भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी: बहन की चूत में भाई का लंड, दिल्ली घर की पहली रात
आदित्य, सच बताओ, तुम भी तो यही चाहते थे ना, श्रेया ने फ्रिज का दरवाजा बंद करते हुए धीमी आवाज में कहा, और उसकी आंखों में वो बात थी जो सालों से दोनों के बीच बिना कहे घूम रही थी। आदित्य ने चाय का कप नीचे रखा और बोला, श्रेया, तुम पागल हो गई हो क्या, घर में कोई नहीं है इसका मतलब ये नहीं कि हम वो सब सोचें। श्रेया ने हंसते हुए कहा, भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी आज रात सच होने वाली है, क्योंकि मैं अब और इंतजार नहीं करूंगी। आदित्य के हाथ कांपने लगे, पर उसने इनकार नहीं किया, क्योंकि उसके दिल में भी वही आग बरसों से सुलग रही थी।
रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे और दिल्ली वाला घर पूरी तरह खामोश था, मम्मी पापा पड़ोस की शादी में गए हुए थे और सुबह से पहले उनके लौटने का कोई सवाल ही नहीं था। श्रेया ने हल्की सी नाइटी पहनी हुई थी और उसके बाल खुले हुए थे, जो उसके कंधों पर बिखर रहे थे। आदित्य ने टीशर्ट और लोअर पहना था, पर उसकी नजरें बार बार अपनी बहन के चेहरे पर टिक जाती थीं। दोनों के बीच की खामोशी अब भारी होने लगी थी, जैसे कोई पुराना राज बाहर आने को बेताब हो।
श्रेया ने आदित्य के पास आकर कहा, तुम्हें याद है बचपन में हम एक ही कमरे में सोते थे और तुम मेरी चोटी खींचकर भाग जाते थे। आदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा, हां याद है, और तुम गुस्से में मेरा तकिया छिपा देती थीं। श्रेया ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, फिर बड़े होने के बाद वो शरारतें क्यों रुक गईं, क्या तुम्हें भी वो एहसास कभी नहीं हुआ जो मुझे हर रात होता था। आदित्य ने गहरी सांस ली और बोला, हुआ था श्रेया, बहुत बार हुआ था, पर मैं डरता था कि अगर मैंने कुछ कहा तो हमारा रिश्ता टूट जाएगा।
श्रेया ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, रिश्ता टूटता नहीं है आदित्य, जब दो लोग एक दूसरे को इस तरह चाहते हैं तो रिश्ता और गहरा होता है। आदित्य ने उसका हाथ कसकर पकड़ा और कहा, तुम सच में ये चाहती हो, कोई जबरदस्ती नहीं, कोई जल्दबाजी नहीं। श्रेया ने सिर हिलाया और कहा, मैं अपनी मर्जी से यहां खड़ी हूं, और मैं आज रात तुम्हारी बनना चाहती हूं। आदित्य ने धीरे से उसके माथे को चूमा, फिर उसके गाल को चूमा, और दोनों के होंठ पहली बार एक दूसरे से टकराए।
पहला चुंबन धीमा था, डर और चाहत से भरा हुआ, श्रेया ने उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और उसकी जीभ से खेलने लगी। आदित्य ने उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसका शरीर अपने शरीर से सटा लिया। श्रेया की सांसें तेज हो गईं और उसने आदित्य के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं। किचन की ठंडी टाइलों पर दोनों के पैरों की आहट गूंज रही थी, पर किसी को इसकी परवाह नहीं थी।
आदित्य ने श्रेया की नाइटी की डोरी को धीरे से खींचा और कहा, तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो आज, श्रेया ने शरमाते हुए कहा, तो फिर देखते क्यों हो, छूकर देखो ना। आदित्य ने उसके कंधे से नाइटी सरकाई और उसकी गोरी त्वचा पर अपने होंठ रख दिए। श्रेया ने आह भरते हुए कहा, हां आदित्य, ऐसे ही, और मत रुको। आदित्य ने उसकी गर्दन को चूमा, उसके कान को चाटा, और उसकी पीठ पर अपनी उंगलियां फिराने लगा।
आदित्य ने श्रेया की नाइटी पूरी तरह उतार दी और उसकी नंगी देह को अपनी आंखों से निहारा, श्रेया के बड़े गोल बूब्स उसके सामने थे और उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। आदित्य ने एक बूब को अपने मुंह में लिया और दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगा। श्रेया ने जोर से आह भरी और कहा, हां भाई, मेरे बूब्स को ऐसे ही चूसो, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। आदित्य ने बारी बारी से दोनों बूब्स को चूसा और श्रेया की कमर को अपने हाथों से सहलाया।
श्रेया ने आदित्य का लोअर नीचे सरकाया और उसके सख्त लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया, उसने धीरे से उसे सहलाया और कहा, तुम्हारा लंड कितना बड़ा और गरम है, मैं इसे अपने मुंह में लेना चाहती हूं। आदित्य ने कहा, श्रेया, धीरे से, मुझे तुम्हारी जीभ का एहसास चाहिए। श्रेया उसके सामने घुटनों पर बैठ गई और उसके लंड के सिरे को अपनी जीभ से चाटने लगी। आदित्य ने उसके बाल पकड़े और कहा, हां, ऐसे ही, और गहरा लो।
आदित्य ने श्रेया को अपनी बाहों में उठाया और ड्राइंग रूम के सोफे पर ले गया, उसने श्रेया को सोफे पर लिटाया और उसके पैर खोलकर उसकी चूत को देखा। श्रेया की चूत गीली हो चुकी थी और उसका रस चमक रहा था। आदित्य ने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को सहलाया और कहा, तुम तो पूरी तरह तैयार हो मेरी जान। श्रेया ने कहा, हां आदित्य, मैं तुम्हारे लंड के लिए कब से तरस रही थी, अब देर मत करो।
आदित्य ने अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में डालीं और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, श्रेया ने अपनी कमर उठाई और कहा, और अंदर डालो, मुझे और चाहिए। आदित्य ने उंगलियों की रफ्तार बढ़ाई और अपने अंगूठे से उसके दाने को रगड़ने लगा। श्रेया की आंखें बंद हो गईं और उसने जोर से कहा, आदित्य, मैं झड़ने वाली हूं, मत रुको। कुछ ही पलों में श्रेया का शरीर कांपा और उसकी चूत से पानी निकल गया।
श्रेया ने हांफते हुए कहा, ये तो सिर्फ शुरुआत थी भाई, अब मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत में चाहिए, आदित्य ने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाव डाला। श्रेया ने कहा, हां, धीरे से डालो, पहली बार थोड़ा दर्द होगा पर मुझे परवाह नहीं। आदित्य ने एक झटके में अपना आधा लंड अंदर डाल दिया और श्रेया ने उसके कंधे को कसकर पकड़ लिया। दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और आदित्य ने पूरा लंड धीरे धीरे अंदर उतार दिया।
श्रेया की चूत ने उसके लंड को कसकर जकड़ लिया और आदित्य ने कहा, तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गरम है श्रेया। श्रेया ने कहा, और तुम्हारा लंड मेरी चूत को पूरा भर रहा है, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं पूरी हो गई हूं। आदित्य ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और हर धक्के के साथ श्रेया की सिसकियां बढ़ती गईं। सोफा हर धक्के पर हल्का सा हिल रहा था और दोनों की सांसों की आवाज कमरे में भर गई थी।
कुछ ही देर में श्रेया दूसरी बार झड़ गई और उसकी चूत ने लंड को और कसकर दबाया, आदित्य ने कहा, श्रेया, मैं भी अब नहीं रुक पाऊंगा, तुम्हारी चूत मुझे पागल कर रही है। श्रेया ने कहा, तो मेरी चूत में ही झड़ो भाई, मुझे तुम्हारा पूरा पानी अपनी चूत में चाहिए। आदित्य ने कुछ तेज धक्के लगाए और फिर जोर से सिसकते हुए अपना सारा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए हांफते रहे।
कुछ देर आराम के बाद श्रेया ने कहा, भाई, अभी रात बाकी है, और मैं अभी और चाहती हूं, आदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा, तुम सच में नहीं थकती क्या, मेरी बहन तो पूरी आग है। श्रेया ने कहा, तुम्हारे साथ तो मैं कभी नहीं थकूंगी, चलो बेडरूम में चलते हैं। दोनों नंगे ही बेडरूम की तरफ बढ़े और रास्ते में एक दूसरे को चूमते रहे। बेडरूम का दरवाजा बंद होते ही श्रेया ने आदित्य को बिस्तर पर धकेल दिया।
श्रेया आदित्य के ऊपर बैठ गई और उसके लंड को फिर से अपनी चूत में डाल लिया। उसने अपनी कमर हिलानी शुरू की और कहा, इस बार मैं ऊपर से चोदूंगी, तुम्हें मेरा पूरा नाच देखना होगा। आदित्य ने उसके कूल्हों को पकड़ा और कहा, हां श्रेया, ऐसे ही हिलो, तुम्हारी चूत मेरे लंड पर बहुत अच्छी लग रही है। श्रेया ने तेज रफ्तार से ऊपर नीचे होना शुरू किया और उसके बाल उसके चेहरे पर आ गए।
आदित्य ने नीचे से भी धक्के लगाने शुरू किए और दोनों की लय एक हो गई, श्रेया ने कहा, आदित्य, मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत की गहराई तक महसूस हो रहा है। आदित्य ने कहा, और मुझे तुम्हारी चूत की गर्मी हर धक्के पर और बढ़ती लग रही है। श्रेया ने अपने बूब्स को खुद मसलते हुए कहा, देखो भाई, मैं तुम्हारे लिए कैसे तड़प रही हूं। आदित्य ने उसे नीचे खींचकर उसके होंठ चूमे और फिर से जोर से धक्के लगाए।
श्रेया ने पोजीशन बदली और घुटनों पर होकर कहा, अब पीछे से चोदो भाई, मुझे डॉगी स्टाइल में तुम्हारा लंड चाहिए। आदित्य उसके पीछे आया और उसकी चूत में अपना लंड डालकर तेज धक्के लगाने लगा। श्रेया ने बिस्तर की चादर पकड़ ली और कहा, हां, और जोर से, मेरी चूत को ऐसे ही फाड़ दो। आदित्य ने उसके कूल्हों को पकड़कर पूरी ताकत से धक्के लगाए और श्रेया की चीखें कमरे में गूंजने लगीं।
आदित्य ने उसके बाल खींचे और कहा, श्रेया, तुम्हारी गांड और चूत दोनों मुझे पागल कर रही हैं, श्रेया ने कहा, तो फिर रुक क्यों रहे हो, मुझे और जोर से चोदो। कुछ ही पलों में दोनों एक साथ झड़ गए और श्रेया की चूत से आदित्य का पानी बहने लगा। श्रेया बिस्तर पर पेट के बल लेट गई और आदित्य उसके ऊपर लेटकर उसकी पीठ को चूमने लगा। दोनों की सांसें धीरे धीरे सामान्य हो रही थीं।
आदित्य ने कहा, श्रेया, क्या हमने सही किया, क्या ये राज हम संभाल पाएंगे, श्रेया ने उसकी तरफ पलटकर कहा, ये राज सिर्फ हमारा है भाई, और इसे कोई कभी नहीं जानेगा। आदित्य ने कहा, पर अगर मम्मी पापा को पता चल गया तो। श्रेया ने उसके होंठों पर उंगली रखकर कहा, श्श, आज रात के बाद हम और सावधान रहेंगे, पर इस रात को कोई हमसे नहीं छीन सकता। आदित्य ने मुस्कुराते हुए उसे कसकर गले लगा लिया।
श्रेया ने कहा, भाई, एक बार और, मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेकर झड़ाना चाहती हूं, आदित्य ने कहा, तुम तो सच में रुकने वाली नहीं हो, चलो, तुम्हारी इच्छा ही मेरी इच्छा है। श्रेया ने उसके लंड को फिर से चाटना शुरू किया और इस बार और तेज रफ्तार से आगे पीछे करने लगी। आदित्य ने कहा, श्रेया, मैं झड़ने वाला हूं, और इस बार तुम्हारे मुंह में ही झड़ूंगा। श्रेया ने लंड को और गहरा लिया और आदित्य का पानी उसके मुंह में भर गया।
रात के तीन बज चुके थे और घर में अब भी पूरी खामोशी थी, श्रेया ने धीमी आवाज में कहा, सुबह होने से पहले हमें सब कुछ सामान्य करना होगा, ताकि कोई शक ना करे। आदित्य ने कहा, हां, हम चादर बदल देंगे, कपड़े संभाल लेंगे, और फिर से भाई बहन बन जाएंगे। श्रेया ने हंसते हुए कहा, दिन में भाई बहन, और रात में जब मौका मिलेगा तो फिर से यही कहानी। आदित्य ने कहा, पक्का वादा, जब भी घर खाली होगा, तुम मेरी होगी।
श्रेया ने आदित्य के कान में कहा, भाई, मुझे अभी भी तुम्हारी बाहों में सोना है, मुझे मत छोड़ना, आदित्य ने उसे कसकर पकड़ा और कहा, मैं कहीं नहीं जा रहा श्रेया, तुम मेरी बाहों में ही सोओगी। श्रेया ने अपनी आंखें बंद कीं और उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी। आदित्य ने भी आंखें बंद कीं और दोनों की सांसें एक लय में चलने लगीं। दिल्ली की उस रात में भाई बहन का छुपा हुआ राज अब एक खूबसूरत याद बन चुका था।
صبح ہونے سے پہلے فاطمہ کی آنکھ کھلی تو ٹرین کی رفتار کم ہو رہی تھی اور کوپے میں ہلکی سی روشنی آ رہی تھی۔ عمران اس کے ساتھ ہی برتھ پر سویا ہوا تھا اور اس کی چادر آدھی نیچے سرک گئی تھی۔ فاطمہ نے اس کے سینے پر ہاتھ پھیرا اور اس کے کان کے پاس آ کر آہستہ سے اس کا نام لیا۔ عمران نے نیند میں ہی اس کا ہاتھ پکڑ لیا اور اسے اپنے قریب کھینچ لیا۔ فاطمہ نے مسکرا کر اس کے ہونٹوں کو چوما اور کہا کہ لکھنؤ آنے سے پہلے وہ ایک بار اور چاہتی ہے۔
عمران نے آنکھیں کھولیں اور فاطمہ کو دیکھ کر مسکرا دیا۔ اس نے فاطمہ کی کمر کو پکڑا اور اسے اپنے اوپر کھینچ لیا۔ فاطمہ نے اس کی چادر ہٹائی اور اس کے لنڈ کو اپنے ہاتھ میں لے کر آہستہ سے ہلانے لگی۔ عمران نے اس کے سینے کو پکڑا اور اس کی نپل کو انگلیوں سے چھیڑا۔ فاطمہ نے اس کے لنڈ کو اپنے منہ میں لیا اور آہستہ آہستہ چوسنے لگی۔ اس کی زبان ہر حرکت پر عمران کے جسم کو جگا رہی تھی۔
فاطمہ نے عمران کو برتھ پر لٹایا اور خود اس کے اوپر بیٹھ گئی۔ اس نے اس کا لنڈ اپنی چوت میں لیا اور آہستہ سے اوپر نیچے ہونے لگی۔ عمران نے اس کی کمر کو پکڑا اور اسے گہرائی میں دبایا۔ فاطمہ کی سانسیں تیز ہو گئیں اور اس نے عمران کے کندھوں کو پکڑ لیا۔ ٹرین نے ایک جھٹکا لیا اور فاطمہ کا جسم عمران کے اوپر اور بھی گہرائی میں بیٹھ گیا۔ دونوں نے ایک دوسرے کو دیکھ کر مسکرایا۔
عمران نے فاطمہ کو پلٹا کر اس کے پیچھے آ گیا اور اس کی چوت میں پیچھے سے اپنا لنڈ داخل کیا۔ فاطمہ نے برتھ کا کنارہ پکڑا اور ہر دھکے پر آگے پیچھے ہونے لگی۔ عمران نے اس کی کمر کو پکڑ کر تیز دھکے لگائے اور فاطمہ نے سسکیاں لیتے ہوئے کہا کہ اور زور سے کرو۔ اس کی چوت سے گیلا پن بہنے لگا اور عمران کی رفتار اور بڑھ گئی۔ فاطمہ کا جسم کانپنے لگا اور وہ جھڑنے کے قریب آ گئی۔
فاطمہ جھڑ گئی اور اس کی چوت نے عمران کے لنڈ کو کس کر پکڑ لیا۔ عمران نے آخری چند تیز دھکے لگائے اور اس کی چوت میں ہی جھڑ گیا۔ دونوں برتھ پر لیٹ گئے اور ایک دوسرے کو دیکھ کر ہنس پڑے۔ فاطمہ نے کہا کہ لکھنؤ کا اسٹیشن قریب آ رہا ہے اور انہیں جلدی کپڑے پہننے ہوں گے۔ عمران نے اس کا ہاتھ پکڑا اور کہا کہ یہ رات وہ کبھی نہیں بھولے گا۔
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