नई हिंदी सेक्स कहानी: ऊपर वाले फ्लैट का शोर
"सुनीता, तू यकीन नहीं करेगी, ऊपर वाले फ्लैट में रात को इतना शोर होता है कि मेरी नींद उड़ जाती है," नैना ने फोन कान से लगाए हुए कहा। वह बालकनी में खड़ी नीचे गली में देख रही थी। "धम धम धम, जैसे कोई कूद रहा हो। कल तो बिस्तर तक हिल रहा था।"
सुनीता हंसी। "नई हिंदी सेक्स कहानी लिख रही है क्या ऊपर वाला? जवान लड़का है, अकेला रहता है, रात को कसरत करता होगा।" नैना ने आंखें घुमाईं। "कसरत नहीं, तांडव करता है। आज मैं जाकर बोलूंगी। बहुत हो गया।"
नैना बत्तीस साल की थी, दिल्ली के एक मिडिल क्लास अपार्टमेंट में रहती थी। उसका पति रोहित बीपीओ में नाइट शिफ्ट करता था, रात को घर से निकलता और सुबह आता। ऊपर वाला फ्लैट दो हफ्ते पहले किराए पर उठा था। किराएदार था विकास, सत्ताईस साल का फिटनेस ट्रेनर।
शाम को नैना ऊपर गई। उसने घंटी बजाई। दरवाजा खुला और विकास सामने खड़ा था। बनियान और शॉर्ट्स में, पसीने से तर, हाथ में डंबल। उसकी बाहों की मांसपेशियां उभरी हुई थीं। नैना की शिकायत जीभ पर ही अटक गई।
"जी, भाभी?" विकास ने मुस्कुराते हुए पूछा। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। नैना ने गला साफ किया। "वो, रात को बहुत शोर होता है आपके फ्लैट से। मेरा बेडरूम ठीक नीचे है। नींद नहीं आती।"
"ओह, सॉरी भाभी। वो मैं रात को वर्कआउट करता हूं। जंपिंग जैक्स, बर्पीज। नीचे आवाज जाती है क्या?" विकास ने डंबल नीचे रखा। "आज से मैट बिछाकर करूंगा। प्रॉमिस।"
नैना ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी नजर बार-बार उसकी चौड़ी छाती पर जा रही थी। "ठीक है। बस थोड़ा ध्यान रखिएगा।" वह नीचे आ गई। सीढ़ियों पर उसके पैर हल्के लड़खड़ा रहे थे। उसने खुद को डांटा। वह शादीशुदा औरत थी।
रात को रोहित नाइट शिफ्ट के लिए निकला। नैना बिस्तर पर लेटी किताब पढ़ रही थी। तभी ऊपर से आवाज आई। धम। धम। धम। लयबद्ध। नैना ने किताब नीचे रखी। यह आवाज जंपिंग जैक्स जैसी नहीं थी। यह कुछ और थी। बिस्तर हल्के से हिल रहा था।
उसकी सांस तेज हो गई। वह समझ गई थी कि ऊपर क्या हो रहा था। विकास अकेला नहीं था, या शायद अकेला ही था, लेकिन वह जो कर रहा था उसकी कल्पना ने नैना के शरीर में आग लगा दी। उसका हाथ अपने आप नीचे सरक गया।
नैना ने आंखें बंद कर लीं। ऊपर की लयबद्ध आवाज और उसकी उंगलियां एक साथ चलने लगीं। उसने विकास का चेहरा याद किया, पसीने से तर बनियान, उभरी हुई बाहें। कुछ ही मिनटों में उसका शरीर अकड़ गया और वह झड़ गई। वह हांफती हुई लेटी रही।
अगली शाम नैना पार्किंग में विकास से टकराई। वह जिम बैग लिए आ रहा था। "भाभी, कल रात शोर तो नहीं हुआ?" उसने पूछा। नैना का चेहरा लाल हो गया। "नहीं, कल शांत था।" वह झूठ बोल रही थी और विकास की आंखों में देखकर उसे लगा कि वह जानता है।
"चाय पिएंगी? ऊपर प्रोटीन शेक बना रहा हूं, आपके लिए चाय बना दूंगा," विकास ने कहा। नैना को मना करना चाहिए था। लेकिन उसके पैर सीढ़ियां चढ़ने लगे। "बस पांच मिनट," उसने कहा, जैसे खुद को समझा रही हो।
विकास का फ्लैट छोटा लेकिन साफ था। एक कोने में डंबल, बेंच, योगा मैट। "बैठिए," उसने सोफे की तरफ इशारा किया। नैना बैठी। विकास रसोई में चाय बनाने लगा। उसकी पीठ की मांसपेशियां बनियान के नीचे हिल रही थीं।
"भाभी, आप कसरत क्यों नहीं करतीं? फिट रहना जरूरी है," विकास ने चाय का कप देते हुए कहा। वह उसके इतना पास बैठा कि उनकी जांघें छू गईं। नैना ने जांघ नहीं हटाई।
"मुझसे नहीं होता," नैना ने कहा। विकास हंसा। "मैं सिखा दूंगा। पहले स्ट्रेचिंग से शुरू करते हैं।" वह उठा और उसका हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया। "ऐसे, हाथ ऊपर।"
नैना ने हाथ ऊपर किए। विकास उसके पीछे खड़ा हो गया। उसके हाथ उसकी कमर पर आए। "सांस अंदर, छोड़ो," उसने उसके कान में कहा। उसकी गर्म सांस नैना की गर्दन पर पड़ी। नैना की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
"विकास," नैना ने धीरे से कहा, लेकिन वह पीछे नहीं हटी। विकास के हाथ उसकी कमर से ऊपर सरके। उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसने उसके स्तनों का भार महसूस किया। नैना की सांस अटक गई।
विकास ने उसे अपनी तरफ घुमाया। उनकी आंखें मिलीं। एक पल का ठहराव। फिर उसके होंठ उसके होंठों पर थे। नैना ने पहले विरोध का नाटक किया, फिर उसके कंधों को पकड़ लिया। उसका मुंह खुल गया और विकास की जीभ अंदर घुस गई।
चुंबन गहरा होता गया। विकास के हाथ उसके कुर्ते के नीचे घुस गए। उसने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। नैना के स्तन आजाद हो गए। विकास ने कुर्ता ऊपर उठाया और उसके एक स्तन को मुंह में ले लिया।
नैना ने उसके बाल पकड़ लिए। "ओह," उसके मुंह से निकला। विकास की जीभ उसके निप्पल के चारों ओर घूम रही थी। वह दूसरे स्तन को हाथ से मसल रहा था। नैना की चूत गीली होने लगी।
विकास ने उसे सोफे पर लिटा दिया। उसने उसकी सलवार का नाड़ा खोला। नैना ने कोई विरोध नहीं किया। सलवार नीचे सरकी। उसकी काली पैंटी गीली हो चुकी थी। विकास ने उसे भी उतार दिया।
वह उसकी टांगों के बीच बैठ गया। उसकी नजर उसकी चूत पर टिकी थी। "बहुत सुंदर," उसने कहा और अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। नैना की कमर उछल गई।
विकास की जीभ उसकी चूत के दाने को ढूंढकर चूसने लगी। नैना ने सोफे की गद्दी पकड़ ली। उसके मुंह से सिसकियां निकलने लगीं। "विकास, प्लीज," वह बड़बड़ाई। लेकिन विकास रुका नहीं। उसकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी।
कुछ ही मिनटों में नैना का शरीर अकड़ गया। वह जोर से झड़ गई। उसकी चूत का पानी विकास के चेहरे पर लगा। वह हांफती हुई पड़ी रही। विकास मुस्कुराते हुए उठा और अपने कपड़े उतारने लगा।
उसका लंड देखकर नैना की आंखें फैल गईं। लंबा, मोटा, नसें उभरी हुईं। विकास उसके ऊपर आया। उसने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। नैना ने अपनी टांगें फैला दीं।
विकास धीरे-धीरे अंदर घुसा। नैना ने उसके कंधे पकड़ लिए। वह पूरा अंदर गया तो नैना ने गहरी सांस ली। फिर वह चलने लगा। धीरे, गहरे धक्के। सोफा हिलने लगा। वही लयबद्ध आवाज, जो नैना रात को नीचे से सुनती थी।
विकास की रफ्तार बढ़ती गई। नैना ने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं। हर धक्के के साथ वह और अंदर जा रहा था। नैना के स्तन उछल रहे थे। विकास ने झुककर एक निप्पल को मुंह में ले लिया और चूसते हुए धक्के मारता रहा।
"तुम बहुत टाइट हो भाभी," विकास ने हांफते हुए कहा। नैना ने शर्म से चेहरा मोड़ लिया, लेकिन उसके शरीर ने जवाब दिया। उसकी चूत ने उसके लंड को और कसकर पकड़ लिया।
विकास ने उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया। अब नैना ऊपर थी। उसने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होना शुरू किया। विकास के हाथ उसके स्तनों पर थे। नैना की आंखें बंद थीं, उसके चेहरे पर मजा साफ दिख रहा था।
कुछ मिनटों बाद नैना की रफ्तार बढ़ गई। वह जोर-जोर से उछलने लगी। "मैं झड़ने वाली हूं," वह चिल्लाई। विकास ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के मारने लगा। दोनों एक साथ झड़े। विकास का पानी उसकी चूत में भर गया।
नैना उसके सीने पर सिर रखकर लेट गई। दोनों हांफ रहे थे। "यह गलत है," नैना ने धीरे से कहा। विकास ने उसके बालों में हाथ फेरा। "तो फिर इतना अच्छा क्यों लगा?" नैना के पास जवाब नहीं था।
वह कपड़े पहनकर नीचे आई। रात को रोहित घर आया। उसने नैना को देखा। "तुम्हारा चेहरा खिला हुआ लग रहा है," उसने कहा। नैना ने मुस्कुराकर बात टाल दी।
अगले दिन रोहित नाइट शिफ्ट के लिए निकला। नैना के फोन पर मैसेज आया। विकास: "ऊपर आओ। आज बर्पीज की बारी है।" नैना ने एक पल सोचा, फिर कुर्ता बदला और ऊपर चली गई।
इस बार विकास ने दरवाजा खोलते ही उसे अंदर खींच लिया। कोई चाय नहीं, कोई बात नहीं। सीधे बेडरूम। उसने उसे बिस्तर पर गिराया और उसके कपड़े उतारने लगा। नैना ने भी उसके कपड़े उतारने में मदद की।
विकास ने उसे उल्टा लिटाया। वह उसकी पीठ पर चुंबन बरसाने लगा। उसकी जीभ उसकी रीढ़ पर नीचे उतरी। नैना सिहर गई। फिर उसने उसकी टांगें फैलाकर पीछे से उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी।
नैना ने तकिया पकड़ लिया। उसकी सिसकियां तकिए में दब गईं। विकास की जीभ अंदर तक जा रही थी। फिर उसने अपनी उंगली भी अंदर डाली। नैना का शरीर कांपने लगा।
विकास उठा और पीछे से उसके अंदर घुस गया। डॉगी स्टाइल। नैना ने अपने हाथ बिस्तर पर टिकाए। विकास ने उसकी कमर पकड़कर जोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए। बिस्तर दीवार से टकराने लगा। धम। धम। धम।
नैना समझ गई। यही वह आवाज थी जो वह रात को सुनती थी। अब वह खुद उस आवाज का हिस्सा थी। इस ख्याल ने उसे और उत्तेजित कर दिया। उसने पीछे धकेलना शुरू कर दिया।
विकास ने उसके बाल पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया। "कैसा लग रहा है भाभी?" उसने पूछा। "बहुत अच्छा," नैना ने हांफते हुए कहा। "और जोर से।"
विकास ने रफ्तार दोगुनी कर दी। नैना दो बार झड़ी। फिर विकास ने उसे सीधा किया और उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। नैना ने पहले कभी ऐसा नहीं किया था, लेकिन उसने चूसना शुरू कर दिया। विकास ने उसके सिर को पकड़कर अंदर-बाहर किया।
कुछ ही देर में विकास उसके मुंह में झड़ गया। नैना ने सब निगल लिया। वह हैरान थी कि उसे यह भी अच्छा लगा। विकास ने उसे गले लगाया। दोनों बिस्तर पर लेट गए।
"कल फिर आओगी?" विकास ने पूछा। नैना ने उसकी छाती पर उंगली घुमाते हुए कहा, "पति सोमवार को घर रहेगा। तब तक रोज।" विकास हंसा और उसे फिर से अपनी बाहों में भर लिया।
उस रात नैना अपने बिस्तर पर लेटी थी। ऊपर से आवाज आई। धम। धम। धम। लयबद्ध। नैना मुस्कुराई। अब वह जानती थी कि वह आवाज क्या थी। और अगली रात वह खुद उस आवाज का हिस्सा बनने वाली थी। उसने करवट बदली और आंखें बंद कर लीं।
अगली सुबह रोहित के जाते ही दरवाजे पर दस्तक हुई। नैना ने दरवाजा खोला। विकास खड़ा था, हाथ में उसका दुपट्टा। "कल रात ऊपर ही रह गया था," उसने आंख मारते हुए कहा।
नैना ने उसे अंदर खींच लिया। दरवाजा बंद होते ही विकास ने उसे दीवार से लगा दिया। "रोहित अभी गया है," नैना ने हांफते हुए कहा। "पांच मिनट हैं।" विकास ने कहा, "पांच मिनट बहुत हैं।"
उसने उसकी नाइटी ऊपर उठाई। नैना ने नीचे कुछ नहीं पहना था। विकास की उंगलियां सीधे उसकी चूत पर गईं। वह गीली थी। "तुम हमेशा तैयार रहती हो," उसने कहा।
विकास ने अपनी पैंट नीचे की। उसका लंड पहले से खड़ा था। उसने नैना की एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रखी और एक ही धक्के में अंदर घुस गया। नैना ने उसके कंधे को काट लिया ताकि आवाज न निकले।
रसोई की दीवार से टिककर विकास ने तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। बर्तन रैक हिलने लगा। नैना ने अपनी उंगली मुंह में डाल ली। हर धक्का उसे हिला रहा था।
"जल्दी," नैना ने फुसफुसाया। "कोई आ जाएगा।" विकास ने रफ्तार बढ़ा दी। दो मिनट में नैना झड़ गई। उसकी चूत ने उसके लंड को निचोड़ लिया। विकास भी उसी पल उसके अंदर झड़ गया।
विकास ने पैंट ऊपर की और दुपट्टा उसके कंधे पर डाल दिया। "यह वापस करने आया था," उसने मुस्कुराते हुए कहा। उसने उसके गाल पर एक हल्का चुंबन दिया। "शाम को जिम से आकर मैसेज करूंगा।"
नैना ने उसे धक्का देकर बाहर निकाला। दरवाजा बंद करके वह दीवार से टिक गई। उसकी टांगें कांप रही थीं। उसकी चूत से उसका पानी बह रहा था। पांच मिनट। उसे पूरी सुबह के लिए काफी थे। वह मुस्कुराई और रसोई में चाय बनाने चली गई। केतली चढ़ाते हुए उसने सोचा, ऊपर वाले फ्लैट का शोर अब उसे परेशान नहीं करता। अब तो वह हर रात उस शोर का इंतजार करती है।
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