हिंदी सेक्स कॉमिक: दिल्ली में कविता की चूत में अमन का लंड, कॉमिक के पन्नों से बेडरूम तक
कविता ने अपनी हिंदी सेक्स कॉमिक की स्केचबुक खोली तो एक पन्ना गायब था। वह पन्ना सबसे बोल्ड था, जिसमें उसने अपने ही चेहरे वाली नायिका को एक लंबे बालों वाले लड़के की गोद में बैठे हुए बनाया था। कविता का दिल जोर से धड़कने लगा, क्योंकि वह कॉमिक सिर्फ उसके लिए थी, किसी और की नजर उस पर नहीं पड़नी थी। उसने बालकनी का दरवाजा खोला तो हवा में उड़ता हुआ वही पन्ना उसे सामने वाली बालकनी की रेलिंग पर अटका दिखा।
सामने वाली बालकनी में अमन खड़ा था, हाथ में वही पन्ना लिए हुए। वह सत्ताईस साल का इलस्ट्रेटर था, जो दो महीने पहले ही उस बिल्डिंग में आया था। कविता ने उसे पहले भी सीढ़ियों पर देखा था, पर कभी बात नहीं हुई थी। अमन ने पन्ने को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, तुम्हारी ड्राइंग में जान है, पर इस नायिका की आंखों में डर क्यों है। कविता का चेहरा लाल हो गया, उसने कहा, वह मेरा पन्ना है, वापस दो।
अमन ने पन्ना वापस नहीं दिया, उसने कहा, पहले चाय पिलाओ, फिर पन्ना मिलेगा। कविता को गुस्सा भी आया और हंसी भी आई, क्योंकि कोई अजनबी उसकी सबसे निजी कल्पना को इस तरह पकड़े खड़ा था। उसने कहा, ठीक है, पांच मिनट के लिए आओ, पर यह बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए। अमन ने पन्ना मोड़कर जेब में रखा और उसके पीछे पीछे उसके फ्लैट में आ गया।
कविता के फ्लैट में एक छोटा सा स्टूडियो कोना था, जहां चारकोल, ब्रश और अधूरी कॉमिक के पन्ने बिखरे थे। अमन ने उन पन्नों को ऐसे देखा जैसे कोई खजाना देख रहा हो। उसने कहा, तुमने इस नायिका को खुद जैसा क्यों बनाया, क्या तुम भी ऐसा ही महसूस करती हो। कविता ने चाय का कप उसके हाथ में थमाते हुए कहा, कल्पना और हकीकत में फर्क होता है, तुम ज्यादा मत सोचो।
अमन ने कप टेबल पर रखा और धीरे से कहा, कल्पना तब तक ही कल्पना है जब तक कोई उसे सच न कर दे। कविता की सांस अटक गई, क्योंकि उसके पति विक्रम पिछले तीन हफ्तों से टूर पर थे और घर में सन्नाटा उसे हर रात खा जाता था। उसने अमन की आंखों में देखा, वहां न शरारत थी, न जल्दबाजी, बस एक ठहरा हुआ इंतजार था। कविता ने कहा, तुम बहुत बोलते हो, चाय खत्म करो और जाओ।
अमन जाने के बजाय उसके स्टूडियो के पास आकर खड़ा हो गया। उसने कहा, एक पन्ना और बनाओ, अभी, मेरे सामने, जिसमें यह नायिका डरती नहीं, मांगती है। कविता के हाथ कांपने लगे, पर उसने पेंसिल उठा ली। उसने एक नया पन्ना बनाया, जिसमें नायिका ने लड़के की शर्ट का कॉलर पकड़ा हुआ था। अमन ने उसके हाथ से पेंसिल ली और उसके कानों के पास आकर फुसफुसाया, अब इसे सच करके दिखाओ।
कविता ने अमन को धक्का नहीं दिया, उसने उसकी शर्ट का कॉलर सच में पकड़ लिया। अमन ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, धीरे से, फिर जोर से। कविता ने पहले उसे रोकने की कोशिश की, फिर खुद ही उसकी गर्दन में उंगलियां डाल दीं। उसके शरीर में महीनों से दबी हुई गर्मी एकदम से जाग उठी। अमन ने उसकी कमर पकड़ी और उसे स्टूडियो की दीवार से लगा दिया।
अमन ने कविता की कुर्ती के बटन एक एक करके खोले, जैसे कोई पन्ना पलट रहा हो। कविता की सांस तेज हो गई, उसने अमन की शर्ट ऊपर उठाकर उसकी छाती पर हाथ फेरा। अमन ने उसके ब्लाउज के हुक खोले और उसके बूब्स को अपने हाथों में भर लिया। कविता ने आंखें बंद करके कहा, धीरे, कोई जल्दी नहीं है। अमन ने उसके निप्पल को अपने मुंह में लिया और धीरे धीरे चूसने लगा।
कविता ने अमन का सिर अपने सीने से लगाया और उसके बालों में उंगलियां चलाईं। अमन ने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसे नीचे सरका दिया। कविता की चूत गीली हो चुकी थी, उसकी पैंटी भीग गई थी। अमन ने पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी उंगली उसकी चूत के होंठों पर फेरी। कविता ने उसके कंधे पर दांत गड़ा दिए और कहा, और अंदर डालो, रुकना मत।
अमन ने दो उंगलियां उसकी चूत में डालीं और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। कविता की कमर अपने आप हिलने लगी, उसकी आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। अमन ने कहा, तुम कॉमिक में जितनी बोल्ड हो, सच में उससे ज्यादा हो। कविता ने उसकी पैंट की जिप खोली और उसका लंड बाहर निकाला, जो पूरी तरह खड़ा था। उसने उसे अपने हाथ में लेकर धीरे से सहलाया।
कविता नीचे बैठ गई और अमन के लंड को अपने मुंह में ले लिया। उसने पहले सिर्फ टिप को चूसा, फिर पूरा लंड अंदर तक लिया। अमन ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, हां, ऐसे ही, रुकना मत। कविता की जीभ उसके लंड के चारों ओर घूम रही थी, उसकी लार नीचे तक बह रही थी। अमन की सांसें तेज हो गईं, उसने कविता को ऊपर उठाया और उसे स्टूडियो की मेज पर बैठा दिया।
अमन ने कविता की टांगें चौड़ी कीं और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। कविता ने उसकी कमर पकड़कर कहा, डाल दो, अब और इंतजार नहीं होता। अमन ने एक झटके में अपना लंड उसकी चूत में उतार दिया। कविता ने जोर से आह भरी, उसकी चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया। अमन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, फिर रफ्तार बढ़ा दी।
मेज हिलने लगी, कविता के बूब्स हर धक्के के साथ उछल रहे थे। अमन ने उसके बूब्स को पकड़कर चूसना शुरू किया, साथ ही नीचे से धक्के भी जारी रखे। कविता ने अपनी टांगें उसकी कमर के चारों ओर लपेट लीं और कहा, और जोर से, मुझे पूरा चाहिए। अमन ने उसे मेज से उठाकर दीवार से लगा दिया और खड़े खड़े ही चोदने लगा। कविता का शरीर हवा में था, उसकी चूत से पानी बह रहा था।
अमन ने कविता को नीचे उतारा और उसे घुमाकर मेज पर झुका दिया। उसने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और उसके बाल पकड़कर धक्के लगाने लगा। कविता ने मेज को कसकर पकड़ लिया, उसकी आंखें बंद थीं, उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं। अमन ने कहा, तुम्हारी चूत इतनी टाइट है कि मेरा लंड फंस सा गया है। कविता ने हंसते हुए कहा, तो निकालो मत, अंदर ही रहो।
कविता की चूत में ऐंठन शुरू हुई, उसका बदन कांपने लगा। उसने कहा, मैं झड़ने वाली हूं, रुकना मत, ऐसे ही करते रहो। अमन ने धक्कों की रफ्तार और बढ़ा दी, उसकी चूत से पानी की धार बह निकली। कविता जोर से चिल्लाई और झड़ गई, उसका बदन ढीला पड़ गया। अमन ने उसे घुमाया, उसे मेज पर लिटाया और फिर से उसकी चूत में लंड डाल दिया।
अमन अब खुद झड़ने के करीब था, उसने कहा, मैं भी आने वाला हूं, कहां निकालूं। कविता ने कहा, मेरी चूत में ही, मुझे तुम्हारा पानी अंदर चाहिए। अमन ने कुछ तेज धक्के लगाए और उसकी चूत में ही झड़ गया। दोनों की सांसें फूल रही थीं, पसीने से उनके बदन चिपक गए थे। कविता ने अमन के माथे पर किस किया और कहा, यह पन्ना अब सच हो गया।
शाम को अमन अपने फ्लैट में लौट गया, पर कविता की बेचैनी खत्म नहीं हुई। उसने एक नया पन्ना बनाया, जिसमें नायिका और लड़का बालकनी में खड़े थे और पीछे दरवाजे पर किसी की परछाईं थी। कविता ने उस पन्ने को देखा और खुद से कहा, यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। उसने अमन को मैसेज किया, कल फिर आओ, एक पन्ना और बाकी है। अमन ने जवाब दिया, कल मैं पन्ना नहीं, तुम्हें पूरा पढ़ने आऊंगा।
अगली शाम अमन फिर आया, इस बार हाथ में कविता की स्केचबुक थी। उसने कहा, मैंने तुम्हारी कॉमिक का अगला हिस्सा पढ़ लिया है, अब मुझे उसका सच चाहिए। कविता ने कहा, पहले दरवाजा बंद करो, पड़ोसियों की नजरें बहुत तेज हैं। अमन ने दरवाजा बंद किया, उसे सोफे पर बैठाया और उसके पैरों के पास बैठ गया। उसने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसकी जांघों पर किस करने लगा।
कविता ने अमन का सिर अपनी जांघों के बीच दबा लिया। अमन ने उसकी पैंटी हटाई और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेरी। कविता ने सोफे की गद्दी को कसकर पकड़ लिया, उसकी चूत से रस बहने लगा। अमन ने जीभ को अंदर तक डाला और क्लिट को चूसने लगा। कविता की आवाजें तेज हो गईं, उसने कहा, हां, वहीं, रुकना मत।
अमन ने उसे सोफे पर लिटाया और उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं। उसने अपना लंड उसकी चूत में डाला और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। कविता ने उसके हाथ पकड़ लिए और कहा, आज धीरे मत करो, मुझे तेज चाहिए। अमन ने रफ्तार बढ़ाई, सोफा हिलने लगा, कविता के बूब्स उछलने लगे। अमन ने एक बूब को मुंह में लिया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
कविता ने अमन को अपने ऊपर खींच लिया और उसके कान में कहा, तुमने मेरी कॉमिक पढ़ी है, अब मेरी चूत को भी पढ़ो। अमन हंस पड़ा और उसने उसे गोद में उठा लिया। कविता उसकी गोद में बैठकर ऊपर नीचे होने लगी, उसका लंड उसकी चूत में गहराई तक जा रहा था। दोनों की सांसें एक हो गईं, कमरे में सिर्फ उनके बदन की आवाजें थीं।
अमन ने कविता को बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटाया। उसने उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा, उसके कूल्हों पर हाथ मारते हुए। कविता ने तकिया पकड़ लिया और कहा, और मारो, मुझे यह सब चाहिए। अमन ने उसकी चूत में लंड को और गहरा डाला, हर धक्के के साथ कविता की सिसकारी तेज होती गई। कविता झड़ गई, फिर अमन भी उसकी चूत में झड़ गया।
दोनों बिस्तर पर नंगे लेटे थे, तभी कविता के फोन पर विक्रम का नाम चमका। विक्रम ने कहा, टूर एक दिन पहले खत्म हो गया है, मैं कल सुबह की फ्लाइट से आ रहा हूं, पर एक बात है। कविता ने पूछा, क्या बात है, तो विक्रम ने कहा, तुम्हारी स्केचबुक के पन्ने मुझे किसी ने भेजे हैं, घर आकर बात करेंगे। कविता का चेहरा सफेद पड़ गया, अमन ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, डरो मत, जो होगा देखा जाएगा।
कविता ने फोन रखा और अमन की ओर देखा, उसकी आंखों में अब डर नहीं, एक अजीब सी हिम्मत थी। उसने कहा, अगर विक्रम को सब पता चल गया है तो यह कहानी अब छुपकर नहीं चलेगी। अमन ने कहा, तो फिर अगला पन्ना हम सबके सामने लिखेंगे। उसी वक्त दरवाजे की घंटी बजी, जोर से, लगातार। कविता और अमन एक दूसरे को देखने लगे, क्योंकि इस वक्त कोई आने वाला नहीं था। अगला भाग जल्द आ रहा है।
उस रात कविता ने अमन को अपने स्टूडियो में मॉडल बनने को कहा। उसने कहा, कपड़े उतारो, मुझे तुम्हारा सच वाला स्केच बनाना है। अमन ने शर्ट उतारी, फिर पैंट भी उतार दी और सिर्फ अंडरवियर में उसके सामने खड़ा हो गया। कविता ने पेंसिल उठाई, पर उसकी नजर बार बार उसके उभार पर जा रही थी।
अमन ने कहा, तुम ड्राइंग कम कर रही हो, घूर ज्यादा रही हो। कविता ने पेंसिल रखी, उसके पास आई और उसका अंडरवियर नीचे सरका दिया। उसका लंड पहले से खड़ा था, कविता ने उसे हाथ में लेकर धीरे से सहलाया। अमन ने उसकी कुर्ती ऊपर उठाई और उसके बूब्स को चूमने लगा।
कविता ने अमन को स्टूल पर बैठाया और उसकी गोद में बैठ गई। उसने अपनी सलवार खुद ही उतारी और उसका लंड अपनी चूत पर सेट किया। धीरे धीरे वह नीचे बैठी, लंड पूरी तरह अंदर चला गया। कविता ने उसके कंधों को पकड़ा और ऊपर नीचे होने लगी, हर बार उसकी चूत से गीली आवाज आ रही थी।
अमन ने उसके बूब्स को मुंह में लिया और उसकी कमर को पकड़कर उसे और तेज किया। कविता की सांसें तेज हो गईं, उसने कहा, बस ऐसे ही, मुझे तुम्हारे ऊपर ही झड़ना है। कुछ ही देर में उसकी चूत में ऐंठन हुई और वह झड़ गई, उसका बदन अमन से चिपक गया। अमन ने उसे उठाकर मेज पर लिटाया और फिर से उसकी चूत में लंड डालकर तेज धक्के लगाने लगा, जब तक वह भी अंदर ही झड़ नहीं गया।
दोनों देर तक एक दूसरे से लिपटे रहे, फिर कविता ने अधूरा स्केच उठाया और उस पर एक लाइन लिखी, यह पन्ना सिर्फ हमारे लिए है। अमन ने वह पन्ना मोड़कर अपनी जेब में रख लिया और कहा, अगली बार मैं खुद इस कहानी का हीरो बनकर आऊंगा, पन्ने पर नहीं, तुम्हारी बाहों में। कविता हंस पड़ी और बोली, हीरो बनना आसान नहीं है, इसके लिए हर रात एक नया पन्ना जीना पड़ता है।
हिंदी सेक्स कॉमिक: दिल्ली में कविता की चूत में अमन का लंड, पार्ट 2
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