हिंदी संभोग कहानी: जयपुर में ऋतु और देवर अमन की पहली रात की आग
“भाभी, आप आज कुछ अलग लग रही हैं,” अमन ने कहा और उसकी नज़र ऋतु के चेहरे पर एक पल ज़्यादा ठहर गई। ऋतु ने हँसकर बात टाल दी, पर उसके हाथ में पकड़ी चाय की प्याली थोड़ी काँप गई। रसोई की ट्यूबलाइट के नीचे वह पीली साड़ी में खड़ी थी और बालों की एक लट बार बार उसके गाल पर आ रही थी।
विक्रम तीन दिन से इंदौर के टूर पर था। घर में सिर्फ ऋतु और अमन थे। अमन उसके देवर का छोटा भाई नहीं था, वह विक्रम का चचेरा भाई था, जो जयपुर में एक नौकरी के इंटरव्यू के लिए आया था। वह चौबीस साल का था, लंबा, दुबला और बात करने में बेझिझक। ऋतु तीस साल की थी और इस हिंदी संभोग कहानी की शुरुआत उसी शाम से हुई जब दोनों पहली बार अकेले खाना बनाने लगे।
“इंटरव्यू कैसा रहा?” ऋतु ने पूछा। अमन ने कंधे उचकाए और कहा कि पहला राउंड अच्छा गया है, दूसरा कल है। वह फ्रिज से टमाटर निकाल रहा था और ऋतु आटा गूँथ रही थी। रसोई छोटी थी, इसलिए दोनों बार बार एक दूसरे से टकरा जाते थे। हर टकराहट पर ऋतु पीछे हट जाती थी और अमन मुस्कुरा देता था।
खाना बनते बनते रात के नौ बज गए। दोनों ने बालकनी में बैठकर खाना खाया। जयपुर की हवा में हल्की ठंडक थी और नीचे गली में कभी कभी कोई बाइक गुज़र जाती थी। अमन ने कहा, “भाभी, आपने तो होटल से अच्छा खाना बना दिया।” ऋतु ने कहा, “झूठी तारीफ़ मत करो, दाल में नमक ज़्यादा है।” अमन ने चम्मच चाटते हुए कहा, “मुझे तो यही नमक अच्छा लग रहा है।”
खाने के बाद अमन ने बर्तन धोने में मदद की। ऋतु ने मना किया, पर वह नहीं माना। सिंक के पास खड़े होकर दोनों की कोहनियाँ टकरा रही थीं। ऋतु ने देखा कि अमन की कमीज़ की आस्तीन गीली हो गई है और उसकी बाँह की नसें उभर आई हैं। उसने नज़र फेर ली, पर दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी।
रात को ऋतु अपने कमरे में लेटी तो नींद नहीं आई। विक्रम का फोन आया था, उसने कहा कि इंदौर में मीटिंग लंबी खिंच गई है और वह एक दिन और रुक सकता है। ऋतु ने कहा, “ठीक है, अपना ख्याल रखना।” फोन रखते ही उसे अजीब सा खालीपन महसूस हुआ। वह उठकर पानी पीने रसोई में गई तो देखा कि अमन भी जाग रहा था और बालकनी में खड़ा सिगरेट नहीं, बल्कि चाय पी रहा था।
“नींद नहीं आ रही?” अमन ने पूछा। ऋतु ने कहा, “तुम भी तो जाग रहे हो।” दोनों बालकनी की कुर्सियों पर बैठ गए। अमन ने धीरे से कहा, “भाभी, सच कहूँ तो जब से आया हूँ, मुझे इस घर में अजनबी जैसा नहीं लगा।” ऋतु ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो उसने विक्रम की आँखों में बरसों से नहीं देखा था।
बातें करते करते रात के बारह बज गए। अमन ने कहा, “कल मेरा इंटरव्यू है, पर मैं अभी सोना नहीं चाहता।” ऋतु ने हँसकर कहा, “तो क्या करोगे, रात भर बालकनी में बैठोगे?” अमन ने कहा, “अगर आप साथ बैठें तो बैठ भी जाऊँ।” ऋतु का दिल ज़ोर से धड़का। उसने कहा, “अमन, ये ठीक नहीं है।” अमन ने कहा, “मैंने कुछ गलत तो कहा ही नहीं, भाभी।”
ऋतु अपने कमरे में लौट आई और दरवाज़ा बंद कर लिया। पर दरवाज़ा बंद करने से मन की आवाज़ बंद नहीं हुई। वह बिस्तर पर लेटकर छत को देखती रही। उसे याद आया कि विक्रम के साथ पिछली बार कब वह ऐसे हँसी थी। उसे याद नहीं आया। उसने करवट बदली और आँखें बंद कर लीं, पर नींद फिर भी नहीं आई।
अगली सुबह अमन इंटरव्यू के लिए तैयार होकर निकला। ऋतु ने उसे टिफिन दिया और कहा, “ऑल द बेस्ट।” अमन ने कहा, “भाभी, आपकी दुआ साथ है तो सब अच्छा होगा।” दिन भर ऋतु घर के कामों में लगी रही, पर बार बार उसकी नज़र गेस्ट रूम के दरवाज़े पर चली जाती थी। वहाँ अमन का बैग पड़ा था और उसकी एक कमीज़ कुर्सी पर टंगी थी।
शाम को अमन लौटा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी। उसने कहा, “भाभी, दूसरा राउंड भी अच्छा गया। अब फाइनल राउंड परसों है।” ऋतु ने खुशी से कहा, “बहुत बढ़िया।” अमन ने कहा, “इस खुशी में आज चाय मैं बनाऊँगा।” ऋतु ने कहा, “तुम्हारी चाय पीने लायक होगी?” अमन ने कहा, “पीकर देखिए, फिर बताइएगा।”
चाय पीते हुए दोनों टीवी देखने लगे। एक रोमांटिक गाना आ रहा था और हीरो हीरोइन बारिश में भीग रहे थे। ऋतु ने कहा, “ये सब फिल्मों में ही अच्छा लगता है।” अमन ने कहा, “क्यों, असल ज़िंदगी में भी तो हो सकता है।” ऋतु ने उसकी ओर देखा और कहा, “असल ज़िंदगी में लोग डरते हैं, अमन।” अमन ने धीरे से कहा, “मैं नहीं डरता, भाभी।”
उस रात खाना खाने के बाद अमन ने कहा, “भाभी, एक बात पूछूँ? आप खुश हैं?” ऋतु चुप हो गई। उसने कहा, “ये कैसा सवाल है?” अमन ने कहा, “सीधा सवाल है। विक्रम भैया महीने में बीस दिन बाहर रहते हैं। आप अकेली रहती हैं। क्या ये खुशी है?” ऋतु की आँखें भर आईं। उसने कहा, “अमन, चुप हो जाओ।” अमन ने कहा, “मैं चुप हो जाऊँगा, पर सच तो यही है।”
ऋतु उठकर अपने कमरे में चली गई। अमन पीछे पीछे आया और दरवाज़े पर रुक गया। उसने कहा, “भाभी, मैं अंदर आ सकता हूँ? बस बात करनी है।” ऋतु ने कहा, “बात यहीं से कर लो।” अमन ने कहा, “दरवाज़े से बात नहीं होती।” ऋतु ने कुछ पल सोचा और दरवाज़ा थोड़ा खोल दिया। अमन अंदर आकर बिस्तर के किनारे बैठ गया।
कमरे की बत्ती धीमी थी। अमन ने ऋतु का हाथ पकड़ लिया। ऋतु ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, पर उसकी पकड़ मज़बूत नहीं थी। अमन ने कहा, “भाभी, मैं जानता हूँ आप भी यही चाहती हैं।” ऋतु ने कहा, “ये गलत है, अमन। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।” अमन ने कहा, “रिश्ता गलत नहीं होता, भाभी। गलत तो वो अकेलापन है जिसमें आप जी रही हैं।”
ऋतु की साँसें तेज़ हो गईं। अमन ने धीरे से उसके गाल को छुआ। ऋतु ने आँखें बंद कर लीं। अमन ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले वह चुंबन हल्का था, फिर गहरा होता गया। ऋतु ने उसके कंधे पकड़ लिए और फिर खुद भी उसका साथ देने लगी। बरसों बाद किसी ने उसे ऐसे चूमा था जैसे वह कोई कीमती चीज़ हो।
अमन ने ऋतु की साड़ी का पल्लू धीरे से हटाया। ऋतु ने कहा, “रुको, दरवाज़ा बंद है ना?” अमन ने कहा, “हाँ, बंद है।” उसने ऋतु के ब्लाउज़ के हुक एक एक करके खोले। ऋतु की साँसें और तेज़ हो गईं। अमन ने उसके सीने को अपने हाथों में लिया और धीरे से दबाया। ऋतु के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली।
“भाभी, आप कितनी खूबसूरत हैं,” अमन ने कहा। ऋतु ने कहा, “चुप रहो और प्यार करो।” अमन ने उसके बदन को चूमना शुरू किया, गर्दन से लेकर सीने तक। ऋतु ने उसके बालों में उँगलियाँ फँसा लीं। जब अमन ने उसके निप्पल को अपने मुँह में लिया और धीरे से चूसा तो ऋतु का बदन काँप उठा। उसने कहा, “अमन, और, और ज़ोर से।”
अमन ने ऋतु की साड़ी पूरी तरह हटा दी और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। ऋतु सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। अमन ने उसकी टाँगों को सहलाया और पेटीकोट का नाड़ा धीरे से खोल दिया। ऋतु ने कहा, “अमन, मुझे शर्म आ रही है।” अमन ने कहा, “शर्म कैसी, भाभी। आप मेरी हो, इस पल में।” उसने उसकी पैंटी को नीचे खिसकाया।
ऋतु की चूत गीली हो चुकी थी। अमन ने अपनी उँगली से उसे छुआ और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। ऋतु ने बिस्तर की चादर को मुट्ठी में पकड़ लिया। उसने कहा, “अमन, बस, अब और नहीं सहा जाता।” अमन ने कहा, “अभी तो शुरुआत है, भाभी।” उसने अपना मुँह ऋतु की चूत पर रख दिया और जीभ से चाटने लगा।
ऋतु का बदन बिस्तर पर उछलने लगा। उसने कहा, “अमन, रुक मत, ऐसे ही, ऐसे ही।” अमन ने जीभ की रफ़्तार बढ़ा दी और एक उँगली भी अंदर डाल दी। ऋतु की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं। कुछ ही पलों में उसका बदन अकड़ गया और वह ज़ोर से झड़ गई। उसका पानी अमन के चेहरे पर लग गया और वह हँस पड़ा।
“भाभी, आप तो बहुत जल्दी झड़ गईं,” अमन ने कहा। ऋतु ने कहा, “बरसों की प्यास थी, अमन।” उसने अमन की पैंट का बटन खोला और उसका लंड बाहर निकाला। वह लंबा और सख्त था। ऋतु ने उसे अपने हाथ में लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी। अमन ने कहा, “भाभी, आपके हाथ में जादू है।”
ऋतु ने अमन के लंड को अपने मुँह में लिया। पहले धीरे, फिर तेज़। अमन ने उसके बाल पकड़ लिए और कहा, “भाभी, ऐसे ही, और अंदर तक।” ऋतु ने उसकी बात मानी और गले तक लेकर चूसी। अमन की साँसें तेज़ हो गईं। उसने कहा, “भाभी, रुकिए, वरना मैं अभी झड़ जाऊँगा।”
ऋतु ने कहा, “तो झड़ जाओ ना, मुझे सब चाहिए।” पर अमन ने कहा, “नहीं, भाभी। असली मज़ा अभी बाकी है।” उसने ऋतु को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसकी टाँगें फैला दीं। उसने अपने लंड को ऋतु की चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। ऋतु ने कहा, “आह, अमन, धीरे, बहुत बड़ा है।”
अमन ने धीरे धीरे पूरा लंड अंदर उतार दिया। ऋतु ने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। फिर अमन ने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे, फिर तेज़। हर धक्के के साथ बिस्तर हिलने लगा। ऋतु ने कहा, “अमन, और तेज़, और तेज़।” अमन ने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक धक्के मारने लगा।
ऋतु की सिसकारियाँ और अमन की साँसें कमरे में एक लय में चल रही थीं। ऋतु ने कहा, “अमन, मैं फिर झड़ने वाली हूँ।” अमन ने कहा, “भाभी, साथ में झड़ते हैं।” उसने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी। ऋतु का बदन अकड़ गया और वह ज़ोर से चिल्लाकर झड़ गई। उसी पल अमन ने भी अपना पानी ऋतु की चूत के अंदर छोड़ दिया।
दोनों हाँफते हुए एक दूसरे से लिपट गए। अमन ने कहा, “भाभी, ये रात मैं कभी नहीं भूलूँगा।” ऋतु ने कहा, “मैं भी नहीं।” वह अमन के सीने पर सिर रखकर लेट गई। कुछ देर बाद अमन ने फिर उसे चूमना शुरू किया और ऋतु ने भी उसका साथ दिया। रात अभी लंबी थी और दोनों के बीच की आग अभी बुझी नहीं थी।
दूसरी बार अमन ने ऋतु को घोड़ी बनाया। उसने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और उसके बाल पकड़कर धक्के मारे। ऋतु ने कहा, “अमन, तुम तो जानवर हो गए हो।” अमन ने कहा, “भाभी, आपकी चूत ने मुझे जानवर बना दिया है।” इस बार दोनों और देर तक चले और जब दोनों साथ झड़े तो ऋतु की आँखों में आँसू आ गए।
सुबह होने से पहले अमन अपने गेस्ट रूम में लौट गया। ऋतु बिस्तर पर अकेली लेटी रही और छत को देखती रही। उसे पता था कि विक्रम परसों लौट आएगा और ये खेल खत्म हो जाएगा। पर इस पल में उसे कोई पछतावा नहीं था। उसने चादर को अपने सीने तक खींचा और मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीं।
अगले दिन अमन का फाइनल इंटरव्यू था। ऋतु ने उसे विदा करते हुए कहा, “ऑल द बेस्ट, अमन।” अमन ने सबके सामने कुछ नहीं कहा, पर जाते जाते उसने धीरे से कहा, “भाभी, वो रात याद रखिएगा।” ऋतु ने कहा, “तुम भी।” दरवाज़ा बंद होते ही ऋतु की आँखें भर आईं, पर उसके होंठों पर एक मुस्कान भी थी।
अगली सुबह ऋतु जल्दी उठ गई। रात की बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं और उसका बदन अभी भी अमन की छुअन को महसूस कर रहा था। वह रसोई में चाय बनाने गई तो देखा कि अमन पहले से वहाँ खड़ा था और दो कप चाय बना रहा था। उसने कहा, “भाभी, आज चाय मैं पिलाऊँगा।” ऋतु ने कहा, “तुम्हारी चाय में वो बात कहाँ।” अमन ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो आप ही सिखा दीजिए।”
ऋतु ने चाय की प्याली उठाई और अमन के करीब आकर खड़ी हो गई। अमन ने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। ऋतु ने कहा, “अमन, दिन में ये सब मत करो, कोई आ जाएगा।” अमन ने कहा, “भाभी, इस घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं है।” उसने ऋतु को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया।
ऋतु का बदन फिर गरम होने लगा। अमन ने उसके ब्लाउज़ के ऊपर से ही उसके सीने को दबाया और कहा, “भाभी, रात को आपने मुझे पागल कर दिया था।” ऋतु ने कहा, “अमन, रसोई में मत करो, बेडरूम में चलो।” अमन ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम तक ले गया। वहाँ उसने ऋतु को बिस्तर पर लिटाया और उसकी साड़ी ऊपर खिसका दी।
अमन ने ऋतु की पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी उँगलियों से उसकी चूत को सहलाने लगा। ऋतु ने कहा, “अमन, जल्दी करो, मुझे तुम्हारा लंड चाहिए।” अमन ने अपनी पैंट नीचे की और बिना देर किए अपना सख्त लंड ऋतु की गीली चूत में उतार दिया। ऋतु ने ज़ोर से सिसकारी भरी और कहा, “हाँ, अमन, ऐसे ही।”
रसोई की चाय ठंडी हो रही थी और बेडरूम में दोनों की साँसें तेज़ हो रही थीं। अमन ने तेज़ धक्के मारने शुरू किए और ऋतु ने उसकी पीठ को पकड़ लिया। कुछ ही मिनटों में ऋतु का बदन अकड़ गया और वह झड़ गई। अमन ने भी उसी पल अपना पानी उसके अंदर छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए।
ऋतु ने कहा, “अमन, अब चाय पीते हैं, वरना वो भी नाराज़ हो जाएगी।” अमन ने हँसकर कहा, “भाभी, चाय से ज़्यादा मज़ा तो इसमें है।” दोनों उठकर रसोई में लौटे और ठंडी चाय को फिर गरम किया। उस सुबह की चाय में रात की कहानी की मिठास घुली हुई थी।
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