होटल के उस कमरे में जब हमने सारी सीमाएँ तोड़ दीं बिना नाम जाने एक-दूसरे को पूरी तरह निगल लिया रफ और डर्टी
बारिश बहुत तेज हो रही थी। होटल की लॉबी में खड़ी तार्या ने अपनी गीली ड्रेस ठीक की। तभी पीछे से आवाज आई—
“टैक्सी नहीं मिलेगी अब। मेरे कमरे में चलोगी?”
तार्या ने मुड़कर देखा। लंबा आदमी, गीली शर्ट शरीर से चिपकी हुई, आँखों में साफ इरादा। उसने नाम नहीं पूछा। सिर्फ सिर हिलाया।
लिफ्ट में दोनों चुप रहे। कमरा 412। दरवाजा बंद होते ही तार्या ने खुद ताला लगा दिया। आदमी ने एक कदम बढ़ाया। तार्या दीवार से सट गई। उसने उसका गला पकड़ा और जोर से चूमा। चुंबन में दाँत टकराए। तार्या की ड्रेस का जिपर एक झटके में खुल गया।
आदमी ने ड्रेस को कंधों से नीचे सरकाया। ब्रा को फाड़ दिया। दोनों स्तनों को जोर से मसलने लगा। निप्पल्स को उँगलियों से मरोड़ा, फिर मुँह में लेकर दाँतों से काटा। तार्या की सिसकी निकल गई।
“और जोर से,” उसने खुद कहा।
आदमी ने उसे उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया। तार्या की जाँघें खुली पड़ी थीं। आदमी ने बिना देर किए अपनी जीभ उसके बीच में धँस दी। तार्या की कमर जोर से उछली।
आदमी की जीभ तेज और बेकाबू थी। वह क्लिट को जोर-जोर से चूस रहा था, फिर तीन उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिला रहा था। तार्या के नाखून चादर में गड़ गए।
“आह्ह… रुक मत… और अंदर…”
आदमी नहीं रुका। उसकी जीभ और उंगलियाँ और तेज हो गईं। तार्या का शरीर अकड़ गया और वह जोर से काँपते हुए चरम पर पहुँच गई। उसकी आवाज कमरे में गूँज गई।
आदमी ऊपर आया। उसने अपनी पैंट एक झटके में उतारी। तार्या की आँखें उसके मोटे, कड़े अंग पर फट गईं। आदमी ने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और एक ही धक्के में पूरा अंदर घुस गया।
तार्या चीख पड़ी। “आह्ह… बहुत मोटा… दर्द हो रहा है…”
आदमी रुका नहीं। उसने कमर पकड़कर पूरी ताकत से धक्के लगाने लगे। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था। हर धक्का इतना गहरा था कि तार्या की छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आदमी ने उसके दोनों स्तनों को पकड़ रखा था और निप्पल्स को मरोड़ रहा था।
“बोल… कितना सह सकती है?” आदमी ने गुर्राते हुए पूछा।
“पूरा… तोड़ दो मुझे…” तार्या की आवाज टूट रही थी।
आदमी ने उसकी टाँगें और फैला दीं और पूरी ताकत से मारने लगा। तार्या की आवाजें अब बेकाबू हो चुकी थीं। आदमी ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और और तेज हो गया।
थोड़ी देर बाद आदमी ने उसे पलटा। तार्या अब घुटनों के बल थी। आदमी ने पीछे से फिर से अंदर घुस गया—इस बार और गहरा। उसने तार्या के बाल पकड़ लिए और जोर से खींचे। हर धक्के के साथ तार्या की गर्दन पीछे की ओर झुक रही थी।
आदमी ने उसके नितंबों पर जोरदार थप्पड़ मारे। आवाज कमरे में गूँज रही थी। तार्या और जोर से पीछे की ओर धकेलने लगी।
“और जोर से… पूरा ले लो…”
आदमी ने उसकी कमर और नीचे झुका दी और पूरी शक्ति लगा दी। तार्या का दूसरा चरम इतना तेज था कि उसके पैर लड़खड़ा गए। आदमी ने भी उसी समय उसके अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया। गर्म और गाढ़ा अंश उसके अंदर भर गया।
दोनों बिस्तर पर गिरे पड़े थे। पसीने से लथपथ। तार्या की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं।
आदमी ने उसका स्तन सहलाते हुए कहा, “रात अभी बाकी है।”
तार्या ने आँखें बंद किए हुए जवाब दिया, “तो फिर से शुरू करो।”
रात के दो बजे आदमी ने तार्या को दीवार से सटाया। एक टाँग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े अंदर घुस गया। तार्या की पीठ दीवार से रगड़ रही थी। आदमी के धक्के इतने तेज थे कि तस्वीरें हिलने लगीं। तार्या की आवाजें दबाने की कोशिश भी नहीं हो रही थीं।
तीसरा चरम दोनों का एक साथ आया। तार्या की आँखें पीछे की ओर फिर गईं। आदमी ने उसके अंदर ही छोड़ दिया।
सुबह चार बजे आदमी ने फिर से तार्या को लिया—इस बार उसके मुँह में। तार्या घुटनों के बल थी। आदमी ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से आगे-पीछे किया। गला तक। तार्या की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन उसने रोका नहीं।
जब आदमी ने आखिरी बार उसके मुँह में छोड़ा, तार्या का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था। जाँघों के अंदर और गले में उसका अंश था। पूरे शरीर पर नाखूनों, दाँतों और थप्पड़ों के निशान थे।
आदमी कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले उसने तार्या के गाल पर उँगली फेरी। “नाम?”
तार्या मुस्कुराई। “कोई जरूरत नहीं। ये सिर्फ एक रात थी।”
दरवाजा बंद होते ही तार्या ने आँखें बंद कर लीं। शरीर में दर्द था, लेकिन वो दर्द मीठा था। होटल के उस कमरे में उस रात जो सीमाएँ टूटी थीं, वे अब वापस नहीं आने वाली थीं।
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