रिश्ते की पहली मुलाकात में ही जब हमने एक-दूसरे को पूरी तरह उतार दिया

S
31 min read0 readers
Font:
0:000:00
Share Story:

रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। होटल के रूफटॉप कैफे में सिर्फ हम दो ही बचे थे।

अनन्या ने वाइन का आखिरी घूँट लिया। सामने वीर बैठा था। परिवारों ने रिश्ता तय करने से पहले “एक बार मिल लो” कहा था। दोनों ने सोचा था सिर्फ औपचारिक बातचीत होगी। लेकिन तीन घंटे, दो बोतल वाइन और बहुत सारी बातों ने हवा बदल दी थी।

वीर ने बिल चुकाया और उठा। “ छोड़ दूँ?”

अनन्या ने खड़े होते हुए कहा, “मेरा ड्राइवर कैंसिल हो गया। तू कहाँ रुक रहा है?”

“यहीं। चौथी मंजिल।”

अनन्या कुछ सेकंड चुप रही। फिर बोली, “मुझे भी थकान हो रही है। लिफ्ट तक तो साथ चल ही सकता है।”

लिफ्ट में दोनों चुप थे। चौथी मंजिल पर वीर रुका। अनन्या भी निकल आई। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। कोई हँसी नहीं, कोई मजाक नहीं। सिर्फ एक भारी सा मौन।

वीर ने कमरे का कार्ड स्वाइप किया। दरवाजा खुला। अनन्या अंदर चली गई। वीर ने दरवाजा बंद किया। ताला भी लगा दिया।

अनन्या ने मुड़कर देखा। “हम पागल हो रहे हैं।”

“हाँ,” वीर ने कहा और एक कदम बढ़ाया।

अगले ही पल दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। चुंबन में वाइन और भूख दोनों थी। अनन्या की ड्रेस का जिपर वीर ने पीछे से खोला। ड्रेस फर्श पर गिर गई। अनन्या ने वीर की शर्ट के बटन खोले और सीने पर हाथ फेरने लगी।

वीर ने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। ब्रा खोली। अनन्या के स्तनों को दोनों हाथों से पकड़कर जोर से मसला। फिर निप्पल को मुँह में ले लिया। अनन्या की कमर तन गई।

“धीरे मत करना,” अनन्या ने हांफते हुए कहा। “आज रात हमें एक-दूसरे को सही से जानना है।”

वीर ने उसकी पैंटी नीचे खींची। अनन्या की जाँघें अपने आप फैल गईं। वीर ने अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। अनन्या की उंगलियाँ उसके बालों में घुस गईं। वीर की जीभ तेज और भूखी थी। वह क्लिट को चूस रहा था, फिर दो उंगलियाँ अंदर डालकर घुमा रहा था।

अनन्या की साँसें तेज हो गईं। “वीर… वहाँ… बस वहीं रख…”

वीर ने और गहराई तक उंगलियाँ दबाईं। अनन्या का शरीर अकड़ गया। पहला चरम आँसू और सिसकी के साथ आया। उसने वीर के बाल जोर से पकड़ रखे थे।

वीर ऊपर आया। अनन्या ने खुद उसकी पैंट के बटन खोले और नीचे की। जब वीर का अंग उसके हाथ में आया तो अनन्या ने उसे अपने होंठों तक ले गई। मुँह में लिया। धीरे-धीरे गहरा। वीर की साँस अटक गई।

थोड़ी देर बाद अनन्या ने उसे छोड़ा और जाँघें फैला दीं। “अब अंदर आ।”

वीर ने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और धीरे-धीरे अंदर घुसना शुरू किया। अनन्या की भौंहें सिकुड़ गईं लेकिन उसने रोका नहीं। जब पूरा अंदर गया तो दोनों की आँखें मिलीं।

“हिल,” अनन्या ने कहा।

वीर ने हिलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। अनन्या की टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। वीर ने झुककर उसके स्तनों को फिर मुँह में लिया। अनन्या की आवाजें अब कमरे में गूँज रही थीं।

“और जोर से वीर… आज सब कुछ देना है।”

वीर ने उसकी बात मान ली। धक्के गहरे और तेज हो गए। बिस्तर चरमरा रहा था। अनन्या की नाखून उसकी पीठ पर चल रहे थे। दूसरा चरम अनन्या का और भी लंबा था। उसने वीर को जोर से जकड़ लिया। वीर ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया।

दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। कुछ देर बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “एक बार और। सुबह होने से पहले हमें खत्म हो जाना है।”

वीर मुस्कुराया। उसने अनन्या को घुटनों के बल किया और पीछे से अंदर आया। इस बार गति शुरू से ही तेज थी। अनन्या ने तकिया दबा लिया। वीर एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए था, दूसरे से उसके स्तन को मसल रहा था।

अनन्या पीछे की ओर जोर से धकेल रही थी। “और… और गहरा…”

वीर ने उसकी कमर और नीचे झुका दी और पूरी ताकत लगा दी। तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। वीर ने फिर से उसके अंदर ही छोड़ दिया।

सुबह चार बजे दोनों थककर बिस्तर पर लेटे थे। अनन्या ने वीर की छाती पर सिर रखा।

“रिश्ता तो अब नहीं होगा,” उसने धीरे से कहा।

वीर ने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “रिश्ता नहीं। लेकिन ये रात… ये तो हो गई।”

अनन्या मुस्कुराई। “हाँ। और ये रात काफी थी।”

वीर ने उसका चेहरा उठाया और फिर से चूमा। दोनों जानते थे कि सुबह वे अलग-अलग निकलेंगे। परिवारों को ना कह देंगे। लेकिन जो कुछ आज रात हुआ था, वह दोनों की त्वचा पर हमेशा के लिए छप चुका था।

Rate this story

🔥 NEXT CHAPTER IN LINE

One Night Stand

एक रात का खेल अनजान लड़की के साथ जब क्लब से होटल तक बिना नाम पूछे कपड़े उतरने लगे और सिर्फ गंदी भूख चली

क्लब में नज़रें मिलीं। नाम तक नहीं पूछा। होटल के कमरे में जाते ही कपड़े उतरने लगे। सिर्फ एक रात का गंदा और बेकाबू खेल।

Read Next Story

Readers who enjoyed “रिश्ते की पहली मुलाकात में ही जब हमने एक-दूसरे को पूरी तरह उतार दिया” also read

8 curated stories
One Night Standहिंदी (Hindi)

हिंदी ट्रेन सेक्स कहानी: दिल्ली से लखनऊ की रात भर की कहानी

दिल्ली से लखनऊ जा रही सुनीता की ट्रेन में मुलाकात होती है फोटोग्राफर रोहन से। आधी रात के बाद खाली वेस्टिब्यूल में जो होता है, वह उसकी ज़िंदगी की सबसे यादगार रात बन जाती है।

⏱️ 11 min read•👁️ 1 views
One Night Standहिंदी (Hindi)

कर्फ्यू वाली रात जब गेस्ट हाउस में सिर्फ हम दो बचे थे

अचानक कर्फ्यू, खाली गेस्ट हाउस और दो अजनबी। जब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा तो अंदर की भूख जाग उठी।

⏱️ 31 min read•👁️ 0 views
One Night Standहिंदी (Hindi)

ट्रेन की उस खाली कॉपी में जब दो अजनबियों ने पूरी रात एक-दूसरे को खोजा

रात की गाड़ी, खाली 2AC कॉपी और दो अजनबी। जब दरवाजा अंदर से लॉक हुआ तो समय ने सारी सीमाएँ मिटा दीं।

⏱️ 33 min read•👁️ 0 views
One Night Standहिंदी (Hindi)

एक रात का भूखा वादा जब दो अजनबियों ने होटल रूम में सारी सीमाएँ मिटा दीं और सिर्फ शरीर की भाषा चली

अजनबी शहर, एक होटल रूम और दो शरीर जिन्होंने सिर्फ एक रात के लिए सारी सीमाएँ मिटा दीं। कोई नाम नहीं, कोई कल नहीं—सिर्फ आज की आग।

⏱️ 27 min read•👁️ 0 views
Rough & Dirtyहिंदी (Hindi)

ज़बरदस्त रात जब उसने बाल खींचकर चोदा और साफ कहा कि आज नर्मियत नहीं चलेगी सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स

उसने मेरा बाल पकड़कर खींचा और बोली – आज नर्मियत नहीं चलेगी। फिर जो हुआ वो सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स था।

⏱️ 9 min read•👁️ 37 views
Hardcore Desiहिंदी (Hindi)

नौकरानी की चुदाई: दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर

राहुल और उसकी कामवाली गौरी की ये कहानी दिवाली की सफ़ाई वाली दोपहर में दीवान हिलाने की मदद मांगने से शुरू हुई, और बेकाबू होती चली गई।

⏱️ 11 min read•👁️ 23 views
Hotwife / Cuckoldहिंदी (Hindi)

जब पति ने खुद मुझे किसी और के हवाले कर दिया और दोनों की सीमाएँ मिटा दीं हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात

एक पति की इच्छा, एक पत्नी का समर्पण और एक तीसरा व्यक्ति जिसने दोनों की सीमाएँ मिटा दीं। हॉटवाइफ की सबसे खुली और तीव्र रात।

⏱️ 29 min read•👁️ 21 views
Hotwife / Cuckoldहिंदी (Hindi)

पत्नी को दूसरे के साथ देखना मेरी छुपी हुई हवस जब मैंने खुद कहा और दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था

मैंने खुद अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के साथ सोने के लिए कहा। दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा। जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था।

⏱️ 5 min read•👁️ 17 views