हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली: जयपुर की छत से बेड तक ऋतु की चुदाई
यह हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली जयपुर की एक छत से शुरू होती है, जहाँ रात के ग्यारह बजे ऋतु खड़ी थी और उसके हाथ में चाय का कप ठंडा हो रहा था। कबिर उसके पीछे आकर खड़ा हुआ तो ऋतु की धड़कन तेज हो गई, क्योंकि तीन साल पहले होली के दिन इसी तरह वह उसके बहुत करीब आ गया था। उस दिन रंगों के बीच कबिर ने ऋतु का हाथ पकड़ा था और ऋतु ने हाथ छुड़ाया नहीं था, बस हंसकर रंग उसके गाल पर मल दिया था। आज की रात में वही पुरानी शरारत फिर जाग उठी थी, और ऋतु जानती थी कि आज वह पीछे नहीं हटेगी।
ऋतु अट्ठाईस साल की थी, जयपुर के एक स्कूल में पढ़ाती थी और अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत संभलकर जीती थी। कबिर बत्तीस साल का था, उसके मोहल्ले में ही रहता था और एक ट्रैवल कंपनी में काम करता था। दोनों के परिवार एक दूसरे को जानते थे, इसलिए दोनों हमेशा एक दूरी बनाकर मिलते थे। पर होली की वह शाम ऋतु के दिमाग से कभी निकली नहीं थी, जब कबिर ने उसके कान में कहा था कि तुम्हारी हंसी पर रंग और भी खिल उठता है।
फ्लैशबैक में ऋतु को वह शाम साफ दिख रही थी। मोहल्ले की छत पर ढोल बज रहा था, बच्चे रंग उड़ा रहे थे और ऋतु गुलाबी साड़ी में भीग चुकी थी। कबिर ने जानबूझकर उसके गाल पर लाल रंग लगाया था और उसकी उंगलियाँ ऋतु के गाल से गर्दन तक फिसल गई थीं। ऋतु ने उसकी कलाई पकड़ ली थी और धीरे से कहा था कि सब देख रहे हैं, पर उसकी आँखों में डर नहीं, एक चमक थी। कबिर समझ गया था कि ऋतु के अंदर भी वही आग है, बस वह उसे छिपाकर रखती है।
वर्तमान में कबिर ने ऋतु के कंधे पर हाथ रखा और पूछा कि चाय ठंडी हो गई है, नई बनाऊँ। ऋतु ने मुड़कर उसे देखा और कहा कि चाय नहीं, आज कुछ और चाहिए। कबिर हंसा और बोला कि इतनी हिम्मत कहाँ से आई। ऋतु ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और अपने कमरे की तरफ इशारा किया, जहाँ दरवाजा खुला था और हल्की रोशनी जल रही थी।
कमरे में आते ही ऋतु ने दरवाजा बंद किया और कबिर को दीवार से सटा दिया। उसने कबिर के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक लंबा, गहरा चुंबन लिया। कबिर ने पहले धीरे से जवाब दिया, फिर उसकी कमर पकड़कर उसे अपने करीब खींच लिया। ऋतु की साँसें तेज हो गईं और उसने कबिर की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। कबिर ने उसके बालों में हाथ डाला और उसकी गर्दन पर चुंबन बरसाने लगा।
ऋतु ने कबिर की शर्ट उतार दी और उसकी छाती पर अपने होंठ फिराए। कबिर ने ऋतु की कुर्ती की डोरी खोली और उसके कंधे से कुर्ती सरका दी। ऋतु का ब्लाउज सामने आया तो कबिर की आँखों में चाहत साफ दिख रही थी। उसने ब्लाउज के ऊपर से ही ऋतु के बूब्स को दबाया और ऋतु के मुँह से एक सिसकारी निकल गई। ऋतु ने कहा कि धीरे नहीं, आज पूरी हिम्मत दिखाओ।
कबिर ने ऋतु का ब्लाउज खोल दिया और उसके बूब्स को अपने हाथों में लेकर चूमने लगा। ऋतु ने अपनी उंगलियाँ कबिर के बालों में गड़ा दीं और उसकी पीठ को सहलाने लगी। कबिर ने ऋतु के निप्पल को अपने होंठों में लिया और हल्के से चूसा तो ऋतु का शरीर कांप उठा। ऋतु ने कबिर के कान में कहा कि तुम्हारे हाथों में आज कुछ अलग ही जादू है।
ऋतु ने कबिर की पैंट की बेल्ट खोली और उसका लंड अपने हाथ में ले लिया। कबिर का लंड पूरी तरह कड़ा था और ऋतु ने उसे धीरे धीरे सहलाया। कबिर ने ऋतु की सलवार की डोरी खोली और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। ऋतु की चूत पहले से गीली थी और कबिर की उंगली के छूते ही वह और भीग गई। ऋतु ने कहा कि अब और इंतजार नहीं होता।
कबिर ने ऋतु को बिस्तर पर लिटाया और उसकी पैंटी उतार दी। उसने ऋतु की टाँगें फैलाईं और उसकी चूत को अपने होंठों से चूम लिया। ऋतु ने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली और अपनी कमर ऊपर उठा दी। कबिर ने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटा और अंदर तक सहलाया तो ऋतु की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। ऋतु ने कहा कि बस, अब अंदर डालो।
कबिर बिस्तर पर चढ़ा और अपना लंड ऋतु की चूत के मुँह पर रखा। उसने धीरे से धक्का दिया और ऋतु की आँखें बंद हो गईं। ऋतु अभी कुंवारी नहीं थी, पर इतने सालों बाद किसी के साथ होना उसके लिए पहली बार जैसा ही था। कबिर ने एक और धक्का दिया और उसका लंड पूरी तरह ऋतु की चूत में समा गया। ऋतु ने कबिर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए और कहा कि हाँ, ऐसे ही।
कबिर ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और ऋतु ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट लीं। हर धक्के के साथ बिस्तर हिल रहा था और दोनों की साँसें एक दूसरे में घुल रही थीं। ऋतु ने कबिर के होंठ चूमे और कहा कि तुम्हारी हर हरकत में वही होली वाली शरारत है। कबिर ने रफ्तार बढ़ाई और ऋतु की चूत से गीलापन और भी बढ़ गया।
कुछ देर बाद कबिर ने ऋतु को पलटाया और उसे घुटनों के बल कर दिया। उसने पीछे से ऋतु की चूत में अपना लंड डाला और उसकी कमर पकड़कर तेज धक्के लगाए। ऋतु ने तकिया पकड़ लिया और उसके मुँह से तेज सिसकारियाँ निकलने लगीं। कबिर ने उसके बूब्स को पीछे से पकड़ा और दबाते हुए धक्के लगाए। ऋतु का शरीर हर धक्के पर आगे पीछे हिल रहा था।
ऋतु अचानक कांपने लगी और उसकी चूत ने कबिर के लंड को कसकर जकड़ लिया। उसने जोर से कहा कि मैं झड़ रही हूँ, और उसका पानी निकल गया। कबिर ने दो तीन तेज धक्के और लगाए और फिर उसका भी पानी ऋतु की चूत में निकल गया। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े और एक दूसरे को देखकर हंसने लगे।
कुछ देर आराम के बाद ऋतु ने कबिर के सीने पर सिर रखा और कहा कि होली वाली शाम के बाद से वह यही रात चाहती थी। कबिर ने कहा कि अब यह रात हर महीने की आदत बननी चाहिए। ऋतु ने उसकी छाती पर उंगली से अपना नाम लिखा और कहा कि आदत तो बन ही गई है। दोनों ने एक दूसरे को फिर चूमा और रात की ठंडी हवा में खिड़की से जयपुर की रोशनी देखने लगे।
आधी रात के बाद कबिर ने ऋतु को फिर अपनी बाहों में लिया और उसकी गर्दन चूमने लगा। ऋतु ने करवट बदलकर उसे अपने ऊपर खींच लिया और कहा कि एक बार और। कबिर का लंड फिर कड़ा हो गया था और उसने ऋतु की चूत में धीरे से डाल दिया। इस बार दोनों ने बहुत धीरे और गहराई से प्यार किया, हर धक्के को महसूस करते हुए।
ऋतु ने कबिर के कान में कहा कि तुम मेरे पहले सच्चे प्यार हो, चाहे दुनिया कुछ भी कहे। कबिर ने जवाब दिया कि तुम्हारी हंसी ही मेरी दुनिया है। दोनों एक साथ झड़े और एक दूसरे की बाहों में सो गए। सुबह जब सूरज की पहली किरण खिड़की से आई तो ऋतु ने कबिर का हाथ पकड़ा और कहा कि आज की रात कभी नहीं भूलूँगी।
सुबह की चाय के समय ऋतु ने कबिर से कहा कि मोहल्ले में सबको लगेगा कि हम सिर्फ पड़ोसी हैं। कबिर ने हंसकर कहा कि पड़ोसी ही तो हैं, बस रात को थोड़े ज्यादा करीब वाले पड़ोसी। ऋतु हंस पड़ी और उसने कबिर के गाल पर एक हल्का चुंबन दिया। दोनों जानते थे कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, यह तो बस शुरुआत थी।
नाश्ते के बाद ऋतु रसोई में परांठे बना रही थी तो कबिर पीछे से आकर उससे लिपट गया। उसने ऋतु की कमर पकड़ी और उसकी गर्दन पर धीरे से काट लिया। ऋतु ने बेलन नीचे रखा और कहा कि रसोई में कोई आ जाएगा। कबिर ने कहा कि दरवाजा बंद है और सुबह का यह वक्त सिर्फ हमारा है। ऋतु ने गैस धीमी की और कबिर की तरफ मुड़ गई।
कबिर ने ऋतु को किचन की स्लैब से सटाया और उसकी नाइटी ऊपर उठा दी। ऋतु की चूत फिर से गीली हो चुकी थी और कबिर ने अपनी उंगलियों से उसे सहलाया। ऋतु ने कबिर का लंड अपनी पैंटी के ऊपर से पकड़ा और दबाया तो कबिर ने एक गहरी साँस ली। दोनों ने एक दूसरे को चूमा और कबिर ने ऋतु की पैंटी एक तरफ सरकाकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।
रसोई में खड़े खड़े कबिर ने धीरे धीरे धक्के लगाए और ऋतु ने स्लैब पकड़कर अपनी कमर हिलाई। परांठे की खुशबू और दोनों की सिसकारियाँ एक साथ घुल रही थीं। ऋतु ने कहा कि यह सुबह भी रात जितनी ही यादगार बन रही है। कबिर ने उसकी गर्दन चूमी और तेज धक्के लगाए तो ऋतु का शरीर कांपने लगा।
ऋतु पहले झड़ी और उसके पानी से कबिर का लंड और भी फिसलन भरा हो गया। कबिर ने कुछ तेज धक्के लगाए और उसका पानी भी निकल गया। दोनों ने एक दूसरे को संभाला और हंसते हुए परांठे की तरफ देखा, जो तवे पर सुनहरा हो चुका था। ऋतु ने कहा कि अब हर सुबह ऐसी ही होनी चाहिए। कबिर ने उसका हाथ पकड़ा और कहा कि वादा रहा, हर सुबह और हर रात तुम्हारी ही होगी।
अगली शाम ऋतु ने कबिर को फिर छत पर बुलाया, इस बार चाय की जगह दो गिलास शिकंजी लेकर। कबिर ने आते ही कहा कि शिकंजी तो बहाना है, असली मिठास तो तुम्हारी हंसी में है। ऋतु ने उसका हाथ पकड़ा और कहा कि आज कोई जल्दी नहीं है, आज रात सिर्फ धीरे धीरे प्यार होगा। दोनों छत की ठंडी हवा में बैठकर पुरानी बातें करने लगे, होली की शाम, स्कूल के दिन और मोहल्ले की शरारतें।
बातों के बीच कबिर ने ऋतु की उंगलियों को अपने हाथ में लिया और एक एक उंगली को चूमा। ऋतु की धड़कन तेज हो गई और उसने कबिर के कंधे पर सिर रख दिया। कबिर ने उसकी गर्दन पर धीरे से चुंबन दिया और कहा कि तुम्हारी खुशबू मुझे हर बार नई लगती है। ऋतु ने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए और उसकी छाती पर अपने होंठ फिराए। छत पर सिर्फ चाँद की रोशनी थी और दोनों की साँसें ही सुनाई दे रही थीं।
ऋतु ने कबिर को कमरे में ले जाकर बिस्तर पर बिठाया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने कबिर का लंड अपने हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाते हुए उसे अपने मुँह में ले लिया। कबिर ने उसके बाल पकड़े और एक गहरी साँस ली। ऋतु ने अपनी जीभ से उसके लंड को चाटा और चूसा, तब तक जब तक कबिर ने कहा कि बस, अब और नहीं। ऋतु मुस्कुराई और उसके ऊपर चढ़ गई।
ऋतु ने कबिर के लंड पर अपनी चूत रखी और धीरे धीरे नीचे बैठ गई। वह खुद ऊपर से धक्के लगाने लगी, अपनी कमर को गोल गोल घुमाते हुए। कबिर ने उसके बूब्स पकड़े और दबाए, और ऋतु की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। कुछ देर बाद ऋतु की रफ्तार तेज हो गई और उसका शरीर कांपने लगा। वह झड़ी और कबिर ने उसे कसकर पकड़ लिया, फिर उसका भी पानी निकल गया। दोनों एक दूसरे की बाहों में गिर पड़े।
रात के आखिर में ऋतु ने कबिर से कहा कि होली वाली शरारत अब उसकी जिंदगी की सबसे प्यारी आदत बन गई है। कबिर ने कहा कि आदतें कभी छूटती नहीं हैं, खासकर जब वह इतनी मीठी हों। दोनों ने एक दूसरे को चूमा और चाँद की रोशनी में सो गए, जानते हुए कि अगली सुबह भी उनकी ही होगी।
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