ऋतु की अन्तर्वासना: दिल्ली स्टूडियो में देव ने ऋतु की चूत में लंड डालकर जमकर चोदा
ऋतु जी, आपकी आँखों में जो अन्तर्वासना चमक रही है, कैमरा उसे छिपा नहीं पा रहा, देव ने लेंस से नज़र उठाए बिना कहा और शटर दबा दिया।
ऋतु ने हँसकर पल्लू संभाला और बोली, तुम फोटोग्राफर हो या ज्योतिषी, जो आँखें पढ़ लेते हो। देव ने कैमरा नीचे रखा और जवाब दिया, दोनों, पर आज सिर्फ कैमरा चला रहा हूँ।
दिल्ली के उस बुटीक स्टूडियो में शाम ढल रही थी। बाहर की रोशनी धीरे धीरे पीली पड़ रही थी और अंदर सॉफ्टबॉक्स की सफेद रोशनी ऋतु के चेहरे पर ठहरी हुई थी।
ऋतु इकतीस साल की थी और यह बुटीक उसी की मेहनत से खड़ा हुआ था। वह अपने नए कलेक्शन की कैटलॉग शूट करवा रही थी और देव को इसी काम के लिए बुलाया गया था।
देव तैंतीस साल का था, लंबा, शांत और अपने काम में डूबा हुआ। वह मॉडल को नहीं, उसकी भावना को खींचता था, यही बात ऋतु को पहले दिन से खींच रही थी।
शूट के दौरान ऋतु ने तीन लहंगे बदले। हर बार जब वह ट्रायल रूम से निकलती, देव की नज़र एक पल के लिए ठहर जाती और फिर कैमरे पर लौट आती।
आखिरी सेट में ऋतु ने गहरे लाल रंग का लहंगा पहना था। उसकी पीठ खुली थी और कमर पर पतली सी डोरी बंधी थी। देव ने कहा, बस, ऐसे ही रहिए, हिलिएगा मत।
ऋतु ने धीरे से कहा, देव, तुम इतनी देर से मुझे ऐसे देख रहे हो जैसे मैं कपड़े नहीं, कोई राज़ हूँ। देव ने मुस्कुराकर कहा, राज़ ही तो हो, और कैमरा राज़ खोल देता है।
शूट खत्म होने पर असिस्टेंट चले गए। स्टूडियो में सिर्फ ऋतु और देव रह गए। बाहर सड़क की आवाज़ें धीमी हो गई थीं और अंदर सिर्फ एसी की हल्की सी सरसराहट थी।
ऋतु ने कहा, चाय पियोगे। देव ने कहा, चाय से ज़्यादा मुझे वो आखिरी फ्रेम देखना है जो मैंने तुम्हारी आँखों में देखा था। ऋतु की साँस एक पल के लिए अटक गई।
वह देव के पास आई और कैमरे की स्क्रीन पर अपनी तस्वीरें देखने लगी। देव उसके पीछे खड़ा था और उसकी गरम साँस ऋतु की गर्दन पर पड़ रही थी।
ऋतु ने धीरे से कहा, तुम इतने पास क्यों खड़े हो। देव ने जवाब दिया, क्योंकि दूर से तुम्हारी खुशबू नहीं आती। उसने ऋतु के बालों को एक तरफ किया और उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए।
ऋतु ने आँखें बंद कर लीं। उसकी गर्दन पर देव के होंठों की नरम गर्मी फैल रही थी। उसने कहा, देव, यह सही नहीं है, हम काम के लिए मिले थे।
देव ने कहा, काम खत्म हो गया, अब जो हो रहा है वो हमारी मर्ज़ी है। उसने ऋतु की कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी ओर खींच लिया।
ऋतु ने पलटकर देव की आँखों में देखा। दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं। ऋतु ने खुद देव का कुर्ता पकड़कर उसे और पास खींच लिया।
देव ने ऋतु के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले धीरे, फिर गहराई से। ऋतु की जीभ देव की जीभ से मिली और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे जैसे बरसों की प्यास बुझा रहे हों।
चुंबन के बीच देव के हाथ ऋतु की खुली पीठ पर घूम रहे थे। उसकी उंगलियाँ रीढ़ की हड्डी के साथ नीचे तक गईं और ऋतु के बदन में सिहरन दौड़ गई।
ऋतु ने कहा, मेरी पीठ की डोरी खोल दो। देव ने धीरे से डोरी खोली और लहंगा ऋतु के कंधों से सरककर नीचे गिर गया।
अब ऋतु सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। देव ने उसे घूरकर देखा और कहा, तुम कैमरे से भी ज़्यादा खूबसूरत हो। ऋतु ने शरमाकर कहा, अब घूरना बंद करो और छुओ।
देव ने ऋतु का ब्लाउज़ खोला और उसके बूब्स को अपने हाथों में भर लिया। वह उन्हें धीरे धीरे दबा रहा था और ऋतु की साँसें गहरी होती जा रही थीं।
उसने ऋतु के निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। ऋतु ने उसके बाल पकड़ लिए और कहा, हाँ, ऐसे ही, और ज़ोर से।
ऋतु के हाथ अब देव के कुर्ते के बटन खोल रहे थे। उसने कुर्ता उतारा और देव की छाती पर अपने नाखून चलाए। देव की छाती गरम और पसीने से नम थी।
ऋतु ने देव की छाती को चूमा और नीचे तक आई। उसने देव की पैंट का बटन खोला और उसका लंड बाहर निकाला। वह लंबा और सख्त था।
ऋतु ने देव के लंड को अपने हाथ में पकड़ा और धीरे धीरे हिलाने लगी। देव ने कहा, तुम्हारे हाथों में जादू है। ऋतु ने मुस्कुराकर उसे अपने मुँह में ले लिया।
वह देव का लंड चूस रही थी, कभी धीरे, कभी तेज़। देव ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, बस, थोड़ा और, मैं झड़ने वाला हूँ।
ऋतु ने मुँह हटाया और कहा, अभी नहीं, पहले मुझे चाहिए। उसने अपना पेटीकोट उतारा और अब वह पूरी नंगी थी।
देव ने ऋतु को सोफे पर लिटा दिया और उसकी टाँगें फैला दीं। उसकी चूत गीली और चमक रही थी। देव ने उस पर अपनी उंगलियाँ फिराईं।
ऋतु ने कहा, उंगलियाँ नहीं, तुम्हारा लंड चाहिए। देव ने उसकी चूत को चाटा, उसकी जीभ अंदर तक गई और ऋतु की कमर उठने लगी।
ऋतु की चूत से पानी बहने लगा और वह देव का सिर दबाकर कहने लगी, हाँ, वहीं, वहीं रुक जाओ। उसकी पहली झड़न उसी चाटने में हो गई।
देव ने अपना लंड ऋतु की चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। ऋतु ने कहा, आह, धीरे, पर अंदर तक डालो।
देव ने एक ज़ोर का धक्का दिया और उसका पूरा लंड ऋतु की चूत में समा गया। ऋतु ने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए और कहा, अब रुकना मत।
देव ऋतु को धक्के देने लगा, पहले धीरे, फिर तेज़। सोफा हिलने लगा और ऋतु की आवाज़ें स्टूडियो में गूँजने लगीं।
ऋतु ने अपनी टाँगें देव की कमर पर लपेट लीं। हर धक्के के साथ उसकी चूत देव के लंड को और कसकर पकड़ रही थी।
देव ने ऋतु को उठाया और दीवार से लगा दिया। इस पोज़ में उसका लंड और गहराई तक जा रहा था। ऋतु ने कहा, हाँ, ऐसे ही, और अंदर।
ऋतु की दूसरी झड़न आ गई। उसकी चूत ने देव के लंड को निचोड़ा और वह चिल्ला उठी। देव ने कहा, बस थोड़ा और, मैं भी आने वाला हूँ।
देव ने आखिरी तेज़ धक्के दिए और ऋतु की चूत में ही झड़ गया। उसका गरम पानी अंदर फैल गया और दोनों एक दूसरे से लिपटकर हाँफने लगे।
कुछ देर बाद ऋतु ने हँसकर कहा, कैटलॉग शूट तो बहाना था, असली शूट तो अब हुआ है। देव ने कहा, इस शूट की तस्वीरें सिर्फ मेरी यादों में रहेंगी।
देव ने ऋतु को गोद में उठाया और ट्रायल रूम की ओर ले गया। ऋतु ने कहा, अभी भी मन नहीं भरा। देव ने जवाब दिया, मेरा भी नहीं।
ट्रायल रूम के शीशे के सामने देव ने ऋतु को खड़ा किया और पीछे से उसकी चूत में फिर से लंड डाल दिया। शीशे में दोनों का नंगा बदन दिख रहा था।
ऋतु शीशे में खुद को देख रही थी और देव के हर धक्के पर उसकी चूत से पानी टपक रहा था। उसने कहा, मुझे देखो, मुझे ऐसे ही देखो।
देव ने ऋतु के बूब्स को शीशे के सामने से पकड़ा और दबाते हुए धक्के देता रहा। ऋतु की तीसरी झड़न शीशे के सामने ही हुई।
इस बार देव ने लंड बाहर निकाला और ऋतु के पेट पर झड़ गया। उसका पानी ऋतु की नाभि तक बह गया। ऋतु ने कहा, अब बस, मैं थक गई।
ऋतु ने देव को सोफे पर बिठाया और उसकी गोद में बैठ गई। उसने देव का लंड फिर से अपनी चूत में लिया और खुद ऊपर से हिलने लगी।
देव ने ऋतु की कमर पकड़ी और नीचे से धक्के देने लगा। ऋतु की चूत में उसका लंड हर बार गहराई तक जा रहा था और ऋतु की आवाज़ें तेज़ होती जा रही थीं।
ऋतु ने देव के कंधों पर हाथ रखे और तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी। उसके बूब्स देव के चेहरे के सामने हिल रहे थे और देव ने एक निप्पल को मुँह में ले लिया।
देव के मुँह में निप्पल और चूत में लंड, दोनों एक साथ, ऋतु को पागल कर रहे थे। उसने कहा, देव, मैं फिर से झड़ने वाली हूँ, मुझे कसकर पकड़ो।
ऋतु की चौथी झड़न गोद वाली पोज़ में हुई। उसकी चूत ने देव के लंड को इतनी ज़ोर से निचोड़ा कि देव भी लगभग झड़ गया, पर उसने खुद को रोक लिया।
देव ने ऋतु को सोफे पर उल्टा लिटाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया। उसने ऋतु के बाल पकड़े और धक्के देने लगा।
ऋतु ने सोफे का किनारा पकड़ लिया और कहा, हाँ, पीछे से और ज़ोर से, मुझे तुम्हारा पूरा लंड चाहिए। देव ने हर धक्के के साथ उसकी चूत को और गहराई तक भरा।
इस बार देव ने लंड बाहर निकाला और ऋतु की पीठ पर झड़ गया। उसका गरम पानी ऋतु की पीठ पर बह गया और ऋतु ने हँसकर कहा, अब तुमने मेरी पीठ भी गंदी कर दी।
देव ने कहा, गंदी नहीं, सजाई है। दोनों हँस पड़े और एक दूसरे को चूमने लगे। ऋतु ने कहा, अब सच में बस, वरना सुबह तक यहीं रह जाएँगे।
ऋतु ने देव को एक कुर्सी पर बिठाया और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने देव का लंड फिर से अपने मुँह में लिया और उसे धीरे धीरे चूसने लगी।
देव ने ऋतु के सिर पर हाथ रखा और कहा, तुमने तो आज कैमरा भी भुला दिया और मुझे भी। ऋतु ने मुस्कुराकर कहा, कैमरा कल चलेगा, आज सिर्फ तुम चलोगे।
दोनों ने कपड़े पहने और स्टूडियो की लाइटें बंद कीं। ऋतु ने दरवाज़े पर रुककर कहा, कल फिर शूट है, पर कैमरा बाद में चलेगा।
अगली शाम ऋतु ने देव को फोन किया और कहा, आज शूट नहीं है, पर स्टूडियो खाली है। देव ने कहा, तो कैमरा घर छोड़ आऊँ। ऋतु ने जवाब दिया, कैमरा ले आओ, पर आज तस्वीरें नहीं, यादें बनानी हैं।
देव जब स्टूडियो पहुँचा तो ऋतु ने दरवाज़ा खुद खोला। उसने हल्की सी साड़ी पहनी थी और उसके बाल खुले थे। देव ने कहा, आज तुम मॉडल नहीं लग रही, आज तुम मालकिन लग रही हो।
ऋतु ने देव का हाथ पकड़ा और उसे ट्रायल रूम में ले गई। वहाँ शीशे के सामने उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। देव ने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी गर्दन को चूमने लगा।
ऋतु ने कहा, कल तुमने मुझे शीशे में दिखाया था, आज मैं खुद को तुम्हारी आँखों में देखना चाहती हूँ। देव ने उसका ब्लाउज़ खोला और उसके बूब्स को शीशे के सामने से दबाने लगा।
देव ने ऋतु की साड़ी नीचे सरकाई और उसकी चूत पर हाथ रखा। वह पहले से गीली थी। उसने उंगलियों से उसे सहलाया और ऋतु ने शीशे में अपनी ही आँखें बंद कर लीं।
ऋतु ने कहा, देव, अब देर मत करो। देव ने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के देने लगा। शीशे में दोनों का बदन एक साथ हिल रहा था।
हर धक्के के साथ ऋतु की चूत से पानी टपक रहा था। उसने कहा, हाँ, ऐसे ही, मुझे शीशे में देखते हुए ही करो। देव ने उसकी कमर पकड़ी और तेज़ धक्के देने लगा।
ऋतु की झड़न शीशे के सामने हुई और उसने अपना सिर शीशे पर टिका दिया। देव ने आखिरी धक्कों के साथ उसकी चूत में ही अपना पानी छोड़ दिया।
दोनों शीशे के सामने खड़े हाँफ रहे थे। ऋतु ने कहा, ये याद कैमरे में नहीं, सिर्फ हम दोनों के पास रहेगी। देव ने मुस्कुराकर कहा, यही तो सबसे कीमती तस्वीर है।
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