चीख रही थी।
"मारो मुझे, वरुण, ज़ोर से मारो," वह चीखी। "मेरी चूत की प्यास बुझा दो।"
वे दोनों एक साथ झड़े। रितु की चीख वरुण के कंधे में दब गई, और वरुण की गर्जना उसके कान में। वे सीट पर ढह गए, एक दूसरे की बाहों में, पसीने में तर।
कुछ देर बाद रितु ने अपनी ड्रेस ठीक की। "तो," उसने कहा, मुस्कुराते हुए। "अब तुम्हारी वह फोन वाली बात पूरी हुई?"
वरुण हंसा। "अभी तो शुरुआत है।" उसने उसका हाथ पकड़ा। "रितु, यह सिर्फ आज रात की बात नहीं है। मैं तुम्हें सच में चाहता हूं।"
रितु ने उसके हाथ को अपने गाल से लगाया। "मुझे पता है," उसने कहा। "तभी तो मैं आई थी।"
वरुण ने उसे घर छोड़ा। गाड़ी से उतरते वक्त रितु ने उसे एक आखिरी चुम्बन दिया। "कल ऑफिस में," उसने कहा, "जब तुम मुझे साड़ी में देखोगे, तो याद रखना कि उसके नीचे क्या है।"
वह इमारत की तरफ बढ़ गई, उसकी चाल में एक नई अदा, उसके होंठों पर एक संतुष्ट मुस्कान, और उसके शरीर में एक मीठा दर्द जो उसे सारी रात वरुण की याद दिलाएगा। पीछे गाड़ी में वरुण उसे जाता देखता रहा, और उसने अपना फोन निकाला। अपने दोस्त को मैसेज टाइप किया: "यार, वह बात जो मैंने कही थी... वह सच हो गई।"
सोमवार की सुबह रितु ऑफिस पहुंची तो वरुण पहले से ही अपनी डेस्क पर था। उसने नज़र उठाकर देखा, और दोनों की आंखों में वही रात चमक उठी। रितु ने साड़ी पहनी थी, गहरे हरे रंग की, और जब वह वरुण के डेस्क के पास से गुज़री, तो उसने धीरे से कहा, "याद है मैंने क्या कहा था? साड़ी के नीचे क्या है, यह सिर्फ तुम जानते हो।"
वरुण की सांस अटक गई। उसने रितु का हाथ पकड़ा और उसे खाली कॉन्फ्रेंस रूम में खींच लिया। दरवाज़ा बंद किया। "तुम मुझे पागल कर दोगी," उसने कहा, उसे दीवार से लगाते हुए।
"यही तो इरादा है," रितु ने कहा, और उसे चूम लिया। वरुण के हाथ उसकी साड़ी के अंदर चले गए, उसकी कमर, उसके स्तन। रितु ने उसकी शर्ट के बटन खोले, उसकी छाती को चूमा।
तभी बाहर किसी के कदमों की आवाज़ आई। वे अलग हुए, हांफते हुए, हंसते हुए। "लंच ब्रेक में," वरुण ने कहा। "वही कॉन्फ्रेंस रूम।" रितु ने अपनी साड़ी ठीक की और बाहर निकली, उसके चेहरे पर एक शांत मुस्कान, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
लंच ब्रेक में कॉन्फ्रेंस रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था। टेबल पर झुकी रितु की साड़ी ऊपर उठी हुई थी, और वरुण पीछे से उसमें था, दोनों की सांसें तेज़, दोनों के चेहरे पर संतुष्टि। बाहर ऑफिस चल रहा था, और अंदर उनकी अपनी दुनिया। जब वे बाहर निकले, तो कोई नहीं जानता था कि उस बंद दरवाज़े के पीछे क्या हुआ था। सिर्फ वे दोनों जानते थे, और यही उनका राज़ था।
उस शाम वरुण ने रितु को एक मैसेज भेजा: "आज रात मेरे घर आओ। कोई पार्किंग नहीं, कोई डर नहीं। सिर्फ तुम और मैं, पूरी रात।" रितु ने जवाब दिया: "आठ बजे। और हां, आज भी साड़ी पहनूंगी। तुम्हें उतारने में मज़ा आता है।" वरुण ने फोन रख दिया और मुस्कुराया। यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। यह तो बस शुरुआत थी।
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