हिंदी सेक्स स्टोरी 2026: तन्वी की चूत में आरव का लंड, जयपुर में आखिरी रात की चुदाई Part 2

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यह हिंदी सेक्स स्टोरी 2026 का दूसरा भाग है, और तन्वी के हाथ में अभी भी आरव का फोन था जिसमें उसके मंगेतर राहुल की दिल्ली वाली तस्वीर खुली हुई थी। दरवाजे की घंटी दूसरी बार बजी तो तन्वी का दिल जोर से धड़क उठा। आरव ने धीरे से कहा कि दरवाजा खोलो, जो भी है सामने आ जाएगा। तन्वी ने कांपते हाथों से कुंडी खोली और सामने राहुल खड़ा था, हाथ में सूटकेस और चेहरे पर थकान।

राहुल ने मुस्कुराकर कहा कि वह दिल्ली से एक दिन पहले आ गया है, तन्वी को सरप्राइज देना चाहता था। तन्वी के गले में शब्द अटक गए। उसने राहुल को अंदर आने दिया और आरव सोफे से उठकर खड़ा हो गया। राहुल ने आरव को देखकर भौंहें उठाईं और पूछा कि इतनी रात को यह आदमी यहाँ क्या कर रहा है। तन्वी ने फोन आगे बढ़ाया और कहा कि पहले यह तस्वीर देखो, फिर सवाल पूछना।

तस्वीर में राहुल दिल्ली की एक शादी में किसी लड़की के साथ बेहद करीब खड़ा था, उसका हाथ उस लड़की की कमर पर था। राहुल का चेहरा पल भर में सफेद पड़ गया। उसने पहले तो कहा कि वह सिर्फ एक दोस्त है, फिर तन्वी की आंखों में आंखें डालकर चुप हो गया। आरव चुपचाप एक तरफ खड़ा रहा, उसने बीच में कुछ नहीं कहा। तन्वी ने धीमी आवाज में कहा कि झूठ मत बोलो, सच सुनने की हिम्मत उसमें है।

राहुल ने लंबी सांस ली और मान लिया कि दिल्ली में उसकी एक सहकर्मी से नजदीकी बढ़ गई थी। उसने कहा कि वह तन्वी से शादी करना चाहता था, पर दिल्ली की दूरी ने सब बिगाड़ दिया। तन्वी ने उसकी बात बीच में काट दी और कहा कि दूरी बहाना है, धोखा धोखा होता है। उसकी आवाज कांप रही थी, पर उसमें एक अजीब सी मजबूती भी थी। उसने राहुल से कहा कि वह अपना सूटकेस उठाए और अभी इसी वक्त चला जाए।

राहुल ने माफी मांगने की कोशिश की, उसने तन्वी का हाथ पकड़ना चाहा, पर तन्वी ने हाथ पीछे खींच लिया। उसने कहा कि जो रिश्ता टूट गया है उसे माफी से नहीं जोड़ा जा सकता। राहुल कुछ पल दरवाजे पर खड़ा रहा, फिर सूटकेस उठाकर बाहर निकल गया। दरवाजा बंद होते ही तन्वी की आंखों से आंसू बह निकले। आरव ने आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके बालों को धीरे से सहलाया।

तन्वी ने आरव के सीने पर सिर रख दिया और कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि वह रोए या हंसे। आरव ने कहा कि उसे कुछ समझने की जरूरत नहीं है, बस आज रात वह अकेली नहीं है। तन्वी ने उसकी ओर देखा, उसकी आंखों में आंसू थे, पर होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान भी थी। आरव ने उसके आंसू अपने अंगूठे से पोंछे और उसके माथे को चूम लिया। उस चुम्बन में कोई जल्दबाजी नहीं थी, सिर्फ एक गहरा सुकून था।

बालकनी से ठंडी हवा अंदर आ रही थी और जयपुर की रात की रोशनी नीचे सड़क पर फैली हुई थी। तन्वी ने आरव का हाथ पकड़ा और उसे बालकनी की ओर ले गई। वहाँ खड़े होकर उसने कहा कि महीनों से वह एक ऐसे रिश्ते में घुट रही थी जिसमें सिर्फ नाम का प्यार था। आरव ने उसकी कमर पर हाथ रखा और कहा कि अब वह घुटन खत्म हो गई है। तन्वी ने पलटकर आरव की आंखों में देखा और धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

यह चुम्बन पहले वाले से अलग था, इसमें एक खुली हुई चाहत थी। तन्वी ने आरव के बालों में उंगलियां फंसाईं और उसे और करीब खींच लिया। आरव ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और उसकी कुर्ती के ऊपर से ही उसके बदन की गर्मी महसूस की। तन्वी की सांसें तेज हो गईं और उसने आरव के कान में कहा कि आज रात उसे कोई रोकटोक नहीं चाहिए। आरव ने मुस्कुराकर कहा कि आज रात सिर्फ उसकी मर्जी चलेगी।

तन्वी ने आरव को अंदर सोफे की ओर खींचा और उसके सामने खड़े होकर अपनी कुर्ती के बटन एक एक करके खोलने लगी। आरव की नजरें उसके बदन पर टिकी रहीं। कुर्ती नीचे गिरते ही उसका ब्लाउज और पेट का गोरा बदन सामने आ गया। आरव ने आगे बढ़कर उसके पेट को चूमा और उसकी नाभि पर जीभ फेरी। तन्वी ने उसके सिर को पकड़ लिया और कहा कि वह उसे ऐसे ही पागल कर देगा।

आरव ने उसका ब्लाउज भी खोल दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को दोनों हाथों से दबाने लगा। तन्वी ने आंखें बंद कर लीं और उसके कंधों को पकड़ लिया। आरव ने ब्रा का हुक खोला और उसके नंगे बूब्स को अपने मुंह में ले लिया। वह एक निप्पल को चूस रहा था और दूसरे को उंगलियों से मसल रहा था। तन्वी के मुंह से हल्की सिसकारी निकली और उसने कहा कि उसे यही चाहिए था, महीनों से यही प्यास थी।

तन्वी ने आरव की शर्ट के बटन खोले और उसकी छाती पर हाथ फेरा। उसकी उंगलियां आरव के सीने के बालों में उलझ गईं। आरव ने उसकी सलवार का नाड़ा खींचा और सलवार नीचे सरक गई। तन्वी अब सिर्फ पैंटी में उसके सामने खड़ी थी। आरव ने घुटनों पर बैठकर उसकी पैंटी को धीरे से नीचे खींचा। तन्वी की चूत उसके सामने खुल गई, गीली और गर्म। आरव ने उसे चूम लिया और तन्वी की टांगें कांप गईं।

आरव ने अपनी जीभ से तन्वी की चूत को चाटना शुरू किया। वह उसके दाने को चूस रहा था और जीभ को अंदर बाहर कर रहा था। तन्वी ने उसके सिर को अपनी जांघों के बीच दबा लिया और कहा कि वह रुकना मत। उसका बदन हिल रहा था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं। कुछ ही देर में तन्वी का बदन अकड़ गया और उसकी चूत से पानी निकल गया। आरव ने वह सारा पानी चाट लिया और ऊपर उठकर उसके होंठों को चूम लिया।

तन्वी ने आरव की पैंट खोली और उसका लंड बाहर निकाला। लंड पूरी तरह खड़ा था, मोटा और गर्म। तन्वी ने उसे हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाना शुरू किया और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया। वह उसके लंड को चूस रही थी, जीभ से उसके टोपे को सहला रही थी। आरव ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा कि वह उसे पागल कर रही है। तन्वी ने आंखें उठाकर उसे देखा और मुस्कुराते हुए चूसती रही।

आरव ने तन्वी को सोफे पर लिटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसने अपने लंड को तन्वी की चूत के मुंह पर रगड़ा और धीरे से अंदर धकेला। तन्वी ने आह भरी और उसकी पीठ को पकड़ लिया। लंड पूरा अंदर जाते ही तन्वी ने कहा कि यही सही जगह है, यही उसे चाहिए था। आरव ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और हर धक्के के साथ तन्वी की चूत और गीली होती गई।

धक्कों की रफ्तार बढ़ती गई और सोफा भी हिलने लगा। तन्वी की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। वह कह रही थी कि और तेज, और अंदर, उसे पूरा चाहिए। आरव ने उसकी कमर पकड़कर उसे और करीब खींच लिया और तेजी से चोदने लगा। तन्वी की टांगें उसके कंधों पर कांप रही थीं और उसके बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे। आरव ने झुककर उसके एक बूब को मुंह में ले लिया और चोदता रहा।

तन्वी का बदन दूसरी बार अकड़ गया और वह जोर से चिल्लाई। उसकी चूत ने आरव के लंड को कसकर जकड़ लिया और पानी बह निकला। आरव भी अब रुक नहीं पाया। उसने कुछ तेज धक्के और लगाए और फिर अपना सारा पानी तन्वी की चूत में छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए। तन्वी ने कहा कि आज पहली बार उसे लगा कि वह सच में किसी की है।

कुछ देर बाद तन्वी ने आरव का हाथ पकड़ा और उसे बेडरूम की ओर ले गई। बिस्तर पर पहुंचकर उसने आरव को धक्का देकर लिटा दिया और उसके ऊपर बैठ गई। उसने खुद ही आरव के लंड को अपनी चूत में डाला और धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी। आरव ने उसके बूब्स को हाथों में लिया और नीचे से धक्के लगाने लगा। तन्वी के बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह उन्हें हटाते हुए हंस रही थी।

इस पोज में तन्वी पूरी तरह कंट्रोल में थी। वह कभी तेज होती, कभी धीरे होकर आरव को तड़पाती। आरव ने उसकी कमर पकड़ ली और कहा कि वह उसे ऐसे तड़पाकर पागल कर देगी। तन्वी ने उसके होंठों को चूमा और कहा कि आज रात तड़पना भी अच्छा लग रहा है। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं और बिस्तर की चादर भीग रही थी।

तन्वी की रफ्तार फिर तेज हो गई और उसका बदन तीसरी बार झड़ने की ओर बढ़ गया। उसने आरव के कंधों को कसकर पकड़ लिया और जोर से हिलने लगी। आरव ने नीचे से तेज धक्के लगाए और तन्वी चीख पड़ी। उसका पानी बह निकला और वह आरव के सीने पर गिर पड़ी। आरव ने उसे कसकर पकड़ लिया और कहा कि वह कहीं नहीं जा रही है।

तन्वी ने करवट बदलकर आरव को अपने ऊपर लिया और अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं। आरव ने उसकी चूत में फिर से लंड डाला और इस बार धीरे धीरे, गहराई से चोदने लगा। हर धक्का लंबा और गहरा था। तन्वी ने उसके कान में कहा कि उसे यही धीमी चुदाई सबसे ज्यादा पसंद है। आरव ने उसकी गर्दन को चूमा और उसके बूब्स को दबाते हुए चोदता रहा।

रात गहराती गई और दोनों एक दूसरे में खोए रहे। आरव ने तन्वी को घोड़ी बनने को कहा और तन्वी हंसते हुए घुटनों पर आ गई। आरव ने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और उसकी कमर पकड़कर तेज धक्के लगाने लगा। तन्वी की आवाजें और तेज हो गईं। वह कह रही थी कि वह पीछे से उसे और जोर से चोदे। आरव ने उसके बाल पकड़े और तेजी से चोदता रहा।

तन्वी का बदन चौथी बार अकड़ गया और वह बिस्तर पर गिर पड़ी। आरव ने भी अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसके बगल में लेट गया। दोनों पसीने में भीगे हुए थे और एक दूसरे की सांसें सुन रहे थे। तन्वी ने कहा कि उसे डर था कि राहुल के जाने के बाद वह टूट जाएगी, पर आरव ने उसे जोड़ दिया है। आरव ने कहा कि टूटी हुई चीजें ही सबसे खूबसूरती से जुड़ती हैं।

आधी रात के बाद तन्वी उठकर पानी पीने गई और आरव भी उसके पीछे आ गया। रसोई में खड़े होकर दोनों ने एक दूसरे को फिर चूमा। तन्वी ने कहा कि उसे भूख लगी है, पर खाने की नहीं। आरव हंस पड़ा और उसे काउंटर पर बिठा लिया। उसने तन्वी की टांगें खोलीं और उसकी चूत को फिर चाटने लगा। तन्वी ने उसके सिर को पकड़ लिया और कहा कि वह कभी नहीं थकता है।

काउंटर पर ही आरव ने तन्वी की चूत में लंड डाल दिया और खड़े खड़े उसे चोदने लगा। तन्वी ने उसकी गर्दन पकड़ ली और हर धक्के पर आह भरने लगी। यह चुदाई तेज और बेताब थी, जैसे दोनों को एक दूसरे की आदत लग गई हो। तन्वी फिर झड़ गई और आरव ने भी अपना पानी उसके अंदर छोड़ दिया। दोनों हंसते हुए बिस्तर पर लौट आए।

सुबह की पहली रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब तन्वी की आंख खुली। आरव उसके बगल में सो रहा था, उसका हाथ तन्वी की कमर पर था। तन्वी ने उसे देखा और मुस्कुरा दी। उसने तय कर लिया था कि वह अपनी बुटीक और अपनी जिंदगी दोनों को अपने हिसाब से चलाएगी। राहुल का फोन आया, पर तन्वी ने उसे बिना देखे साइलेंट कर दिया। उसने आरव के माथे को चूमा और कहा कि उठो, नई सुबह है और नई जिंदगी भी। आरव ने आंखें खोलीं और कहा कि नई जिंदगी की पहली सुबह उसके साथ ही अच्छी लग रही है।

🔒 Bonus Scene locked

सुबह की पहली किरण में तन्वी ने आरव से एक ऐसा वादा लिया जो रात से भी ज्यादा गर्म था।

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