सविता भाभी की चुदाई कहानी: जयपुर में भाभी की चूत में देवर का लंड
दरवाजे की घंटी उस वक्त बजी जब सविता ने अभी अभी नहाकर तौलिया लपेटा ही था। जयपुर के उस फ्लैट में शाम की हल्की धूप खिड़की से आ रही थी और बाथरूम से निकलती भाप में उसका चेहरा लाल दिख रहा था। उसने जल्दी से गाउन पहना और दरवाजे की ओर भागी, क्योंकि उसे लगा कि दूध वाला होगा या कूरियर वाला। दरवाजा खोलते ही वह ठिठक गई, सामने उसका देवर अर्जुन खड़ा था, हाथ में एक छोटा बैग और चेहरे पर थकी हुई मुस्कान।
अर्जुन ने कहा, भाभी, मैं बिना बताए आ गया, ट्रेन दो घंटे लेट थी और भैया ने कहा था कि सीधे घर आ जाऊं। सविता ने उसे अंदर बुलाया और कहा कि तुम्हारे भैया तो टूर पर हैं, तीन दिन बाद लौटेंगे, तब तक यही तुम्हारा घर है। अर्जुन ने बैग सोफे पर रखा और पानी मांगा, सविता रसोई की ओर गई तो उसे अपने गाउन का ख्याल आया, जो अभी भी थोड़ा खुला हुआ था। उसने जल्दी से गाउन ठीक किया, पर अर्जुन की नजर उस एक पल पर ठहर गई थी, और दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी छा गई।
सविता की उम्र बत्तीस साल थी और उसकी शादी को सात साल हो गए थे। उसका पति राकेश अक्सर टूर पर रहता था और घर में सविता अकेली ही रहती थी। अर्जुन उनतीस साल का था, दिल्ली में नौकरी करता था और साल में दो बार ही जयपुर आता था। बचपन से दोनों के बीच मजाक चलता था, पर इस बार कुछ अलग था। अर्जुन अब पहले से ज्यादा लंबा और मजबूत दिख रहा था, और सविता की आंखों में वह बदलाव साफ दिख रहा था।
शाम को सविता ने दाल चावल और पनीर की सब्जी बनाई। खाने की मेज पर अर्जुन ने अपने ऑफिस की कहानियां सुनाईं और सविता हंसती रही। हंसी के बीच अर्जुन ने पूछा, भाभी, आप इतनी अकेली कैसे रह लेती हैं, भैया तो महीनों बाहर रहते हैं। सविता ने मुस्कुराकर कहा, आदत हो गई है, पर कभी कभी रातें बहुत लंबी लगती हैं। यह बात कहते हुए उसकी आवाज थोड़ी धीमी हो गई और अर्जुन ने उसकी आंखों में देखा, वहां अकेलापन साफ झलक रहा था।
खाना खत्म होने के बाद अर्जुन ने बर्तन उठाने में मदद की। रसोई में दोनों एक साथ खड़े थे और सविता के हाथ से एक कटोरी फिसलकर सिंक में गिरी। अर्जुन ने उसे पकड़ने की कोशिश की और उसके हाथ सविता के हाथ से टकरा गए। दोनों ने एक दूसरे को देखा और फिर जल्दी से नजरें हटा लीं। सविता ने कहा, तुम थक गए होगे, गेस्ट रूम में सो जाओ, मैं चादर लगा देती हूं। अर्जुन ने सिर हिलाया, पर उसकी धड़कन तेज हो गई थी।
रात को करीब ग्यारह बजे सविता अपने कमरे में किताब पढ़ रही थी जब बिजली की हल्की गड़गड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। जयपुर की गर्मी में बारिश की ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई और अर्जुन ने कहा, भाभी, मेरे कमरे की खिड़की बंद नहीं हो रही, बारिश अंदर आ रही है। सविता ने कहा, अंदर आ जाओ, मैं देखती हूं, और वह गेस्ट रूम की ओर चल दी।
गेस्ट रूम में खिड़की का कुंडा सच में जाम था। सविता ने उसे बंद करने की कोशिश की तो अर्जुन पीछे से खिड़की को धक्का देने लगा। दोनों के शरीर एक दूसरे से सट गए और बारिश की ठंडी हवा में सविता को अर्जुन की गर्म सांस अपनी गर्दन पर महसूस हुई। उसने कहा, रुक जाओ, यह ऐसे नहीं होगा, पर उसकी आवाज में कोई सख्ती नहीं थी। अर्जुन ने धीरे से कहा, भाभी, आप जानती हैं कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं, और सविता ने उसकी ओर मुड़कर देखा।
उस पल में सविता की सारी हिचकिचाहट टूट गई। उसने अर्जुन के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया और दोनों एक दूसरे को ऐसे चूमने लगे जैसे बरसों की प्यास बुझा रहे हों। सविता का गाउन खुल गया और अर्जुन के हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे। उसने सविता को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर झुक गया।
अर्जुन ने सविता की गर्दन पर चूमा और धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ा। सविता की सांसें तेज हो गईं और उसने अर्जुन के बालों में उंगलियां फंसा लीं। उसने कहा, धीरे, कोई जल्दी नहीं है, आज रात हमारी है। अर्जुन ने मुस्कुराकर उसकी छाती पर हाथ रखा और उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोले। सविता के बूब्स सामने आ गए और अर्जुन ने उन्हें अपने हाथों में लेकर सहलाया, फिर एक को मुंह में लेकर चूसा।
सविता ने आंखें बंद कर लीं और उसके मुंह से हल्की सिसकारी निकली। अर्जुन ने दूसरे बूब को भी वैसे ही चूसा और उसकी जीभ से उसके निप्पल को छेड़ा। सविता ने कहा, अर्जुन, तुम तो बहुत शरारती हो गए हो, और अर्जुन ने हंसकर कहा, भाभी, यह तो सिर्फ शुरुआत है। उसने सविता की कमर पर हाथ फेरा और उसकी पेटीकोट की डोरी खोल दी। सविता ने अपनी टांगें थोड़ी फैला दीं और अर्जुन ने उसकी चूत पर हाथ रखा।
अर्जुन की उंगलियां सविता की चूत पर घूमने लगीं और सविता का शरीर कांपने लगा। उसकी चूत गीली हो गई थी और अर्जुन ने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। सविता ने कहा, हां, ऐसे ही, और अर्जुन ने दो उंगलियों से उसे और उत्तेजित किया। सविता ने अर्जुन की शर्ट के बटन खोले और उसकी छाती पर चूमा। उसने अर्जुन की पैंट की जिप खोली और उसका लंड बाहर निकाला, जो पूरी तरह खड़ा था।
सविता ने अर्जुन के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी। अर्जुन ने आंखें बंद कर लीं और कहा, भाभी, आप यह बहुत अच्छा करती हैं। सविता ने मुस्कुराकर उसके लंड पर चूमा और फिर उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। अर्जुन ने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे धीरे उसके मुंह में धक्के लगाने लगा। सविता ने उसके लंड को गहराई तक लिया और उसकी जीभ से उसे सहलाया, जिससे अर्जुन की सांसें और तेज हो गईं।
कुछ देर बाद अर्जुन ने सविता को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसने अपना लंड सविता की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। सविता ने कहा, आह, धीरे, बहुत दिन बाद है, और अर्जुन ने रुककर उसे संभलने का वक्त दिया। फिर उसने एक जोर का धक्का लगाया और उसका लंड पूरी तरह सविता की चूत में समा गया। सविता ने अपनी टांगें उसकी कमर से लपेट लीं और दोनों एक लय में हिलने लगे।
अर्जुन के धक्के धीरे धीरे तेज होने लगे और सविता की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं। उसने कहा, अर्जुन, और तेज, मुझे और चाहिए, और अर्जुन ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। सविता के बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे और अर्जुन ने उन्हें पकड़कर दबाया। दोनों का पसीना एक दूसरे से मिल गया था और बारिश की आवाज के बीच उनकी सांसों की आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
सविता को पहली बार चरम सुख तब मिला जब अर्जुन ने उसे नीचे से ऊपर की ओर जोर से धक्का दिया। उसका शरीर कांपा और उसकी चूत ने अर्जुन के लंड को कसकर जकड़ लिया। उसने कहा, मैं झड़ रही हूं, अर्जुन, रुकना मत, और अर्जुन ने तब तक धक्के लगाए जब तक सविता की सांसें सामान्य नहीं हो गईं। सविता ने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा, यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगी।
पर रात अभी खत्म नहीं हुई थी। अर्जुन ने सविता को पलटकर घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड फिर से डाला। सविता ने तकिया पकड़ लिया और हर धक्के पर आगे पीछे होने लगी। अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ी और तेज धक्के लगाए, जिससे सविता की चूत से गीलापन टपकने लगा। उसने कहा, भाभी, आपकी चूत बहुत टाइट है, और सविता ने हंसकर कहा, तो फिर इसे संभालकर रखो।
इस पोज में अर्जुन का लंड सविता की चूत में और गहराई तक जा रहा था। सविता ने अपनी उंगलियों से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया और उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं। अर्जुन ने उसकी पीठ पर चूमा और कहा, मैं अब ज्यादा देर नहीं टिक पाऊंगा। सविता ने कहा, मेरे अंदर ही झड़ जाओ, आज कोई डर नहीं है, और यह सुनकर अर्जुन के धक्के और तेज हो गए।
अर्जुन ने आखिरी जोर के धक्कों के साथ अपना पानी सविता की चूत में छोड़ दिया। दोनों एक साथ झड़ गए और फिर एक दूसरे के बगल में गिर गए। सविता ने अर्जुन के सीने पर सिर रखा और कहा, तुम्हारे भैया को यह कभी पता नहीं चलना चाहिए। अर्जुन ने कहा, यह हमारा राज रहेगा, भाभी, और सविता ने उसकी ओर देखकर मुस्कुरा दिया।
थोड़ी देर बाद सविता उठी और दोनों ने साथ में चाय बनाई। रसोई में खड़े होकर अर्जुन ने उसे पीछे से गले लगाया और कहा, कल रात फिर से। सविता ने हंसकर कहा, पहले यह रात तो खत्म होने दो, पर उसकी आंखों में साफ दिख रहा था कि वह भी यही चाहती थी। दोनों ने चाय पी और फिर अपने अपने कमरे में सोने चले गए, पर दोनों के दिलों में एक नई आग जल चुकी थी।
अगली सुबह सविता ने नाश्ता बनाया और अर्जुन ने उसे रसोई में फिर से छेड़ा। उसने सविता की कमर पर हाथ रखा और कहा, भाभी, आप सुबह में और भी सुंदर लगती हैं। सविता ने उसे धक्का देकर कहा, नाश्ता ठंडा हो जाएगा, पर उसने अर्जुन का हाथ नहीं हटाया। दोनों ने साथ में नाश्ता किया और दिन भर एक दूसरे की ओर देखते रहे, जैसे रात की यादें अभी भी ताजा हों।
दोपहर को जब सविता कपड़े सुखा रही थी, अर्जुन छत पर आ गया। उसने पीछे से सविता को पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चूमा। सविता ने कहा, कोई देख लेगा, और अर्जुन ने कहा, छत पर कोई नहीं आता। उसने सविता को दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसकी साड़ी ऊपर उठाई। सविता की चूत फिर से गीली हो गई और अर्जुन ने अपना लंड निकालकर धीरे से उसकी चूत में डाला।
छत पर खुले आसमान के नीचे दोनों की चुदाई और भी रोमांचक लग रही थी। सविता ने दीवार को पकड़ लिया और अर्जुन के हर धक्के पर सिसकियां भरने लगी। उसने कहा, धीरे, कोई आ जाएगा, पर अर्जुन ने रुकने के बजाय और तेज धक्के लगाए। सविता का शरीर कांपने लगा और वह फिर से झड़ गई, उसके बाद अर्जुन ने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
शाम को दोनों ने साथ में बाजार जाकर सब्जी खरीदी। बाजार में अर्जुन ने सविता का हाथ पकड़ लिया और सविता ने उसे देखकर मुस्कुरा दिया। घर लौटकर दोनों ने खाना बनाया और रात को फिर से एक दूसरे की बाहों में सो गए। सविता ने कहा, तीन दिन बहुत कम हैं, और अर्जुन ने कहा, तो हर रात को खास बनाते हैं। दोनों ने एक दूसरे को चूमा और रात फिर से उनकी हो गई।
तीसरी रात को राकेश के लौटने से पहले सविता ने अर्जुन से कहा, तुम दिल्ली लौट जाओगे, पर यह रातें हमेशा याद रहेंगी। अर्जुन ने कहा, मैं फिर आऊंगा, भाभी, और तब भी यही होगा। सविता ने उसे कसकर गले लगाया और कहा, बस यही वादा चाहिए। दोनों ने आखिरी रात को भी पूरी शिद्दत से एक दूसरे को प्यार किया और सुबह अर्जुन दिल्ली की ट्रेन पकड़कर चला गया, पर सविता के दिल में उसकी यादें बस गईं।
अगली रात जब सविता शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बाल सुखा रही थी, अर्जुन चुपचाप उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। शीशे में दोनों की नजरें मिलीं और सविता ने मुस्कुराकर कहा, तुम फिर आ गए। अर्जुन ने उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी गर्दन पर धीरे से चूमा, जिससे सविता की सांसें तेज हो गईं।
अर्जुन ने सविता को शीशे की ओर घुमाया और कहा, आज मैं तुम्हें शीशे में देखना चाहता हूं। उसने सविता का गाउन धीरे से नीचे सरकाया और उसके बूब्स को शीशे में देखते हुए सहलाया। सविता ने शीशे में अपनी ही आंखों में देखा और शरमाकर नजरें झुका लीं, पर अर्जुन ने उसका चेहरा ऊपर उठाकर कहा, शरमाओ मत, तुम बहुत सुंदर लग रही हो।
अर्जुन ने सविता की चूत पर हाथ रखा और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा। सविता ने शीशे को पकड़ लिया और उसके मुंह से सिसकारी निकली। अर्जुन ने अपना लंड निकाला और पीछे से सविता की चूत में धीरे से डाला, जिससे सविता ने शीशे में अपने चेहरे का हर भाव देखा। हर धक्के के साथ उसके बूब्स हिल रहे थे और वह खुद को देखकर और उत्तेजित हो रही थी।
अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ी और तेज धक्के लगाए, जिससे सविता की चूत से पानी टपकने लगा। उसने कहा, भाभी, शीशे में देखो, तुम कितनी गरम लग रही हो, और सविता ने शीशे में देखते हुए कहा, यह सब तुम्हारी वजह से है। दोनों एक साथ झड़ गए और अर्जुन ने सविता को पीछे से कसकर गले लगा लिया।
सविता ने मुड़कर अर्जुन को चूमा और कहा, यह शीशे वाली रात भी याद रहेगी। अर्जुन ने हंसकर कहा, तो हर रात एक नई याद बनाते हैं, और दोनों ने एक दूसरे को फिर से बाहों में भर लिया।
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