हिंदी सेक्सी कहानी: दिल्ली में नैना और अमन की पुरानी दोस्ती का नया मोड़
“नैना, तुम अब भी उसी पुरानी चाय की दुकान पर बैठती हो?” अमन की आवाज़ फोन पर सुनते ही नैना हँस पड़ी।
“और तुम अब भी बिना बताए दिल्ली आ जाते हो,” नैना ने कहा। “कहाँ हो तुम?”
“तुम्हारे ऑफिस से दस मिनट की दूरी पर। एक कॉफी पिला दो, पुरानी दोस्ती के नाम पर।”
नैना ने घड़ी देखी। शाम के छह बजे थे, काम लगभग खत्म था, और उसका दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा था। अमन कॉलेज का वह दोस्त था जिसके साथ वह घंटों हँसती थी, जिसके मज़ाक पर वह सबसे ज़्यादा शर्माती थी।
कैफ़े में अमन पहले से बैठा था। उसने नीली शर्ट पहनी थी, बाल थोड़े बिखरे थे, और उसकी आँखों में वही पुरानी शरारत थी। नैना ने उसके सामने बैठते ही कहा, “तुम बिल्कुल नहीं बदले।”
“तुम बदल गई हो,” अमन ने मुस्कुराकर कहा। “पहले से ज़्यादा खूबसूरत।”
नैना का चेहरा लाल हो गया। उसने कॉफी का कप उठाया और नज़रें झुका लीं। “मुंबई ने तुम्हें झूठ बोलना सिखा दिया है।”
“मुंबई ने मुझे सच बोलना सिखाया है,” अमन ने धीरे से कहा। “और सच यह है कि तुम्हें देखकर मुझे वही पुरानी बेचैनी हो रही है।”
दोनों ने कॉलेज के दिनों की बातें कीं। पुराने प्रोजेक्ट, रात की मैगी, वह बारिश वाली शाम जब दोनों एक ही छाते के नीचे भीगते हुए हॉस्टल लौटे थे। नैना को लगा जैसे बीच के साल गायब हो गए हों।
“तुम्हारा फ्लैट कहाँ है?” अमन ने पूछा।
“यहाँ से पास ही। क्यों?”
“क्योंकि मैं तुम्हें अपनी नई डिज़ाइन दिखाना चाहता हूँ। लैपटॉप मेरे बैग में है, पर बैटरी खत्म है। तुम्हारे घर चार्जर मिल जाएगा।”
नैना जानती थी कि यह सिर्फ बहाना है। फिर भी उसने हाँ कह दी। दिल के किसी कोने में वह भी यही चाहती थी।
फ्लैट पहुँचते ही नैना ने दरवाज़ा खोला और लाइट जलाई। छोटा सा साफ़ सुथरा फ्लैट, दीवार पर उसकी बनाई पेंटिंग, बालकनी में सूखते कपड़े। अमन ने चारों ओर देखा और कहा, “तुम्हारी दुनिया बिल्कुल तुम्हारी तरह है। सुंदर और सुलझी हुई।”
“चाय बनाऊँ?” नैना ने पूछा।
“पहले यह बताओ,” अमन उसके करीब आ गया, “तुमने मुझे इतने साल दूर क्यों रखा?”
नैना पीछे हटी, पर उसकी पीठ दीवार से लग गई। अमन ने उसके चेहरे के पास अपना हाथ रखा, बिना छुए। उसकी साँसें नैना के गालों को छू रही थीं।
“क्योंकि तुम खतरनाक हो,” नैना ने फुसफुसाकर कहा।
“किस तरह खतरनाक?”
“तुमसे बात करके मन करता है कि सब कुछ भूल जाऊँ।”
अमन ने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्का सा स्पर्श, फिर गहरा। नैना ने उसकी शर्ट की कॉलर पकड़ ली और उसे और करीब खींच लिया। सालों की दबी हुई चाहत एक ही पल में जाग उठी।
उसने नैना की कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी ओर खींचा। नैना का बदन उसके बदन से सट गया। वह उसकी गर्दन पर होंठ रखकर धीरे धीरे चूमने लगा। नैना की साँसें तेज़ हो गईं।
“अमन,” वह बोली, “दरवाज़ा बंद है न?”
“मैंने आते ही बंद कर दिया था,” उसने कहा और उसके कान के नीचे चूम लिया।
नैना ने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। एक, दो, तीन। उसकी छाती सामने आई तो नैना ने उस पर हाथ फेरा। अमन ने उसकी कुर्ती के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाया। नैना ने आह भरी और सिर पीछे झुका दिया।
“तुम्हारी आवाज़,” अमन ने कहा, “आज भी मुझे पागल करती है।”
वह उसे बेडरूम तक ले गया। बिस्तर पर बैठते ही नैना ने अपनी कुर्ती उतार दी। अमन ने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके बूब्स को दोनों हाथों से थाम लिया। वह एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा। नैना ने उसके बालों में उँगलियाँ डाल दीं।
“और ज़ोर से,” नैना ने कहा।
अमन ने दूसरे बूब पर भी वही किया। फिर वह नीचे झुका और उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। नैना की चूत उसके सामने थी, गीली और गर्म। उसने अपनी उँगली से उसे सहलाया तो नैना का बदन काँप उठा।
“अमन, अब मत रोको,” नैना ने कहा।
अमन ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। नैना ने उसे हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर उसने उसे मुँह में लिया। अमन ने सिर पीछे किया और गहरी साँस ली।
नैना ने उसके लंड को चूसा, जीभ से उसके ऊपर घुमाया, और कभी कभी ऊपर देखकर मुस्कुराई। अमन ने उसके बाल पकड़े और कहा, “बस, अब मैं और नहीं रुक सकता।”
उसने नैना को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। फिर उसने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। नैना ने आह भरी। “हाँ, धीरे धीरे।”
अमन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीमे, फिर तेज़। नैना ने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। दोनों की साँसें एक हो गईं।
“तुम कितनी टाइट हो,” अमन ने हाँफते हुए कहा।
“और तुम कितने मोटे,” नैना ने हँसते हुए कहा, फिर उसकी गर्दन पर काट लिया।
अमन ने उसे उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया। इस पोज़िशन में उसका लंड और गहरा गया। नैना ऊपर नीचे होने लगी। उसके बूब्स हिल रहे थे। अमन ने उन्हें मुँह में लिया और चूसता रहा।
नैना की चूत से पानी निकलने लगा। वह तेज़ तेज़ हिल रही थी। “मैं झड़ने वाली हूँ,” वह चिल्लाई।
“साथ में,” अमन ने कहा और उसे कसकर पकड़ लिया।
दोनों एक साथ झड़े। नैना का बदन काँप रहा था। अमन ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके माथे पर चूमा।
कुछ देर बाद नैना ने कहा, “तुम्हें भूख लगी है?”
“बहुत,” अमन ने कहा, “पर खाने की नहीं।”
रात को दोनों ने साथ खाना बनाया। रसोई में नैना ने आटा गूँथा और अमन ने पीछे से उसे पकड़ लिया। उसने उसकी गर्दन चूमी और हाथ उसकी कमर से नीचे ले गया। नैना हँस पड़ी। “खाना जल जाएगा।”
“जलने दो,” अमन ने कहा और उसे किचन स्लैब पर बैठा दिया।
उसने नैना की नाइटी ऊपर की और उसकी चूत को चाटने लगा। नैना ने स्लैब पकड़ लिया। उसकी जीभ की हर हरकत उसे पागल कर रही थी। “अमन, बस अब अंदर डालो,” वह बोली।
अमन ने खड़े होकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और तेज़ धक्के लगाने लगा। स्लैब हिल रहा था। नैना की चीखें कमरे में गूँज रही थीं।
“तुम्हारी चूत कितनी गर्म है,” अमन ने कहा।
“तो फिर बाहर क्यों निकलते हो,” नैना ने कहा और उसे और अंदर खींच लिया।
इस बार अमन ने उसे पीछे से लिया। नैना स्लैब पर झुकी थी। उसने पीछे से धक्के लगाए, कभी धीमे कभी तेज़। नैना का बदन लहरा रहा था।
“मैं फिर झड़ रही हूँ,” नैना ने कहा।
अमन ने भी अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए एक दूसरे से लिपट गए।
रात के बारह बजे दोनों बालकनी में बैठे थे। दिल्ली की ठंडी हवा चल रही थी। नैना ने अमन के कंधे पर सिर रखा।
“तुम कब तक दिल्ली में हो?” नैना ने पूछा।
“जब तक तुम कहो,” अमन ने कहा।
“तो फिर कल सुबह भी यही होगा,” नैना ने मुस्कुराकर कहा।
सुबह नैना की आँख खुली तो अमन उसके बगल में था। उसने धीरे से नैना के बूब्स को सहलाया। नैना ने आँखें खोलीं और कहा, “फिर से?”
“फिर से,” अमन ने कहा और उसके ऊपर आ गया।
सुबह की रोशनी में दोनों ने एक बार फिर प्यार किया। इस बार धीरे धीरे, बिना जल्दी के। हर स्पर्श, हर चुम्बन लंबा था। नैना ने उसके लंड को हाथ से सहलाया, फिर वह उसके ऊपर बैठ गई और धीरे धीरे हिलने लगी।
“तुम्हारे बिना ये साल कैसे बीते,” अमन ने कहा।
“अब मत जाना,” नैना ने कहा और उसे कसकर पकड़ लिया।
दोनों साथ झड़े। फिर नैना ने उसके सीने पर सिर रखा और कहा, “कॉफी?”
“पहले एक चुम्बन,” अमन ने कहा।
नैना हँस पड़ी और उसके होंठों पर लंबा चुम्बन दिया। बाहर दिल्ली जाग रही थी, पर उनके फ्लैट में वक्त थम सा गया था।
दोपहर को दोनों ने साथ नहाने का फैसला किया। शावर के नीचे गर्म पानी गिर रहा था। नैना ने अमन की पीठ पर साबुन लगाया और वह उसकी कमर से नीचे हाथ ले गया।
“यहाँ भी?” नैना ने शरारत से पूछा।
“हर जगह,” अमन ने कहा और उसे दीवार से सटा दिया।
पानी की धार में अमन ने नैना की चूत को उँगलियों से सहलाया। नैना ने उसके लंड को पकड़ लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी। दोनों की साँसें भाप में घुल रही थीं।
अमन ने नैना की एक टाँग उठाई और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। खड़े खड़े धक्के लगाना मुश्किल था, पर नैना ने दीवार पकड़ ली और उसका साथ दिया। पानी उनके बदन पर बह रहा था।
“तुम्हारी चूत में पानी और मेरा पानी मिल रहा है,” अमन ने हँसते हुए कहा।
“बकवास बंद करो और तेज़ करो,” नैना ने कहा।
अमन ने तेज़ धक्के लगाए। नैना की चीखें बाथरूम में गूँज उठीं। वह झड़ी तो उसकी टाँगें काँपने लगीं। अमन ने उसे सँभाला और अपना पानी भी छोड़ दिया।
नहाकर दोनों ने चाय पी। नैना ने कहा, “अमन, एक बात सच बताओ। तुम दिल्ली क्यों आए थे?”
“तुमसे मिलने,” अमन ने बिना झिझक कहा। “मुंबई में सब कुछ था, पर तुम नहीं थीं।”
नैना की आँखें भर आईं। उसने अमन का हाथ पकड़ा और कहा, “तो अब रुक जाओ। यह फ्लैट, यह शहर, और मैं, सब तुम्हारे हैं।”
अमन ने उसके हाथ पर चुम्बन दिया और कहा, “मैं कहीं नहीं जा रहा।”
अगले हफ़्ते नैना और अमन ने एक छोटी सी यात्रा की योजना बनाई। वे दिल्ली से बाहर एक शांत रिसॉर्ट में गए।
रिसॉर्ट का कमरा बड़ा था, बालकनी से पहाड़ दिखते थे। दरवाज़ा बंद होते ही अमन ने नैना को पीछे से पकड़ लिया।
“यहाँ कोई हमें नहीं जानता,” अमन ने कहा। “यहाँ हम जो चाहें कर सकते हैं।”
नैना ने मुस्कुराकर अपनी ड्रेस उतार दी। अमन ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पूरे बदन पर चुंबन दिए।
उसने नैना के बूब्स को चूसा, उसकी कमर को सहलाया, और फिर उसकी चूत को जीभ से चाटा। नैना की साँसें तेज़ हो गईं।
“अमन, अब अंदर आओ,” नैना ने कहा।
अमन ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। नैना ने उसकी पीठ पकड़ ली।
दोनों ने बालकनी में भी प्यार किया। ठंडी हवा में नैना का बदन काँप रहा था, पर अमन की गर्मी उसे सँभाल रही थी।
अमन ने नैना को बालकनी की रेलिंग से सटाया और पीछे से धक्के लगाए। नैना की चीखें पहाड़ों में गूँज रही थीं, पर वहाँ कोई सुनने वाला नहीं था।
“तुम्हारी चूत में मेरा पानी,” अमन ने कहा, “और तुम्हारे होंठों पर मेरा नाम।”
नैना हँस पड़ी। “और तुम्हारे सीने पर मेरे नाखूनों के निशान।”
रात को दोनों ने साथ खाना खाया। खाने के बाद अमन ने नैना को फिर बिस्तर पर ले लिया। इस बार नैना ऊपर बैठी और धीरे धीरे हिली।
उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे। अमन ने उसके बूब्स को पकड़ा और चूसा।
दोनों एक साथ झड़े। नैना अमन के सीने पर गिर पड़ी।
“अगली यात्रा कब?” नैना ने पूछा।
“जब तुम कहो,” अमन ने कहा। “हर हफ़्ते, हर महीने, हमेशा।”
नैना ने उसके माथे पर चूमा और कहा, “तो फिर यह यात्रा कभी खत्म नहीं होगी।”
रिसॉर्ट से लौटते समय नैना ने अमन का हाथ पकड़ा। “यह यात्रा मैं कभी नहीं भूलूँगी।”
“मैं भी नहीं,” अमन ने कहा। “और अगली यात्रा में हम और भी आगे जाएँगे।”
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