वेलम्मा हिंदी: जयपुर में रितु की चूत में विक्रम का लंड, कॉमिक पढ़ते ही असली चुदाई
रितु ने स्टोररूम की पुरानी अलमारी खोली तो धूल भरी किताबों के बीच एक टैबलेट पड़ा मिला, और उसकी स्क्रीन पर वेलम्मा हिंदी का पहला पेज खुला हुआ था। वह हँस पड़ी, क्योंकि उसने सोचा था कि इस घर में ऐसी चीजें सिर्फ उसके पति की जवानी की यादें होंगी, पर अब वह खुद उन पन्नों को उलट रही थी। बाहर जयपुर की शाम ढल रही थी और उसका पति दो दिन के लिए उदयपुर गया हुआ था, इसलिए घर में सिर्फ उसकी अपनी साँसों की आवाज थी। उसने टैबलेट सोफे पर रख लिया और एक पेज पढ़ते ही उसके गाल गर्म हो गए, क्योंकि कहानी की औरत की हिम्मत और उसकी अपनी दबी हुई चाहत एक जैसी लग रही थी।
तभी दरवाजे की घंटी बजी और रितु चौंक गई। दरवाजा खोला तो सामने विक्रम खड़ा था, उसके पति का दोस्त, जो किताब लौटाने आया था। विक्रम की नजर सीधे सोफे पर पड़े टैबलेट पर गई और वह मुस्कुरा दिया। उसने कहा कि यह कॉमिक तो वह खुद कॉलेज में पढ़ता था, और रितु ने शर्माते हुए कहा कि वह तो बस सफाई कर रही थी। विक्रम अंदर आ गया और बोला कि सफाई में ऐसी किताबें मिल जाएँ तो आदमी रुक ही जाता है। रितु ने चाय बनाने की बात कही, पर विक्रम ने कहा कि पहले वह एक पेज तो पढ़कर सुनाए।
रितु ने टैबलेट उठाया और पढ़ने लगी, पर उसकी आवाज धीरे धीरे काँपने लगी। कहानी में औरत अपने पड़ोसी के सामने कपड़े बदल रही थी, और रितु को लगा जैसे वह लाइनें उसी के बारे में लिखी गई हों। विक्रम उसके बगल में बैठ गया, इतना करीब कि उसकी साँस रितु की गर्दन को छू रही थी। उसने धीरे से कहा कि कॉमिक की औरत जितनी बेखौफ है, रितु भी उतनी ही लगती है, बस उसने कभी मौका नहीं दिया। रितु ने उसकी तरफ देखा और उसकी आँखों में वही भूख दिखी जो उसके अपने अंदर धधक रही थी।
विक्रम ने रितु का हाथ पकड़ा और अपने होंठों से छुआ। रितु ने हाथ नहीं छुड़ाया, बल्कि उसकी उँगलियों को कसकर पकड़ लिया। उसने कहा कि उसका पति उसे महीनों से ठीक से छूता भी नहीं, और वह रात रात भर जागकर अपनी चूत को सहलाती रहती है। विक्रम ने यह सुनते ही उसे अपनी बाहों में खींच लिया और उसके होंठों पर ऐसा चुम्बन दिया कि रितु की सारी शर्म बह गई। उसके हाथ विक्रम की पीठ पर घूमने लगे और वह उसके सीने से चिपक गई।
रितु ने विक्रम की कमीज के बटन खोलने शुरू किए और उसकी छाती पर अपनी उँगलियाँ फिराईं। विक्रम ने उसकी साड़ी का पल्लू धीरे से सरकाया और उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा। रितु सिसक उठी और बोली कि ऐसे ही दबाओ, उसे यही चाहिए था। विक्रम ने ब्लाउज खोल दिया और उसके नंगे बूब्स को मुँह में भर लिया, एक एक निप्पल को चूसते हुए उसकी कमर को सहलाया। रितु की चूत गीली होने लगी और वह विक्रम के पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को महसूस करने लगी।
विक्रम ने रितु को सोफे पर लिटा दिया और उसकी साड़ी पूरी तरह खोल दी। वह सिर्फ पेटीकोट और पैंटी में थी, और उसकी जाँघों के बीच गीलापन साफ दिख रहा था। विक्रम ने उसकी पैंटी एक तरफ सरकाई और अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। रितु ने अपनी कमर उठा दी और कहा कि और अंदर डालो, उसे पूरा चाहिए। विक्रम ने उँगलियों को तेज चलाया और अपने अँगूठे से उसके दाने को रगड़ा, जिससे रितु की सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँजने लगीं।
रितु ने विक्रम का पैंट खोला और उसका कड़ा लंड बाहर निकाला। वह मोटा और गर्म था, और रितु ने उसे अपने हाथ में लेकर ऊपर नीचे करना शुरू किया। उसने कहा कि इतना बड़ा लंड उसने अपने पति में कभी नहीं देखा, और अब वह इसे अपने मुँह में लेना चाहती है। विक्रम ने उसके बाल पकड़े और रितु ने उसका लंड अपने मुँह में भर लिया, सिर को आगे पीछे करते हुए उसे गहराई तक चूसा। विक्रम की साँसें तेज हो गईं और उसने कहा कि वह इससे ज्यादा देर नहीं टिक पाएगा।
विक्रम ने रितु को उठाया और बेडरूम की तरफ ले गया, जहाँ उसने उसे बिस्तर पर पटक दिया। उसने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना लंड उसकी गीली चूत के मुँह पर रगड़ा। रितु ने कहा कि अब मत तड़पाओ, अंदर डाल दो। विक्रम ने एक धक्के में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया और रितु चिल्ला उठी। वह धीरे धीरे धक्के लगाने लगा, हर धक्के के साथ रितु की चूत उसके लंड को और कसकर पकड़ रही थी।
रितु ने अपनी टाँगें विक्रम की कमर पर लपेट लीं और उसके हर धक्के पर अपनी कमर उठाने लगी। विक्रम ने उसकी छातियों को पकड़कर दबाते हुए तेज धक्के लगाने शुरू किए, जिससे बिस्तर हिलने लगा। रितु ने कहा कि ऐसे ही चोदो, वह बरसों से इस चुदाई की प्यासी थी। उसकी चूत से पानी निकलने लगा और विक्रम के लंड पर चमकने लगा। रितु की आँखें बंद हो गईं और वह अपने नाखून विक्रम की पीठ में गड़ाने लगी।
विक्रम ने पोजीशन बदली और रितु को घोड़ी बना दिया। उसने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और उसके कूल्हों को पकड़कर जोर जोर से धक्के मारने लगा। रितु के बूब्स आगे पीछे हिल रहे थे और वह हर धक्के पर सिसक रही थी। विक्रम ने उसके बाल खींचे और उसकी गर्दन पर काट लिया, जिससे रितु और उत्तेजित हो गई। उसने कहा कि वह झड़ने वाली है, और विक्रम ने धक्कों की रफ्तार और बढ़ा दी।
रितु जोर से चिल्लाई और उसकी चूत ने विक्रम के लंड को कसकर जकड़ लिया, उसका पानी बह निकला और वह काँपते हुए बिस्तर पर गिर पड़ी। विक्रम ने उसे पलटा और फिर से उसकी चूत में लंड डाल दिया, क्योंकि वह अभी झड़ा नहीं था। रितु ने हाँफते हुए कहा कि वह एक बार और कर सकती है, और विक्रम ने उसे मिशनरी में फिर से चोदना शुरू किया। इस बार धक्के धीमे और गहरे थे, हर धक्का रितु की चूत के अंदर तक जा रहा था।
विक्रम ने रितु के होंठ चूमे और कहा कि उसकी चूत इतनी टाइट और गर्म है कि वह इसे छोड़ना नहीं चाहता। रितु ने मुस्कुराकर कहा कि जब तक उसका पति उदयपुर से न लौटे, यह चूत उसी की है। विक्रम ने यह सुनते ही पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू किए और रितु फिर से सिसकने लगी। उसकी चूत से पानी और विक्रम के लंड की रगड़ की आवाज कमरे में भर गई।
आखिर विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला और रितु के पेट पर अपना पानी छोड़ दिया, गर्म धारें उसकी नाभि तक बह गईं। रितु ने अपनी उँगली से उस पानी को उठाकर चाट लिया और कहा कि यह स्वाद उसे कॉमिक की कहानियों से भी ज्यादा अच्छा लगा। विक्रम उसके बगल में लेट गया और दोनों हाँफते हुए एक दूसरे को देखने लगे। रितु ने टैबलेट की तरफ इशारा किया और कहा कि कहानी तो अभी आधी ही पढ़ी है।
दोनों ने चाय पी और फिर से टैबलेट खोला, पर इस बार रितु विक्रम की गोद में बैठी थी। कहानी का अगला पेज पढ़ते ही विक्रम का लंड फिर से खड़ा हो गया और रितु की नंगी चूत उसे महसूस करने लगी। रितु ने कहा कि कॉमिक वाली औरत की तरह वह भी अब शर्म नहीं करेगी। वह विक्रम के लंड पर बैठ गई और धीरे धीरे अपनी चूत में उतार लिया, ऊपर नीचे हिलते हुए उसके कंधों को पकड़ लिया।
रितु ऊपर से चुदते हुए अपने बूब्स को खुद दबाने लगी और विक्रम उसकी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मारने लगा। उसकी चूत विक्रम के लंड पर पूरी तरह बैठ रही थी और हर उठान पर पानी की आवाज आ रही थी। रितु ने कहा कि उसे यही पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि इसमें वह खुद कंट्रोल कर सकती है। विक्रम ने उसके निप्पल चूसे और रितु की रफ्तार और तेज हो गई।
रितु दूसरी बार झड़ी, उसकी चूत ने विक्रम के लंड को निचोड़ा और वह उसके सीने पर गिर पड़ी। विक्रम ने उसे नीचे लिटाया और उसकी चूत को चाटने लगा, उसकी जीभ उसके दाने पर घूम रही थी। रितु ने उसकी सिर को अपनी जाँघों के बीच दबा लिया और कहा कि वह फिर से झड़ने वाली है। विक्रम ने चाटना जारी रखा जब तक रितु का शरीर काँपकर शांत नहीं हो गया।
रात गहरी हो गई और दोनों बिस्तर पर नंगे लेटे रहे। रितु ने कहा कि उसका पति जब लौटेगा तो उसे कुछ पता नहीं चलेगा, पर वह जानती है कि अब वह यह भूख छिपा नहीं पाएगी। विक्रम ने कहा कि वह फिर आएगा, और इस बार वह कॉमिक की अगली कहानी साथ लाएगा। रितु हँस पड़ी और बोली कि अगली कहानी वे पढ़ेंगे नहीं, जिएँगे। उसने विक्रम के लंड को एक बार फिर हाथ में लिया और उसे चूम लिया।
विक्रम ने जाते समय दरवाजे पर रितु को फिर से चूमा और कहा कि जयपुर की इस शाम ने उसे वह सब दे दिया जो वह बरसों से ढूँढ रहा था। रितु ने दरवाजा बंद किया और टैबलेट को अलमारी में वापस रख दिया, पर इस बार उसने वह पेज बुकमार्क कर लिया जहाँ कहानी रुकी थी। वह बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत पर हाथ रखकर मुस्कुराई, क्योंकि वह जानती थी कि उसकी असली कहानी अब शुरू हुई है।
सुबह जब रितु उठी तो उसके शरीर पर विक्रम के दिए निशान साफ दिख रहे थे, और उसकी चूत अब भी हल्की सूजन के साथ धड़क रही थी। उसने आईने में खुद को देखा और पहली बार अपने आप को शर्माते हुए नहीं, बल्कि एक चाहत से भरी औरत के रूप में देखा। उसने विक्रम को मैसेज किया कि रात की कहानी उसके दिमाग से उतर नहीं रही, और विक्रम ने जवाब दिया कि वह शाम को फिर आएगा। रितु ने दिन भर घर के काम किए, पर हर काम के बीच उसकी उँगलियाँ बार बार अपनी साड़ी के नीचे चली जाती थीं।
शाम को विक्रम फिर आया तो रितु ने दरवाजा खोलते ही उसे अंदर खींच लिया और उसके होंठों पर चुम्बन दे दिया। उसने कहा कि आज वह कॉमिक नहीं पढ़ेगी, आज वह खुद कहानी लिखेगी। विक्रम ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम तक ले गया, जहाँ रितु ने अपनी साड़ी खुद उतार दी और बिस्तर पर लेट गई। विक्रम ने उसकी चूत को फिर से चाटा और फिर अपना लंड अंदर डालकर उसे तब तक चोदा जब तक दोनों एक साथ नहीं झड़ गए। रितु ने उसकी बाहों में कहा कि अब यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है।
अगली शाम विक्रम एक नई कॉमिक लेकर आया, पर रितु ने उसे खोलने से पहले ही दरवाजा बंद कर दिया और विक्रम को दीवार से लगा लिया। उसने कहा कि आज कहानी किताब में नहीं, बिस्तर पर लिखी जाएगी। विक्रम ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए, उसके बूब्स को हाथों में भरकर दबाने लगा। रितु सिसक उठी और बोली कि उसे यही चाहिए, बिना किसी देर के।
रितु ने विक्रम को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर बैठ गई, उसकी पैंटी एक तरफ सरकाकर अपना गीला मुँह उसके लंड पर रख दिया। विक्रम ने उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के मारने लगा, हर धक्के के साथ रितु की चूत उसके लंड को कसकर पकड़ रही थी। रितु ने अपने बूब्स खुद दबाए और कहा कि उसे यही रफ्तार चाहिए, तेज और गहरी।
विक्रम ने रितु को पलटा और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया, उसके कूल्हों को पकड़कर जोर जोर से धक्के मारने लगा। रितु के बूब्स हिल रहे थे और वह हर धक्के पर सिसक रही थी। उसने कहा कि वह झड़ने वाली है, और विक्रम ने रफ्तार और बढ़ा दी, जब तक रितु का पानी बहकर बिस्तर पर नहीं आ गया।
झड़ने के बाद रितु ने विक्रम के लंड को मुँह में लेकर चाटा, उसे साफ करते हुए कहा कि यह स्वाद उसे हर शाम चाहिए। विक्रम ने उसके बालों में हाथ फेरा और कहा कि वह कल फिर आएगा, एक और नई कहानी के साथ। रितु हँस पड़ी और बोली कि कहानी चाहे कोई भी हो, अंत हमेशा बिस्तर पर ही होगा।
रात को रितु ने टैबलेट में वह पेज बुकमार्क किया जहाँ उनकी कहानी रुकी थी, और सोने से पहले अपनी चूत पर हाथ रखकर मुस्कुराई। वह जानती थी कि विक्रम के साथ उसकी हर शाम अब एक नई कॉमिक से ज्यादा रोमांचक होगी, और अगली शाम का इंतजार ही उसकी सबसे बड़ी चाहत बन गया था।
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