गर्लफ्रेंड को उसके ही घर में पूरी रात चोदा, सुबह तक दोनों थके नहीं
"तुम सच में आ रहे हो ना?" रिया ने फोन पर फुसफुसाकर पूछा, और उसकी आवाज़ में घबराहट के साथ साथ एक अजीब सी बेचैनी भी थी। "मम्मी पापा जयपुर निकल चुके हैं, घर पर कोई नहीं है, लेकिन पड़ोस वाली आंटी की नज़र हमेशा हमारी बालकनी पर रहती है।" अर्जुन हँसा और बोला, "तो बालकनी से नहीं आऊँगा, सीधा गेट से आऊँगा, जैसे तुम्हारा कोई दोस्त आया हो।" रिया ने हँसकर फोन काट दिया, पर उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, क्योंकि आज पहली बार वह अर्जुन को अपने ही घर में पूरी रात के लिए बुला रही थी।
रिया ने जल्दी से घर को समेटा, बेडरूम की चादर बदली, और बाथरूम में जाकर देर तक नहाई। उसने गुलाबी रंग की पतली सी नाइटी पहनी, जिसके नीचे उसने जानबूझकर कुछ भी नहीं पहना था, और आईने में खुद को देखकर शरमा गई। उसके मन में बार बार यही ख्याल आ रहा था कि आज रात अर्जुन उसके ही बिस्तर पर होगा, उसी कमरे में जहाँ वह बचपन से सोती आई थी। दरवाज़े की घंटी बजी तो वह दौड़कर गई, और दरवाज़ा खोलते ही अर्जुन को देखकर उसकी साँस अटक गई।
अर्जुन ने काली टीशर्ट और जींस पहनी थी, उसके हाथ में एक छोटा सा बैग था, और उसकी आँखों में वही शरारत थी जो रिया को हमेशा पागल कर देती थी। "अंदर आओ जल्दी," रिया ने उसका हाथ पकड़कर उसे अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद करके कुंडी लगा दी। अर्जुन ने उसे दीवार से सटा लिया और उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया, जिससे रिया के घुटने कमज़ोर पड़ गए। "इतनी जल्दी?" रिया ने हँसकर कहा, पर उसने अर्जुन की कमर को कसकर पकड़ रखा था।
दोनों हॉल के सोफे पर बैठ गए, रिया ने दो गिलास में कोल्ड ड्रिंक डाली, पर किसी का ध्यान ड्रिंक पर नहीं था। अर्जुन ने रिया की नाइटी के स्ट्रैप को उँगली से नीचे सरकाया और उसके कंधे पर चुंबनों की लाइन बना दी। रिया ने आँखें बंद कर लीं और उसके बालों में उँगलियाँ फेरने लगी। "तुम्हारे घर में तुम और भी खूबसूरत लग रही हो," अर्जुन ने कहा, और रिया ने शर्माकर अपना चेहरा उसकी छाती में छिपा लिया।
अर्जुन ने रिया को गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ चल पड़ा, रिया ने उसकी गर्दन को चूमते हुए कहा, "धीरे, पड़ोसियों को आवाज़ न जाए।" बेडरूम में पहुँचकर अर्जुन ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया। उसने रिया की नाइटी को ऊपर उठाया और उसकी नंगी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। रिया की साँसें तेज़ हो गईं, उसने अर्जुन की टीशर्ट को ऊपर खींचकर उसकी छाती को चूमना शुरू कर दिया।
अर्जुन ने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी और रिया के ऊपर झुककर उसके गले, कानों और छाती को चूमने लगा। रिया ने उसके बालों को कसकर पकड़ लिया और फुसफुसाई, "और नीचे, प्लीज़।" अर्जुन मुस्कुराया, उसने रिया की नाइटी को पूरी तरह उतार दिया, और अब रिया उसके सामने पूरी नंगी थी, उसकी गोरी चमड़ी बेडरूम की हल्की रोशनी में चमक रही थी। अर्जुन ने उसकी दोनों छातियों को हाथों में लेकर धीरे धीरे दबाया, फिर एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।
रिया ने ज़ोर से कराहकर कहा, "अर्जुन, ये बहुत अच्छा लग रहा है, मत रुको।" अर्जुन ने दूसरी छाती को भी उसी तरह चूसा, और उसकी उँगलियाँ रिया के पेट से नीचे सरकती हुई उसकी चूत तक पहुँच गईं। रिया की चूत पहले से ही गीली थी, अर्जुन की उँगली ने जैसे ही उसके दाने को छुआ, रिया का पूरा शरीर काँप गया। "तुम तो पहले से ही तैयार हो," अर्जुन ने शरारत से कहा, और रिया ने उसकी जींस की ज़िप पर हाथ रख दिया।
रिया ने अर्जुन की जींस और अंडरवियर उतार दिए, और उसका खड़ा लंड उसके हाथ में आ गया। वह मोटा, लंबा और गर्म था, रिया ने उसे धीरे धीरे हिलाना शुरू किया, और अर्जुन ने आँखें बंद करके कराहना शुरू कर दिया। "तुम्हारा लंड मुझे हमेशा पागल कर देता है," रिया ने कहा, और फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया। अर्जुन ने उसके सिर को पकड़ लिया, रिया ने लंड को अंदर बाहर करते हुए चूसा, उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी।
कुछ देर बाद अर्जुन ने रिया को रोककर कहा, "अब मेरी बारी है, लेट जाओ।" उसने रिया की टाँगें फैलाईं और उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। उसकी जीभ रिया की चूत के अंदर बाहर हो रही थी, रिया ने बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से कराहने लगी। "अर्जुन, मैं झड़ने वाली हूँ," रिया ने कहा, पर अर्जुन ने रुककर उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और उन्हें अंदर बाहर करने लगा।
रिया का शरीर अकड़ गया, उसने ज़ोर से चीखकर अपना पहला पानी छोड़ दिया, और उसकी चूत से रस बहकर बिस्तर पर फैल गया। अर्जुन ने उसकी चूत को चाटकर साफ किया और फिर उसके ऊपर आ गया। "अब अंदर डालो, और देर मत करो," रिया ने बेसब्री से कहा। अर्जुन ने अपने लंड को रिया की चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया।
रिया ने ज़ोर से कराहकर अर्जुन को कसकर पकड़ लिया, उसका लंड उसकी चूत में पूरा समा गया था, और दोनों के शरीर एक दूसरे से चिपक गए थे। अर्जुन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, हर धक्के के साथ रिया की छातियाँ हिल रही थीं, और उसकी कराहें कमरे में गूँज रही थीं। "और तेज़, अर्जुन, और तेज़," रिया ने कहा, और अर्जुन ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी।
अर्जुन ने रिया की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं, जिससे उसका लंड और भी गहराई तक जाने लगा। रिया ने अपनी कमर उठाकर हर धक्के का जवाब देना शुरू कर दिया, दोनों की साँसें एक दूसरे में घुल गई थीं। "तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गर्म है," अर्जुन ने कहा, और रिया ने शर्माकर उसे चूम लिया। धक्कों की आवाज़ और रिया की कराहें मिलकर कमरे को भर रही थीं।
कुछ देर बाद अर्जुन ने पोज़िशन बदली, उसने रिया को घोड़ी बनने को कहा, और रिया ने तुरंत घुटनों पर आकर अपनी कमर झुका दी। अर्जुन ने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसकी कमर पकड़कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। रिया की छातियाँ नीचे लटककर हिल रही थीं, और वह हर धक्के पर "हाँ, हाँ, ऐसे ही" कह रही थी। अर्जुन ने एक हाथ से उसकी छाती को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा।
रिया दूसरी बार झड़ने के करीब आ गई, उसका शरीर काँपने लगा, और उसने ज़ोर से चीखकर अपना पानी छोड़ दिया। अर्जुन ने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई, और कुछ ही धक्कों में उसने अपना गर्म वीर्य रिया की चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े, पसीने से तर, एक दूसरे की बाँहों में। "ये तो सिर्फ शुरुआत थी," अर्जुन ने कहा, और रिया हँस पड़ी।
दोनों ने मिलकर बाथरूम में शॉवर लिया, जहाँ गर्म पानी के नीचे अर्जुन ने रिया को फिर से चूमना शुरू कर दिया। रिया ने उसके लंड को हाथ से हिलाया, और शॉवर के नीचे ही अर्जुन ने उसे दीवार से सटाकर फिर से चोदना शुरू कर दिया। पानी की धार और दोनों की कराहें मिल गईं, रिया ने अर्जुन की पीठ पर नाखून गड़ा दिए। शॉवर के बाद दोनों ने तौलिए में लिपटकर डिनर किया, पर डिनर के बीच भी अर्जुन का हाथ रिया की जाँघ पर ही रहा।
रात के बारह बजे दोनों फिर बेडरूम में आ गए, इस बार रिया ऊपर आई। उसने अर्जुन के लंड पर बैठकर धीरे धीरे ऊपर नीचे होना शुरू किया, उसकी छातियाँ अर्जुन के चेहरे के सामने हिल रही थीं, अर्जुन ने उन्हें मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। रिया ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, उसके बाल बिखर गए, और वह ज़ोर ज़ोर से कराहते हुए झड़ गई। अर्जुन ने उसे पलटकर फिर से मिशनरी में चोदा, और इस बार दोनों साथ में झड़े।
रात के दो बजे रिया ने अर्जुन के लिए चाय बनाई, दोनों किचन में नंगे ही खड़े होकर चाय पी रहे थे, और बीच बीच में एक दूसरे को चूम रहे थे। "तुम्हारे घर में चाय भी अलग लग रही है," अर्जुन ने कहा, और रिया ने उसे चपत लगाई। चाय खत्म होते ही अर्जुन ने रिया को किचन के स्लैब पर बिठा लिया, उसकी टाँगें फैलाईं, और वहीं खड़े खड़े उसकी चूत में लंड डाल दिया। रिया ने स्लैब को पकड़कर धक्कों का साथ दिया, और किचन में भी उसकी कराहें गूँज गईं।
सुबह के चार बजे दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए, रिया ने अर्जुन की छाती पर सिर रख दिया और बोली, "काश मम्मी पापा एक दिन और रुक जाते।" अर्जुन ने हँसकर कहा, "तो मैं एक दिन और रुक जाता, पर तुम्हारी हालत देखो, तुम चल भी नहीं पाओगी।" रिया ने उसे चूमकर कहा, "तुम्हारी वजह से ही तो ये हालत है, और मुझे कोई शिकायत नहीं है।" दोनों की आँखें बंद होने लगीं, पर नींद आने से पहले अर्जुन ने रिया की चूत में उँगली डालकर उसे एक बार फिर गरम कर दिया।
सुबह के पाँच बजे, जब बाहर हल्की रोशनी होने लगी, अर्जुन ने रिया को जगाया और कहा, "एक आखिरी बार, फिर मैं निकल जाऊँगा।" रिया ने नींद में ही अपनी टाँगें फैला दीं, अर्जुन उसके ऊपर आ गया और धीरे धीरे उसे चोदने लगा। सुबह की ठंडी हवा में दोनों के शरीर फिर से गर्म हो गए, रिया ने कराहते हुए अर्जुन को कसकर पकड़ लिया। इस बार धक्के धीमे थे, पर हर धक्का गहरा था, और दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखते हुए साथ में पानी छोड़ा।
सुबह के छह बजे अर्जुन ने कपड़े पहने, रिया ने उसे दरवाज़े तक छोड़ा, और जाते जाते अर्जुन ने उसके होंठों पर एक लंबा चुंबन दिया। "आज रात फिर?" अर्जुन ने पूछा, और रिया ने कहा, "मम्मी पापा कल शाम तक आएँगे, आज रात भी घर खाली है।" दोनों हँस पड़े, रिया ने दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर जाकर गिर पड़ी, उसके शरीर पर अर्जुन की हर छुअन की याद ताज़ा थी। उसके ही घर में बिताई ये पूरी रात उसकी ज़िंदगी की सबसे गर्म रात बन गई थी।
शाम को जब रिया ने आईने के सामने खड़े होकर अपने बाल सँवारे, तो उसकी गर्दन पर अर्जुन के दिए निशान साफ दिख रहे थे। उसने उन्हें छिपाने की कोशिश नहीं की, बल्कि मुस्कुराकर अपनी नाइटी का स्ट्रैप नीचे कर दिया और उन निशानों को उँगली से छुआ। तभी पीछे से अर्जुन की बाँहें उसकी कमर पर आ गईं, और उसने आईने में ही रिया की आँखों में देखते हुए उसके कंधे को चूम लिया।
रिया ने आईने में ही अर्जुन को देखा और बोली, "तुम फिर शुरू हो गए, मैं तैयार हो रही थी।" अर्जुन ने उसकी नाइटी को ऊपर उठाया और आईने के सामने ही उसकी नंगी कमर पर हाथ फेरने लगा। रिया ने आईने को पकड़ लिया, उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और अर्जुन ने पीछे से उसकी चूत में उँगली डालकर उसे गरम कर दिया।
आईने के सामने खड़े होकर रिया ने खुद को अर्जुन के साथ देखा, और ये नज़ारा उसे और भी उत्तेजित कर गया। अर्जुन ने उसकी टाँगें थोड़ी फैलाईं, अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़कर धीरे से अंदर डाल दिया। रिया ने आईने में अपनी ही कराहती शक्ल देखी, उसके होंठ खुले थे, आँखें बंद थीं।
अर्जुन ने पीछे से धक्के लगाने शुरू किए, हर धक्के पर रिया की छातियाँ हिल रही थीं, और आईना भी हल्का सा हिल रहा था। रिया ने एक हाथ से आईने का फ्रेम पकड़ा और दूसरे हाथ से अर्जुन का हाथ अपनी छाती पर रख दिया। "आईने में देखो, कितने अच्छे लग रहे हैं हम," अर्जुन ने कहा, और रिया ने शर्माकर भी आँखें खोलकर देखा।
कुछ ही देर में रिया का शरीर काँपने लगा, उसने आईने के सामने ही ज़ोर से कराहकर अपना पानी छोड़ दिया, और अर्जुन ने भी उसके अंदर ही अपना वीर्य छोड़ दिया। दोनों आईने के सामने ही एक दूसरे से चिपके खड़े रहे, हाँफते हुए, और रिया ने मुस्कुराकर कहा, "अब सच में तैयार होना है, वरना मम्मी पापा के आने से पहले घर समेटना मुश्किल होगा।"
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