चेकअप करवाने आई भाभी डॉक्टर से चुद गई: जयपुर क्लिनिक की बंद केबिन में पहली बार
रितु ने क्लिनिक के केबिन का दरवाजा धीरे से खोला तो उसकी नजर सबसे पहले मेज पर रखी फाइल पर पड़ी। वह उसकी अपनी पुरानी फाइल थी, और वह सबसे ऊपर रखी थी, जैसे डॉक्टर साहब ने उसे खास तौर पर निकालकर रखा हो। फाइल के अंदर उसका नाम, उसकी पिछली शिकायतें, उसकी दवाइयों की सूची, सब कुछ करीने से लगा था। उसे यह देखकर अजीब सी खुशी हुई कि इतने मरीजों के बीच डॉक्टर अर्जुन मेहता को उसकी फाइल याद थी।
अंदर की ओर एक छोटा सा दरवाजा अधखुला था। उस दरवाजे के पीछे एक छोटा सा कमरा दिख रहा था, जिसमें एक साफ सुथरा बिस्तर लगा था और एक अलमारी में डॉक्टर साहब का एक जोड़ा कपड़े टंगे थे। रितु समझ गई कि कभी कभी डॉक्टर साहब रात को क्लिनिक में ही रुक जाते होंगे। यह जानकर उसके दिल की धड़कन तेज हो गई, पर उसने खुद को संभाला और कुर्सी पर बैठ गई।
डॉक्टर अर्जुन मेहता अड़तीस साल के थे, लंबे कद के, साफ रंग के, और उनकी आवाज में एक अजीब सा ठहराव था। रितु तीस साल की थी, उसका पति पिछले दो साल से दुबई में काम कर रहा था, और वह जयपुर में अपनी सास के साथ रहती थी। उसकी पीठ का पुराना दर्द फिर से बढ़ गया था, और उसी दर्द के चेकअप के लिए वह इस क्लिनिक में आई थी।
डॉक्टर साहब ने मुस्कुराकर कहा, रितु जी, आप तो बहुत दिनों बाद आई हैं। रितु ने हंसकर कहा, डॉक्टर साहब, दर्द ने फिर से याद दिला दिया कि आपसे मिलना बाकी था। डॉक्टर साहब की आंखों में एक पल के लिए कुछ चमका, फिर वह अपनी कुर्सी पर बैठ गए और फाइल खोलकर देखने लगे।
उन्होंने कहा, पिछली बार मैंने जो दवा लिखी थी, वह आपने पूरी की थी। रितु ने कहा, हां, पर काम का बोझ बढ़ गया, और पीठ फिर से अकड़ने लगी। डॉक्टर साहब ने कहा, तो आज ठीक से जांच कर लेते हैं, ताकि दर्द की असली वजह समझ आ जाए। उन्होंने कंपाउंडर को आवाज देकर कहा कि अगले आधे घंटे कोई मरीज अंदर न भेजा जाए।
रितु खड़ी हुई और जांच वाली मेज की ओर बढ़ी। डॉक्टर साहब ने कहा, आप आराम से लेट जाइए, मैं पीठ की मांसपेशियों को देखता हूं। रितु धीरे से मेज पर लेट गई। उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, और उसने उसे ठीक करने की कोशिश नहीं की। डॉक्टर साहब के हाथ जब उसकी पीठ पर आए तो वह एकदम गर्म थे।
उन्होंने धीरे धीरे उसकी पीठ को दबाना शुरू किया। उनकी उंगलियां उसकी रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर चल रही थीं। रितु की आंखें बंद हो गईं। उसने कहा, डॉक्टर साहब, यहीं पर सबसे ज्यादा दर्द होता है। डॉक्टर साहब ने कहा, यहां की मांसपेशी बहुत सख्त हो गई है, इसे धीरे धीरे ढीला करना होगा।
उनके हाथ अब उसकी कमर तक आ गए थे। रितु की सांस तेज हो गई। उसने अपने होंठों को दांतों से दबा लिया। डॉक्टर साहब ने धीमी आवाज में कहा, रितु जी, आप बहुत तनाव में रहती हैं। तनाव शरीर में यहीं जमा हो जाता है। रितु ने कहा, तनाव तो है ही, अकेले सब संभालना पड़ता है।
डॉक्टर साहब एक पल के लिए रुके। फिर उन्होंने कहा, अकेलापन भी एक तरह का दर्द होता है, और उसका इलाज दवा से नहीं होता। रितु ने आंखें खोलीं और उनकी ओर देखा। उनकी आंखों में वही चमक थी जो उसने पहले देखी थी। उसने कहा, तो फिर इसका इलाज क्या है, डॉक्टर साहब।
डॉक्टर साहब ने उसके चेहरे के पास झुककर कहा, कभी कभी इलाज के लिए मरीज को डॉक्टर पर भरोसा करना पड़ता है, पूरी तरह। रितु ने धीरे से कहा, मुझे आप पर भरोसा है। यह सुनकर डॉक्टर साहब ने उसके गाल को छुआ। उनका स्पर्श बहुत कोमल था, पर उसमें एक छिपी हुई गर्मी थी।
रितु उठकर बैठ गई। उसकी साड़ी अब काफी सरक चुकी थी, और उसका ब्लाउज उसकी छाती की बनावट को साफ दिखा रहा था। डॉक्टर साहब की नजरें एक पल के लिए वहां ठहर गईं, फिर उन्होंने नजरें हटा लीं। रितु ने कहा, डॉक्टर साहब, आप शरमा क्यों रहे हैं, आप तो डॉक्टर हैं।
डॉक्टर साहब ने हंसकर कहा, डॉक्टर भी इंसान होता है, रितु जी। रितु ने उनकी हथेली को पकड़ लिया और अपनी छाती पर रख दिया। उसने कहा, तो फिर इंसान की तरह महसूस कीजिए। डॉक्टर साहब की सांस अटक गई। उन्होंने धीरे से उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी छाती को दबाना शुरू किया।
रितु ने अपनी आंखें बंद कर लीं और कहा, हां, ऐसे ही। डॉक्टर साहब ने उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक एक हुक खुलता गया, और रितु की गोरी छाती सामने आ गई। उसकी चूचियां बड़ी और भरी हुई थीं, और उनके निप्पल सख्त हो चुके थे। डॉक्टर साहब ने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे धीरे मसलने लगे।
रितु ने कहा, आह, डॉक्टर साहब, बहुत दिन हो गए किसी ने ऐसे छुआ हो। डॉक्टर साहब ने झुककर उसके एक निप्पल को मुंह में ले लिया। उन्होंने उसे चूसना शुरू किया, पहले धीरे, फिर तेज। रितु ने उनके बालों में उंगलियां डाल दीं और उनका सिर अपनी छाती पर दबा लिया।
उन्होंने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए कहा, रितु जी, आप बहुत खूबसूरत हैं। रितु ने कहा, यह खूबसूरती अब आपकी है, डॉक्टर साहब। डॉक्टर साहब ने उसकी साड़ी को पूरी तरह खोल दिया। साड़ी नीचे गिर गई, और रितु सिर्फ पेटीकोट में रह गई।
डॉक्टर साहब ने पेटीकोट का नाड़ा खींचा। पेटीकोट भी नीचे सरक गया। अब रितु सिर्फ अपनी पैंटी में थी। उसकी पैंटी उसकी चूत के गीलेपन से चिपक गई थी। डॉक्टर साहब ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को छुआ। रितु ने एक लंबी सांस ली और कहा, हां, वहीं।
डॉक्टर साहब ने उसकी पैंटी को नीचे खींच दिया। उसकी चूत सामने आ गई, गीली और गर्म। उन्होंने अपनी उंगली से उसकी चूत को सहलाया। रितु की कमर उठने लगी। उसने कहा, डॉक्टर साहब, और अंदर। डॉक्टर साहब ने एक उंगली उसकी चूत में डाली और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे।
रितु ने उनकी कलाई पकड़ ली और कहा, और तेज। डॉक्टर साहब ने दो उंगलियां डाल दीं। रितु की आवाज तेज हो गई। उसने कहा, हां, हां, ऐसे ही, रुकना मत। डॉक्टर साहब की उंगलियां उसकी चूत में तेजी से चल रही थीं, और उसकी चूत से पानी निकलने लगा था।
रितु ने कहा, डॉक्टर साहब, अब और नहीं रुका जा रहा। डॉक्टर साहब ने अपनी पैंट खोली। उनका लंड पूरी तरह सख्त हो चुका था, लंबा और मोटा। रितु ने उसे देखते ही कहा, इतना बड़ा। डॉक्टर साहब ने कहा, यह सब आपकी वजह से है, रितु जी।
रितु ने उनका लंड अपने हाथ में लिया। वह गर्म और सख्त था। उसने उसे धीरे धीरे हिलाना शुरू किया। डॉक्टर साहब ने आंखें बंद कर लीं और कहा, हां, ऐसे ही। रितु ने झुककर उनके लंड को मुंह में ले लिया। उसने उसे चूसना शुरू किया, पहले धीरे, फिर गहराई तक।
डॉक्टर साहब ने कहा, रितु जी, आप यह भी बहुत अच्छा करती हैं। रितु ने मुंह से लंड निकाला और कहा, अभी तो बहुत कुछ बाकी है। डॉक्टर साहब ने उसे मेज पर लिटा दिया और उसकी टांगें फैला दीं। उन्होंने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा।
रितु ने कहा, डालिए, डॉक्टर साहब, पूरा डालिए। डॉक्टर साहब ने धीरे से अपना लंड उसकी चूत में धकेला। रितु ने एक जोर की सांस ली। उसका लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था। जब वह पूरा अंदर चला गया तो रितु ने कहा, आह, भर गया, पूरा भर गया।
डॉक्टर साहब ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ रितु की चूत उनके लंड को जकड़ रही थी। रितु ने कहा, हां, और तेज, और तेज। डॉक्टर साहब ने अपनी गति बढ़ा दी। मेज हल्की सी हिलने लगी। रितु की आवाजें केबिन में गूंज रही थीं।
डॉक्टर साहब ने कहा, रितु जी, आपकी चूत बहुत टाइट है। रितु ने कहा, वह इसलिए क्योंकि बहुत दिनों से किसी ने इसे छुआ नहीं। डॉक्टर साहब ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और अंदर के छोटे कमरे में ले गए। वहां बिस्तर पर उन्होंने उसे लिटा दिया।
बिस्तर पर डॉक्टर साहब ने रितु को घोड़ी बनाया। उन्होंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला। इस पोजीशन में उनका लंड और भी गहराई तक जा रहा था। रितु ने तकिया पकड़ लिया और कहा, हां, पीछे से और भी अच्छा लग रहा है।
डॉक्टर साहब ने तेज धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के पर रितु की चूचियां हिल रही थीं। उसने कहा, मैं आने वाली हूं, डॉक्टर साहब, मैं आ रही हूं। डॉक्टर साहब ने कहा, साथ में आते हैं, रितु जी। उन्होंने अपनी गति और बढ़ा दी।
रितु की चूत ने जोर से सिकुड़कर उनके लंड को जकड़ा। वह झड़ गई, और उसके मुंह से एक लंबी आह निकली। डॉक्टर साहब भी कुछ ही धक्कों में झड़ गए। उनका पानी उसकी चूत में भर गया। दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर गए।
रितु ने उनके सीने पर सिर रख दिया और कहा, डॉक्टर साहब, यह चेकअप तो मैं कभी नहीं भूलूंगी। डॉक्टर साहब ने कहा, यह तो सिर्फ पहला चेकअप था, रितु जी। अगला चेकअप इससे भी खास होगा। रितु हंस पड़ी और उनकी छाती पर उंगली से कुछ लिखने लगी।
कुछ देर बाद डॉक्टर साहब ने उसे फिर से अपनी बाहों में खींच लिया। उन्होंने उसकी चूचियों को चूमा और कहा कि उसकी छाती की गर्मी उन्हें पागल कर रही है। रितु ने हंसकर कहा कि यह गर्मी अब हर हफ्ते के चेकअप में मिलेगी। डॉक्टर साहब ने उसकी चूत को फिर से सहलाया, और रितु ने उनके लंड को हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाया। दोनों जानते थे कि यह सिर्फ शुरुआत थी, और आगे की मुलाकातों में इससे भी ज्यादा कुछ होने वाला था।
रितु ने कहा, डॉक्टर साहब, मेरे पति को मेरी इस बीमारी के बारे में मत बताइएगा, यह बीमारी सिर्फ आप ही ठीक कर सकते हैं। डॉक्टर साहब ने कहा, यह बीमारी तो अब मेरी भी हो गई है, रितु जी। दोनों हंस पड़े, और रितु ने जल्दी से अपनी साड़ी उठाकर पहननी शुरू की। उसे घर पहुंचने की जल्दी थी, पर उसका दिल अभी भी क्लिनिक में ही अटका हुआ था।
दोनों अभी कपड़े पहन ही रहे थे कि तभी केबिन का दरवाजा खटका। बाहर से कंपाउंडर की घबराई हुई आवाज आई, डॉक्टर साहब, आपकी पत्नी आ गई हैं, वह बाहर ही खड़ी हैं। रितु के हाथ रुक गए, और डॉक्टर साहब का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।
उस रात रितु घर लौटी तो उसकी सास सो चुकी थी। उसने धीरे से अपने कमरे का दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर लेट गई। उसकी आंखों के सामने बार बार डॉक्टर साहब का चेहरा आ रहा था। उसकी छाती पर अभी भी उनके हाथों का एहसास बाकी था। उसने अपनी साड़ी का पल्लू हटाया और अपनी चूचियों को खुद ही सहलाने लगी।
रितु ने आंखें बंद कर लीं और क्लिनिक की वह शाम याद करने लगी। उसे डॉक्टर साहब की गर्म सांसें याद आ रही थीं। उसने अपनी उंगलियां अपनी चूत पर रख दीं। उसकी चूत अभी भी गीली थी। उसने धीरे धीरे अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करना शुरू किया। उसके मुंह से धीमी आहें निकलने लगीं।
तभी उसके फोन पर एक मैसेज की आवाज आई। उसने फोन उठाकर देखा। डॉक्टर साहब का मैसेज था। लिखा था, रितु जी, आज का चेकअप अधूरा रह गया। अगला चेकअप कब होगा। रितु ने मुस्कुराकर जवाब लिखा, जब आप कहें, डॉक्टर साहब। मेरी बीमारी का इलाज सिर्फ आपके पास है।
डॉक्टर साहब ने तुरंत जवाब दिया, कल शाम को क्लिनिक बंद होने के बाद आ जाइए। कोई नहीं होगा। रितु का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने अपनी उंगलियों की गति बढ़ा दी। उसे लग रहा था जैसे डॉक्टर साहब अभी उसके पास हों। कुछ ही पलों में वह झड़ गई और बिस्तर पर निढाल होकर लेट गई।
रितु ने फोन को सीने से लगा लिया और सोने की कोशिश करने लगी। उसे पता था कि कल की शाम आज से भी ज्यादा खास होने वाली है।
सुबह उठकर रितु ने सबसे पहले अपनी अलमारी से वह साड़ी निकाली जो डॉक्टर साहब ने पिछली बार पसंद की थी। उसने शीशे के सामने खड़े होकर खुद को देखा और मुस्कुरा दी। उसकी आंखों में एक नई चमक थी। उसने तय कर लिया कि शाम को क्लिनिक जाते समय वह वही परफ्यूम लगाएगी जो डॉक्टर साहब को पसंद था। दिन भर उसका मन क्लिनिक की उस केबिन में ही घूमता रहा, और हर घंटे वह घड़ी देख रही थी कि शाम कब होगी।
चेकअप करवाने आई भाभी डॉक्टर से चुद गई: Part 2
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