गर्लफ्रेंड की सील शादी से पहली रात तोड़ी: लखनऊ में श्रेया और आदित्य की आखिरी रात
श्रेया ने आदित्य के कमरे की पुरानी अलमारी का दराज खोला तो उसकी उँगलियों से एक छोटा मखमली डिब्बा छू गया और वह एक पल के लिए साँस लेना भूल गई, क्योंकि उसी रात गर्लफ्रेंड की सील शादी से पहली रात तोड़ी जाने वाली थी और वह इस सच को अपने भीतर दबाकर उससे मिलने आई थी। डिब्बे का कपड़ा सालों पुराना था, उसका रंग हल्का पड़ गया था, पर उसके अंदर रखी चीज़ की खुशबू अब भी वैसी ही थी जैसी पहली बार मिली थी। श्रेया ने डिब्बा हथेली पर रखा, उसकी धड़कन तेज हो गई और दरवाजे पर खड़े आदित्य की आँखें उस पर टिक गईं।
आदित्य ने धीमी आवाज़ में कहा कि वह डिब्बा उसने कभी फेंका नहीं, उसने इसे हर उस रात संभालकर रखा जब श्रेया की याद उसे सोने नहीं देती थी। श्रेया ने डिब्बा खोला तो अंदर एक पतली चाँदी की चूड़ी थी, एक सूखा गुलाब था और एक छोटा कागज़ था जिस पर आदित्य की लिखावट में सिर्फ उसका नाम था। उसकी आँखें भर आईं, उसने कागज़ को छाती से लगाया और कहा कि कल उसकी शादी है, पर आज रात वह झूठ नहीं बोलना चाहती। आदित्य ने उसका हाथ पकड़ा, उसकी उँगलियों की कँपकँपाहट महसूस की और उसे अपने करीब खींच लिया।
लखनऊ के उस पुराने मकान में रात गहरी हो रही थी, बाहर गली सुनसान थी और घर के अंदर सिर्फ एक पीली रोशनी जल रही थी। श्रेया का लहंगा नहीं, बल्कि एक सादा सलवार सूट था, क्योंकि वह सीधे अपनी मंगेतर के घर से बहाना बनाकर निकली थी। आदित्य के फ्लैट की खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी, पर्दा हल्के से हिल रहा था और दोनों के बीच सालों की दूरी एक ही पल में टूट गई। श्रेया ने कहा कि वह सिर्फ अलविदा कहने आई थी, पर आदित्य ने मुस्कुराकर कहा कि अलविदा कभी इस तरह नहीं कहा जाता।
आदित्य ने श्रेया के गाल को छुआ, उसकी त्वचा गर्म थी और उसकी साँसें तेज चल रही थीं। श्रेया ने उसकी आँखों में देखा, वहाँ गुस्सा नहीं था, सिर्फ एक पुरानी चाहत थी जो कभी मरी नहीं थी। उसने आदित्य की कमीज़ का कॉलर पकड़ा, उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह चुंबन धीमा नहीं था, यह भूखा था, सालों से रुकी हुई प्यास जैसा था और आदित्य ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा, उसे दीवार से लगाया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ फिराए।
श्रेया की साँसें अब और तेज हो गईं, उसने आदित्य के बालों में उँगलियाँ फँसा लीं और उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा कि वह आज रात पूरी तरह उसकी है। आदित्य ने उसके सूट की कुर्ती के बटन एक एक करके खोले, उसकी त्वचा पर अपनी उँगलियाँ फिराईं और उसके पेट की गर्मी महसूस की। श्रेया ने अपनी आँखें बंद कीं, उसका शरीर काँप रहा था और उसकी छाती तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। आदित्य ने उसकी ब्रा का हुक खोला, उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया और उन्हें धीरे धीरे दबाया।
आदित्य ने श्रेया की सलवार का नाड़ा खोला, उसे नीचे खिसकाया और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया। श्रेया की चूत पहले से गीली थी, उसकी पैंटी का कपड़ा भीग चुका था और आदित्य की उँगलियों के दबाव पर वह और भीग गई। श्रेया ने अपनी टाँगें फैलाईं, आदित्य को अपने करीब खींचा और कहा कि वह अब और इंतज़ार नहीं कर सकती। आदित्य ने उसकी पैंटी उतारी, उसे एक ओर फेंका और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
श्रेया ने बिस्तर की चादर को मुट्ठियों में भींच लिया, उसकी कमर ऊपर उठ गई और उसके मुँह से तेज़ आहें निकलने लगीं। आदित्य की जीभ उसकी चूत के हर हिस्से पर घूम रही थी, कभी उसके दाने को छेड़ती, कभी अंदर तक जाती और श्रेया का शरीर लहरों की तरह हिल रहा था। उसने कहा कि आदित्य रुक मत, और तेज़ कर, मुझे आज पूरी रात यही चाहिए। आदित्य ने उसकी बात मानी, अपनी जीभ की रफ़्तार बढ़ाई, एक उँगली उसकी चूत में डाली और अंदर बाहर करने लगा।
श्रेया का पहला चरम करीब आ गया, उसकी टाँगें काँपने लगीं, उसकी साँस रुक रुककर चलने लगी और फिर वह एक ज़ोर की चीख के साथ झड़ गई। उसका पानी आदित्य के मुँह पर लग गया, आदित्य ने उसे चाटकर साफ़ किया और मुस्कुराकर उसके ऊपर आ गया। श्रेया ने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, उसके मुँह में अपनी ही गीलापन का स्वाद चखा और उसे और कसकर पकड़ लिया। आदित्य ने अपनी पैंट उतारी, अपना लंड बाहर निकाला और उसे श्रेया की चूत के मुँह पर रगड़ने लगा।
श्रेया ने आदित्य के लंड को अपने हाथ में लिया, वह कड़ा था, गर्म था और उसकी नसें उभरी हुई थीं। उसने उसे धीरे धीरे हिलाया, उसके टोपे पर अपनी उँगली फिराई और आदित्य की आँखें बंद हो गईं। आदित्य ने कहा कि वह उसे अंदर लेना चाहता है, पर श्रेया ने कहा कि पहले वह उसे अपने मुँह में लेना चाहती है। उसने आदित्य के लंड को अपने मुँह में लिया, उसे चूसने लगी, अपनी जीभ उसके चारों ओर घुमाई और आदित्य ने उसके बाल पकड़कर धीरे धीरे धक्के दिए।
श्रेया धीरे धीरे नीचे बैठी, आदित्य का लंड उसकी चूत में घुसने लगा और दोनों ने एक साथ गहरी साँस ली। उसकी चूत टाइट थी, गीली थी और लंड के अंदर जाते ही उसने उसे कसकर जकड़ लिया। श्रेया ने अपनी कमर हिलानी शुरू की, पहले धीरे, फिर तेज़, और आदित्य ने उसके स्तनों को पकड़कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ थी, बिस्तर की चरमराहट थी और श्रेया की आहें थीं।
आदित्य ने नीचे से धक्के देने शुरू किए, हर धक्के के साथ उसका लंड श्रेया की चूत में और गहरा जाता और श्रेया की आँखें बंद हो जातीं। श्रेया ने कहा कि यही वह रात है जिसका वह सालों से इंतज़ार कर रही थी, यही वह पल है जब वह पूरी तरह उसकी हो गई। आदित्य ने उसकी कमर को पकड़ा, उसे ऊपर उठाया और फिर नीचे पटका, उसकी चूत से गीलापन टपकने लगा और दोनों के जाँघें भीग गईं। श्रेया ने अपनी रफ़्तार और बढ़ाई, वह अब लगभग उछल रही थी, उसके स्तन हवा में हिल रहे थे।
पहली चुदाई का यह दौर लंबा चला, श्रेया ने आदित्य के कंधों को पकड़ा, उसके होंठों को चूमा और फिर वह एक बार फिर ज़ोर से झड़ गई। उसकी चूत ने आदित्य के लंड को बार बार सिकोड़ा, आदित्य ने भी अपने को रोक नहीं पाया और उसने अपना पानी श्रेया की चूत के अंदर ही छोड़ दिया। दोनों एक दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें धीरे धीरे सामान्य हुईं और श्रेया ने आदित्य के सीने पर अपना सिर रख दिया। आदित्य ने उसके बालों में हाथ फिराया, कहा कि वह उसे कभी भूल नहीं पाया।
कुछ देर बाद श्रेया उठी, उसने पानी पिया, आदित्य के दिए हुए तौलिए से अपना शरीर पोंछा और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई। आदित्य पीछे से आया, उसे कमर से पकड़ा, उसकी गर्दन को चूमा और उसके स्तनों को फिर से अपने हाथों में लिया। श्रेया ने उसकी ओर मुड़कर कहा कि रात अभी खत्म नहीं हुई, उसे और चाहिए। आदित्य ने उसे खिड़की से सटाकर खड़ा किया, उसकी एक टाँग उठाई और पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।
दूसरी चुदाई में आदित्य ने श्रेया को घुमाया, उसे खिड़की से हटाकर मेज़ के पास ले गया और उसे मेज़ पर बिठा दिया। श्रेया की टाँगें आदित्य की कमर के चारों ओर लिपट गईं, आदित्य ने फिर से उसकी चूत में अपना लंड डाला और तेज़ तेज़ धक्के देने लगा। मेज़ हिलने लगी, उस पर रखा मखमली डिब्बा भी हिल गया और श्रेया ने हँसकर कहा कि वह डिब्बा भी उनकी कहानी देख रहा है। आदित्य ने उसके होंठों को चूमा, उसकी जीभ को अपनी जीभ से उलझाया और उसकी चूत में अपना लंड पूरी ताकत से चलाया।
दोनों ने फिर एक दूसरे को गले लगाया, आदित्य ने श्रेया को बाथरूम तक ले जाकर उसके शरीर को गीले तौलिए से साफ़ किया। श्रेया ने आदित्य के सीने पर पानी की बूँदें देखीं, उन्हें अपनी जीभ से चाटा और कहा कि वह उसे नहाते हुए भी देखना चाहती है। आदित्य ने शॉवर खोला, दोनों उसके नीचे खड़े हो गए, गर्म पानी उनके शरीरों पर बहने लगा और श्रेया ने आदित्य के लंड को फिर से अपने हाथ में ले लिया। पानी की धार में उसका लंड फिर कड़ा हो गया, श्रेया ने उसे हिलाना शुरू किया और आदित्य ने उसकी चूत में उँगलियाँ डाल दीं।
शॉवर के नीचे तीसरी चुदाई शुरू हुई, आदित्य ने श्रेया को दीवार से लगाया, उसकी एक टाँग अपनी कमर पर उठाई और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। पानी उनके बीच से बह रहा था, उनकी त्वचा फिसल रही थी और हर धक्का और भी गहरा लग रहा था। श्रेया ने आदित्य की गर्दन को चूमा, उसके कान को काटा और कहा कि वह उसे अपनी शादी की रात से पहले पूरी तरह पाना चाहती है। आदित्य ने कहा कि वह पहले ही उसकी है, और उसने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी।
रात के दो बजे के करीब आदित्य ने श्रेया को फिर बिस्तर पर लिटाया, इस बार धीरे से, बिना जल्दबाज़ी के। उसने श्रेया के पूरे शरीर को चूमा, उसके माथे से लेकर उसकी उँगलियों तक, और श्रेया ने उसकी इस कोमलता पर अपनी आँखें बंद कर लीं। आदित्य ने उसकी चूत को फिर सहलाया, वह अब भी गीली थी, और उसने अपना लंड धीरे धीरे उसकी चूत में डाला। इस बार धक्के धीमे थे, गहरे थे, और हर धक्के के साथ दोनों एक दूसरे का नाम फुसफुसा रहे थे।
धीरे धीरे रफ़्तार फिर बढ़ी, श्रेया ने अपनी टाँगें आदित्य की पीठ पर कस लीं, आदित्य ने उसके स्तनों को चूमा और दोनों का चरम एक साथ आया। श्रेया ने आदित्य के कंधे को काटा, आदित्य ने अपना पानी उसकी चूत में छोड़ा और दोनों एक दूसरे से लिपटकर पड़े रहे। श्रेया ने कहा कि अब वह समझ गई है कि सील टूटना क्या होता है, यह सिर्फ शरीर की बात नहीं, यह किसी को पूरी तरह सौंप देने की बात है। आदित्य ने उसके माथे को चूमा, कहा कि वह उसे हमेशा ऐसे ही संभालकर रखेगा, चाहे वह कहीं भी रहे।
सुबह के करीब चार बजे श्रेया की आँख खुली, आदित्य सो रहा था, उसका एक हाथ श्रेया की कमर पर था। श्रेया ने चुपचाप उठकर अपने कपड़े पहने, अपने बाल सँवारे और मेज़ पर रखा मखमली डिब्बा देखा। डिब्बा अब भी खुला था, चूड़ी और गुलाब अब भी उसके अंदर थे, और श्रेया ने उसे धीरे से बंद कर दिया। उसने डिब्बे को अपनी हथेली पर रखा, उसे एक बार चूमा और फिर उसे वहीं मेज़ पर रख दिया, क्योंकि वह जानती थी कि वह डिब्बा आदित्य की यादों का घर है।
श्रेया ने अपनी उँगली से सगाई की अँगूठी उतारी, उसे देर तक देखा, उसकी चमक अब उसे भारी लग रही थी। उसने अँगूठी को मेज़ पर, मखमली डिब्बे के ठीक बगल में रख दिया, और उसके पास एक छोटा सा पल ठहर गई। आदित्य की साँसें अब भी धीमी थीं, कमरे में रात की महक अब भी थी और श्रेया ने दरवाज़े की ओर बढ़ने से पहले एक बार पीछे मुड़कर उसे देखा। उसने कोई आवाज़ नहीं की, कोई वादा नहीं किया, बस अपनी अँगूठी वहीं छोड़कर धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया।
रात के बीच में जब दोनों थोड़ी देर के लिए बिस्तर से उठे तो आदित्य श्रेया को हाथ पकड़कर अपने फ्लैट के छोटे से सोफ़े तक ले गया, वहाँ की नरम गद्दी पर उसने उसे धीरे से बिठाया और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। श्रेया ने उसकी ओर देखा, उसके चेहरे पर थकान नहीं थी, सिर्फ एक और चाहत थी जो अभी पूरी नहीं हुई थी। आदित्य ने उसकी टाँगों को फैलाया, उसकी चूत को अपने हाथों से सहलाया और कहा कि वह उसे इस सोफ़े पर भी अपना बनाना चाहता है। श्रेया ने हँसकर कहा कि वह आज रात हर जगह उसकी है, और उसने आदित्य के सिर को अपने करीब खींच लिया।
आदित्य ने श्रेया की चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया, उसकी जीभ धीरे धीरे घूम रही थी और श्रेया की कमर सोफ़े पर हिलने लगी। उसने आदित्य के बाल पकड़े, उसे और करीब किया और कहा कि वह उसे ऐसे ही महसूस करना चाहती है, बिना रुके। आदित्य ने एक उँगली उसकी चूत में डाली, फिर दूसरी, और अंदर बाहर करते हुए उसकी जीभ से उसके दाने को छेड़ता रहा। श्रेया की आहें सोफ़े के कमरे में गूँजने लगीं, उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपने शरीर को आदित्य की ओर सौंप दिया।
कुछ ही देर में श्रेया झड़ गई, उसका पानी आदित्य के मुँह पर लग गया और आदित्य ने उठकर उसे अपने ऊपर बिठा लिया। श्रेया ने आदित्य के लंड को अपनी चूत के मुँह पर रखा, धीरे धीरे नीचे बैठी और उसके लंड को पूरी तरह अपने अंदर ले लिया। सोफ़े की गद्दी नरम थी, इसलिए हर धक्का गहरा लग रहा था, श्रेया की कमर ऊपर नीचे हो रही थी और आदित्य ने उसके स्तनों को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया। श्रेया ने कहा कि उसे यह अंदाज़ बहुत पसंद है, क्योंकि इसमें वह आदित्य की आँखों में देख सकती है।
आदित्य ने नीचे से धक्के दिए, श्रेया ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई और दोनों की साँसें एक साथ तेज़ हो गईं। श्रेया के स्तन आदित्य के चेहरे से टकरा रहे थे, आदित्य ने उन्हें चूमा, उनके निप्पल को मुँह में लिया और श्रेया एक बार फिर चीखकर झड़ गई। आदित्य ने भी उसे कसकर पकड़ा, अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया और दोनों सोफ़े पर एक दूसरे से लिपटकर पड़े रहे। श्रेया ने उसके सीने पर अपना सिर रखा, कहा कि यह रात उसे हमेशा याद रहेगी, और आदित्य ने उसके बालों को चूमकर उसे अपने करीब और खींच लिया।
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