पहली बार जब शरीर ने खुद को पूरी तरह खोल दिया घबराहट दर्द और फिर बेकाबू मजे की वो रात जिसने सारी हिचक जला दी
रात के लगभग बारह बज रहे थे। कमरे में सिर्फ बेडसाइड लैंप की हल्की रोशनी थी।
इशा बिस्तर के किनारे बैठी थी। हाथ काँप रहे थे। सामने आरव खड़ा था। दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन आज पहली बार इतने करीब थे।
“डर लग रहा है?” आरव ने धीरे से पूछा।
इशा ने सिर हिलाया। “थोड़ा… बहुत।”
आरव उसके पास आकर बैठ गया। उसने इशा का चेहरा अपने हाथों में लिया और माथे पर चुंबन रखा। फिर होंठों पर। चुंबन धीमा था, जैसे वह उसे तैयार कर रहा हो। इशा की साँसें धीरे-धीरे तेज होने लगीं।
आरव ने उसकी कुर्ती के हुक खोले। एक-एक करके। ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को सहलाने लगा। इशा की आँखें बंद हो गईं। आरव ने ब्रा के हुक खोले और उसे पूरी तरह हटा दिया। पहली बार किसी ने उसके स्तनों को इतनी नजदीक से छुआ था।
आरव ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। इशा की कमर अपने आप तन गई। आरव का हाथ उसके पेट पर से होता हुआ और नीचे चला गया। सालवार के नाड़े को खोला और अंदर हाथ डाल दिया।
इशा पहले से गीली थी। आरव की उंगलियाँ धीरे-धीरे उसके बीच में घूमने लगीं। इशा की साँसें अटकने लगीं। आरव ने एक उँगली अंदर डाली। इशा की भौंहें सिकुड़ गईं।
“दर्द?” आरव ने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन मत रोको।”
आरव ने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। साथ में उसके निप्पल को चूसता रहा। इशा की उंगलियाँ चादर को जकड़ने लगीं। थोड़ी देर में दर्द मजे में बदलने लगा। इशा की कमर अब खुद आरव के हाथ की ओर उठने लगी।
आरव ने उसकी सालवार और पैंटी पूरी तरह उतार दी। इशा अब नंगी थी। आरव ने उसकी जाँघें फैलाईं और अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। इशा की प्रतिक्रिया तुरंत हुई। कमर उछल गई। आरव की जीभ क्लिट पर धीरे-धीरे घूम रही थी। इशा पहली बार ये एहसास कर रही थी। उसकी आवाजें दबी-दबी निकलने लगीं।
कुछ देर बाद आरव ऊपर आया। उसने अपनी टी-शर्ट और पैंट उतारी। इशा की आँखें उसके कड़े अंग पर जाकर रुक गईं। घबराहट साफ दिख रही थी।
आरव उसके ऊपर आ गया। उसने इशा की टाँगें फैलाईं और अपने अंग को उसके बीच में रखा। धीरे-धीरे दबाव बढ़ाने लगा। इशा की भौंहें जोर से सिकुड़ गईं। आँखें बंद हो गईं।
“आरव… दर्द हो रहा है…”
आरव रुक गया। “बोल, रुक जाऊँ?”
इशा ने सिर हिलाया। “नहीं… करते रहो… धीरे-धीरे।”
आरव ने फिर से दबाव बढ़ाया। धीरे-धीरे अंदर जाता गया। इशा के नाखून उसकी पीठ में गड़ गए। जब पूरा अंदर गया तो दोनों की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। आरव कुछ देर बिना हिले रहा। इशा की साँसें सामान्य होने दीं।
फिर उसने बहुत धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। इशा की आँखों से आँसू निकल आए—दर्द के और राहत के। आरव ने उसके आँसू पोंछे और माथे पर चुंबन लिया। गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी।
इशा की टाँगें अब आरव की कमर के चारों ओर लिपटने लगीं। दर्द कम हो रहा था और उसकी जगह एक नई सी जलन ले रही थी। आरव ने उसका एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। इशा की आवाजें अब ज्यादा साफ निकल रही थीं।
“थोड़ा और जोर से…” इशा ने फुसफुसाया।
आरव ने उसकी बात मानी। धक्के थोड़े तेज हो गए। बिस्तर हल्के-हल्के चरमरा रहा था। इशा की साँसें तेज चल रही थीं। उसका शरीर अब खुद आरव के धक्कों का जवाब दे रहा था।
थोड़ी देर बाद इशा का शरीर अकड़ने लगा। पहली बार का चरम आया। उसने आरव को जोर से जकड़ लिया और काँपते हुए सिसकियाँ लेने लगी। आरव ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हांफ रहे थे।
कुछ देर बाद आरव बाहर निकला। इशा की जाँघों के अंदर हल्का खून और उसका अंश मिला हुआ था। आरव ने नरम तौलिया लेकर उसे साफ किया। इशा अभी भी आँखें बंद किए लेटी थी।
“कैसा लग रहा है?” आरव ने पूछा।
इशा मुस्कुराई। आँखें अभी भी बंद थीं। “दर्द हो रहा है… लेकिन… अच्छा लग रहा है।”
आरव उसके बगल में लेट गया और उसे अपनी छाती से लगा लिया। इशा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“फिर से करना है,” उसने धीरे से कहा।
आरव हैरान होकर उसकी ओर देखा। “अभी?”
इशा ने सिर हिलाया। “थोड़ी देर बाद… आज रात फिर से।”
आरव मुस्कुराया। उसने इशा के बालों में उँगली फेरते हुए कहा, “जैसी तुम्हारी इच्छा।”
एक घंटे बाद जब दोनों ने फिर से एक-दूसरे को छुआ, तो इशा की हिचक काफी कम हो चुकी थी। आरव ने उसे इस बार ऊपर बैठाया। इशा ने खुद उसका अंग अपने अंदर लिया। दर्द अभी भी था, लेकिन अब वह खुद ऊपर-नीचे होने लगी थी। आरव के हाथ उसके स्तनों पर थे। इशा की आँखें बंद थीं और होंठ खुले।
दूसरी बार का चरम पहले से ज्यादा लंबा और गहरा था। इशा ने आरव के कंधों को जोर से पकड़ रखा था। आरव ने भी उसके अंदर ही छोड़ दिया।
रात के तीन बज गए थे जब दोनों थककर एक-दूसरे से सट गए। इशा की जाँघों में अभी भी दर्द था, लेकिन उसके चेहरे पर शांति थी।
उसने आरव की छाती पर सिर रखते हुए कहा, “आज मैंने खुद को पूरी तरह खोल दिया… पहली बार।”
आरव ने उसके माथे पर चुंबन लिया। कमरे में पहली बार की वो खामोश सी खुशबू अभी भी बाकी थी। और दोनों जानते थे—ये पहली बार उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।
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