बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी: नागपुर की राधा और भूली हुई स्केचबुक
यह बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी नागपुर की राधा की है, एक ऐसी औरत की जिसकी जिंदगी में सब कुछ था, सिवाय उस एक एहसास के जो वह बरसों से भूल चुकी थी। राधा बत्तीस साल की थी, उसका पति दुबई में नौकरी करता था, और वह नागपुर के एक शांत अपार्टमेंट में अकेली रहती थी। शाम के वक्त जब वह बालकनी में चाय लेकर बैठी, तो रेलिंग के पास उसे एक स्केचबुक पड़ी मिली, जिसके पन्ने हवा से फड़फड़ा रहे थे। उसने किताब उठाई और पहला पन्ना पलटा, तो उसकी सांस रुक गई, क्योंकि उस पर उसी की तस्वीर बनी थी, बालकनी में खड़ी, हाथ में चाय का कप लिए।
राधा ने कांपते हाथों से पन्ने पलटे। हर पेज पर वह थी। कभी रसोई की खिड़की पर खड़ी, कभी गीले बालों में तौलिए लिपटी, कभी साड़ी का पल्लू संभालती हुई। किसी ने उसे बहुत ध्यान से देखा था, बहुत करीब से, और हर छोटी बात को पेंसिल से कैद कर लिया था। आखिरी पेज पर एक लाइन लिखी थी, तुम्हारी हंसी में एक अजीब सी रोशनी है। राधा का दिल जोर से धड़कने लगा। गुस्सा भी आया और एक अजीब सी सिहरन भी दौड़ गई, जिसे वह समझ नहीं पा रही थी।
स्केचबुक के पहले पेज पर नाम लिखा था, करन। सामने वाले फ्लैट में रहने वाला लड़का, अट्ठाईस साल का फोटोग्राफर, जो कभी कभी लिफ्ट में मिलता था और हल्की सी मुस्कान के साथ नमस्ते कहता था। राधा ने कभी उस पर खास ध्यान नहीं दिया था। अब अचानक उसे एहसास हुआ कि वह लड़का उसे रोज देखता था, चुपचाप, बिना कुछ कहे। वह स्केचबुक अपने कमरे में ले गई और उसे अलमारी के नीचे छिपा दिया, जैसे वह कोई राज हो जिसे वह खुद से भी छिपाना चाहती हो।
रात को राधा को नींद नहीं आई। वह बार बार उन स्केचों के बारे में सोचती रही। किसी ने उसे इतनी बारीकी से देखा था, उसकी गर्दन का तिल, उसके हाथों की नसें, उसकी साड़ी के नीचे से झांकती कमर की लकीर। उसके पति ने तो बरसों से उसे ऐसे देखा ही नहीं था। दुबई से आने वाले छोटे छोटे वीडियो कॉल में सिर्फ हालचाल होता था, खाना खाया, तबीयत ठीक है, बस। राधा ने करवट बदली और अपने ही बदन पर हाथ फेर लिया, फिर झट से हाथ हटा लिया, जैसे खुद से शरमा गई हो।
अगली शाम राधा ने जानबूझकर बालकनी का दरवाजा खुला रखा। करन अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ा था, कैमरा हाथ में लिए। उनकी नजरें मिलीं। राधा ने स्केचबुक उठाकर दिखाई और इशारे से पूछा, यह तुम्हारी है। करन का चेहरा लाल हो गया। वह हकलाते हुए बोला, हां, शायद मेरी बालकनी से उड़कर आपकी तरफ आ गई। राधा ने दरवाजा खोलकर उसे अंदर आने का इशारा किया। करन धीरे धीरे आया, जैसे कोई चोर पकड़ा गया हो।
राधा ने स्केचबुक मेज पर रखी और सीधे पूछा, तुम मुझे कब से देख रहे हो। करन ने नजरें झुका लीं। उसने कहा, जब से आप इस बिल्डिंग में आईं, तब से। मैं फोटोग्राफर हूं, मुझे चेहरे पढ़ने की आदत है, लेकिन आपका चेहरा कुछ अलग है, उसमें एक कहानी है। राधा हंस पड़ी, लेकिन उसकी हंसी में गुस्सा कम और एक अजीब सी खुशी ज्यादा थी। उसने कहा, तुम्हें शर्म नहीं आती, किसी औरत को चुपके से देखना। करन ने कहा, शर्म आती है, लेकिन आपकी खूबसूरती देखकर चुप रहना मुश्किल है।
राधा ने उसे चाय के लिए बैठाया। बातों बातों में करन ने बताया कि वह नागपुर में एक स्टूडियो में काम करता है, शादियों और पोर्ट्रेट की फोटोग्राफी करता है। राधा ने पूछा, तुमने मेरी इतनी तस्वीरें क्यों बनाईं। करन ने धीरे से कहा, क्योंकि आप हंसती कम हैं, और जब हंसती हैं तो पूरा चेहरा बदल जाता है, मैं उस पल को पकड़ना चाहता था। राधा का गला सूख गया। उसने चाय का कप उठाया, लेकिन हाथ कांप रहा था। करन ने उसका हाथ थाम लिया और कहा, घबराइए मत, मैं कुछ गलत नहीं करूंगा, जब तक आप न कहें।
उस रात के बाद राधा का मन बदलने लगा। वह सुबह उठकर आईने में खुद को देखने लगी। उसने अपनी पुरानी साड़ियां निकालीं, बालों में तेल लगाया, होंठों पर हल्की लिपस्टिक लगाई। उसे लगा जैसे वह फिर से जिंदा हो रही हो। दो दिन बाद करन फिर आया, इस बार एक छोटा सा स्केच लेकर, जिसमें राधा मुस्कुरा रही थी। राधा ने स्केच देखा और बोली, इस बार तुमने मेरी हंसी पकड़ ली। करन ने कहा, आपकी हंसी पकड़ना सबसे मुश्किल था, और सबसे खूबसूरत भी।
शाम गहराने लगी। राधा ने खिड़कियां बंद कर दीं, पर्दे खींच दिए। करन सोफे पर बैठा था। राधा उसके पास बैठी, इतने करीब कि उनकी सांसें टकराने लगीं। करन ने धीरे से उसके गाल को छुआ। राधा ने आंखें बंद कर लीं। उसने कहा, करन, यह गलत है, मेरे पति हैं। करन ने कहा, मैं जानता हूं, लेकिन आपकी आंखें कुछ और कह रही हैं। राधा ने उसकी ओर देखा, फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला चुंबन धीमा था, डरता हुआ, फिर अचानक तेज हो गया, जैसे बरसों की प्यास एक साथ फूट पड़ी हो।
राधा ने करन की कमीज के बटन खोले। उसकी छाती चौड़ी और गर्म थी। करन ने राधा की साड़ी का पल्लू धीरे से सरकाया, फिर ब्लाउज के हुक खोले। राधा की सांस तेज हो गई। करन ने उसके गले पर, कंधों पर, छाती पर चुंबन दिए। राधा ने उसके बालों में उंगलियां फंसा लीं और उसे और करीब खींच लिया। उसने कहा, धीरे मत करो, मुझे बरसों से किसी ने ऐसे नहीं छुआ। करन ने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके स्तनों को हाथों में लेकर सहलाया, फिर जीभ से उसके निप्पलों को चूमा। राधा के मुंह से एक लंबी सी आह निकली।
राधा ने करन की पैंट की जिप खोली। उसका लंड तना हुआ था, लंबा और गर्म। राधा ने उसे हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाया। करन ने उसकी साड़ी पूरी तरह हटा दी, फिर पेटीकोट का नाड़ा खोला। राधा अब सिर्फ पैंटी में थी। करन ने उसकी पैंटी भी सरका दी और उसकी चूत को देखा, जो गीली हो चुकी थी। उसने उंगलियों से उसे सहलाया, फिर जीभ से चाटा। राधा ने सोफे की गद्दी को कसकर पकड़ लिया। उसकी टांगें कांप रही थीं। उसने कहा, बस, अब और मत तरसाओ, अंदर आओ।
करन ने राधा को सोफे पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धकेला। राधा की आंखें फैल गईं। बरसों बाद किसी मर्द का स्पर्श उसे अंदर तक महसूस हो रहा था। करन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, पहले धीमे, फिर तेज। राधा ने उसकी पीठ को नाखूनों से खरोंचा और कहा, और तेज, और तेज करो। करन ने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और गहरे धक्के मारे। राधा की चूत से पानी बहने लगा, उसकी आवाजें कमरे में गूंजने लगीं।
थोड़ी देर बाद करन ने राधा को गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। उसने उसे बिस्तर पर औंधे मुंह लिटाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। राधा ने तकिया कसकर पकड़ लिया। करन ने उसकी कमर पकड़कर तेज धक्के मारे, हर धक्के के साथ राधा की आहें बढ़ती गईं। उसने कहा, करन, मैं झड़ने वाली हूं, रुकना मत। करन ने रफ्तार और बढ़ा दी। राधा का बदन अकड़ गया, फिर एक जोरदार झटके के साथ वह झड़ गई, उसकी चूत ने करन के लंड को कसकर जकड़ लिया।
करन भी ज्यादा देर नहीं टिक पाया। उसने कुछ और गहरे धक्के मारे और फिर राधा के अंदर ही झड़ गया, गर्म पानी की धार के साथ। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। राधा ने करन के सीने पर सिर रखा और कहा, मुझे डर लग रहा था, लेकिन अब लग रहा है जैसे मैं फिर से औरत बन गई हूं। करन ने उसके माथे को चूमा और कहा, तुम हमेशा से खूबसूरत थी, बस किसी ने तुम्हें बताया नहीं।
उस रात करन देर तक रुका। उन्होंने साथ खाना खाया, बातें कीं, फिर एक बार और प्यार किया, इस बार धीरे धीरे, बिना जल्दी के। राधा ने करन के हाथ को अपने बदन पर घुमाया और कहा, कल फिर आओगे। करन ने कहा, जब तक तुम कहोगी, मैं आता रहूंगा। राधा ने स्केचबुक निकाली और आखिरी पेज पर खुद एक लाइन लिख दी, आज पहली बार किसी ने मुझे सच में देखा।
अगले कुछ हफ्तों में राधा और करन की मुलाकातें बढ़ गईं। कभी करन उसके लिए नए स्केच लाता, कभी राधा उसके लिए खाना बनाती। एक शाम बारिश होने लगी और करन भीगता हुआ उसके घर आया। राधा ने उसे तौलिया दिया, लेकिन करन ने तौलिया एक तरफ रख दिया और उसे भीगी हालत में ही बाहों में भर लिया। राधा की साड़ी भीग गई, बदन से चिपक गई। करन ने उसके गीले बालों को पीछे किया और उसके होंठों को चूमा। राधा ने उसकी भीगी कमीज उतार दी और उसकी छाती पर हाथ फेरा।
उस शाम उन्होंने बाथरूम में ही प्यार किया। शावर के नीचे गर्म पानी बह रहा था। करन ने राधा को दीवार से लगाया और उसकी टांग उठाकर अपनी कमर पर रख ली। राधा ने उसकी गर्दन को चूमा और कहा, ऐसे ही, यहीं। करन ने अपना लंड उसकी चूत में डाला और धक्के मारे, पानी की बूंदें उनके बदनों पर चमक रही थीं। राधा ने अपनी उंगलियों से करन की पीठ सहलाई और उसके कान में कहा, तुम मुझे पागल कर दोगे। करन ने उसकी चूत को और गहराई से भरा, राधा की आवाजें शावर की आवाज में मिल गईं।
दोनों एक साथ झड़े, हांफते हुए, एक दूसरे को पकड़े हुए। राधा ने हंसकर कहा, अब तो तुम मेरे स्केच भी नहीं बनाते, सिर्फ मुझे ही बनाते हो। करन ने कहा, तुम्हें बनाना ही मेरा सबसे अच्छा स्केच है। राधा ने उसे कसकर गले लगाया। उसे पता था कि यह रिश्ता आसान नहीं है, उसके पति का फोन कभी भी आ सकता है, पड़ोसी कभी भी कुछ कह सकते हैं। लेकिन उसने तय कर लिया था कि वह अपनी खुशी को अब छिपाकर नहीं रखेगी।
एक दिन राधा के पति का फोन आया कि वह अगले महीने नागपुर आ रहा है। राधा का दिल धड़क उठा। उसने करन को बताया। करन ने कहा, तो क्या हम रुक जाएं। राधा ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, नहीं, रुकना नहीं है, बस थोड़ा संभलकर चलना है। उसने करन से कहा कि वह उसके लिए एक आखिरी स्केच बनाए, जिसमें वह मुस्कुरा रही हो, बिना किसी डर के। करन ने वादा किया।
उस रात राधा ने करन को अपने बेडरूम में बुलाया। उसने एक लाल साड़ी पहनी, जो उसने बरसों से नहीं पहनी थी। करन ने उसे देखकर कहा, आज तुम सबसे खूबसूरत लग रही हो। राधा ने उसे बिस्तर पर बिठाया और खुद उसके ऊपर आ गई। उसने धीरे धीरे उसकी कमीज उतारी, फिर अपनी साड़ी हटाई। करन ने उसके स्तनों को चूमा, उसकी कमर को सहलाया। राधा ने करन का लंड अपनी चूत में खुद डाला, ऊपर से धक्के मारते हुए। उसकी आंखें बंद थीं, चेहरे पर एक गहरी मुस्कान थी।
राधा ऊपर से धक्के मारती रही, कभी धीरे, कभी तेज, कभी रुककर करन के होंठों को चूमती हुई। करन ने उसकी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मारे। दोनों की सांसें तेज हो गईं। राधा ने कहा, मैं आ रही हूं, करन, मैं आ रही हूं। उसका बदन कांपा, चूत ने लंड को कस लिया, और वह एक लंबी आह के साथ झड़ गई। करन ने भी उसी पल उसे कसकर पकड़ा और उसके अंदर झड़ गया। दोनों पसीने में भीगे, एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे।
राधा ने करन के कान में कहा, तुमने मुझे मेरी हंसी वापस दी, और मेरा बदन भी। करन ने कहा, और तुमने मुझे मेरी सबसे अच्छी कहानी दी। राधा ने खिड़की से बाहर देखा, नागपुर की रात की बत्तियां जल रही थीं। उसने तय किया कि चाहे आगे कुछ भी हो, वह इस एहसास को नहीं खोएगी। उसने स्केचबुक को सीने से लगाया और आंखें बंद कर लीं, करन की धड़कन सुनते हुए।
अगली सुबह राधा रसोई में चाय बना रही थी, जब करन बिना बताए दरवाजे पर आ गया। उसके हाथ में एक नया स्केच था, लेकिन इस बार उसमें राधा अकेली नहीं थी, उसके पीछे एक परछाईं भी थी, जो उसे गले लगाए हुए थी। राधा ने स्केच देखा और शरमाकर मुंह फेर लिया। करन ने पीछे से उसे पकड़ लिया और उसके कंधे पर सिर रख दिया। राधा ने कहा, चाय गिर जाएगी, छोड़ो। करन ने कहा, गिरने दो, आज चाय से ज्यादा तुम्हारी खुशबू अच्छी लग रही है।
राधा ने गैस बंद की और करन की ओर मुड़ी। करन ने उसके हाथ अपने हाथों में लिए और उसकी हथेलियों को चूमा। राधा की सांस तेज हो गई। उसने कहा, सुबह सुबह यह सब ठीक नहीं है, कोई आ जाएगा। करन ने कहा, कोई नहीं आएगा, दरवाजा बंद है। उसने राधा की कमर पकड़कर उसे रसोई के स्लैब से लगा दिया। राधा ने उसके होंठों को चूमा, पहले धीरे, फिर गहराई से। करन ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसके पेट पर हाथ फेरा।
राधा ने करन की टीशर्ट ऊपर उठाई और उसकी छाती पर होंठ रख दिए। करन ने उसकी ब्लाउज के हुक खोले और उसके स्तनों को सहलाया, फिर जीभ से निप्पलों को चूमा। राधा ने आह भरकर कहा, बस, अब जल्दी करो, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी। करन ने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे स्लैब पर बिठा लिया। उसने अपनी पैंट उतारी और राधा की टांगें फैलाकर अपना लंड उसकी गीली चूत में धीरे से डाला।
राधा ने करन की कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया। करन ने धक्के मारे, पहले धीमे, फिर तेज, स्लैब पर रखे बर्तन हल्के से हिलने लगे। राधा ने उसके कंधों को पकड़ा और कहा, और तेज, करन, और तेज। करन ने उसकी चूत को गहराई से भरा, हर धक्के के साथ राधा की आहें बढ़ती गईं। थोड़ी देर में राधा का बदन अकड़ गया और वह एक लंबी सिसकी के साथ झड़ गई। करन ने कुछ और धक्के मारे और फिर उसके अंदर ही झड़ गया।
दोनों हांफते हुए एक दूसरे को पकड़े रहे। राधा ने हंसकर कहा, अब चाय ठंडी हो गई, दोबारा बनानी पड़ेगी। करन ने कहा, ठंडी चाय भी तुम्हारे हाथ की हो तो मीठी लगती है। राधा ने उसे एक कप चाय दी और स्केच को फ्रिज पर चिपका दिया, ताकि हर सुबह उसे याद रहे कि किसी ने उसे सच में देखा था।
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