हिंदी हॉट कहानियां PDF: इंदौर में श्रेया की चूत में देव का लंड, गरम चुदाई
"देव, ये वाला कपड़ा मत छूना, पहले मेरी बात सुनो," श्रेया ने मुस्कुराते हुए कहा और उसकी आँखों में एक शरारत झलक रही थी। आज सुबह उसने एक हिंदी हॉट कहानियां PDF अपने फोन में डाउनलोड की थी और तब से उसका मन बार बार उसी कहानी के गरम पलों की तरफ भाग रहा था। देव ने हँसकर कहा, "अरे, तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मैं कोई चोर हूँ, मैं तो सिर्फ कपड़ा देखने आया था।" श्रेया ने उसकी तरफ देखा और धीरे से बोली, "कपड़ा देखने आए थे या मुझे देखने आए थे, ये भी बता दो।"
श्रेया ने मन ही मन सोचा कि सुबह से उसका बदन कितना गरम हो रहा था। उसने फोन में वो कहानी देखी थी और तब से उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसने देव से कहा, "तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ, वैसे भी दुकान बंद होने में अभी थोड़ा वक्त है।" देव ने कहा, "चाय तो पी लूँगा, पर तुम मेरे पास बैठकर पीना, अकेले नहीं।" श्रेया ने चाय का कप उसके सामने रखा और उसके बगल में बैठ गई।
श्रेया ने उठकर दुकान का शटर आधा गिरा दिया और बोली, "अब दुकान बंद करने का वक्त हो गया है, तुम भी निकलो।" देव ने कहा, "इतनी जल्दी, अभी तो बात शुरू ही हुई थी।" श्रेया ने मुस्कुराकर कहा, "बातें खत्म नहीं हुई हैं, बस जगह बदल जाएगी।" देव ने हैरानी से पूछा, "जगह मतलब, कहाँ।" श्रेया ने कहा, "मेरा फ्लैट पास में ही है, वहाँ चलो, चाय वहाँ भी पी सकते हैं।"
श्रेया ने देव को सोफे पर बैठाया और कहा, "तुम बैठो, मैं कपड़े बदलकर आती हूँ, ये साड़ी दिन भर से चुभ रही है।" देव ने कहा, "जल्दी आना, मैं यहीं इंतजार कर रहा हूँ।" श्रेया कमरे में गई और एक हल्की सी नाइटी पहनकर बाहर आई। देव ने उसे देखकर कहा, "अरे वाह, ये तो साड़ी से भी ज्यादा अच्छी लग रही है।" श्रेया ने शर्मा कर कहा, "तुम्हारी नजरें ही ऐसी हैं, हर चीज में कुछ और देख लेती हैं।"
श्रेया उसके बगल में बैठ गई और देव ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। देव ने कहा, "श्रेया, मैं सच कहूँ, मैं तुम्हें बहुत दिनों से चाहता हूँ, पर कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई।" श्रेया ने कहा, "हिम्मत तो आज भी तुमने नहीं की, मैंने ही तुम्हें यहाँ बुलाया है।" देव ने कहा, "तो फिर आज हिम्मत मैं दिखाता हूँ, तुम्हें अपने पास खींचकर।" उसने श्रेया को अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
श्रेया ने पहले तो थोड़ा सा झिझक दिखाई, फिर उसने भी देव का चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और किस का जवाब दिया। दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक गए और साँसें तेज हो गईं। देव ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे और पास खींच लिया। श्रेया ने धीरे से कहा, "देव, धीरे, मुझे ऐसे ही अच्छा लग रहा है, जल्दी मत करो।" देव ने कहा, "जैसा तुम कहो, आज रात तुम्हारी ही चलेगी।"
देव ने श्रेया के गले पर अपने होंठ रखे और धीरे धीरे चूमने लगा। श्रेया ने आँखें बंद कर लीं और उसके बालों में उँगलियाँ फेरने लगी। उसने कहा, "हाँ, ऐसे ही, तुम्हारे होंठ बहुत गरम हैं।" देव ने उसके कंधे पर किस किया और उसकी नाइटी की डोरी को धीरे से खींच दिया। श्रेया ने कहा, "तुम बहुत शरारती हो, डोरी खोलने में जरा भी देर नहीं लगाई।" देव ने हँसकर कहा, "शरारत तो अभी शुरू हुई है।"
नाइटी उसके कंधों से सरककर नीचे गिर गई और श्रेया का बदन देव के सामने खुल गया। देव ने उसे देखते हुए कहा, "तुम कितनी खूबसूरत हो, तुम्हारे बूब्स तो बिल्कुल परफेक्ट हैं।" श्रेया ने कहा, "देखना बंद करो और छूना शुरू करो, सिर्फ देखने से क्या होगा।" देव ने उसके बूब्स को अपने हाथों में लिया और धीरे धीरे दबाने लगा। श्रेया ने सिसकारी भरी और कहा, "हाँ देव, ऐसे ही दबाओ, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"
देव ने उसके एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। श्रेया ने उसके सिर को पकड़ लिया और कहा, "हाँ, और जोर से चूसो, मुझे यही चाहिए था।" देव ने दूसरे बूब को हाथ से मसलते हुए पहले को चूसना जारी रखा। श्रेया की साँसें तेज हो गईं और उसका बदन काँपने लगा। उसने कहा, "देव, तुमने मुझे पागल कर दिया है, सुबह से ही मैं यही सोच रही थी।" देव ने कहा, "सुबह से क्या सोच रही थी, बताओ ना।"
देव ने श्रेया की पैंटी को धीरे से नीचे खिसकाया और उसकी चूत को देखा। उसने कहा, "तुम तो पूरी गीली हो गई हो, तुम्हारी चूत चमक रही है।" श्रेया ने कहा, "तुम्हारी वजह से ही तो गीली हुई हूँ, अब इसे ऐसे ही मत देखो।" देव ने अपनी उँगली से उसकी चूत को सहलाया और धीरे से अंदर डाली। श्रेया ने कहा, "आह, देव, तुम्हारी उँगली बहुत अच्छी लग रही है, और अंदर डालो।" देव ने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा।
श्रेया ने अपनी टाँगें फैला दीं और कहा, "हाँ, ऐसे ही, मुझे तुम्हारी उँगलियों का जादू बहुत पसंद आ रहा है।" देव ने उसकी चूत को चूम लिया और अपनी जीभ से उसे चाटने लगा। श्रेया ने बेड की चादर को कसकर पकड़ लिया और कहा, "देव, रुक मत, तुम्हारी जीभ ने मुझे दीवाना कर दिया है।" देव ने उसकी चूत के दाने को जीभ से दबाया और चाटता रहा। श्रेया की सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँजने लगीं।
श्रेया ने कहा, "देव, मैं झड़ने वाली हूँ, मुझे मत रोको।" देव ने और तेज चाटना शुरू किया और श्रेया का बदन जोर से काँपा। उसका पानी निकल गया और उसने लंबी साँस ली। उसने कहा, "तुमने मुझे पहली बार ही इतना खुश कर दिया, अब मेरी बारी है।" देव ने कहा, "तुम्हारी बारी का मुझे बेसब्री से इंतजार है।" श्रेया ने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी।
श्रेया ने देव की शर्ट उतार दी और उसकी छाती पर किस करने लगी। देव ने कहा, "तुम्हारे होंठ मेरी छाती पर बहुत अच्छे लग रहे हैं।" श्रेया ने उसकी पैंट की जिप खोली और उसका लंड बाहर निकाला। उसने कहा, "वाह देव, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा और सख्त है।" देव ने कहा, "ये तुम्हारे लिए ही सख्त हुआ है, अब इसे प्यार दो।" श्रेया ने उसके लंड को हाथ में लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी।
श्रेया ने उसके लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी। देव ने कहा, "आह श्रेया, तुम्हारा मुँह बहुत गरम है, ऐसे ही चूसती रहो।" श्रेया ने उसके लंड को गहराई तक लिया और अपनी जीभ से उसके चारों तरफ घुमाया। देव ने उसके बाल पकड़ लिए और कहा, "तुम बहुत अच्छा चूसती हो, मुझे बहुत मजा आ रहा है।" श्रेया ने और तेज चूसा और देव की साँसें तेज हो गईं।
देव ने कहा, "श्रेया, बस करो, वरना मैं अभी ही झड़ जाऊँगा।" श्रेया ने मुँह हटाया और मुस्कुराकर कहा, "झड़ना तो अभी बाकी है, असली मजा तो अब शुरू होगा।" देव ने उसे बेड पर लिटाया और उसकी टाँगों के बीच आ गया। उसने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और धीरे से धक्का दिया। श्रेया ने कहा, "हाँ देव, अंदर डालो, मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत में चाहिए।" देव ने धीरे धीरे अपना लंड अंदर डाला।
श्रेया ने कहा, "आह, कितना बड़ा है, मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा है और मजा भी आ रहा है।" देव ने कहा, "धीरे धीरे दर्द मजे में बदल जाएगा, तुम बस आराम से रहो।" उसने पूरा लंड अंदर डाल दिया और कुछ पल रुक गया। श्रेया ने उसकी कमर पकड़ ली और कहा, "अब धक्के मारो, मुझे और चाहिए।" देव ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किए और श्रेया की सिसकारियाँ बढ़ने लगीं।
देव ने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी और श्रेया ने कहा, "हाँ देव, ऐसे ही, और तेज, मुझे तुम्हारे धक्के बहुत पसंद आ रहे हैं।" देव ने उसके बूब्स को पकड़कर दबाते हुए चुदाई जारी रखी। श्रेया ने कहा, "तुम मुझे बहुत अच्छे से चोद रहे हो, मेरी चूत तुम्हारे लंड से पूरी भर गई है।" देव ने कहा, "तुम्हारी चूत भी बहुत टाइट और गरम है, मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा है।" दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही थीं।
श्रेया ने कहा, "देव, मुझे ऊपर आने दो, मैं तुम्हारे ऊपर बैठकर करना चाहती हूँ।" देव ने कहा, "जरूर, तुम ऊपर आओ, मैं नीचे से तुम्हें देखना चाहता हूँ।" श्रेया उसके ऊपर बैठ गई और उसके लंड को अपनी चूत में डाल लिया। उसने अपनी कमर हिलानी शुरू की और कहा, "देखो, मैं कितनी अच्छी तरह कर रही हूँ।" देव ने उसके बूब्स को हाथ में लिया और कहा, "तुम ऊपर से बहुत सेक्सी लग रही हो।"
श्रेया ने तेज तेज अपनी कमर हिलाई और उसका बदन ऊपर नीचे होने लगा। देव ने नीचे से धक्के मारे और कहा, "हाँ श्रेया, ऐसे ही हिलती रहो, मुझे बहुत मजा आ रहा है।" श्रेया ने कहा, "मैं फिर से झड़ने वाली हूँ, देव, मुझे कसकर पकड़ लो।" देव ने उसकी कमर कसकर पकड़ ली और श्रेया जोर से झड़ गई। उसका पानी देव के लंड पर बह गया और उसने कहा, "आह, कितना अच्छा लगा।"
देव ने कहा, "अब मेरी बारी है, तुम लेट जाओ, मैं तुम्हें पीछे से करना चाहता हूँ।" श्रेया ने कहा, "पीछे से, ये तो और भी मजेदार होगा।" वह घुटनों के बल हो गई और देव उसके पीछे आ गया। देव ने अपने लंड को उसकी चूत में पीछे से डाला और कहा, "तुम्हारी गांड कितनी सुंदर है, इसे देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया है।" श्रेया ने कहा, "तो फिर देर मत करो, मुझे पीछे से जमकर चोदो।"
देव ने पीछे से तेज धक्के मारने शुरू किए और श्रेया ने कहा, "हाँ देव, ऐसे ही, और तेज, मुझे पीछे से बहुत मजा आ रहा है।" देव ने उसकी कमर पकड़कर धक्के मारे और उसके बूब्स को पीछे से हाथ बढ़ाकर दबाया। श्रेया की सिसकारियाँ तेज हो गईं और उसने कहा, "देव, मत रुकना, मुझे इसी तरह चोदते रहो।" देव ने कहा, "मैं नहीं रुकूँगा, तुम बस ऐसे ही रहो।" कमरे में दोनों की आवाजें गूँज रही थीं।
देव ने कहा, "श्रेया, मैं झड़ने वाला हूँ, तुम्हारी चूत में ही झड़ूँ।" श्रेया ने कहा, "हाँ, मेरी चूत में ही झड़ो, मुझे तुम्हारा पानी अपनी चूत में चाहिए।" देव ने कुछ तेज धक्के मारे और अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। श्रेया ने कहा, "आह, तुम्हारा गरम पानी मेरी चूत में भर गया है, कितना अच्छा लग रहा है।" देव ने उसके ऊपर से हटकर उसके बगल में लेट गया और दोनों हाँफने लगे।
दोनों थककर एक दूसरे की बाँहों में लेट गए। श्रेया ने कहा, "देव, तुम कल भी आओगे ना।" देव ने कहा, "कल ही क्यों, मैं हर शाम आऊँगा, तुम्हारी बुटीक भी और तुम्हारा फ्लैट भी।" श्रेया ने हँसकर कहा, "तुम्हारी ये बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई।" देव ने उसके माथे पर किस किया और कहा, "तुम सो जाओ, मैं तुम्हें ऐसे ही पकड़कर सोऊँगा।" श्रेया ने आँखें बंद कीं और बोली, "सोने से पहले एक बात, कल सुबह तुम मेरे लिए चाय बनाना।"
सुबह की पहली रोशनी खिड़की से अंदर आई तो श्रेया ने आँखें खोलीं और देव को अपने बगल में सोते हुए देखा। उसने मुस्कुराकर उसके गाल पर किस किया और धीरे से कहा, "उठो, तुमने रात को चाय बनाने का वादा किया था।" देव ने आँखें खोलीं और कहा, "वादा तो किया था, पर पहले एक किस तो बनती है।" श्रेया ने उसके होंठों पर किस किया और कहा, "अब उठो, चाय के बाद ही आगे की बात होगी।"
देव ने उसे अपनी बाँहों में खींच लिया और कहा, "चाय बाद में, पहले मुझे तुम्हें फिर से अपने पास चाहिए।" श्रेया ने कहा, "तुम तो सुबह सुबह भी शुरू हो गए, तुम्हें चैन ही नहीं है।" देव ने उसके बूब्स को हाथ से सहलाया और कहा, "तुम्हारे पास होकर चैन किसे मिलेगा।" श्रेया ने सिसकारी भरी और कहा, "हाँ, ऐसे ही सहलाओ, सुबह की ये शुरुआत मुझे बहुत पसंद आ रही है।"
श्रेया ने देव के लंड को हाथ में लिया और कहा, "देखो, तुम्हारा लंड सुबह से ही सख्त है।" देव ने कहा, "तुम्हें देखकर ये हर वक्त सख्त रहता है।" श्रेया ने उसके लंड को धीरे धीरे हिलाया और देव ने उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसा। श्रेया ने कहा, "आह देव, तुम्हारा मुँह और तुम्हारे हाथ दोनों जादू करते हैं।" देव ने कहा, "तो फिर आज सुबह का जादू लंबा चलेगा।"
देव ने श्रेया को अपने ऊपर बिठाया और उसका लंड उसकी चूत में डाल दिया। श्रेया ने धीरे धीरे अपनी कमर हिलाई और कहा, "सुबह की ये चुदाई रात से भी ज्यादा मीठी लग रही है।" देव ने उसके बूब्स को दबाते हुए कहा, "तुम्हारी चूत सुबह में और भी गरम लग रही है।" श्रेया ने तेज हिलना शुरू किया और कहा, "हाँ देव, मुझे ऐसे ही चाहिए, मत रुकना।"
कुछ ही देर में श्रेया जोर से झड़ गई और उसने देव को कसकर पकड़ लिया। देव ने भी कुछ तेज धक्के मारे और अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। श्रेया ने हाँफते हुए कहा, "अब तो चाय बनती है, वो भी तुम बनाओगे।" देव ने हँसकर कहा, "जरूर, चाय भी मैं बनाऊँगा और तुम्हें भी मैं ही खुश रखूँगा।" श्रेया ने कहा, "यही वादा मुझे हर सुबह चाहिए।"
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