सolo ट्रिप की उस रात जब लोकल गाइड ने मेरी सारी अकेलापन मिटा दी
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। पहाड़ी होमस्टे में सन्नाटा था। पति शहर में था। आंचल अकेली बैठी थी। त्रिप का प्लान सolo था, लेकिन अकेलापन भारी लग रहा था।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। भuvan था—लोकल गाइड। सुबह से ट्रैकिंग पर साथ था। शाम को उसने कहा था कि रात को चेक करने आएगा।
“सब ठीक है ना?” भuvan ने पूछा।
आंचल ने सिर हिलाया। “आ जाओ। चाय पी लो।”
भuvan अंदर आया। दोनों ने चाय पी। बातें हल्की थीं। फिर खामोशी हो गई। आंचल ने अचानक कहा, “आज मत जाना। रुके रहो।”
भuvan की आँखें थोड़ी चौड़ी हुईं। आंचल ने खुद आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ा। “बस एक रात। कोई पूछेगा नहीं।”
भuvan ने दरवाजा बंद किया। आंचल ने खुद अपनी कुर्ती के हुक खोले। भuvan ने उसे दीवार से सटाया और चूमा। चुंबन में पहाड़ी ठंड और भूख दोनों थी। आंचल की ब्रा खुल गई। भuvan ने स्तनों को जोर से मसलना शुरू किया। निप्पल को मुँह में ले लिया।
आंचल की सिसकी निकल गई। भuvan ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। सालवार और पैंटी उतार दी। आंचल की जाँघें फैल गईं। भuvan ने अपनी जीभ उसके बीच में रख दी। आंचल ने तकिया दबा लिया। भuvan की जीभ तेज और गहरी थी।
थोड़ी देर में आंचल का पहला चरम आ गया। भuvan ऊपर आया। उसने अपनी पैंट खोली। आंचल ने खुद उसका अंग पकड़कर अपने अंदर की ओर गाइड किया। भuvan ने धीरे-धीरे पूरा अंदर ले लिया।
“हिलो…” आंचल ने कहा।
भuvan ने हिलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। आंचल की टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। भuvan ने झुककर उसके स्तनों को फिर मुँह में लिया। आंचल की आवाजें अब कमरे में गूँज रही थीं।
“और जोर से भuvan…”
भuvan ने उसकी कमर पकड़ ली और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगे। बिस्तर चरमरा रहा था। आंचल का दूसरा चरम और भी तेज था। उसने भuvan को जोर से जकड़ लिया। भuvan ने भी उसी समय उसके अंदर ही छोड़ दिया।
दोनों हांफते हुए बिस्तर पर लेटे रहे। कुछ देर बाद आंचल ने कहा, “एक बार और। सुबह होने में समय है।”
भuvan मुस्कुराया। उसने आंचल को घुटनों के बल किया। पीछे से फिर से अंदर आया। इस बार शुरू से ही तेज। आंचल ने तकिया दबा लिया। भuvan एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए था, दूसरे से उसके नितंबों पर थप्पड़ मार रहा था।
आंचल पीछे की ओर जोर से धकेल रही थी। “और… पूरा…”
भuvan ने उसकी कमर और नीचे झुका दी। तीसरा चरम दोनों का लगभग एक साथ आया। भuvan ने फिर से उसके अंदर ही छोड़ दिया।
रात के एक बज गए थे। दोनों फिर से करीब आए। इस बार आंचल ने भuvan के ऊपर बैठकर खुद गति तय की। भuvan के हाथ उसके स्तनों पर थे। आंचल जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रही थी। चौथा चरम और भी भारी था।
सुबह जब भuvan जाने लगा, आंचल ने उसका हाथ पकड़ लिया। “कल फिर ट्रैकिंग पर… और रात को भी।”
भuvan ने सिर हिलाया। “जैसी आज्ञा।”
आंचल मुस्कुराई। सolo ट्रिप की अकेलापन उस रात मिट चुकी थी। और शरीर की प्यास अब और रातों की माँग कर रही थी।
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