पति के दोस्त ने जब मेरी हर सीमा को पार कर दिया एक रात की गलती ने दोनों को इतना गहरा बाँध दिया कि पीछे मुड़ना नामुमकिन हो गया
रात के साढ़े बारह बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। पति ऑफिस ट्रिप पर था और तीन दिन बाद ही लौटना था।
मेहर सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी। तभी फोन बजा। स्क्रीन पर नाम था—यश। पति का सबसे पुराना दोस्त।
“अभी आ सकता हूँ?” यश की आवाज सीधी थी।
मेहर की साँस रुक गई। पिछले दो महीनों से जो चल रहा था, वह अब और गहरा होने वाला था। उसने सिर्फ इतना कहा, “आ जा।”
पंद्रह मिनट बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। मेहर ने खोला। यश अंदर आया और पीछे से ताला लगा दिया। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। कोई नमस्ते नहीं। यश ने एक कदम बढ़ाया और मेहर का गला पकड़ लिया। चुंबन तुरंत हिंसक हो गया।
मेहर की साड़ी का पल्लू फर्श पर गिर गया। यश ने उसका ब्लाउज ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से ही स्तनों को जोर-जोर से मसलने लगा। फिर ब्रा को नीचे खींचा और निप्पल को मुँह में ले लिया। दाँतों से काटा। मेहर की सिसकी निकल गई।
“यश… धीरे…”
“धीरे नहीं होगा आज,” यश ने कहा और उसे सोफे पर धकेला। साड़ी और पेटीकोट एक साथ उतर गए। पैंटी को फाड़ दिया। मेहर की जाँघें खुली पड़ी थीं।
यश ने उसकी जाँघें फैलाईं और अपनी जीभ उसके बीच में धँस दी। मेहर की कमर उछल गई। यश की जीभ तेज और भूखी थी। वह क्लिट को जोर-जोर से चूस रहा था, फिर तीन उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिला रहा था। मेहर के नाखून सोफे को जकड़ गए।
“आह्ह… यश… रुक मत…”
यश नहीं रुका। उसकी जीभ और उंगलियाँ और तेज हो गईं। मेहर का शरीर अकड़ गया और वह जोर से काँपते हुए चरम पर पहुँच गई। उसकी आवाज घर में गूँज गई।
यश ऊपर आया। उसने अपनी पैंट खोली। मेहर की आँखें उसके मोटे अंग पर टिक गईं। यश ने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और एक ही धक्के में पूरा अंदर घुस गया।
मेहर चीख पड़ी। “आह्ह… बहुत गहरा…”
यश रुका नहीं। उसने कमर पकड़कर पूरी ताकत से धक्के लगाने लगे। सोफा जोर-जोर से चरमरा रहा था। हर धक्का इतना तीव्र था कि मेहर की छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। यश ने उसके दोनों स्तनों को पकड़ रखा था और निप्पल्स को मरोड़ रहा था।
“बोल… कितना चाहिए?” यश ने गुर्राते हुए पूछा।
“पूरा… तोड़ दो…” मेहर की आवाज टूट रही थी।
यश ने उसकी टाँगें और फैला दीं और पूरी ताकत से मारने लगा। मेहर की आवाजें अब बेकाबू हो चुकी थीं। यश ने उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया और और तेज हो गया।
थोड़ी देर बाद यश ने उसे पलटा। मेहर अब घुटनों के बल थी। यश ने पीछे से फिर से अंदर घुस गया—इस बार और गहरा। उसने मेहर के बाल पकड़ लिए और जोर से खींचे। हर धक्के के साथ मेहर की गर्दन पीछे की ओर झुक रही थी।
यश ने उसके नितंबों पर जोरदार थप्पड़ मारे। आवाज पूरे घर में गूँज रही थी। मेहर और जोर से पीछे की ओर धकेलने लगी।
“और जोर से… यश… पूरा ले लो…”
यश ने उसकी कमर और नीचे झुका दी और पूरी शक्ति लगा दी। मेहर का दूसरा चरम इतना तेज था कि उसके पैर लड़खड़ा गए। यश ने भी उसी समय उसके अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया। गर्म और गाढ़ा अंश उसके अंदर भर गया।
दोनों सोफे पर गिरे पड़े थे। पसीने से लथपथ। मेहर की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं।
यश ने उसका स्तन सहलाते हुए कहा, “आज रात यहीं रुकोऊँगा।”
मेहर ने आँखें बंद किए हुए जवाब दिया, “रुक जा… सुबह तक।”
रात के दो बजे दोनों बेडरूम में चले गए। इस बार मेहर खुद यश के ऊपर बैठ गई। उसने उसका अंग अपने अंदर लिया और जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। यश के हाथ उसके स्तनों पर थे। मेहर की आँखें बंद थीं और मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं।
यश ने उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के लगाने लगा। मेहर की गति और तेज हो गई। तीसरा चरम दोनों का एक साथ आया। मेहर यश की छाती पर गिर गई।
सुबह चार बजे यश ने फिर से मेहर को पेट के बल लिटाया और पीछे से लिया। इस बार और भी बेकाबू। थप्पड़, बाल खींचना और गहरे धक्के। मेहर की आवाजें अब दबाने की कोशिश भी नहीं कर रही थीं।
जब यश ने आखिरी बार उसके अंदर छोड़ा, मेहर का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था। जाँघों के अंदर उसका अंश बह रहा था। नितंबों पर थप्पड़ों के लाल निशान थे। गले और स्तनों पर दाँतों के निशान थे।
यश ने उसके बालों में उँगली फेरते हुए कहा, “पति आने से पहले और दो रातें हैं… मैं हर रात आऊँगा।”
मेहर ने आँखें बंद किए हुए जवाब दिया, “आ जाना… दरवाजा खुला रहेगा।”
यश मुस्कुराया। पति के घर में उस रात जो गलती हुई थी, वह अब आदत बन चुकी थी। दोनों जानते थे—ये सीमाएँ अब वापस नहीं आने वालीं।
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