सविता भाभी हिंदी: इंदौर बुटीक में सविता की चूत में करन का लंड, ट्रायल रूम से बेडरूम तक की चुदाई
सविता भाभी हिंदी कहानी की इस दोपहर बुटीक का शीशे वाला दरवाजा खुला और करन हाथ में तीन बड़े पार्सल लिए अंदर आ गया। सविता ने काउंटर से नजर उठाई तो उसकी आंखें सीधे करन की आंखों से टकरा गईं। वह मुस्कुराया और बोला, भाभी जी, आज फिर आपके लिए माल आया है, साइन कर दीजिए। सविता ने पेन उठाया और रजिस्टर पर दस्तखत करते हुए उसकी उंगलियों को जानबूझकर छू लिया।
सविता पैंतीस साल की थी और इंदौर के इस छोटे से बुटीक की मालकिन थी। उसके पति का कपड़ों का कारोबार था और वह हफ्ते में चार दिन दूसरे शहरों में घूमता रहता था। घर में अकेलापन और बुटीक में दिन भर की भागदौड़ ने उसे अंदर से बहुत बेचैन कर रखा था। वह सुंदर थी, गोरी थी, और उसकी चाल में एक ऐसी लचक थी जो हर आने वाले की नजर खींच लेती थी।
करन अट्ठाईस साल का कूरियर वाला था जो रोज दोपहर को इसी बुटीक में पार्सल लेकर आता था। उसकी कद काठी मजबूत थी, बाहें भरी हुई थीं और चेहरे पर हमेशा एक शरारती मुस्कान रहती थी। पिछले दो हफ्तों से सविता उसकी हर बात पर हंसने लगी थी और करन भी हर बार कुछ देर ज्यादा रुकने लगा था। दोनों के बीच कुछ ऐसा पक रहा था जिसे कोई नाम नहीं दिया गया था।
आज करन ने पार्सल काउंटर पर रखे और बोला, भाभी जी, आज तो आप कुछ ज्यादा ही अच्छी लग रही हैं, यह साड़ी आप पर बहुत जच रही है। सविता ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और बोली, अच्छा, तो अब तुम मेरी तारीफ भी करने लगे हो। करन हंसा और बोला, तारीफ तो मैं पहले दिन से कर रहा हूं, आप ही सुनती नहीं थीं। सविता का दिल तेजी से धड़कने लगा।
बुटीक में उस वक्त कोई ग्राहक नहीं था। सविता ने अंदर के ट्रायल रूम की तरफ इशारा किया और बोली, जरा ये नए सूट अंदर रख दो, मैं अभी आती हूं। करन सूट लेकर ट्रायल रूम में गया और सविता उसके पीछे पीछे चली गई। ट्रायल रूम छोटा था, शीशा बड़ा था और पर्दा आधा खुला था। करन ने सूट टांगा और मुड़कर सविता को देखा।
सविता ने धीरे से पर्दा खींच दिया। करन की सांसें तेज हो गईं। उसने सविता का हाथ पकड़ा और बोला, भाभी जी, मैं रोज यहां आता हूं सिर्फ आपको देखने के लिए। सविता ने उसकी आंखों में देखा और बोली, झूठ मत बोलो करन, पार्सल तो बहाना है ना। करन ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहला चुंबन धीमा था, फिर गहरा हो गया। सविता ने करन की कमीज को मुट्ठी में पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया। करन ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे शीशे से सटा दिया। सविता की सांसें गरम हो गईं और उसने करन की जीभ को अपनी जीभ से छुआ। ट्रायल रूम की हवा में परफ्यूम और पसीने की मिली हुई खुशबू फैल गई।
करन ने सविता के ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाया। सविता ने एक हल्की सी सिसकी ली और बोली, धीरे करन, कोई आ जाएगा। करन ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, कोई नहीं आएगा भाभी जी, दरवाजा मैंने देखा है, बाहर कोई नहीं है। सविता ने उसकी बात पर भरोसा किया और अपने शरीर को उसके हवाले कर दिया।
तभी बुटीक के बाहर किसी ग्राहक की आवाज आई। दोनों झटके से अलग हुए और सविता ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की। करन ने मुस्कुराकर कहा, भाभी जी, यह अधूरी बात यहीं नहीं रुकेगी। सविता ने उसकी ओर देखा और बोली, शाम को मेरे फ्लैट पर आ जाना, पति बाहर है, कोई नहीं होगा। करन की आंखें चमक उठीं और वह पार्सल का रजिस्टर लेकर बाहर निकल गया।
शाम को सविता अपने फ्लैट में करन का इंतजार कर रही थी। उसने हल्की सी नाइटी पहनी थी जिसके नीचे कुछ नहीं था। दरवाजे की घंटी बजी तो उसका दिल जोर से धड़का। उसने दरवाजा खोला और करन सामने खड़ा था, हाथ में एक छोटा सा गुलदस्ता लिए। सविता ने उसे अंदर खींचा और दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
सविता ने करन की शर्ट के बटन एक एक करके खोले। उसकी छाती चौड़ी और मजबूत थी। सविता ने उसकी छाती पर अपनी उंगलियां फिराईं और उसके निप्पल को अपनी जीभ से छुआ। करन ने एक गहरी सांस ली और सविता के बालों में हाथ डालकर उसका सिर अपनी छाती से लगा लिया। सविता मुस्कुराई और बोली, तुम्हारा शरीर तो बहुत गरम है करन।
करन ने सविता की नाइटी के स्ट्रैप धीरे से नीचे खिसकाए। नाइटी उसके कंधों से फिसलकर नीचे गिर गई और सविता का नंगा शरीर उसके सामने आ गया। उसके बूब्स बड़े और गोल थे, निप्पल कड़े हो गए थे। करन ने दोनों बूब्स को अपने हाथों में लिया और उन्हें दबाते हुए चूमने लगा। सविता ने सिर पीछे झुकाया और बोली, हां करन, ऐसे ही, और जोर से।
करन ने सविता को गोद में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया। उसने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। सविता ने अपनी टांगें फैला दीं और करन को अपनी ओर खींच लिया। करन ने उसकी चूत पर हाथ रखा तो वह पूरी तरह गीली थी। उसने अपनी उंगली उसकी चूत के अंदर डाली और धीरे धीरे हिलाने लगा।
सविता की चूत से पानी बहने लगा और उसकी सिसकियां तेज हो गईं। वह बोली, करन, अब और मत तड़पाओ, मुझे तुम्हारा लंड चाहिए, अभी चाहिए। करन ने अपनी पैंट उतारी और उसका कड़ा लंड बाहर आ गया। वह लंबा और मोटा था, और सविता ने उसे देखते ही अपने होंठ चाट लिए। उसने लंड को हाथ में लिया और धीरे से हिलाने लगी।
सविता ने करन के लंड को अपने मुंह में लिया। उसने उसके टोपे को अपनी जीभ से चाटा और फिर पूरा लंड अंदर तक ले गई। करन ने उसके बाल पकड़ लिए और बोला, भाभी जी, आपका मुंह तो जादू करता है। सविता ने लंड को चूसते हुए अपनी आंखें ऊपर उठाकर उसे देखा। करन का शरीर कांपने लगा और उसने जल्दी से लंड बाहर निकाल लिया।
करन ने सविता को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसकी टांगों के बीच आ गया। उसने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। सविता ने एक लंबी आह भरी और बोली, हां, अंदर डालो, पूरा डालो। करन ने एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। सविता की चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया।
करन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धक्के धीमे थे, फिर तेज हो गए। सविता ने अपनी टांगें उसकी कमर में लपेट लीं और हर धक्के पर अपनी कमर उठाने लगी। बिस्तर की चरमराहट और उनकी सांसों की आवाज कमरे में गूंजने लगी। सविता बोली, करन, तुम तो मुझे पागल कर दोगे, ऐसे ही चोदो मुझे।
सविता अचानक कांपने लगी। उसकी चूत ने करन के लंड को और कसकर जकड़ लिया और वह जोर से चीख पड़ी, करन, मैं झड़ रही हूं, मैं झड़ रही हूं। उसके शरीर में एक लहर सी दौड़ गई और वह करन की बाहों में पिघल गई। करन ने धक्के जारी रखे और बोला, भाभी जी, अभी मेरा बाकी है, अभी रुकना मत।
करन ने सविता को पलटकर घोड़ी बना दिया। उसने उसके कूल्हों को पकड़ा और पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। सविता ने तकिया पकड़ लिया और अपनी गांड पीछे की ओर धकेलने लगी। करन ने उसके कूल्हों पर हल्का सा थप्पड़ मारा और बोला, भाभी जी, आपकी गांड तो कमाल है।
करन की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं। उसने कहा, भाभी जी, मेरा निकलने वाला है, कहां निकालूं। सविता ने पीछे मुड़कर कहा, अंदर ही निकाल दो करन, मेरी चूत में ही अपना पानी छोड़ दो। करन ने कुछ तेज धक्के लगाए और फिर एक लंबी आह के साथ अपना पूरा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। सविता ने उसकी गर्मी को अपने अंदर महसूस किया और संतोष से आंखें बंद कर लीं।
दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेट गए। करन ने सविता के माथे पर चुंबन दिया और बोला, भाभी जी, आज तो आपने मुझे अपना दीवाना बना दिया। सविता हंसी और बोली, दीवाना तो मैं तुम्हारी पहली मुस्कान से ही हो गई थी, बस कहने की हिम्मत आज हुई। दोनों की हंसी कमरे में गूंज गई और थकान के बावजूद उनके चेहरों पर मुस्कान थी।
दोपहर बाद जब बुटीक खाली हुआ तो सविता ने फिर ट्रायल रूम का पर्दा खींचा। इस बार करन ने देर नहीं की। उसने सविता को शीशे के सामने खड़ा किया और पीछे से उसे बाहों में भर लिया। उसके हाथ सविता के बूब्स पर थे और उसके होंठ उसकी गर्दन पर थे। सविता ने शीशे में दोनों का अक्स देखा और बोली, करन, शीशे में हम दोनों कितने अच्छे लग रहे हैं।
फिर सविता खड़ी हुई और करन ने उसे ट्रायल रूम की दीवार से सटा दिया। उसने सविता की साड़ी ऊपर उठाई और उसकी चूत पर हाथ रखा। चूत पूरी तरह गीली थी। करन ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और खड़े खड़े ही धक्के लगाने लगा। सविता ने दीवार पकड़ ली और हर धक्के पर अपनी कमर हिलाने लगी। ट्रायल रूम छोटा था, इसलिए हर आवाज और हर सांस साफ सुनाई दे रही थी।
खड़े खड़े चुदाई में सविता को एक अलग ही मजा आ रहा था। वह बोली, करन, धीरे नहीं, तेज करो, कोई आए उससे पहले मुझे झाड़ दो। करन ने उसकी बात मानी और धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। सविता की चूत ने लंड को कसकर पकड़ लिया और वह कुछ ही देर में झड़ गई। उसकी टांगें कांपने लगीं और उसने करन के कंधे पर अपना सिर टिका दिया।
अगली शाम करन फ्लैट पर आया तो सविता ने दरवाजा खोलते ही उसे अंदर खींच लिया। इस बार कोई बातचीत नहीं हुई, सीधे होंठ मिले। सविता ने करन की शर्ट फाड़ने जैसे अंदाज में खोली और करन ने उसकी नाइटी ऊपर उठा दी। दोनों बेडरूम तक पहुंचते पहुंचते ही आधे नंगे हो चुके थे। बिस्तर पर गिरते ही सविता करन के ऊपर आ गई।
सविता ने करन के ऊपर बैठकर उसकी चुदाई शुरू की। वह उसके लंड पर ऊपर नीचे होने लगी और उसके बूब्स हवा में हिल रहे थे। करन ने उसके बूब्स को पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने लगा। सविता बोली, करन, आज मैं तुम्हें चोदूंगी, तुम बस लेटे रहो। करन हंसा और बोला, भाभी जी, आपकी सवारी तो सबसे अच्छी है।
सविता फिर झड़ गई और इस बार उसकी चीख पूरे फ्लैट में गूंज गई। वह करन की छाती पर गिर पड़ी और हांफने लगी। करन ने उसे पलटा और खुद ऊपर आ गया। उसने मिशनरी पोजीशन में फिर से धक्के लगाने शुरू किए। सविता ने अपनी टांगें उसकी कमर में लपेट लीं और बोली, हां करन, अब तुम चोदो, मुझे तुम्हारे धक्के चाहिए।
अंत में करन ने अपना पानी फिर उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे और देर तक एक दूसरे की सांसों को महसूस करते रहे। सविता ने कहा, करन, तुम रोज आते हो, लेकिन अब तुम मेरे दिल में भी रोज आते हो। करन ने उसके माथे को चूमा और बोला, भाभी जी, मैं रोज आऊंगा, पार्सल लेकर भी और प्यार लेकर भी।
सविता ने करन की ओर देखा और मुस्कुराकर बोली, तो कल दोपहर फिर मिलते हैं, उसी ट्रायल रूम में, उसी पर्दे के पीछे।
रविवार की सुबह सविता ने करन को फोन किया और बोली, आज बुटीक बंद है, तुम सीधे फ्लैट पर आ जाओ, मैंने तुम्हारे लिए कुछ खास रखा है। करन आधे घंटे में पहुंच गया और दरवाजा खुलते ही सविता ने उसे अंदर खींच लिया। उसने एक नई लाल साड़ी पहनी थी और उसकी आंखों में वही शरारत थी जो करन को पहली बार में ही दीवाना बना गई थी।
सविता ने करन को सोफे पर बिठाया और उसके सामने चाय रखी, लेकिन चाय पीने से पहले ही वह उसकी गोद में बैठ गई। करन ने उसकी कमर पकड़ ली और उसके गाल पर चुंबन दिया। सविता ने उसके होंठों को चूमा और बोली, आज कोई जल्दी नहीं है, आज हम आराम से एक दूसरे को महसूस करेंगे। करन ने मुस्कुराकर कहा, भाभी जी, आपकी हर अदा मुझे और पागल कर देती है।
सविता ने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू हटाया और करन के सामने अपने बूब्स को उसके हाथों में दे दिया। करन ने उन्हें दबाते हुए चूमा और सविता की सिसकियां सोफे वाले कमरे में गूंजने लगीं। फिर सविता ने करन की शर्ट उतारी और उसकी छाती पर अपने होंठ फिराने लगी। करन का लंड उसकी पैंट में ही कड़ा हो गया था और सविता ने उसे ऊपर से ही पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया।
करन ने सविता को सोफे पर लिटाया और उसकी साड़ी ऊपर उठा दी। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी। करन ने अपनी उंगलियों से उसे सहलाया और फिर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा। सविता ने सोफे की गद्दी पकड़ ली और बोली, करन, ऐसे ही, और अंदर तक। करन ने उसकी चूत को चूसते हुए उसे पहली बार झाड़ दिया और सविता का शरीर सोफे पर कांप उठा।
फिर करन ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और सोफे पर ही धक्के लगाने लगा। सविता ने अपनी टांगें उसकी कमर में लपेट लीं और हर धक्के पर अपनी कमर उठाने लगी। दोनों की आवाजें रविवार की शांत सुबह में गूंज रही थीं। करन ने उसकी चुदाई की रफ्तार बढ़ाई और सविता फिर झड़ गई, इस बार और जोर से।
अंत में करन ने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया और दोनों सोफे पर ही एक दूसरे से लिपटकर लेट गए। सविता ने हंसकर कहा, रविवार की चाय तो ठंडी हो गई, लेकिन यह सुबह गरम हो गई। करन ने उसके माथे को चूमा और बोला, भाभी जी, अगला रविवार भी मेरा ही होगा।
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