Hindi Sex Story: ऑफिस की गुप्त मुलाक़ात (Part 1)
अंजलि ने कहा, तुम्हारी hindi sex story वाली मुस्कान बड़ी खतरनाक है सर, और उसी पल कमरे की हवा बदल गई।
घड़ी में रात के साढ़े नौ बज रहे थे। दिल्ली के कनॉट प्लेस वाले उस फाइनेंस ऑफिस में सारे कर्मचारी जा चुके थे, बस चौथी मंजिल के कॉर्नर केबिन में दो लोग रह गए थे। अंजलि, उनतीस साल की, दो महीने पहले ही कंपनी में जॉइन की थी, शादीशुदा, पति रोहन आईटी में था और अक्सर टूर पर रहता था। दूसरी तरफ विक्रम, अड़तीस साल, उसका बॉस, शादीशुदा, बीवी निशा और आठ साल का बेटा, पर ऑफिस में उसका अंदाज किसी फिल्म के हीरो जैसा था।
आज सुबह ही विक्रम ने कहा था, अंजलि, ये क्लाइंट प्रेजेंटेशन कल सुबह नौ बजे तक तैयार होनी चाहिए, वरना डील हाथ से निकल जाएगी। अंजलि ने बिना झिझके हां कहा था, पर शाम को पता चला कि डेटा में एक बड़ी गलती थी, और अब दोनों मिलकर उसे ठीक कर रहे थे।
केबिन का दरवाजा आधा खुला था। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा के बावजूद अंजलि के माथे पर पसीने की बूंदें थीं। उसने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा ठीक किया, पर विक्रम की नजरें उसी पल्लू पर अटक गई थीं। अंजलि ने देखा, पर अनदेखा कर दिया।
तुम बहुत मेहनती हो, विक्रम ने कहा, उसकी आवाज धीमी थी। अंजलि हंसी, बोली, सर, मेहनत की तारीफ ऑफिस में सब करते हैं, पर आपकी नजरें कुछ और कह रही हैं। विक्रम चौंका, फिर मुस्कराया। उसकी आंखों में वो चमक थी जो अंजलि दो हफ्तों से नोटिस कर रही थी, हर मीटिंग में, हर चाय के ब्रेक में।
तुम्हें गलतफहमी हुई है, विक्रम ने कहा, पर उसकी आवाज में वो दृढ़ता नहीं थी। अंजलि ने लैपटॉप बंद किया, कुर्सी थोड़ी उसके करीब खिसकाई और बोली, गलतफहमी? पिछले शुक्रवार जब आपने मेरे कंधे पर हाथ रखा था रिपोर्ट देखते वक्त, तब भी गलतफहमी थी क्या। विक्रम का चेहरा लाल हो गया। उसने कुछ कहना चाहा, पर अंजलि ने उसकी आंखों में सीधे देखा।
मौन। सिर्फ एसी की सरसराहट और बाहर सड़क से आती हल्की ट्रैफिक की आवाज। विक्रम ने धीरे से कहा, अंजलि, मैं शादीशुदा हूं। अंजलि ने जवाब दिया, और मैं भी। तो? दोनों के बीच वो बात आ गई थी जो हफ्तों से हवा में तैर रही थी।
विक्रम उठा, केबिन का दरवाजा बंद किया। ये छोटी सी हरकत सब कुछ कह गई। अंजलि का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने अपने बालों को एक तरफ किया, गले की चेन थोड़ी नीचे खिसकाई। विक्रम उसके पास आया, इतना करीब कि उसकी सांसें अंजलि के चेहरे पर महसूस हो रही थीं।
तुम बहुत खूबसूरत हो, उसने फुसफुसाया। अंजलि ने उसका कॉलर पकड़ा और खींचकर उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला चुंबन धीमा था, झिझक भरा, पर फिर दोनों में जैसे आग लग गई। विक्रम ने उसे अपनी बाहों में कस लिया, उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगा।
अंजलि की साड़ी का पल्लू जमीन पर गिर गया। विक्रम की उंगलियां उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगीं, एक एक करके। अंजलि ने उसकी शर्ट के बटन खोले, उसकी छाती पर हाथ फेरा। दोनों की सांसें तेज हो गई थीं। केबिन की ट्यूबलाइट की रोशनी में दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, जैसे पहली बार देख रहे हों।
रुको, अंजलि ने अचानक कहा। विक्रम रुक गया। उसने धीरे से कहा, दरवाजा लॉक कर दो। विक्रम ने जल्दी से दरवाजा लॉक किया, ब्लाइंड्स भी बंद कर दिए। अब वो पूरी तरह अकेले थे।
विक्रम ने अंजलि को डेस्क के सामने वाली दीवार से लगाया। उसके होंठ उसकी गर्दन पर थे, धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ रहे थे। अंजलि ने आंखें बंद कर लीं, उसके मुंह से हल्की सिसकारी निकली। उसकी उंगलियां विक्रम के बालों में थीं, उसे और नीचे की ओर धकेल रही थीं।
विक्रम ने उसके ब्लाउज को पूरी तरह उतार दिया। अंजलि की ब्रा काली लेस वाली थी, उसके गोरे बदन पर बहुत जंच रही थी। विक्रम ने ब्रा का हुक खोला, और उसके बड़े गोल बूब्स आजाद हो गए। उसने एक को मुंह में लिया, जीभ से उसके निप्पल को छेड़ा। अंजलि के पैर कांपने लगे।
ओह्ह, उसने कहा, उसकी आवाज में वो मिठास थी जो विक्रम को पागल कर रही थी। विक्रम ने दूसरे बूब को हाथ से दबाया, मसलना शुरू किया। अंजलि ने उसका हाथ पकड़ा और अपने पेट के नीचे ले गई, साड़ी के अंदर। विक्रम समझ गया।
उसने अंजलि की साड़ी को कमर से ऊपर उठाया। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। विक्रम ने उंगली से उसे छुआ, और अंजलि की पूरी देह में झुरझुरी दौड़ गई। बस थोड़ा और, उसने फुसफुसाया। विक्रम ने पैंटी को एक तरफ खिसकाया और अपनी उंगली उसकी चूत में डाली।
अंजलि ने उसके कंधे को काट लिया, इतना मजा आ रहा था। विक्रम की उंगली अंदर बाहर हो रही थी, तेज होती जा रही थी। अंजलि का पानी निकलने वाला था, उसकी टांगें कांप रही थीं। तभी विक्रम रुक गया, उसने उंगली निकाली और अपने होठों से चाटा।
तुम्हारा स्वाद, उसने कहा, बहुत मीठा है। अंजलि ने उसे घुटनों पर बैठने का इशारा किया। विक्रम समझ गया, उसने अंजलि की टांगें फैलाईं और अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया। उसकी जीभ अंदर घुसी, ऊपर नीचे होने लगी।
अंजलि दीवार से टिक गई, उसके हाथ विक्रम के सिर पर थे। उसकी जीभ का हर वार उसे पागल कर रहा था। हां, ऐसे ही, और तेज, वो बुदबुदा रही थी। ऑफिस का वो केबिन अब किसी और ही दुनिया में बदल चुका था।
विक्रम ने अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ा दी। अंजलि की चूत से पानी बहने लगा, उसकी सिसकारियां तेज हो गईं। बस अब और नहीं, उसने कहा, और विक्रम को ऊपर खींचा। उसने जल्दी से विक्रम की पैंट का बटन खोला, जिप नीचे की।
विक्रम का लंड पूरी तरह खड़ा था, मोटा और लंबा। अंजलि ने उसे हाथ में लिया, धीरे धीरे हिलाने लगी। फिर उसने झुककर उसे मुंह में ले लिया। विक्रम के मुंह से गहरी सांस निकली। अंजलि की जीभ उसके लंड के टोपे पर घूम रही थी, वो उसे अंदर तक ले रही थी।
बस, विक्रम ने कहा, उसकी आवाज कांप रही थी, अब नहीं रुक सकता। उसने अंजलि को उठाया और डेस्क पर बिठा दिया। फाइलें और कागज जमीन पर गिर गए, पर किसी को परवाह नहीं थी। उसने अंजलि की टांगें अपने कंधों पर रखीं।
विक्रम ने अपना लंड अंजलि की चूत के मुंह पर रखा। दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे। फिर एक ही झटके में वो अंदर घुस गया। अंजलि चीख पड़ी, पर उसने अपना मुंह हाथ से ढक लिया। ऑफिस में आवाज बाहर नहीं जानी चाहिए थी।
विक्रम ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ अंजलि की देह हिल रही थी। उसका एक हाथ विक्रम की पीठ पर था, नाखून गड़ रहे थे। तेज करो, उसने फुसफुसाया। विक्रम ने रफ्तार बढ़ा दी।
डेस्क हिलने लगी। अंजलि के बूब्स हर धक्के के साथ उछल रहे थे। विक्रम ने झुककर एक निप्पल को मुंह में लिया, चूसने लगा। अंजलि पागलों की तरह उसके बाल खींच रही थी। उसकी चूत विक्रम के लंड को कसकर पकड़े हुए थी, अंदर का हर हिस्सा जल रहा था।
मैं झड़ने वाली हूं, अंजलि ने कहा, उसकी आवाज टूट रही थी। विक्रम ने उसे और कसकर पकड़ा, धक्के और तेज कर दिए। अंजलि की पूरी देह अकड़ गई, फिर एक जोरदार झटके के साथ उसका पानी निकल गया। उसकी चूत ने विक्रम के लंड को निचोड़ा, और विक्रम भी नहीं रुक सका।
उसने अपना लंड बाहर निकाला और अंजलि के पेट पर अपना वीर्य गिरा दिया। दोनों हांफ रहे थे, पसीने से तर। अंजलि डेस्क पर लेटी रही, विक्रम उसके बगल में खड़ा था। कुछ पल तक कोई कुछ नहीं बोला।
ये गलत था, विक्रम ने आखिर कहा, पर उसकी आवाज में पछतावा नहीं, एक अजीब सी खुशी थी। अंजलि मुस्कराई, बोली, गलत? तो फिर तुम्हारी आंखों में ये चमक कैसी। विक्रम ने उसके माथे पर एक चुंबन दिया।
दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने। फाइलें समेटीं। प्रेजेंटेशन का काम तो आधा भी नहीं हुआ था, पर अब किसी को उसकी फिक्र नहीं थी। अंजलि ने अपना बैग उठाया, दरवाजे की ओर बढ़ी।
कल सुबह, विक्रम ने कहा, नौ बजे प्रेजेंटेशन है। अंजलि ने पलटकर देखा, उसकी आंखों में शरारत थी। बोली, प्रेजेंटेशन तो हो जाएगी सर, पर क्या आप कल भी इतनी रात तक रुकेंगे। विक्रम हंसा, वो हंसी जिसमें वादा था।
अंजलि लिफ्ट में उतर रही थी। उसका फोन बजा। पति रोहन का मैसेज था, कल रात की फ्लाइट से आ रहा हूं, सरप्राइज। अंजलि का दिल एक पल के लिए रुक सा गया। उसने मैसेज डिलीट किया, पर उसके चेहरे पर शिकन थी।
उसी वक्त विक्रम केबिन में अकेला था। उसका फोन बजा। स्क्रीन पर नाम चमका, निशा। उसने फोन उठाया। दूसरी तरफ से आवाज आई, तुम कहां हो, बेटा तुम्हें पूछ रहा है। विक्रम ने कहा, बस निकल रहा हूं, आधे घंटे में घर।
फोन रखते ही केबिन का दरवाजा खटका। विक्रम चौंका। दरवाजा लॉक था, पर बाहर से किसी ने हैंडल घुमाया था। फिर एक आवाज आई, सर, मैं सफाई वाला रामू, अंदर कोई है क्या। विक्रम की सांस रुक गई। उसने जल्दी से कहा, नहीं, कोई नहीं है, सुबह आना।
बाहर कदमों की आवाज धीरे धीरे दूर हो गई। विक्रम ने राहत की सांस ली। पर तभी उसकी नजर डेस्क के नीचे पड़ी। अंजलि की काली लेस वाली ब्रा वहीं पड़ी थी। वो भूल गई थी। विक्रम ने उसे उठाया, जेब में रखा। उसके होठों पर मुस्कान थी।
अगली सुबह ऑफिस में सब कुछ सामान्य था। अंजलि अपनी सीट पर थी, विक्रम अपने केबिन में। पर जब दोनों की नजरें मिलीं, तो दोनों के चेहरों पर वो राज था जो सिर्फ वो दो जानते थे। प्रेजेंटेशन सफल रही, क्लाइंट खुश था।
दोपहर को अंजलि के डेस्क पर एक छोटा सा पैकेट रखा मिला। अंदर उसकी ब्रा थी, और एक नोट, आज रात आठ बजे, मेरे केबिन में, अधूरा काम पूरा करना है। अंजलि ने नोट पढ़ा, उसके गाल लाल हो गए। उसने नोट को फाड़कर डस्टबिन में फेंका, पर उसकी आंखों में इंतजार था।
शाम को छह बजे रोहन का फोन आया। अंजलि, मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गई, मैं परसों आऊंगा। अंजलि ने राहत की सांस ली, पर साथ ही एक अजीब सी बेचैनी भी थी। उसने विक्रम को मैसेज किया, आज रात पक्का। जवाब आया, पक्का।
रात आठ बजे अंजलि विक्रम के केबिन में थी। दरवाजा लॉक था, ब्लाइंड्स बंद थे। विक्रम ने उसे देखते ही अपनी बाहों में भर लिया। इस बार कोई झिझक नहीं थी, कोई डर नहीं था। दोनों एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे।
विक्रम ने अंजलि को दीवार से लगाया, उसके होठों को चूमा। उसके हाथ उसकी कमर पर थे, धीरे धीरे नीचे जा रहे थे। अंजलि ने उसकी शर्ट फाड़ सी दी, बटन टूटकर गिर गए। दोनों की सांसें तेज थीं, दिल धड़क रहे थे।
आज मैं तुम्हें पूरी तरह चाहता हूं, विक्रम ने कहा। अंजलि ने जवाब दिया, तो लो ना, किसने रोका है। विक्रम ने उसे गोद में उठाया और सोफे पर लिटा दिया। केबिन का वो छोटा सोफा आज उनकी दुनिया बनने वाला था।
विक्रम अंजलि के ऊपर था। उसने उसके ब्लाउज के हुक दांतों से खोले, एक एक करके। अंजलि हंस पड़ी, बोली, तुम तो जंगली हो गए हो। विक्रम ने कहा, तुम्हारे लिए तो बनना पड़ेगा। उसने उसकी ब्रा उतारी, बूब्स को हाथों में लिया।
उसने दोनों बूब्स को बारी बारी चूसा, काटा हल्के से, चाटा। अंजलि की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। उसकी उंगलियां विक्रम की पीठ पर निशान बना रही थीं। विक्रम का मुंह नीचे की ओर बढ़ रहा था, पेट से होते हुए नाभि तक।
अंजलि ने अपनी साड़ी खुद ही खोल दी। वो पूरी नंगी विक्रम के सामने थी, सिर्फ उसकी आंखों में शर्म की एक हल्की सी परत थी। विक्रम ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा, जैसे कोई खजाना देख रहा हो। तुम बला की खूबसूरत हो, उसने कहा।
विक्रम ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। उसका लंड तना हुआ था, अंजलि को देखकर और भी सख्त हो गया था। अंजलि ने उसे इशारे से पास बुलाया। विक्रम उसके ऊपर आया, अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
अंजलि की चूत पहले से गीली थी। विक्रम ने धीरे से अंदर डाला। अंजलि ने उसके कंधों को पकड़ लिया। धक्के शुरू हुए, धीमे, गहरे, हर धक्का उसे अंदर तक छू रहा था। विक्रम की आंखें बंद थीं, वो हर पल को महसूस कर रहा था।
तेज, अंजलि ने कहा। विक्रम ने रफ्तार बढ़ाई। सोफा चरमराने लगा। अंजलि की टांगें विक्रम की कमर से लिपटी थीं। उसके बूब्स विक्रम की छाती से रगड़ खा रहे थे। दोनों के पसीने मिल रहे थे, सांसें एक हो रही थीं।
विक्रम ने अंजलि को पलटा, उसे घुटनों पर किया। पीछे से उसने अपना लंड फिर से अंदर डाला। अंजलि ने सोफे की बाह को पकड़ लिया। ये पोजीशन उसे पागल कर रही थी, हर धक्का गहरा, हर धक्का तेज।
उसने पीछे हाथ बढ़ाकर विक्रम के बाल पकड़े। और तेज, उसने कहा। विक्रम ने उसकी कमर पकड़ी और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा। अंजलि की चीखें अब रुक नहीं रही थीं, उसने तकिया मुंह में दबा लिया।
मैं आ रही हूं, वो चिल्लाई। विक्रम ने आखिरी जोरदार धक्के लगाए। अंजलि का बदन कांपा, उसका पानी बह निकला। विक्रम ने भी अपना वीर्य उसकी पीठ पर गिराया। दोनों सोफे पर ढेर हो गए।
कुछ देर तक सिर्फ हांफने की आवाजें थीं। फिर विक्रम ने कहा, अंजलि, ये सिलसिला कहां तक जाएगा। अंजलि ने उसकी आंखों में देखा, बोली, जहां तक हम चाहें। पर उसकी आवाज में वो भरोसा नहीं था।
तभी विक्रम का फोन बजा। स्क्रीन पर नाम था, निशा। रात के साढ़े नौ बज रहे थे। विक्रम ने फोन साइलेंट किया, पर अंजलि ने स्क्रीन देख ली थी। उसके चेहरे का रंग उड़ गया। उसने जल्दी से कपड़े पहने।
मुझे जाना होगा, उसने कहा, उसकी आवाज ठंडी थी। विक्रम ने उसका हाथ पकड़ा, रुको, बात तो सुनो। अंजलि ने हाथ छुड़ाया, बोली, क्या सुनूं, कि तुम्हारी बीवी तुम्हारा इंतजार कर रही है, और मैं यहां।
विक्रम कुछ नहीं बोला। अंजलि दरवाजे की ओर बढ़ी। उसने हैंडल घुमाया, पर तभी बाहर से आवाज आई। कॉरिडोर में किसी के कदमों की आहट थी, और एक जानी पहचानी आवाज, विक्रम, तुम अंदर हो।
अंजलि के पैर जम गए। ये आवाज निशा की थी। विक्रम का चेहरा सफेद पड़ गया। दरवाजे का हैंडल फिर घुमा। अंजलि ने घबराकर विक्रम को देखा। दोनों की आंखों में एक ही सवाल था, अब क्या।
अगला भाग जल्द आ रहा है। Part 2 में जानिए, क्या निशा दरवाजा खोल पाएगी, और अंजलि विक्रम के इस जाल से निकल पाएगी या और गहरे धंसेगी।
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